Monday, May 28

"अनमोल "-28मई 2018



 आँखों से गिरा था आँसू
जब उस बच्ची का।
पिता ने कहा ये आँसू नहीं

अनमोल मोती है 
मेरी बच्ची का।

स्कूल में डाँट पर बहा आँसू
पोंछा आँसू उसका।
सहेली ने कहा ये आँसू नहीं
अनमोल मोती है 
मेरी सखी का।

लड़ाई में जब आया आँसू
इस बहन का।
भाई बहन ने कहा ये आँसू नहीं
अनमोल मोती है 
हमारी बहन का।

विदाई पर फिर निकले आँसू
जब उस बेटी का।
माँ ने कहा ये आँसू नहीं
अनमोल मोती है 
मेरी बेटी का।

गिरा जब पहली बार आँसू
ससुराल के सबब का।
आवाज़ आई बहा ये आँसू
नमक का पानी है बहू इसका
बह जाना है अच्छा।

क्यों आज भी इतना अन्तर
रखता है ये आँसू।
परिभाषा भी बदली इसकी
रिश्तों की आड़ में
बेमेल अब ये आँसू।

डॉ स्वाति श्रीवास्तव


सारे रिश्ते हैं अनमोल
सबसे बोलो मीठे बोल,

आज प्रेम से सबसे मिल
समय पता कब जाए डोल।
मानुष रूप भाग्य से मिलता
रंग और रूप कहाँ है टिकता,
दो दिन का मिला है जीवन
प्रेम के सब दरवाजे खोल।
अनमोल प्रकृति, अनमोल वचन
अनमोल वृक्ष,अनमोल सृजन
अनमोल है ये सारे बंधन
है ये सारा जग अनमोल।
सर्वेश पाण्डेय
२८-०५-२०१८
स्वरचित


अनमोल
🔏🔏🔏

वा का नहीं है कोई मोल
लेकिन फिर भी यह अनमोल
इसी तरह फैला यदि प्रदूषण 
तो लड़खड़ा जायेंगे सबके बोल। 

शब्द निकालो तोल तोल
अच्छे नहीं हैं बिगड़े बोल
बन्द करो बजाने ढोल
इन बातों को करो न गोल। 

अच्छा वृक्षारोपण हो
उनका अच्छा पोषण हो
जो भी हुआ सम्भालना है
व्यर्थ क्यों दोषारोपण हो।

हवा हमारी सबकी प्राणवायु 
यह देती हमें एक दीर्घ आयु
हमारी वृक्ष सम्पदा हम बढ़ालें
स्वस्थ होंगे सबके स्नायु।


शीर्षक - अनमोल

आज कुछ लिखना चाहती हूं

दिल की बातो को शब्द देना चाहती हूँ
क्यों हो तुम अनमोल मेरे लिए 
ये सोचना चाहती हूँ

की है कोशिश पूरी 
दे सकू शब्द अपनी सोच को
रिश्ता है अनमोल हमारा 
दुःख सुख में लगता सहारा।

जो भी है सब कुछ 
निस्वार्थ निश्चल निभाते
बस ये ही कारण तुम मुझे हो भाते
मिस यू-२ बोलकर सब कुछ कह जाते।

ना तुम सिर्फ दोस्त हो 
ना हो कोई अलग रिश्ता से सम्मानित
लेकिन जो भी हो
बहुत खास हो मेरा विश्वास हो।

हर जगह तुम मेरा आत्मबल बढ़ाते
नही किसी से हूँ मै कम 
हमेशा मुझे अवगत करवाते
मुझ से ज्यादा भरोसा मुझ पर दिखलाते।

मेरी जीत का जसन 
अपनी जीत की तरह हो मनाते
मेरे लेखन में सूत्रधार हो तुम
मेरे अज़ीज बड़े कमाल हो तुम।

मेरी नजर में न-१ हो तुम
इसलिए मेरे जीवन का सार हो तुम
अच्छा-बुरा सही गलत सब तुमको ही बताना
तुमको सुनना और अपनी सुनाना ।

लोग दोस्ती से रिश्ता प्यार तक ले जाते
हम प्यार से भरपूर दोस्ती निभाते
सब कुछ है इस रिश्ते में 
प्यार, विश्वास, समर्पण इतना सब कुछ
हम तुम से ही पाते।

जितना बोलूं उतना कम है
इस दोस्त का एक ही वचन है
निभाएंगे ये रिश्ता पूरे हक और विश्वास से
चाहे फिर दूर रहे या पास रहे।

छवि गौतम।


 "अनमोल'।

जीवन के प्रत्येक क्षण है अनमोल।

न गंवाये इन्हें वरना दुनिया है गोल।

उतार चढाव तो आये जीवन में,
हमे क्या इनसे घबराना।
बीते क्षण न लौट पायेंगे।
समझे चतुर सयाना।

अनमोल हैं हमारी यादें,
जो जीवन में रच बस जाये।
कभी हँसे कभी सबक ले।
जो जीवन में काम आये।

अनमोल है हर एक रिश्ता।
जो जीवन बगीया महकाये।
इन रिश्तों के बिना ,
जीवन जिया न जाये।
अनमोल है शिक्षा।
अनमोल है संस्कार।
इन दोनो के अदभुत संयोग से
जीवन सफल हो जाये।

सोच है अनमोल
सही सोच रखें
जीवन सुखद हो जाये।
स्वरचित -आरती श्रीवास्तव।


भावों के मोती 
सोमवार 28/5/18


अनमोल 
------------

और भले ही कुछ भी भूलो
पर सुनो कान को खोल 
गांठ बांध कर सदा ही रखना 
चार बातें अनमोल 

हरा भरा न पेड़ कटाना 
चाहे कुछ हो जाए 
अगर बची न हरियाली 
तो सांस कठिन हो जाए 

साफ-सफाई का ध्यान रहे 
घर हो या चौबारा 
एक बार जो हाथ से निकली 
न सेहत मिली दोबारा 

व्यर्थ न फेंको इधर-उधर 
जितना चाहिए उतना लो 
धरती पर जीवन है जल से 
संरक्षण का प्रण लो 

प्रेम भाव से मिलकर रहना 
निकलें मीठे बोल 
गांठ बांध कर सदा ही रखना 
चार बातें अनमोल 

सपना सक्सेना 
ग्रेटर नोएडा


शीर्षक: अनमोल

है जीवन अनमोल रे प्राणी

समझ तू इसका मोल रे प्राणी

सुख दुख छांव आनी जानी
सुध बुध खोकर भागे प्राणी
आस निरास पीड़ा बेमानी
जीवन हार करे मनमानी
समझ तू इसका मोल रे प्राणी
है जीवन अनमोल रे प्राणी

माया रूप स्वरूप जवानी
हो उतावला भागे प्राणी
आंख पे पट्टी बना अज्ञानी
बना है जीवन चक्कर घाणी
समझ तू इसका मोल रे प्राणी
है जीवन अनमोल रे प्राणी

पाप की गठरी उतार रे प्राणी
मन संताप त्याग रे प्राणी
सत्य की राह बड़ी तूफानी
निर्भीक होंसले करे सलामी
समझ तू इसका मोल रे प्राणी
है जीवन अनमोल रे प्राणी

जीवन है उपहार रे प्राणी
कर अंगीकार हो रूमानी
ईश्वर की तू कर गुलामी
खिले गुलाब सी हो जिन्दगानी
समझ तू इसका मोल रे प्राणी
है जीवन अनमोल रे प्राणी

स्वरचित : मिलन जैन
दिनांक : २८ मई २०१८


28-5-2018
अनमोल
अनमोल है वो पन्ने,
जिसमे तुम्हारी लिखावट खिलखिलाती है,
दूर होकर भी वो,
पास होने का अहसास दिलाती है ।

ये कितना अनमोल रिश्ता है,
पन्नों से सरकता ,
दिल मे महकता है,
अनछुए जज्बातों को लिए,
दिल में मचलता है।

न ही इसमें सूरत है
न ही मधुर आवाज़ है,
अपने अनमोल रिश्ते में,
पन्ने ही तो सौगात है।

यही तो खास है,
दिन औ रात को चमकता,
यही मेरा सरताज है,
अनमोल पल,बिन पन्ने बेकार है।

वीणा शर्मा


किसे क्या अनमोल किसे क्या भाया है
हमें तो उनके नैनों ने ही उलझाया है ।।

काश अगर वो मिलते तो अच्छा होता
मगर न दिल किस्मत वो ऐसी पाया है ।।

जिसे ही बतलायी हमने ये दिल की बात
वो हँस कर के हमको ये समझाया है ।।

कुछ न रखा मेरे भाई , इस मुहब्बत में
ये तो इस जग की झूठी ही माया।है ।।

भजन करो उस प्रभु का जिसमें सार है
जग में एक वो ही अनमोल कहाया है ।।

किसी ने कहा दौलत शोहरत को
इससे ही रिश्ते और यश आया है ।।

जानूँ तो मैं भी ये कथायें सारीं 
पर दिल न समझा तड़फाया है ।।

कोहनूर कहते ''शिवम" सभी बड़ा
यहाँ तो कोहनूर भी आधा कहलाया है ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"




विधा : पिरामिड

1)

तू
मेरी
जिंदगी
अनमोल
मेरा वज़ूद
बस तेरे लिये
मेरे जीवनसाथी

2)

मैं
पाता
परम
सुखशांति
तू अनमोल
है जीवनसाथी
सदा निभाना सँग

3)


मन
लुभाते
मनमीत
निभाना प्रीत
तू है अनमोल
जीवन बना गीत

(स्वरचित)


नमन "भावों के मोती"
चंद हाइकु
विषय -अनमोल
28/5/2018
(1)
बेशकीमती
समय "अनमोल"
क्षण का मोल
(2)
प्रेम का रिश्ता
"अनमोल" खजाना
असली धन
(3)
उम्र की शाम
"अनमोल" स्मृतियाँ
आँखों में नाच
(4)
धरोहर है
संस्कृति "अनमोल"
बचाये कौन?
(5)
रत्न समान
"अनमोल" व्यक्तित्व
गुणों की खान
ऋतुराज दवे

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