Tuesday, June 26

"भाव "25जून2018











 भाव बिना जुड़ती नहीं , दिल की कोई डोर ।
भाव तारे भाव निशा, भाव तरे हर भोर ।।











जैसा मन का भाव होता है।
वैसा हीं कर्म करते हैं लोग।

इसीलिए तो दुष्ट प्रकृति लोग।
बनते हैं चोर।
और सहृदय लोग।
बनते हैं साधु।
या फिर सच्चे लोग कभी भी।
गलत काम नहीं करते।
वे सदा सबका भला हीं सोचते हैं।
पर झूठे लोग हमेशा।
झूठ बोलकर सबको ठगते हीं रहते हैं।
मन के भाव सही होंगे।
तो आगे हीं बढ़ते जाओगे।
गर गलत हो गया भाव।
तो पीछे पछताओगे।।
25जून2018
बोकारो स्टील सिटी
स्वरचित



भा.25/6/2018( सोमवार)शीर्षकःभाव ः
ये मनोभावनाऐं ही हर
मानव मन की अभिव्यक्ति होती है।

मन में उठते अपने भक्ति भाव,
वही सच्ची मन की भक्ति होती है।
मनोभाव निरंन्तर बदलते रहते है ,
इनमें छिपी कोई अदृश्य शक्ति होती है।
भाव भंगिमाऐं परिवर्तित होती रहतीं हैं,
इनपर अपना काबू नहीं रहता।
मनोभावनाओं कामनाओं पर
कभी किसी का जादू नहीं चलता।
भाव कभी भक्ति के उठते हैं तो,
कभी पल भर में ही बदलते हैं।
भाव अगर हृदय से निकले तो,
निश्चित माधुर्य बखेरते हैं।
कभी दया भाव जाग्रत हो जाता
कहीं मिलने दिल मचलते हैं।
कभी भाव चेहरे पर परिलक्षित होकर
मन के भाव बताते हैं।
कभी किसी मानस पटल पर उठते
क्रोधित भाव बताते हैं।
हमने अपने घर में देखा है
अपनी माँ की ममता का भाव।
सामाजिक जीवन में देखा
कुछ लोगों में समता का भाव।
कुछ नहीं कह सकते हम
भाव विव्हल मानव के बारे में
कभी कहीं दिख जाता हमको
मन में उठती घृणा का भाव।
जैसी मनोभावना होती हैं अपनी
उसी रूप में मन समझता।
तुमने जैसा भाव बनाया,
वैसा ही ये मष्तिष्क मानता।
स्वरचितः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.
जय जय श्री राम राम जी




#भाव

#दुख की जो परछाई छू दे 
आंसू बन ..पिघल ...जाते हैं 
अतिरेक हो #आनंद का तो..
मुसकानों में ..खिल..जाते हैं ,

#भाव अगर हों #भय वाले
स्वेद से ..झरने ..लगते हैं 
#रौद्ररूप से परिपूर्ण हो
लोचन ..दहकने ..लगते हैं, 

जो लहरायें #दयाभाव 
पतित का ..आलिंगन ..लें 
#वितृष्णा से भरें अगर 
नृप को भी ..धूमिल ..कर दें,

#वात्सल्य और #करूणा की 
देवी ...माँ ..सबसे प्यारी है 
#वीर हृदय देशभक्त के आगे 
नतमस्तक ..सृष्टि ..सारी है।

सपना सक्सेना 
स्वरचित


"भाव"
हजारों सपने रंगीन सपने

भावों से ही ये अपने हैं 

हँसते गाते और रुलाते
भावों से ही अपनी मुसकान है 

रुदन,प्रेम के गीत गाते
भावों से ही विरह वेदना है

आत्म तुष्टि,प्रेम भक्ति 
भावों से मिलती शक्ति है

भावों से ही हम इंसान हैं 
वरना पशु समान हैं 

स्वरचित पूर्णिमा साह पश्चिम बंगाल











हाइकु 
1)
 शक्ति के सम 
"भावों" के आवेग में 
बहे नियम

2)

चढ़ाये आँसू 
गरीब भी लगाए 
भावों का भोग

3)

भाव दरिया 
हृदय बाँध टूटा 
आँखों से छूटा

4)

ईश के द्वार 
ह्रदय उठे भाव
आस्था का ज्वार




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