Saturday, July 21

"हर पल "21जुलाई 2018




पैरों में रून झून हर पल जी
हाथों में खन खन हर पल जी
तेरी,राह मैं ताकू हर पल जी
चंदा ,तेरे लिए मैं हर पल जी

लबों पे लाली हर पल जी
नयनों में सुरमा हर पल जी
तेरी,राह मैं ताकू हर पल जी
मेरी साँसों में तुम हो हर पल जी

माथे पर बिंदिया हर पल जी
कानों में झुमके हर पल जी
तेरी,राह मैं ताकू हर पल जी
ख्वाबों में तुम हो हर पल जी।

वीणा शर्मा😊
बड़े भाग मानुष तन पाये
क्यों न हम इसे सफल बनाये

जी भर कर हम खुशियाँ मनाये 
हर पल पल पल हम उत्सव मनाये

सुकर्म करे हम हर पल
सुविचार करें हम प्रतिपल
हमें मिला है जो रंग मंच
रंग भरे हम इसमे प्रतिपल

एक पल भी हम न भूलें
याद रखें हम हर पल 
माता पिता है चारो धाम
दे उन्हें हम सम्पूर्ण प्यार

पैसा तो है बस माया का जाल
इसमे न उलझ जाये हम
रिश्ते -नाते सभंल जाये तो
जीवन में खुशियां भर जाये हर पल

मर मर कर जीने से तो अच्छा है
जी भर कर हम जिये हर पल
दुनिया 
अच्छा  है या बुरा
हमें क्या करना है इसमे उलझ कर

एक एक पल का महत्व बहुत है
जिसे न हम गवायें एक पल
हर पल करे हम प्रभु के स्मरण
जिसने रखा हमारा ध्यान हर पल।
स्वरचित-आरती श्रीवास्तव।



ज़िन्दगी का हर पल , नहीं होता एक जैसा !
कभी है खुशगवार , तो कभी मायूस सा !!
ग़म और खुशी --ज़िन्दगी के 2 अहम पहलू हैं ! 
जिनके साथ हम अपनी उम्र गुज़ार देते हैं !! 
खुशियों के पल , बड़े सुहाने लगते !
और ग़म हमें , ग़मग़ीन कर जाते !!
ये दोनों ही ज़रूरी हैं , ज़िन्दगी के लिए ! 
हमारे लिए इनका महत्व , समझने के लिए !!
दुख न हों , तो सुख की कीमत पता न लगे !
और सुख के अभाव में , दुख को सह न सकें !!
इसलिए ज़िन्दगी का हर पल , अपना विशेष महत्व रखता है !
और समय-समय पर , हमें एक नया सबक दे जाता है !!


हर पल 
-------
हर पल फिसल रही मुट्ठी से
रेत समय की हौले-हौले 
बांच रहा है भाग्य का लेखा 
कर्म धर्म की पोथी खोले 

पल पल रीत रही रे बंधु 
भरी गगरिया लम्हों वाली 
बहती रहती अथक सरिता 
नहीं कभी भी रुकने वाली 

जीवन कश्ती साथ लहर के 
बढ़ती जाये रुके कभी ना
ठहरा हुआ निर्जीव ही जानो 
राही हरपल चलते रहना .....

सपना सक्सेना 
स्वरचित

यौवन किसका अमिट रहा है,
एकदिन तो ढलता है,
जीवन है सुख-दुख का संगम,

हरपल कब सुख मिलता है,

उगता सूरज चढ़ता है,
पर साम को ढलता है,
पेड़ों पर वसन्त बाद है आती,
पहले पतझड़ सहता है,

दोनो में स्थिर -दोनो में खुश,
उसको पतझड़ कब खलता है....

यौवन किसका अमिट रहा है,
एकदिन तो ढलता है,
जीवन है सुख-दुख का संगम,
हरपल कब सुख मिलता है,

एक बीज मृदा के अंदर,
कितने ही दुख सहता है,
होता है नष्ट स्वम्,
पर नव जीवन देता है,

उसके अंदर पल-पल,
एक जीवन चलता है.....

यौवन किसका अमिट रहा है,
एकदिन तो ढलता है,
जीवन है सुख-दुख का संगम,
हरपल कब सुख मिलता है,

एक सुन्दरी रूप के मद में,
इतराती इठलाती है,
अपने रूप माधुर्य पर,
वारी-वारी जाती है..

एक दिन उसका रूप है ढलता,
दर्पण भी छलता है....

यौवन किसका अमिट रहा है,
एकदिन तो ढलता है,
जीवन है सुख-दुख का संगम,
हरपल कब सुख मिलता है,

...राकेश




II हर पल II 

ज़िन्दगी मौत डगरिया हर पल....
जी रहा कोई सरफिरा हर पल....

खुद को जाना नहीं कभी भी अगर...
ढूंढता क्यूँ फिरे खुदा हर पल....

प्यार करना तुझे न भाया कभी...
धड़कनों बिन ही तू जिया हर पल...

याद जब भी किया उसे मैनें.....
ज़ख्म रिस्ता रहा मुआ हर पल.....

ज़िन्दगी-मौत खेल-खेला 'चन्दर'.... 
सांस जाती है दे सदा हर पल....

II स्वरचित - सी.एम्.शर्मा II




हर पल बीत रही उमर 

हर पल रो रहा जिगर ।।
मिलन की सूरत नजर न आय
सोचूँ रात रात भर ।।

थके थके से ये नैन रहें
लुका छुपी से चैन रहें ।।
खुशी इश्क में जो दिलवर से
उसको सच्चा चैन कहें ।।

सच्ची पीर मिटे दिल की
वो भले ही हो दो पल की ।।
हो दीदार तुम से ''शिवम" 
इंतजार उस महफिल की ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"




र पल है सबका अनजान 
फिर क्यों करें जीवन वीरान
क्यों न बनालें जीवन को उत्सव 
सबके हिस्से में ही लिखा श्मशान। 

इसलिये ही कर्म को योग कहा
भोग को महारोग रोग कहा
मनुष्य जीवन को ही केवल
मुक्ति में सहयोग कहा।

पल पल को मैं राम में साधूॅ
पल पल ही मैं राम आराधूॅ
इन अमूल्य सांसों से मैं 
प्रेम की उससे डोर बाॅधूं। 

जीवन का फिर यह पल पल
देगा मुझे सुन्दर प्रतिफल
मैं हो सकूंगा निश्छल
आनन्द की होगी हलचल।

"हर पल"

जो करेगा कल कल ,
ये पल ना लौट के आएगा,
पल ये हो जाएगा ओझल,
हाथ मलता रह जाएगा,
हर पल माँ ये सिखलाती है,
मेहनत से ना तुम कभी घबराना,
भरा रहेगा अगर हौंसलों से मन,
हर पल मिलेगा नया नजाराना,
हार से ना टूटी मैं कभी,
कर मेहनत सफलता पाई,
रहूँ मैं धरा के किसी छोर पर,
माँ हरपल तू मन में है समाई।

स्वरचित-रेखा रविदत्त
21/7/18
शनिवार



पग-पग पर है प्रबल परीक्षा
आगे बढ़ते जाना है ! *************************
धैर्य शील संयम अनुशासन,

को पाथेय बनाना है
चार कदम पर मंजिल ठहरी,
मंजिल हमको पाना है
राह कंटीली हों गिरी गह्वर ,
हमें नहीं घबराना है
पग-पग पर है प्रबल परीक्षा
आगे बढ़ते जाना है ! *************************
निश्चित होगी विजय हमारी,
साहस नहीं डिगाना है
तप कर काया कंचन बनती,
मेहँदी पिस कर रंग लाती
पिस-पिस तप-तप कर मिल जाता,
सुख का नया खजाना है
पग-पग पर है प्रबल परीक्षा
आगे बढ़ते जाना है ! *************************
हरकत से ही बरकत मिलती,
मेहनत मीठा फल देती
नन्हीं चीटी गिरकर उठती,
हर पल हमसे कह देती
मेहनत को हथियार बनाकर
हमको लड़ते जाना है
पग-पग पर है प्रबल परीक्षा
आगे बढ़ते जाना है ! **

अनुराग दीक्षित




पथरीली जमीनों पर नदी सी गुजरती है

वैसी ही कुछ कुछ मेरी जिंदगी भी गुजरती है
तेरे संग सदियां भी एक लम्हे की तरह थी
तेरे बिन तो हर पल एक सदी सी गुजरती है

हर पल रब से मांगती , पास रही या दूर
सदा सुहागन मैं रहूं, जुग जुग जिए सिंदूर

ख़ुशी और ग़म में, जिसे मुस्कुराना आता है
सच है कि उसे ही, जिन्दगी का तराना आता है
हर पल जियो जिंदगी, जिंदादिली से दोस्त
मौत का क्या, उसे अनगिनत बहाना आता है

याद आता है हर पल वो,कई बहाने से
भूला बैठा है जो हमें ,कई जमाने से
हर शख्स यहां जो है, बुत सरीखा है
फायदा क्या, किसी को अपना, दर्द बताने से

हरपल दीदार करूँ मै श्याम सलोने मोहन का
जीवन जिऊँ खुशी से साथ हो मेरै मोहन का।

कहीं छोड सकूँ मायावी दुनिया तो निश्चित,
हरदिन हर पल मुझे दर्शन हो इस मोहन का।

भक्ति करूँ प्रतिदिन साथ मिले मनमोहन का।
रहूँ भक्तिभाव में लीन सुखदसाथ मोहन का।
बंशीबजैया रासरचैया सुन हे गिरधरगोपाला,
शरण तुम्हारे पडे हुए सिर्फ सहारा मोहन का।

दिया है जीवन हरपल खुश रखना है तुमको।
वैभवऐश्वर्य के दाता अब सुख देना है हमको।
आलस में पडे हुए कामधाम कुछ नहीं करते,
जैसे भी हैं हरपल चरणों में रखना है तुमको।

स्वरचित ः
इंजी.शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.


श्री हरि के चरणों में, 
हर पल बिता पाऊँ,
एक सच्चा साथी तू, 
अब ओर कहाँ जाऊँ! 

जल चढाना चाऊँ,
तो कैसे मैं चढाऊँ,
मछली का झूठा प्रभु, 
सुच्चा कहाँ से लाऊँ!

फूल अर्चना में चढाऊँ,
मन मे फिर घबराऊँ, 
झूठा है भँवरों का, 
सुच्चा कहाँ से लाऊँ! 

मन से मेरी भक्ति स्वीकारों,
प्रभु करों मुझ पर उपकार, 
तुम बिन क्या अस्तित्व प्रभु, 
ये जीवन जीना है बेकार! 
"संगीता कुकरेती "



हर पल एक नये सफर में जिंदगी चलती हैं 
कभी ख्वाब सजाती हैं कभी हकीकत बयान 
करती हैं .


जिंदगी के हर पल हर मोड़ में एक नया
रंग दिखता हैं कभी ख़ुशी आती हैं कभी 
तन्हाई कभी रुस्वाई .

हर पल जिंदगी को जिओ नये अन्दाज में 
कल में नहीं जिओ आज में जिओ अपने ख़ुद
के अंदाज में जिओ .
# स्वरचित रीता बिष्ट


No comments:

"हिंदी/हिंदी दिवस "14 सितम्बर 2019

ब्लॉग की रचनाएँ सर्वाधिकार सुरक्षित हैं बिना लेखक की स्वीकृति के रचना को कहीं भी साझा नहीं करें   ब्लॉग संख्या :-505 Nafe ...