Monday, July 23

"प्रेम की सौगात "23जुलाई 2018


नत मस्तक हो जाता है

जब प्रिय का चेहरा आता है
प्रेम की क्या सौगात दूँ 
दिल सोच कर रह जाता है
प्रेम न कोई अहसां है
प्रेम न कोई सौदा है
प्रेम तो ईश्वर की सौगात
ईश्वर नजर आता है
नाम अभी तक दे न पाया
किस नाम से तुम्हे पुकारूँ मैं
हर रूप में तुम ही तुम दिखतीं 
दिल दैवी तुम्हे बताता है
कहीं कोई भूल न हो 
पल पल दिल घबराता है
प्रेम का रूप तो बिल्कुल उलट
जग में अब कहलाता है
तुम्हे स्मरण करके ही
दिल कलम ये उठाता है
तुम से ही पहचान मिली है
नित चरणनन शीष झुकाता है
पूजो तो हर इंसा में
ईश्वर पाया जाता है
भावना जो शुद्ध हो 
ये जग मंदिर बन जाता है
अगर भावना शुद्ध नही 
भक्त भी कुछ न पाता है
जो सौगात मिली हमको 
दिल गर्व से फूल जाता है
आज तुम्ही से खुशियाँ हैं
दिल हरेक गम सह जाता है
वाह विधाता तेरी सौगात
कैसे किसे हँसाता है
मुझे तो ये महसूस न होता
गम कब निकल जाता है
प्रेम पवित्र है प्रेम को समझो
दुख दूर हो जाता है
प्रेम में रहकर इंसा का
जीवन सँवर जाता है
प्रेम की सौगातों में ''शिवम"
प्रेम ही माँगा जाता है
न तारे न चाँद चाहिये
ये तो छंद ही सिर्फ सजाता है

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"

प्रेम की सौगात
प्रेम है जीवन दायिनी।
प्रेम है संजीवनी।
प्रेम पाकर इन्सां निखर जाये।
प्रेम पाकर किस्मत संवर जाये।
प्रेम के हीं कारण सबरी के बैर।
राम ने जूठे हीं सही,पर खाये।
प्रेम के हीं कारण मीरा ने।
जहर के प्याले को भी पिये।
पर जहर अमृत बन गया।
प्रेम जगत में जीत गया।
प्रेम तो प्रेम है।
इसकी कोई सौगात है कम।
गर देना हीं है सौगात।
खुशियाँ दो,प्रेमी को।
कभी प्रेमी को तुम दो ना गम।
ये सौगात सबसे अच्छी होगी।
यही एक प्रेम की सौगात।
सबसे सच्ची होगी।।
स्वरचित
बोकारो स्टील सिटी





विधा : ग़ज़ल 

प्रेम सौगात मिल गयी मुझको.....
अश्क बरसात मिल गयी मुझको....

वो तेरे हुस्न कर्म के जलवे....
ज़ख्म खैरात मिल गयी मुझको.....

बिन तेरे याद कुछ न रहता है....
याद बारात मिल गयी मुझको.....

मौत बेमौत देख मर जाए....
ऐसी सौगात मिल गयी मुझको....

जान कर भी न खुद को जाना, ज्यों... 
अजनबी गात मिल गयी मुझको.....

II स्वरचित - सी.एम्. शर्मा II 

गात : देह




प्रेम की सौगात

प्रेम की सौगात लेकर आ गए है हम सभी
भूली बिसरी यादों को,,गुनगुनाएं हम सभी।
टूटे दिल को जोड़ कर ,मुस्कुराएं हम सभी
प्रेम की सौगात ले कर आ गए है हम सभी।।
एक कदम जो तू बढ़ाए, दूजा हम तेरा साथ दें
मिल के हम चल पड़े ,गुल खिलाएं हर कहीं
साथ तेरे हम है देखों,नजरें घुमाओ हर कहीं
प्रेम की सौगात लेकर आ गए है हम सभी।।
याद तुम करना सदा,उपवन खिलेंगे हर कही
टूटी कलियाँ देख कैसे,झुक रही है हर कहीं
डाल उसमे नेह की वर्षा,पुष्प खिला दे हर कही
प्रेम की सौगात लेकर, आ गए है हम सभी।

वीणा शर्मा

प्रेम की सौगात दिल में श्वांस भरती है
नकारात्मकता की पौध हटाकर सकारात्मकता को सींचती है
ये सदैव मन में विश्वास भरती है
घृणा के बादलों को हटाकर मन का व्योम साफ रखती है
चुभता है नश्तर जब कोई इस सौगात का उपहास करता है
उठा के खंजर पीठ पर वार करता है
मुँह पर तो चाशनी में डूबे स्वर बिखेरता है
पलटते ही हदय की मिठास को तार तार करता है
प्रेम तो ईश्वर की दी अनुपम सौगात है
करो इसका सम्मान इसमें स्वयं शिव का वास है
प्रेम की सौगात मीरा को अमर कर देती है
बन मांझी पथरीले पहाड़ों को काट समतल कर देती है
प्रेम में डूबे सुदामा के चावल मोती हो जाते है
और बावरी शबरी के झूठे बेर भी अमृत हो जाते है
जब प्रेम की रश्मियाँ अणु अणु को माणिक करती हैं
तब प्रेम की अनुभूति से आत्मा तृप्त हो जाती है

स्वरचित : मिलन जैन
अजमेर ( राजस्थान)



प्रेम की सौगात लिए आया श्रावण मास, 
मंद मंद पवन चले है 
है साजन का साथl
तीज का त्यौहार आया, लाया घेवर साथ, 
मदमस्त मगन होकर झूला झूलूँ, मै साजन के साथ l
प्रेम ...... 
मै भी झुमू तुम भी झूमो और झूमे आकाश 
प्रेम की सौगात लिए आया श्रावण मास l
ले अायो बरसात साथ मे बुझी धरती की प्यास, 
हर किसान झूम उठा बीज लिए है हाथ, 
आज मै जम कर नाचूंगी अपने पिया के साथ l
प्रेम........ 
हर दिन होती तीज ज़ब हो 
प्रीतम का साथ 
मिल जुल कर झूम उठे 
जैसे भू और आकाश 
मिलजुल के ती ज मनाऊ 
अपने पिया के साथ l
प्रेम की........ 
कुसुम पंत 
स्वरचित




विषय -प्रेम की सौगात 

रिमझिम बरसात में 
तुम्हारी याद का आना
न कोई इत्तेफाक है 
न कोई खूबसूरत बहाना।
वैसे तो हमारा प्यार 
मोहताज नहीं मौसम का
पर अच्छा लगा तेरी
यादों की बारिश में भीगना।
ये बरसात लेकर आई है
तुम्हारे प्रेम की सौगात
इसबार, वरना क्यों होता
ये दिल मेरा, तेरा दीवाना।
-मनोज नन्दवाना




ना हीरे ना मोती माणिक 
ना अमूल्य जवाहरात 
बस दो मीठे बोल हृदय से 
बड़ी प्रेम की सौगात 

बिक जाते हैं ताज तख्त 
पर मिलता नही है प्यार 
खड़े खड़े न्योछावर हो गया 
देख नयन बरसात 

और भले ही कुछ भी कर लो 
मत तोड़ो विश्वास 
जीवन लेकर ही जाता है 
मन पे लगा आघात ....

सपना सक्सेना 
स्वरचित



आज दिल कुछ, 
शायराना शायराना लगता है
तेरा प्यार कुदरत का दिया ,
कोई खजाना लगता है....
हम कुछ भी बोले 
ना जाने आपको क्यों,
बेबुनियाद झूठा फ़साना लगता है
फ़साना,अफसाना जो भी हो
आपका दिल भी कुछ
दीवाना लगता है...
मौसम का मिजाज भी
कुछ मस्ताना सा लगता है
सावन का आना जैसे,
प्रिय मिलन का एक बहाना लगता है।...
प्रेम में पड़कर सुधबुध खोना
ये खेल भी गजब सुहाना लगता है
दस्तुरे मोहब्बत निभाना भी
मुश्किल होकर भी आसान,
उस पर चल जाना लगता है।...
प्रेम में ख़ुशी गम जो भी मिले
प्रेमियो को प्रेम की सौगात लगता है
हर चांदनी रात का अवसर
यादो की बारात सा लगता है।...
नाम लेने से ही हमारा बढ़ जाती है
दिल की धड़कन आपकी
कह भी दो ना की हमारा दिल
आपके सीने में ही धड़कता है।...

छवि ।




नहीं दिल में लगे आघात लाया हूँ।
मै कन्हैया प्रम की सौगात लाया हूँ।
सुनते रहें मुरलिया कानों में कन्हाई,
बहुत ढूँढकर इन्हें मै साथ लाया हूँ।

प्रेम की सौगात सबको हो मुबारक।
खुदा की इबादत सबको हो मुबारक।
स्नेह सरिताओं की धारा निरंन्तर बहें ,
 प्रेम की मुलाकात सबको हो मुबारक।
प्रेम की सौगात प्रभु ने बांटी बहुत हैं।
यहाँ सुहावन रात हमने काटी बहुत हैं।
कुछ दिनों से फिजाओं में फैला जहर,
फिर भी जलाईं प्रेम की बाती बहुत हैं।
साहित्य सृजन मै करूँ हो प्रेम सिंचित।
नहीं दिखे जगत में कोई जो प्रेम बंचित।
मिली जो तुझसे प्रेम की सौगात मनोहर,
नहीं हो कभीे वसुंधरा प्रभु ये रक्त रंजित।
स्वरचित ः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.

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