Monday, January 28

"गणतंत्र दिवस "26जनवरी2019

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मैं वोट हूँ
नीयत में जिसके खोट 
उसे देता बड़ी चोट हूँ
ये तो थी मेरी अब तक की कथा ।
आजकल हो रही बड़ी व्यथा
प्रलोभनों की मार से
आरक्षण की धार से
आरोपों के वार से
सोशल मीडिया के अनर्गल प्रचार से
कर्जमाफी के शगूफे से
राफेल के धमाके से
मैं काँपने लगा हूँ 
अस्तित्व होते हुए भी 
शून्यता में खोने लगा हूँ 
मैं वोट हूँ 
लोकतंत्र का हथियार हूँ 
मतदाता की शक्ति हूँ 
नेताओं के गले की फाँस हूँ 
ई वी एम का त्रास हूँ
मतदाता पत्र का अतीत हूँ
नोटा का वर्तमान हूँ
मैं वोट हूँ 
नोटा बढ़ रहा है
नेताओं ,जरा संभल जाना 
अब मेरी शक्ति बढ़ने लगी है
जनता को बेवकूफ न बना पाओगे 
अब अपने मुँह की खाओगे
राष्ट्रहित में काम करो
मतदाताओं तुम जागरूक हो जाओ
नेताओं के बहकावे में न आओ
मेरी शक्ति पहचानो
मैं वोट हूँ ।




तरक्की मुल्क की बाहम वफ़ादारी अमन से है ।
मुहब्बत जान से ज़्यादा हमें अपने वतन से है।।
जहाँ हैं लहलहाती खेतियाँ कश्मीर की घाटीं ।
जहाँ कन्या कुमारी तक मिलें हर किस्म की माटीं ।
जहाँ नदियों का इठलाना तरन्नुम आबसारों का ।
वर्फ की चादरें ओढ़े मिलें कोहसारों का ।
हमें जो फ़ैज़ हासिल है वो सब गंगओजमन से है।।१।।
जहाँ श्री राम ने आकर शरीफ़ों को ज़िला दी है ।
जहाँ पर कृष्ण की मुरली ने जन जन से वफ़ा की है।
जिसे टैगोर गौतम गाँन्धी ने ओज बख़्शा है ।
शहीदों ने गवाँ कर जान जिसको सोज़ बख़्शा है।
चमन हिन्दोस्तां अपना वफ़ादारी चमन से है।।२।।
गी है दाँव पर हस्ती वतन पर सर कटाने को ।
कि सरहद रोंदना चाहे उसे नीचा दिखाने को ।
तमाज़त ख़ून में इतनी रगों में आग बहती है।
मियानें तोड़ फेंकीं हैं नगिन तलवार रहती है।
जिसे हिम्मत हो टकराए ग़रज़ अब बांकपन से है ।।३।।
स्वरचित-राम सेवक दौनेरिया 'अ़क्स'

विश्व विदित तिरंगा है तूँ विश्व विदित तिरंगा है !
तुझमे हिंद-हिंद में तूँ ही यमुना गंगा है !! # विश्व विदित - 


तेरी शान है अरमान मेरी ,
तुझसे ही तो पहचान मेरी ।

जब तुझको शीश नवाता हूँ ,
गर्वित-पुल्कित हो जाता हूँ।

देख समय चक्र की तिल्ली यूं नीले आकश में रंगा है !
विश्व विदित तिरंगा है तूँ विश्व विदित तिरंगा है !!

केसरिया है शौर्य की गाथा ,
साहस बलिदान हमें सिखाता ।

शांति सच्चाई पवित्रता की ,
श्वेत धवल है पाठ पढ़ाता ।

सम्पन्नता लिए हरे रंग की बात भी चंगा है !
विश्व विदित तिरंगा है तूँ विश्व विदित तिरंगा है !!

तुझमें हिंद - हिंद मे तूँ ही यमुना - गंगा है !
विश्व विदित तिरंगा है तूँ विश्व विदित तिरंगा है !!
जय हिन्द

© > सर्वाधिकार सुरक्षित स्वरचित सन्तोष परदेशी
२६ जनवरी २०१९


रचना -देश प्रेम 
देश अपना प्यारा मिलकर इसे सजायेंगे। 
वंदना भारत माँ की गुण सदा ही गायेंगे।। 

तोड़ न पाये कोई एकता की जंजीरों को। 
सेवा में भारत माता के कर्त्वयों को निभायेंगे।। 

मिटा देंगे राग द्वेष मन के सारे भेद अब। 
मिलकर मानवता का दीप हम जलायेंगे।। 

वंदन माँ भारती का हमने गुणगान किया। 
रक्षा को इसकी हम वीर सपूत बन जायेंगे।। 

बढ़े तिरंगे का मान हो रक्षा संविधान की। 
इसके सम्मान से ही मान हम भी पायेंगे।। 

देश भारत बन जाये जग में विश्व गुरू सदा। 
आओ एकता की झलक हम जग को दिखायेंगे।।

नई सोच नई उमंग का मन में संचार हो। 
प्रेम भाव की नदियाँ मन में सदा बहायेंगे ।।
.........भुवन बिष्ट 
रानीखेत (अल्मोड़ा)
उत्तराखंड


चलो मनाऐं गणतंत्र दिवस ऐसा कि
चहुं ओर हृदय सुमन खिल जाऐं।
नहीं दिखे कहीं वैरभाव कोई भी,
हमें प्रफुल्लित कलियां मिल जाऐं।

रहें एकदूसरे से मिलने आतुर हम
हृदयांगम में जनजन को भरने ।
मनमयूर पुलकित हो जाऐं सबके,
हृदयालय में ईश्वर को धरने।

विहंगम दृश्य दिखे आजादी का,
प्रसन्नचित्त सब चेहरे दिख जाऐं।
नहीं मनमलिन रुग्न दिखें कोई भी,
हर्षित स्वजन मुखडे मिल जाऐं।

दुश्मन मिले नहीं यहां कोई भी
नदियां बहें प्रेमप्रीत के सागर।
रहें मिलजुलकर सभी साथ हम
सदा छलकती रहे स्नेह की गागर।

है अभिव्यक्ति की आजादी पर,
इसका दुरूप्रयोग नहीं होने दें हम।
मान सम्मान करें एकदूजे का,
मर्यादाओं पर चोट नहीं होने दें हम।

स्वरचितःःः, स्वप्रमाणित, मौलिक
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.

26/1/2019( शनिवार)
गणतंत्र दिवस,देशभक्ति


**************
सुनो!हिंद देश के नौजवानों,
देशप्रेम के ओ दिवानो,
चारों तरफ दुश्मन का पहरा, 
मजबूत करो तुम अपनी सेना |

दुश्सासन बन वो खड़ा है, 
कश्मीर का चीर लूट रहा है, 
उसको लाज जरा नहीं आती, 
उसके घर न माँ है न भाभी |

घर-घर में वो घुस गया है, 
चुनौती हमको दे रहा है, 
आपस में लड़ना सब छोड़ो,
घर से उसको बाहर खदेड़ो |

देश प्रेम में मर मिटे जो,
बलिदान उनका जाये न खाली, 
चमन देश का खिलता रहे, 
बनो तुम इस बगिया के माली |
🇮🇳जय हिंद 🇮🇳
स्वरचित *संगीता कुकरेती*


जिसके दम पर क़ायम मेरा स्वाभिमान
मेरा वतन मेरा हिंदुस्तान
राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र का संज्ञान
लेखनी करती देशप्रेम का सम्मान
भौगोलिक परिवेश का सुखद बखान
छह ऋतुएँ यहाँ चढ़ती परवान
ऋषि मुनियों के तप की तपन
पुण्य आत्माओं से खिला चमन
पत्थर में भी पूजे जाते भगवान
नदियाँ कहलाती यहाँ माता समान
देवतुल्य कहे जाते हैं मेहमान
वसुधैव कटुंबकम हमारा नारा महान
जग ज़ाहिर इसका ज्ञान विज्ञान
विश्व गुरु की उपाधि बनी पहचान
धर्म, जाति भाषा ना बनती अड़चन 
अनेकता में एकता - कर्णप्रिय कथन
जय जवान जय किसान
माटी के लाल पाते सम्मान
सरहद पर पहरा देते वीर जवान
फिर पाकर शहादत करते गुमान 
सबसे बेहतर इसका संविधान 


उद्देश्य इसका समरसता जान
लोकतंत्र है इसकी बुनियादी पहचान
मताधिकार से सम्पन्न होता मतदान 
जन गण मन कहलाता राष्ट्रीय गान
विविध राज्यों का मिलता भान
केसरिया ,श्वेत ,हरे रंग का मिलन 
अशोक चक्र मध्य में पाता स्थान
सभ्यता संस्कृति है शिरोमणि महान
इसकी आन , बान, शान पर क़ुर्बान
मेरा वतन है प्यारा हिंदुस्तान
अपने वतन पर मुझको अभिमान
तन ,मन ,धन इस पर बलिदान
मेरा वतन है प्यारा हिंदुस्तान ।

संतोष कुमारी। ‘ संप्रीति ‘
स्वरचित


भरतों की पावन भूमि
जन जन ने इसको चूमि
शस्यश्यामल यह धरती
रहती नित लूमी झूमि
हैं जगन्नाथ पूरब में
पश्चिम द्वारिका नगरी
दक्षिण रामेश्वर वासम
उत्तर में विष्णु बदरी
गङ्गा की निर्मल धारा
हर नर का एक सहारा
हिमगिरि वीर प्रहरी
करता नित वारा न्यारा
यह सोन चिड़ी अद्भुत है
सर्व सुखी नित बोले
अतीत वैभव शाली नित
स्वर्णिम पन्नों को खोले
प्रिय भारती जग को
नित नव सबक सिखावे
पञ्चशील की वाणी
पथ शांति जग बतलावे
नित वंदे मातरम करके
सीने पर गोली सहते
इंकलाब नित कहते
वे विपदा सब हर लेते
है अन्न वसन की दाता
नत मस्तक शीश झुकाता
जग फैले कीर्ति पताका
जय जय हो भारत माता।।
स्व0 रचित
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।


हर मुल्कों से न्यारा है
ये हिन्
दोस्तां हमारा है ।।
हमें गर्व है इस मिट्टी पर
जग का ये सितारा है ।।

जहाँ ज्ञान की ज्योत जली
सभ्यता सबसे पहले फली ।।
सोने की चिड़िया कहलाया
ये गरिमा भारत को मिली ।।

धीर वीर गंभीर हुये हैं
दुश्मन को शमशीर हुये हैं ।।
विश्व गुरू का खिताब मिला
दुनिया की तकदीर हुये हैं ।।

विश्व पटल पर नाम लिखा है
हमने अपना काम लिखा है ।।
आज नही कई सदियों से
विश्व को हमने पैगाम लिखा है ।।

निज मातृभूमि हमें है प्यारी
चाहे यह जान जाये हमारी ।।
शान न ''शिवम्" घटने देंगे
सौ जन्म इस पर बलिहारी ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्


देशप्रेम हो सबसे ऊपर
तुम देश की शान बनों
तोड़ सकें न कोई तुमको
तुम ऐसी दीवार बनों
हम संतानें भारत माँ की
भारत की पहचान बनों
जात-पात से ऊपर उठकर
मानवता की पहचान बनों
सच्चाई के पथ पर चल
मातृभूमि की शान बनों
कर्मभूमि यह वीरों की
इसका मान बढ़ाना है
विश्व विजयी ओर सबसे प्यारा
तिरंगा हमको फहराना है
भरो हुंकार जागो युवा
आतंकवाद ने बहुत कुछ छीना
आतंक के घाव मिटाकर
सुख का सूरज ले आना है
याद करो जो शहीद हुए
वो भी किसी की संतान थे
भारत की शान की खातिर
उन्होंने प्राणों का बलिदान दिया
भूलों न इस बलिदान को
आओ मिलकर करें प्रतिज्ञा
मातृभूमि की रक्षा से ऊपर
न हो कोई धर्म दूसरा
देशप्रेमी का युगों-युगों तक
गूंजता रहता है जग में नाम
गणतंत्र दिवस के अवसर पर
आओ मिलकर शपथ उठाएं
जय भारत जय भारती
वंदे मातरम् गूंजे हर गली
***अनुराधा चौहान**मेरी स्वरचित रचना


चौराहों, बाजारों में बिकते
तिरंगे का रंग ,स्वरूप ,आकार 
जाने कब कहाँ खो गया ।

कुछ अनगढ़ हाथों मे 
केसरिया से लाल तो 
जाने कब का हो गया।

कभी कहीं आयत से गोल,
कही हरा केसरिये से 
ऊपर हो गया ।

जिन्हें तिरंगे का भान नही 
अस्तित्व की पहचान नहीं
वो सम्मान कहाँ कर पाएंगे!

हम देशभक्ति दिखलाते है 
मोलभाव कर विजयी हो
उस गरीब से
तिरंगा खरीद लाते है।

जो अनमोल तिरंगे का मोल लगाया
शहीदों का सम्मान भुलाया
तो सम्मान कहाँ दे पायेंगे !

दो घंटे मे पर्व मनाकर स्कूलों
में झंडा फहराते है ,
पर मूल तत्व न समझा पाते है।

टेम्पो रिक्शा की शान बढ़ा
सड़को पर पड़ा 
पैरो से कुचला जाता है।
तो तिरंगा नही 
सम्मान देश का, पैरो तले 
रौंदा जाता है ।

जब राष्ट्र का पर्व मनाना
इसकी हिफाजत करना
इसका सम्मान करना बतला देना ।

ये महज कागज का टुकड़ा नही
प्रतीक है हमारी अस्मिता का
ये ,देशभक्ति रगों में भर देना ।

स्वरचित
अनिता सुधीर

------------------
एक तरफ रोटी है 
एक तरफ तिरंगा है 
हे मातृभूमि बता! 
किधर जाऊँ मैं 
या रोटी के लिए तिरंगा बेच आऊँ मैं 
या तिरंगा की हिफाजत में अपनी जान दे दूँ मैं 

एक तरफ नंगा बदन है 
एक तरफ घायल सरहद है 
हे मातृभूमि बता! 
किधर जाऊँ मैं
या वसन के लिए तिरंगा बेच आऊँ मैं 
या सरहद की हिफाजत में तिरंगा ओढ़ लूँ मैं 

एक तरफ घर का छत उजड़ा हुआ है 
एक तरफ दुश्मनों के बंकर हैं 
हे मातृभूमि बता! 
किधर जाऊँ मैं 
या छत के लिए तिरंगा बेच आऊँ मैं 
या जाकर दुश्मनों के बंकरों को तहस-नहस कर दूँ मैं 

हे मातृभूमि! मेरी जवानी तेरी अमानत है,
तू है तो मेरी शान है,
तिरंगा हमारा आन बान शान है 
इस तिरंगे से ही मेरा स्वाभिमान, अभिमान है 

हे मातृभूमि! चलो आज अपनी कुर्बानी देता हूँ मैं,
सलामत रहे अपना वतन 
अपने वतन के लिए 
हँसते-हँसते शहीद होता हूँ मैं,

कफन हो तिरंगा मेरा
यही आरजू रखता हूँ मैं ,
दफनाना मुझे अपनी भूमि पर ही 
चलो अब अपने लहू से हिन्दुस्तान लिखता हूँ मैं 
@राधे श्याम
स्वरचित

वीर सपूत अगर तुम सच्चे
भारत माँ के लाल
सच्चे देश भक्त गर हो तुम
नहीं डराए काल
नही जरूरी सरहद जाके
दुश्मन से तुम जा टकराओ
घर बैठे सच्ची सेवा कर
अपना धर्म निभाओ
हर भारतवासी के मन में
देश प्रेम की जोत जलाओ
सैनिक शहीद के बच्चों का
कभी सम्बल तुम बन जाओ
धरती पुत्र गर तुम हो तो
दीनों की लाठी बन जाओ
रहे देश में कोई न भूखा
एक टुकड़ा उनको दे आओ
भीख न मांगे को बालक
शिक्षित उनको तुम कर पाओ
तन मन तुमको मिला प्रभु से
सच्ची सेवा में जुट जाओ
धन इस धरती से पाया तुमने
सत्कर्मों में इसे लगाओ
वीरों में हुंकार भरो तुम
कविता में हुंकार सजाओ
युद्ध भूमि में जाकर कभी तुम
बलिवेदी पर भी चढ़ जाओ
कण्टक मार्ग बहुत हैं लेकिन
मातृ भूमि को स्वर्ग बनाओ
प्राण देश की खातिर निकले
मन में यह संकल्प सजाओ
नया उजाला हो भारत में
उज्ज्वल ज्योति पुंज बन जाओ

सरिता गर्ग
स्व रचित


आओ इस तिरंगे को नमन करें 
चतुर्दिक विकास का आवाहन करें 
मुश्किल से मिली आजादी है हमें 
आपसी वैमनस्यता को दूर करें 
आओ इस तिरंगे को नमन करें ।।
राम रहीम की ये धरा 
मुझे स्वर्ग से लगती प्यारी है 
वेदों उपनिषदों के ग्यान बताती 
आओ इस तिरंगे को नमन करें ।।
वसुधैव कुटुम्बकम हमारा नारा 
ग्यान विग्यान को चहूँ ओर फैला 
राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र का संग्यान लेकर 
देशप्रेम का सम्मान करें 
देश को अपने चमन करें 
आओ इस तिरंगे को नमन करें ।।
जय हिंद , जय भारत 🙏🙏
तनुजा दत्ता (स्वरचित )


शीर्षक प्यार के गीत,गाना मना नहीं,।।
पहले मां को,
माशूका से पहले,
सदा ही देखों,
घर से पहले,तो
वतन देखों,
प्यार के गीत गाना,
मना नहीं है,
राष्ट्र के गीत गाओं,
बंदूक,तोप,
से, लड़ कर नहीं,
प्रेम के बल,
अपने कलम से,
देश का नाम,
रोशन ही करेंगे,
यही तमन्ना,
हर देश वासी का,
हम भामाशाह ही,
बन जायेगें,
देश का प्रजातंत्र,
मिट न जाए,
समय संकट का,
जब आयेगा,
धन भी जान देगें,
हम एक हैं,
सब एक रहेंगे,
अनेकता में,
विभिन्न ता पर नहीं,
हमें जाना हैं,
हमारी भाषा हिन्दी,
देश हमारा,
यह भारत देश,
भारत वासी,
सदा कहता आया,
प्यार के गीत,
गाना मना नहीं है,
राष्ट्र के गीत गाना।।
देवेन्द्र नारायण दास बसना छ,ग,


मेरा भारत देश है, जनतांत्रिक गणराज्य।
संप्रभुता परिपूर्ण ये, संघात्मक अविभाज्य।।
संघात्मक अविभाज्य, यहाँ राष्ट्रीय एकता।
भाषा, धर्म, भूगोल, विविधता है विशेषता।।
कहि 'कौशल' कविराय, देश की करें इबादत।
सारे जग में श्रेष्ठ, राष्ट्र है मेरा भारत।।

सत्तरवां गणतंत्र दिवस, दो हजार उन्नीस।
भारत माता को नमन, दे हमको आशीष।।
दे हमको आशीष, ज्ञान विज्ञान बढ़ाएं।
हो विकास चहुँ ओर, सदा हम बढ़ते जाएं।
कहि 'कौशल' छा जाय, देश का जग में जलवा।
भारतीय गणतंत्र, दिवस उत्सव सत्तरवां।।

स्वरचित
कौशलेंद्र सिंह लोधी 'कौशल'
पलेरा (टीकमगढ़)


है अह्लादित मन आज,
आया है दिवस गणतंत्र।
रहे अमर विश्व पटल पर,
सदा भारतीय गणतंत्र।

दशकों से है बना रक्षक,
जन मन के अधिकारों का।
करता रहा दमन सदा,
असंवेधानिक विचारों का।

है विशाल स्वरूप इसका,
है ये लोकतंत्र का रक्षक।
अनीती, अत्याचारों और,
कुविचारों का है ये भक्षक।

गणतंत्र का सम्मान ही,
सदा हो बस ध्येय हमारा।
सदा रहे अमर विश्व में,
लहराता तिरंगा हमारा।

स्वरचित :- मुकेश राठौड़


विजयीविश्व तिरंगा प्यारा
ऐसा है गणतंत्र हमारा
आओ हम सब मिलकर गणतंत्र दिवस मनाये
भारत है एक लोकतान्त्रिक देश 
इस बात से सब को अवगत करवाए ।

शांति, प्यार,देश प्रेम हम सब में बाटेंगे
अधिकारो का हम अपने करेंगे सदुपयोग 
बस ये ही नारा हम लगाएँगे

गणतन्त्र दिवस के इस पर्व पर
आओ हम सब फिर से एक साथ मिलकर चलना सीखे

हो एकता में अनेकता का भाव
बस ये ही लहर हम चारो तरफ चलाये

हो न कभी कोई द्वेष भाव किसी के मन मे
बस ये ही प्यार और अपनापन हम सबको सिखलाए

कितने वीरो ने अपनी जान देकर हमको एक आज़ाद देश का नागरिक बनाया
तब जाकर १९५० में हमने गणतंत्र दिवस पहली बार मनाया ।

छवि ।
स्वयंरचित !


गुंजित कर गगन में रणभेरी
काटे सयत्न दासता की बेरी
जन-गण वतन में खुशहाल
संतति,रखना इसे संभाल

तन-मन धन अपनी गँवा दी
पुरखों की आशीष आजादी
हुए है आज हम अति निहाल
संतति,रखना इसे संभाल

रंग-बिरंगे है विविध व्यंजन 
स्वच्छंद छंद है अभिव्यंजन 
वाणी में कुछ शुचिता डाल
संतति,रखना इसे संभाल

जन मन से ये चमन हरा है
कोटि कंठ कलरव भरा है
परिंदे काट न तू निज डाल
संतति,रखना इसे संभाल
-©नवल किशोर सिंह
स्वरचित


हमारा गणतंत्र दिवस

उल्लास लाया
गणतंत्र दिवस
देश गर्वित !

हर्ष प्रसंग 
मनोहारी छटायें
राजपथ पे !

विरल दृश्य
संस्कृति औ' सैनिक
मान बढ़ायें !

पावन पल
मनमोहक झाँकी
मुग्ध दर्शक !

वीर जवान
कदम से कदम
मिलाते चलें !

आसमान में
अद्भुत करतब
करें हैरान !

धारे हुए है
हर भारतवासी
वसंती चोला !

गर्व है हमें
गणतंत्र हमारा
विश्व में न्यारा !

संकल्प लेंगे
अपने भारत का
मान रखेंगे !

राष्ट्र पर्व है
छब्बीस जनवरी
मान हमारा !

साधना वैद


द्वितीय प्रस्तुति

देशप्र
ेम का जज़्बा सदा जगाये रहो
दुश्मन को अपनी ताकत बताये रहो ।।

कितनी कीमत चु
काई देश की खातिर

भूल न जाओ उसको याद बनाये रहो ।।

शहीदों के खून का न अपमान हो
सरहद पर सीनातान पैर जमाये रहो ।।

कदम बढ़ा न पाये दुश्मन सीमा पर
उसकी हरकत पर नजर गढ़ाये रहो ।।

दुश्मन के नापाक मंसूबों को समझो
माकूल जबाव उसे 'शिवम'दिलाये रहो ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 26/01/2019



मुझे ना तन चाहिए 
मुझे ना धन चाहिए 

शांति हो अमन हो 
ऐसा एक वतन चाहिए 

70 वां गणतंत्र दिवस है 
देश सेवा करने की मन चाहिए 

आत्मबल बढ़ता रहे 
मनोबल बढ़ता रहे 

जिंदा रहूं मातृभूमि के लिए 
देश प्रेम के लिए 

अगर मर भी जाऊं 
तिरंगा ही कफन चाहिए ।

स्वरचित एवं मौलिक 
मनोज शाह मानस 
सुदर्शन पार्क 
मोती नगर नई दिल्ली


छंदमुक्त कविता
🍀🍀🍀🍀🍀
मेरा भारत महान।
इससे मेरी आन,बान, शान।
ऐ माँ।
तेरी खातिर।
अपनी जां लूटायेंगे।
डटे रहेंगे सीमा पर।
दुश्मन को ना घुसने देंगे।
तिरँगा लहराएंगे।
सदा ऊँचा रखेंगे।
क्योंकि।
तिरँगा है महान।
इसी तिरंगे की खातिर।
वीरों ने दी कुर्बानी।
तिरंगे से लिपटाकर।
वे गये श्मशान।
अलग,अलग है।
देश की भाषा।
अलग,अलग है जाति।
फिर भी।
हम हैं।
हिंदुस्तानी।
दुश्मनों के।
छुड़ाएंगे छक्के।
छठी का दूध याद दिलायेंगे।
ऐ माँ।
तेरी खातिर।
अपनी जां लुटायेंगे।
वीरों की कुर्बानी को।
जाया नहीं होने देंगे।
जबतक रहेगी।
ये धरती।
जबतक है।
ये आसमां।
तुझको याद करेंगे।
तेरे कब्रों पर।
फूल चढ़ाएंगे।
शहीदों को नमन।
उनकी कुर्बानी को।
याद करेंगे।
ऐ माँ।
तेरी खातिर।
अपनी जां लुटायेंगे।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि।
🌷🌷💐💐🌷🌷🌹🌹
वीणा झा
स्वरचित
बोकारो स्टील सिटी


द्वितीय प्रस्तुति

मेरी जान है वतन...
मेरी शान है वतन..
जान कुरबान हो इस वतन के लिए
मेरे मन में वतन..
मेरे तन में वतन...
इस वतन के लिए ही हुआ है जनम
हो तिरंगा कफन..
है यही अब स्वपन...
इस तिरंगे से ही चलती है हर सांस अब
लाख खतरे पड़े,
हो सफर में अगर...
रखता जाऊँ कदम मै जयहिंद बोलकर
रहे अमर यह
ध्वज तिरंगा सदा
इस तिरंगे के सदके मैं जाऊँ सदा
मेरी नस नस में बहे
देशप्रेम की ही धार
जान कुरबान हो इस वतन के लिए

स्वरचित :- मुकेश राठौड़


संनिहित भक्ति में शक्ति शुचित,
सम्मान शक्ति का नित सर्वत्र,
सबल आत्मशक्ति के बल पर,
संप्रभुता रहती सदा महान।

गणतंत्र शपथ का आकाँक्षी शुचि, 
हो नतमस्तक जन गण मन नित,
संविधान संरक्षण- हित सबका,
न्यौछावर हो तन मन धन।

मात्र सैन्य-शक्ति में सर्वदा,
नहीं निहित सेवा स्वदेश की,
संवर्धन अपनत्व भाव का,
देशप्रेम का शुचित प्रतीक।

छल-छंद्मों से मुक्त परस्पर,
सदव्यवहार-मय हो जीवन 
सर्वभूतहित प्रेम हदयगत
देशप्रेम का नवजीवन।
--स्वरचित--
(अरुण)


पर्व "गणतंत्र दिवस"
मना रहा है भारत वर्ष
दिल्ली का राजपथ
झाँकियों से दमकता रहा

हमारे वीर जवानों के
हौसले देखते ही बनते थे
कदम से कदम मिला
साथ-साथ चल रहे थे

"आजाद हिंद फौज "
कहानी वर्षों पुरानी
वयोवृद्ध सेनानी थे
चल रहे सीना ताने थे
सभी दे रहे सलामी थे

"पीर पराई जानिए"
बापूजी की थी स्तुति
झाँकियों की थी प्रस्तुति

"एकला चलो रे"
कविगुरु की थी वाणी
बापू संग मित्रता थी पूरानी

गाँधीजी का था सपना
स्वच्छता का संदेशा देना
अपना चरखा अपनी तकली
अपनाये धर्म स्वदेशी

सत्य अहिंसा के पूजारी
डांडी यात्रा रंग लायी
सत्याग्रह की लड़ाई
रेल सफर से शुरु हुई

फूलों से सजा 'शांतिदूत'
शांति का संदेशा देता
राजपथ पर मुस्कुरा रहा

घर-घर चल बिजली रानी
भिन्न-भिन्न राज्यों की थी 
अपनी-अपनी कहानी

मन मेरा तल्लीन था
समापन का जयघोष हुआ
भाव देशप्रेम से भरा रहा
🇮🇳 वंदे मातरम 🇮🇳

स्वरचित पूर्णिमा साह पश्चिम बंगाल


दुनिया में भारत का परचम लहराना है साथियों।
मन मन में हिंदुस्तान को बसाना है साथियों।

माँ भारती के प्रति हर कर्तव्य को हमें है निभाना,
जन-जन के दिल में देशप्रेम बढ़ाना है साथियों। 

शहीद वीरों की बहुमूल्य कुर्बानियां बेकार न जाए,
हमारे "गणतंत्र" का सम्मान हर दिल से कराना है साथियों।

आओ "गणतंत्र दिवस" की बेला पर करें हम यह प्रतिज्ञा,
चुनकर लाएँगे वही नेता जिससे देश को महकाना है साथियों।

"गणतंत्र दिवस" के दिन संविधान हमारा लागू हुआ,
माँ भारती का जो हुआ सम्मान उसमें और इजाफा लाना है साथियों।

तिरंगा हमारी आन -बान-शान व माँ धरती अभिमान है
सबसे प्यारा सबसे न्यारा हिंदुस्तान हमारा दुनिया को ये बताना है साथियों।

कहे वीणा जात- पात, भेदभाव की तोड़कर दीवारें दोस्तों,
हमें तो सिर्फ "हम हिंदुस्तानी हैं" का नारा लगाना है साथियों।

@सारिका विजयवर्गीय"वीणा"
नागपुर (महाराष्ट्र)


(2)
हाइकु
🇮🇳
देश की शान
"आजाद हिंद फौज"
हैं वृद्ध सेना
🇮🇳
देश सेवा में
शहीदों की आहुति
माँ तड़पती
🇮🇳
नभ सा ऊँचा
"गणतंत्र दिवस"
तिरंगा गूँजा
🇮🇳
शोणित रंग
तत्पर देश सेवा
प्रेम के संग
🇮🇳
राष्ट्रीय पर्व
लहराया तिरंगा
घर-घर में

स्वरचित पूर्णिमा साह पश्चिम बंगाल


भारत माँ का आज गणतंत्र पर्व निराला है,
दिल्ली का राजपथ तिरंगे की अद्भुत शान दिखा रहा था,

वीर जवानों की परेड, अदम्य साहस उत्साह से कदम बढातें,
सत्य अहिंसा ,स्वच्छता,परमो धर्म की बापू जी की झाकियां,
जल,थल,वायु सेनाओं का, उत्कर्षमय सैन्य साहस तकनीकी,
भारत माँ की शान बढाती, देशभक्ति का गौरव-गान बढाती, 
विकसित उन्नत भारत के ,सपने सजोकर सुन्दर-सुन्दर झाकियां,
गाँधी, शुभाष, टेगौर ,भगतसिंह ,आजाद की दिखाते कहानियां,
आजाद हिंद फौज का उद्घोष लियें,पूर्व वीर सेनानी सम्मान पाते,
तिरगें में रंगी वसुधा भी मुस्कुराई,आसंमा में तिरंगा शान से लहरें,
अखण्डता,एकता का संदेश देती,प्रदेशों की संस्कृति महिमा गाती,
गांधी जी का स्वच्छ भारत का स्वपन सजोयें, मोदी जी मुस्करातें,


कुछ दोहे 
जय हिन्द 
भारत वासी क्यों डरे, क्यों बहाये नीर, 
देश युवा बनाएंगे, भारत की तस्वीर ll
2
देश धर्म के नाम पर,लुट रही इसकी लाज, 
कौन वो नेता आज है, नहीं गिराता गाज l
3
युवा ये मेरे देश के, भारत के है लाल, 
अच्छी शिक्षा जो मिले, चम चम चमके भाल l
कुसुम पंत उत्साही 
स्वरचित 


स्वरचित:- सुनीता पंवार, (देवभूमि उत्तराखण्ड)

(२६/०१/२०१९)


देश - भक्ति के गीत सुनाएंगे
सब मिलकर गणतंत्र मनाएंगे।
*************************

बूढ़े, बच्चों और जवानों को
देश - प्रेम की बात सिखाएंगे।
*************************

गणतंत्र दिवस पर सारे मिलकर
मानवता की अलख जगाएंगे।
**************************

हिंसा का दोष बताकर सबको
प्रेम - शांति का पाठ पढ़ाएंगे।
*************************

पड़े जरूरत जो कभी हमारी
सीमा पर हम जान ‌गवाएंगे।
*************************

आपस ‌ के सारे ‌बैर - भाव को
सब मिलकर के दूर हटाएंगे।
*************************

गणतंत्र हमारा सबसे अच्छा
दुनिया को ये बात बताएंगे।
*************************

बुरी नजर जो डालेंगे हम पर
सब दुश्मन को मार भगाएंगे।
**************************

गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर
झूमेंगे..... ‌ नाचेंगे...... गाएंगे।
**************************

स्वरचित
रामप्रसाद मीना'लिल्हारे'
चिखला बालाघाट (म.प्र.)


(1)तिरंगा प्यारा 
लहराता ही रहें 
जग में सारा
(2)गांधी की आंधी 
फहराया तिरंगा 
उड़े फ़िरंगी
(3)खुला आसमां 
परिंदों की उड़ान 
आजाद देश 
(4)बोई कुर्बानी 
जन्मी है स्वतंत्रता 
छाई खुशियाँ 
(5)छलके आंसू 
देखते ही ताबूत 
शहीद बेटा 

स्वरचित 
मुकेश भद्रावले
हरदा मध्यप्रदेश 
26/1/2019


आओ हम सभी आज गणतंत्र दिवस पर 
मिलकर देशभक्ति के गीतों को गाते है 
आओ हम सभी आपस में मिलकर 
राष्ट्र गान को गाते है 
आओ आज हम सभी मिलकर 
भारत माता और उनके वीर सुपुत्रों की जयजयकार बुलाते है 
आओ आज हम सभी मिलकर 
दुश्मनो के दिल को दहलाने वाली एक ऊँची ललकार लगाते है 
और हम सभी मिलकर दुश्मनो को ये बतलाते है 
की अब हिन्दुस्तान बदल चूका है 
तुम उन उन बातों को छोड़ो वो तो पुरानी बातें है 
आओ हम आज सभी मिलकर 
सुबह देशभक्ति के रंग में रंग जाए 
और शाम को वीर शहीदों की याद में मिलकर दीये जलाते है 
दुश्मनो और हममे भेद बहुत है आज उन्हें बतलाते है 
वो अपने बच्चो को बचपन से ही आतंकी 
और हम अपने बच्चो को बचपन से ही सैनिक वीर बनाते है 
वो दूसरों की जान को लेना 
और हम दूसरों की जान की रक्षा करनी सिखाते है 
आओ हम मिलकर पुरे विश्व में भारत की शान बढ़ाते है 
आओ हम सभी मिलकर जय हिन्द के नारे लगाते है 
और मिलकर भारत माता के आगे शीश झुकाते है 
स्वरचित :
''जनार्धन भारद्वाज ''
श्री गंगानगर (राजस्थान)


आम जन की
टूटी अभिलाषायें
जुड़ पायेंगी ?

लोकतंत्र को
सबल सरकार
मिल पायेगी ? 

भोली प्रजा की
रोजी रोटी की चिंता
मिट पायेगी ?

शोषित नारी 
अधिकारों के लिये
लड़ पायेगी ?

अपने लिए
समाज में जगह
बना पायेगी ?

संस्कारहीन
पथभ्रष्ट युवा के 
पाँव रुकेंगे ?

भ्रष्ट जनों के
लोभपूर्ण कृत्यों से 
मुक्ति मिलेगी ?

दीन को रोटी
सिर पर छप्पर 
मिल पायेगा ?

बच्चों को शिक्षा
बुजुर्गों को भरोसा
मिल पायेगा ?

सह पायेगी
कष्ट कुशासन का
भारतमाता ?

है सत्तरवाँ
गणतंत्र दिवस
क्या बदलेगा ?

कितने प्रश्न
सभी अनसुलझे
उत्तर दोगे ? 

तीव्र इच्छा एवं मंगलकामना है कि इस गणतंत्र दिवस
पर आम जन की चिंताओं और उद्विग्नता का शमन हो
और बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये किये जाने
वाले उसके सतत संघर्ष को विराम मिले ! 

जय भारत ! 

साधना वैद


*अमर शहीदों का नारा है* 
पंद्रह अगस्त है पावन चंदा 
छब्बीस जनवरी ध्रुवतारा है
चमक रहें ये झिलमिल करते 
अमर शहीदों का नारा है।

स्वतंत्रता का भान बहुत है 
स्वतंत्र का मान बहुत है
आजादी पर परतंत्रता का 
बोध मात्र अपमान बहुत है

बहनों के चूड़ी गहनों की 
सिंदूर बहे अबलाओं की 
भर भर आए माताओं की 
तपते आँसू में आँच बहुत है

सिंचित नित- नित जिस पर करते 
ये पावन -परम दुलारा है 
चमक रहे---------

डूब ना जाए किमती धरोहर 
भूल भुलैया के बादल में 
टूट ना जाए रत्न अनमोल 
आतंकवाद के आँचल में 

भय ही करती शक्ति संचार 
शक्ति ही भय भगाती है 
बलिदानों के रक्त सिंदूर से 
माता निज माँग सजाती है

देश की धरती सोंधी माटी 
सुरभित चमन हमारा है 

चमक रहें---------

देश भक्ति जज्बा हो दिल का
अनुशासित जीवन हमारा हो 
लग्न परिश्रम सिद्धांत हो अपने
विश्वास ही संबल हमारा हो

दूरदर्शिता हो आँखों पर 
स्वभाव नम्रता का प्रारूप 
कलम बनें इतिहास लेखिका 
हम हैं लघु बलिदानी रूप 

आओ अब अपनी बारी है 
अपना बुलंद सितारा है

चमक रहें----
स्वरचित
सुधा शर्मा 
राजिम छत्तीसगढ़ 
26-1-2019


याद करो सन ४७ कितनों ने जान गंवाई थी
कितने वीरों को खोकर हमने आजादी पाई थी

अब हम अपना ७०वां गणतंत्र दिवस मनायेंगे
फिर से हम उन वीरों के गान को गाएंगे
जाने कितनी मांओं ने माथे की बिंदिया हटाई थी
कितने वीरों को खोकर हमने आजादी पाई थी

याद करो सन ३१को जब भगत फांसी पर लटका था
उसकी मां को फिर लगा सहसा झटका था
प्राणों को देकर भी उसने उम्मीद नहीं गंवाई थी
कितने वीरों को खोकर हमने आजादी पाई थी

याद करो उस छोटी सी मनु को कितनों का खून बहाया था
देख के उसको लोगों में फिर नया प्रसार सा आया था
बांध के दत्तक पुत्र को अपने प्राणों की बाजी लगाई थी
कितने वीरों को खोकर हमने आजादी पाई थी

चलो आज हम सब फिर से उन वीरों को याद करें
उनके जैसे लालों को पाने की हम फरियाद करें
आजादी के चक्कर में कितनों ने लड़ी लड़ाई थी
कितने वीरों को खोकर हमने आजादी पाई थी। 

#‌इति_ शिवहरे_ औरैया


पंकजमुक्ता छंद 

""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""
🙏नमन मातृभूमि 🙏

सहज सुखद मनभावन, आओ गीत बनाएं |
जन गण मन हरषेेे ,चल ऐसी प्रीत जगाएं ||
अनुपम अतुलित सुंदर ,प्यारा देश हमारा |
पग पग पर मन मोह रहा, क्या खूब नजारा ||

कल कल कर बहती ,नदियों की ,धार सुहाती |
पवन,सुमन खुशबू ,महकाती ,राह सजाती ||
नित नव, कलरव ,पंख पसारे तान सुनाते |
मन प्रमुदित करते ,पंछी नभ में, बलखाते ||

इस रज पर ,भगवान बसे ,क्या बात निराली |
अतिप्रिय,अतुल बनी ,इसकी, गाथा सब, आली ||
शत-शत नमन, प्रणाम ,तुझे हे ! भारत माता |
करत *सरस* गुणगान, सदा ,तेरी जय गाता ||

भारत माता की जय 👏
""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""
स्वरचित 
प्रमोद गोल्हानी सरस 
कहानी -- सिवनी म.प्र.


-वतन की खुशबू----

सारे जहां में फैली मेरे वतन की खुशबू
फिजाओं में घुली सारे चमन की खुशबू,

मानव मानव में देखो भेद ना कोई जाने
आती यहाँ चैन-ओ-अमन की खुशबू,

करता जो मेहनत दिल ओ जान से
महके इक दिन उसके बदन की खुशबू,

सूरज-चाँद सी गौरव गाथा है इसकी
और शौर्य बतलाती पवन की खुशबू,

हर दिल में हर दिल के लिए वफ़ा
प्यार जताती आपसी चलन की खुशबू,

ऋषि मुनियों की रही ये पावन धरा
आती हरदम जहाँ से हवन की खुशबू,

लूटा दे वतन पर जान अपनी हर कोई
मिले सबको तिरंगे में कफ़न की खुशबू,

स्वरचित
बलबीर सिंह वर्मा
रिसालियाखेड़ा, सिरसा(हरियाणा)


जीवन अर्पित कर दो, भारत के लिए प्यारों।जिस भू पर जन्म लिया,तन-मन इस पर वारो।। 
उत्तर दिशा हिमालय सिरमौर बना इसका
दक्षिण दिशा में सागर पग क्षाल रहा इसका 
आये न कोई विपदा मन से यही विचारो।। 
जीवन अर्पित कर................... ।
बहतीं पावन नदियाँ मानव उद्धार करें
गंगा यमुना संगम तन-मन निष्पाप करे
इन पावन नदियों पर तन मन धन सब वारो।। 
जीवन अर्पित कर..…............... ।
है धरती वसुन्धरा रत्नों को उपजाती
हरियाली से अपनी मानव मन हर्षाती
इसलिए इसे वीरों निज हाथों सँवारो।। 
जीवन अर्पित कर.................


नमन तुम्हें करता हूँ भारतमाता
भरें शक्ति फिर मेरे भुजदंडों में।
जोभी देखे माँ कुदृष्टि से तुझको,
बांट उन्हें दूँ मै शतशत खंडों में।

भाले की जरा चमक धार दिखा दूँ।
चलता कैसे ये दमक मार दिखा दूँ।
वरदे मुझे हे सिंहवाहिनी माँ भारती,
दें आशीष कुछ मै हुंकार दिखा दूँ।

रक्तिम ध्वज जो माँ तुम्हारे हाथों में,
ऐसा ही दुश्मन का मै लहू बहा दूँ।
जोभी दिखें मुझे भारतभूमि के वैरी,
मै उनको उनकी अंतिम राह बता दूँ।

वलिदान किऐ जो भारत के वीरों ने,
उन्हें भारत का स्वाभिमान लिखा दूँ।
मातृभूमि रहे सदा संरक्षित हे माता,
अभिमन्यु सा कुछ अरमान दिखा दूँ।

तन मन धन सब माँ तुझ पर कुर्बान ।
हम क्या कर सकते तुझ पर वलिदान।
जो कुछ भी मिला हमें इस माटी से,
माँ तूही है हम सबकी जननी महान।

स्वरचितः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.


मेरा प्यारा भारत देश,
अखंड विश्व में है सर्वेश।
बहुरंगी है संस्कृति इसकी,
विश्व गुरु पहचान है इसकी।
विशाल है गणतंत्र इसका,
संविधान से शासन चलता।
संवैधानिक इसकी प्रणाली,
समस्त विश्व में सबसे निराली।
जन-जन के यह मन में बसता,
देश-प्रेम की बहती सरिता।
देश की शान पर आंच न आए,
शीश कटे या लहू बह जाए।
रखें अखंडित इसकी एकता,
बनी रहे इसकी समप्रभुता।
धर्म-जाति के भेद मिटाएं,
मानवता की ज्योति जलाएं।
तन-मन-धन करें इसको अर्पण,
देश-रक्षा में सब करें समर्पण।
विकृतियों को हम मिलकर मिटाएं,
देश-प्रेम का अलख जगाएं।

अभिलाषा चौहान
स्वरचित


फहरा तिरंगा हिमालय पर,
ले उम्मीदें आया नया सवेरा,
बढ़े कदम जीत की ओर,
दुश्मनों को वीरों ने घेरा,
चमके नभ में जब तक,
ये चाँद सितारे,
आँच ना आने देंगे देश पर,
माँ तेरे लाल ये प्यारे,
त्याग और वीरता से भरपूर,
मेरा भारत देश है,
सभी धर्मों को मानता,
लोकतांत्रिक मेरा देश है।
****
स्वरचित-रेखा रविदत्त
26/1/19
शनिवार


सेवा में मेवा 
नैतिकता की ओट 
देश बेचारा |

देश की सेवा 
सहते हैं पत्थर 
दुर्भाग्य कैसा |

देश प्रेम है 
मतदान करते 
खाली हाथ हैं |

राष्टीय पर्व 
उत्साह बचपन 
ये देश प्रेम |

वो देश प्रेम 
आजादी के दीवाने 
तलाश जारी |

ये विरासत 
गणतंत्र दिवस 
टिका भविष्य |

दुरूपयोग 
गणतंत्र किनारे 
मनमानी है |

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश ,


माँ भारती! हम सब की जान है...

वंदन करूं मैं किस विध तेरा...
रूप बनाया रचयिता ऐसा तेरा...
तेरे अधरों पे सजाई मुस्कान है
माँ भारती हम सब की पहचान है.. 

सर हिमालय गर्व है जिसका... 
झुक जाए सर हर किसी का...
तिलक करने को रहते तत्पर...
तेरे रणबांकुरे माँ हर पल आतुर...

ज्योत सुनहरी जलाये प्रथमाकर...
असम, अरुणाचल, मेघालय दिवाकर...
हर कोई करे अर्चना भावों से...
मन में उभरते आह्लादों से...

शांत रूह से करते जो श्रृंगार हैं... 
खजुराहो, साँची और उज्जैन हैं... 
मध्य प्रदेश सब करता मुहाल है...
गर्व करता भारतीय हर हाल है....

शान्ति दूत भारत का जग को...
पश्चिम में वहां उसका स्थान है...
हर और जिसने तेरा नूर बढ़ाया....
जग में वो महात्मा कहलाया....

उत्तर में बसती तेरी ही जान है....
गर्व से कहते वो हमारी शान है...
स्वर्ग धरा पे उतर आया जहां पे...
ऐसा रूप कश्मीर हिंदोस्तान है...

धर्म का डंका जिसने जग में बजाया..
भारत का अध्यात्म रूप दिखलाया....
कन्या कुमारी वो तेरा परम् स्थान है....
विवेकानन्द ने दिया रूप महान है....

हर परबत में तेरा अडिग श्रृंगार है...
नदियाँ..सागर तेरे संगीत गान हैं...
जब तू मुस्काये...चहचहाये है...
तेरे संग हर दिल खिल जाए है....

तेरा रूप बखान करूं मैं कैसे...
निशब्द मेरी है कलम माँ जैसे...
तेरे रूप में सब की ही शान है...
माँ भारती! हम सब की जान है...

II स्वरचित - सी.एम्.शर्मा II 


ये गणतंत्र
शहीदों की कल्पना
साकार मंत्र।।


गण ही चुनें
तंत्र उन्हें चुगाये
खोखला देश।।

ये संविधान
अधिकार समता
लुटी गणिका।।

है अधिकार
आज़ाद अभिव्यक्ति
झलके द्रोह।।

बहाया लहू
दिलाया गणतंत्र
स्वर्ग में शोक।।

मुफ़्त में मिली
ये पीढ़ी लूटे मज़ा
रोये आज़ादी।।

भावुक





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