Thursday, February 28

" संकल्प/प्रण "28फरवरी 2019

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प्रेषित शब्द - संकल्प 
————————-
अपने बुज़ुर्गों से सुना था कभी
इतिहास के पन्नों में पढ़ा था कभी 
खो गया है जो आज यहीं कहीं
आओ ! भारत माँ का आत्म सम्मान बनें 
सुंदर स्वर्णिम भारत का नव निर्माण करें ।

दुश्मन जो पर्वत सा डटकर खड़ा 
देखना है आज उसे मुँहके बल गिरा 
दृढ़ संकल्प ,आगे क़दम बढाओ ज़रा 
आओ ! भारत माँ के लिए वरदान बनें ।
मुक्त कंठ से देश का जय जय गान करें ।

राहों से काँटे सारे दूर हटाते चले
ख़ुदगर्ज़ी का हर दस्तूर मिटाते चलें 
भृषटाचार को जड़ से उखाड़ते चले
आओ ! भारत माँ का नया परिधान बनें ।
सुनीता, सुधर्म ,सुविचार का विधान करें ।

निर्मल नीर सा देश प्रेम की धारा बहे
हम एक हैं, एक रहेंगे - का गूँजता नारा रहे
न तेरा,न मेरा ,बस देश सदा ‘हमारा ‘ रहे
आओ !भारत माँ के अरमानों का आसमान बनें ।
स्वर्णिम युग से नव पीढ़ी की पहचान करें ।

ये कभी न सोचे - देश ने हमे क्या दिया 
मिलकर सोचें - देश को हमने क्या दिया 
सत्य और अहिंसा का सदा जलता रहे दीया 
आओ ! भारत माँ की नेक संतान बनें ।
नित्य निरंतर सर्वत्र देश का गौरवगान करें ।

दिलों में हौसला कभी कम न हो 
माँ बहनों की आँखें कभी नम न हो 
तिरसकृत हो देश जिससे , वो हम न हो 
आओ !भारत माँ के इस नव रुप की पहचान बनें 
आओ !हम इस देश की आन बान और शान बनें ।
(C)भार्गवी रविन्द्र .....स्वरचित

संकल्प में शक्ति है संकल्प का मान है
इतिहास को देखिये सुसंकल्प महान है ।।

भीष्म पितामह की अटल प्रतिज्ञा ही
कहलायी अद्भुत शक्तियों की खान है ।।

असुरविहीन धरा करने का राम का प्रण 
असुरों को मारना हुआ आगे आसान है ।।

रास्ते बने अस्त्र मिले ससैना मित्र मिले 
असुरों का मिटाया नामो निशान है ।।

रास्ते स्वतः बने विचार हों जो नेक दृढ़
संकल्प लेना सीखिये संकल्प की शान है ।।

लगन लगाइये मन में हताशा नही लाइये 
एकलव्य बिन अँगूठा किया तीर संधान है ।।

हार मान जो बैठा वो कभी न जीता 'शिवम'
संकल्प ले चला जो मंजिल से हुआ मिलान है ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"


संकल्प जब मन में होगा , मुश्किल न कोई काम होगा ,

चाहे सामने ही लक्ष्य होगा , प्रण बिना वो पूर्ण न होगा |

इच्छा शक्ति जब हो प्रबल , तब ध्यान कांटों पर न होगा ,

फिर विजय पथ होगा सुगम ,जय घोष का ही शोर होगा |

आतंकी दुश्मनों की शह पर, हमारी राह के रोड़े बने हैं ,

लील लेते हमारे सिपाही , हमारी शान पर धब्बा बने हैं|

सबक उन सबको सिखाना ,संकल्प से ही संभव हुआ है,

दुश्मन जो है बिलबिलाया , उसकी नाक में दम हुआ है |

कहीं है नहीं उसका ठिकाना ,वो एकदम बेदम हुआ है ,

जवानों का ये संकल्प था , जयकार जो संभव हुआ है |

जिदंगी में कर्म तो है जरूरी , संकल्प से ही साधना है ,

बनना हमको जो है विजयी , सिर्फ प्रण का ही रास्ता है|

रीति सदियों से चलती रही , अनवरत यह सिलसिला है,

संकल्प के बिन कभी भी , कोई काम नहीं हो सका है |

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश ,

मत हो हताश
न छोड़ आस
उठ चल कर्म कर
दीप जला अंधेरा हटा
हवा के रुख को मोड़ ले
कर्म कर कर्मयोगी बन
दृढ़ संकल्प का भान कर
लक्ष्य का ज्ञान कर
धर्म कर्म से पूर्ण हो
मानवता से प्यार कर
कोई अंधेरा नहीं घना
ज्ञान का प्रकाश कर
दुखियों के दर्द दूर कर
जहां में ऊंचा नाम कर
तुम भाग्य विधाता खुद अपने
जीवन की तस्वीर बदल
कर्म कर कर्मयोगी बन
***अनुराधा चौहान***© स्वरचित


सहनशीलता कायरता नहीं
समझ सम्भलने का अवसर
उसमें भी नाकाम हुये तुम
कहर ढा दिया घोला जहर
संकल्पों के बल के ऊपर
असंभव संभव बनता है
निष्ठा लगन और वजूद पर
रिपु कायर रिक्त रहता है
ईंट का बदला पत्थर होता
भारत के इतिहास में
खून का बदला खून ही होता
रण बाँकुरे साहस में
कई बार ललकारा तुमने
शांत धीर गम्भीर रहे हैं
सत्तर सालों से झेला तुमको
नद रक्त अब नाल बहे हैं
दृढ़ प्रतिज्ञ संकल्पित सब
हर नर दे भारत बलिदान
अरे नापाकी मुठ्ठी भर तू
कितनी सी है तेरी जान
हिमालय से तुम टकराते
शेरों से कायर तुम लड़ते
अपनी अवकात ही देखलो
मुँह की खाकर भी भिड़ते
संकल्पों से हम जीते हैं
जो सोचते वह् करते हैं
आँख उठाई गर तुमने तो
धुंवा के गुबार उड़ते हैं।।
स्व0 रचित,मौलिक
गोविंद प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

विधा - छंद मुक्त

---आओ मिलकर करे संकल्प---

कर लिया जिसने संकल्प
कुछ भी फिर असम्भव नहीं,
पा लेता वो हर मंजिल को
आये कितनी मुश्किल कहीं,

किया संकल्प राम ने जब
रावण को भी पराजित किया,
अर्जुन के दृढ़ निश्चय के आगे
कौरवों को भी पछाड़ दिया,

किया संकल्प भगत सिंह ने
देश की खातिर झूल गये,
देखो शेखर सुभाष का निश्चय
सर्वस्व अपना भूल गये,

देखों सरहद पर जवानों को
देश की खातिर मिट रहे,
दृढ़ निश्चय से अडिग खड़े
दुश्मन को धूल चटा रहे,

हिन्द देश की शान निराली
देशों में देश भारत प्यारा,
आओ मिलकर करे संकल्प
तिरंगा ऊंचा रहे हमारा,

स्वरचित
बलबीर सिंह वर्मा
रिसालियाखेड़ा सिरसा (हरियाणा)


**************
देश हित के लिए लेना होगा संकल्प,
दुश्मन अब बाज नहीं आ रहा,
दुष्टता अपनी वो फिर दिखा रहा, 
छोड़ा नहीं उसने कोई विकल्प |

माँ भारती की संतानों, 
सुनों हिंद के नौजवानों,
निर्भय होकर वार करो, 
अब आर करो या पार करो |

चूहे-बिल्ली का खेल न खेलों, 
दुश्मन को बिल में ही मारो,
पायलट अभिनंदन को छुडाओं, 
दुश्मन के सिरों को उड़ाओ |

बंद करो अब ये राजनीति, 
सब मिलकर एकजुट हो जायें, 
संकल्प सबका एक ही होगा, 
दुश्मन को न दें दूसरा मौका |
जय हिंद |

स्वरचित *संगीता कुकरेती*


संकल्प 
संकल्प करें जब मन में ,दूर होये व्यवधान। 
परिश्रम संग संकल्प से,बनती राह आसान। 

राहों में निकले मानुष,नयनों में भर सपने। 
संकल्प रहे बरगद सा,सपने होंगे अपने। 

लांघ दिवारें आलस की,मेहनत से कर काम। 
संकल्प करें बस इतना,मरेंगे कर के नाम। 

रिश्तों की कड़वाहट भी,दूर अगर हो करनी। 
प्रेम और विश्वास की,पकड़ संकल्प डगर। 

देश सेवा का संकल्प,बढ़ाये मन अभिमान। 
देश से बढ़कर कुछ नही,देश ही अपना मान। 
बबीता "सहर "


कर पुरूषार्थ परोपकार करूं मै
दृढ़ संकल्पित हो प्रभु मन मेरा।
सदाचार सद्व्यवहार करूं मैं,
हो सुखद शांतिमय जीवन मेरा।

रघुवंशम श्री राम का वंशज ,
अपने वचनों को सदा निभाऊँ।
मुझे गर्व रघुकुल पर है तो,
कुछ शुभकर्म कर नाम कमाऊँ।

प्राण जाऐं पर वचन ना जाऐ,
प्रभु राम आशीष दें मुझको।
सदमार्ग पर चलता जाऊँ ,
भगवान आर्शीवाद दें मुझको।

अबतक संकल्प निभाया मैने,
हो सका संभव जितना भगवन।
अगर वचन दूं आजन्म निभाऊँ,
ये सत्य दृढ़ संकल्प हो श्रीमन।

स्वरचितःःः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.



तन की ताक़त से बडी , मन की ताक़त जान ।
दृढ़ता हो संकल्प में ,हो मंज़िल आसान ।।१।।

पूरी इच्छा हो तभी , होए दृढ़ संकल्प ।
निश्चित हो मन भावना , सोचे नहीं विकल्प ।।२।।

ध्येय सिद्धि होती तभी , सात्विक हो संकल्प ।
कार्य सिद्ध निश्चित बने , लगे समय भी अल्प ।।३।।

सरल बने संकल्प से , दिखे कठिन जो काम ।
मन मस्तिष्क के तंत्र में ,विचार रहें सकाम ।।४।। 

दुर्गम यात्रा जगत की , बन जाती आसान ।
अन्तर्मन संकल्प से , जब लेता है ठान ।।५।।

भाग्य भरोसे मत रहो , करो लक्ष्य संधान ।
हृदय संकल्प ठान के , साहस को पहचान ।।६।।

अजगर से ही सीखिये , खींचें श्वास शिकार ।
अपने दृढ संकल्प से , करता ठोस प्रहार ।।७।।

ऊँचाइयाँ संकल्प की , पहुँचाती आकाश ।
दूर गगन को भेदता , होता नहीं निराश ।।८।।

स्वरचित:-
ऊषा सेठी 
सिरसा 125055 ( हरियाणा )


संकल्प 

न झुकने देंगे 
सिर माँ का
संकल्प लेते 
वीर जवान
भारत के

न की अपनी परवाह

न अपने परिवार की 

सीमा पर डेट रहे
ऐसे है सैनिक
भारत के

न आई
शिकन चेहरे पे
कर्त्तव्य पथ
अडे हुुुए
ऐसे है वीर लड़ाकू
भारत के

दुश्मन सीमा
की चिन्ता नहीं
फैहराते हैं
तिरंगा आसमां में
सब देशभक्ति से
प्रेरित रहते 
संकल्प लेते
र॔णवाकुरे भारत के

करता है देश
सलाम इन्हें
हर भारतवासी
नत मस्तक है
कर्ज तुम्हारा
न उतार पायेंगे
सीमा पर
रहो महफ़ूज तुम
करता है दुआ हर भारतवासी 

स्वलिखित लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल


यह जीवन तो सचमुच रण है-
भारत की माटी चंदन है.
जूझेंगे हम आजीवन ही-
मन में सांची लगी लगन है

अपना तो यह पक्का #प्रण है.

बाधाओं से डरना कैसा?
कसें कसौटी पर,संदेसा.
जीवन-पथ पर राष्ट्र-प्रेम का-
कहता इस भू का कण-कण है.

अपना तो यह पक्का #प्रण है.

शत्रु को पहले समझाना-
माने ना फिरसे धमकाना,
बाज न आए तो निर्भय हो-
भिड़ जाना वो समुचित क्षण है.

अपना तो यह पक्का #प्रण है.

कर्मक्षेत्र में कदम बढ़ाना-
सत्कर्मों से अलख जगाना,
महकाना यश-सुरभि चतुर्दिक -
मातृभूमि का तुझपर ॠण है.

अपना तो यह पक्का #प्रण है.

________
#स्वरचित

डा.अंजु लता सिंह 
नई दिल्ली


भाग्य भरोसे कभी न बैठो
कर्मठता से यत्न करो
पुरुषार्थ के पथ चलने का
प्रण लेकर आगे बढ़ो

जीवनरूपी कर्मभूमि में
विजयपताका फहराओ
बाधाओं की बाणवर्षा से
युद्धवीर बन टकराओ
शौर्य और पराक्रम से
सफलता के सोपान चढ़ो
पुरुषार्थ के पथ चलने का
प्रण लेकर आगे बढ़ो

शिथिल,क्लान्त,भयभीत हृदय में
नवऊर्जा का संचार करो
साहस का प्रतिमान बनो
तुम सिंह सदृश हुंकार भरो
घनघोर तिमिर से प्रभापुंज सा
जीवन का संग्राम लड़ो
पुरुषार्थ के पथ चलने का
प्रण लेकर आगे बढ़ो

संघर्षों के हवनकुण्ड में
आहुति श्रम की डालो
जीवन लक्ष्य करो निर्धारित
दृढ़ निश्चय से उसको पा लो
जिजीविषा से परिपूर्ण
अनुकरणीय चरित्र गढ़ो
पुरुषार्थ के पथ चलने का 
प्रण लेकर आगे बढ़ो


अब प्रकृति को इस ‘प्रदूषण’ से बचायें 
.
क़ुदरत के विधा होते है व्रक्ष विलक्षण
दारोहर को बचाये रखना अपना लक्षण 
व्रक्षो से धरती को सजाने का ले प्रण
व्रक्षो की कमी से संकट होगा हर क्षण 

सुंदर शोबित, सुरक्षित रहे आपनी धरा 
व्रक्षो से सजी रहे हमारी प्यारी वसुंदरा
पर्यावरण को बचाना मानवता का धर्म 
व्रक्षारोपण कर रखे पृथ्वी को हरा भरा

कोई भी इन व्रक्षो को क्षति न पहुचाए
इस सुंदर दारोहर को धरा से न गवाए
ईनी से मिलती है हमको स्वच्छन्द हवा 
देश व्रक्ष बचाने का सक्त नियम बनाए 

अपनी प्रकृति पर संकट ख़ूब घहराया
इस कूकृत्य को हम इंसानो ने रचाया
आधुनिकरण की दौड़ कटते रोज़ व्रक्ष 
प्रक्रतिक धरोहर काट धरा को जलाया 
.
.
_________________________________
✍🏻 राज मालपाणी.(शोरापुर-कर्नाटक)


आज से मैं भी ये प्रण लेती 
हूँ दिल में एक दृढ़ संकल्प 
लेतीहूँ जो मिले अवसर तो 
कुछ कर दिखाने का अपने 
देश की खातिर तो कसम है 
मुझको हे भारत माता! बहा 
दूँगी अपने खूँ के इक इक 
कतरे को 

नमन करती हूँ मैं अपने देश 
की सरहद पे तैनात जाँबाज़ 
सेना को,फकर है मुझे बड़ा 
ही भारत देश के शूरवीरों पे,
मैं भी देश की खातिर हो जा-
ऊँगी रुखसत इक दिन इस 
जहाँ से। 

यही प्रण है मेरा की मैं अपने 
देश की खातिर अपार सर्वस्व 
भी न्यौछावर करदूँ, गोली, बम 
बारूद से अपने साथ साथ सारे 
आतंकियों के एकपल में प्राण ले 
डूबूँ ऐसा ही मैंने दिल में संकल्प 
लिया है। 

आज ये प्रण लेती हूँ मैं के जब
तक ना मिट जाए नामों निशां
उन पाखंडी पाकिस्तान के 
आतंकियों का तब तक मैं 
भी चैन से एक पल भी ना 
बैठूँगी।बस यही दृढ़ संकल्प
मैं आज करती हूँ। 

रौशनी अरोड़ा (रश्मि)


जिंदगी के इस सफर में
प्रण ना कभी मैनै लिया
परिस्थितियों को झेलते 
वर्तमान का सामना किया।

रहकर अपनों के बीच में
प्रण ना कभी मैंने लिया,
गमों को भी गले लगाके
सबकी ख्वाहिशों को पूरा किया

जिंदगी के इम्तिहान में
प्रण ना कभी मैंने लिया
अपनी ख्वाहिशों को छोड़के
सबके सपनों को पूरा किया।

अपनी बेरंग सी जिंदगी में
प्रण ना कभी मैंने लिया
हर रुपों में ढलकर
तरलता से ही जिया।

मानवता का संकल्प लेके
प्रीत का ही संदेशा दिया
ईर्ष्या, द्वेष, घृणा को भूलके
सिर्फ चाहतों को ही जिया।।

स्वरचित पूर्णिमा साह(भकत)
पश्चिम बंगाल


दोहे---
1.
इच्छा से संकल्प बड़, करे दूर व्यवधान।
द्वार सफलता पहुंचना, हो जाता आसान ।।
2.
सपने बिन संकल्प के , हो सकते बेकार।
सपनों से प्रयास मिले, मनचाही हो धार।।
3.
पाना हो गर सफलता,बन सकते सब दक्ष।
करें संकल्प भी बड़ा,रखें सफलता लक्ष।।
4.
पति पत्नी संबन्ध हैं,ज्यों फूलों में इत्र।
प्यार,संकल्प, नेहमय,सबसे अधिक पवित्र।।
5.
आत्मजीवी व्यक्ति सदा,अलग दिखे संसार।
करे व्यक्ति संकल्प तो,हो अधर्म संहार ।।

*********स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451-551


प्रण

हाशिए पर वक्त के जो सो गया।
वो गर्दिशों की आँधियों में खो गया।

जो खो गई पहचान आज ढूँढ लो। 
रास्ते होंगे आसान आज सोंच लो।

फूट पड़ी हैं किरणें उम्मीद की।
बीत गई है रात आज नींद की।

चल पडो कि आज तुम रुको नहीं। 
चल पड़ो कि आज तुम झुको नहीं।

दम भरो कि तेरे कदम रुके नहीं।
प्रण करो कि अब कभी टूटो नहीं।

उठ गया जो आज तेरा एक कदम। 
निकल पड़ेगा कारवाँ कदम-कदम।

स्व रचित 
डॉ उषा किरण


वसुधा पर,
चौरासी लाख योनियों में
जीवों में,
मानव ही,
श्रेष्ठ जी व है,
अच्छे जीवन जीना,
बिना संकल्प के,
अच्छे लक्ष्य के लिए
संकल्प बहुत ही जरूरी है,
पढ़ना और जीवन गढ़ ना,
संकल्प से ही पूरा हो सकेगा,
भारत देश में,
ऐसे युवा और युवतियां है,
रहने को घर नहीं,
जीने के लिए दो रोटी नहीं,
फिर भी,
संघीय लोकसेवा आयोग,
परीक्षा में,
उर्त्तीण हो,
कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर,
जैसे पदों को हासिल कर,
अपने दुख मय,
और,
अंधेरे जीवन में,
उजाले की ओर,
बढ़ते हुए,
हासिल कर लेते हैं,
इसी का नाम
जिन्दगी है,
अच्छा करना,
अच्छा जीवन जीवन।
मानव काजीवन,
ऐसे दृष्टान्त,
भारत में देखने को मिलते हैं।
स्वरचित देवेन्द्र नारायण दास बसना छ,ग,।।


***********************
🍁
संकल्प यही दोहरा करके,
भारत माता के लाल चले।
सम्मान नही झुकने देगे,
कह कर वो सीन तान चले।
🍁
वो साथ तिरंगा लेकर के,
हाथो मे लेकर प्राण चले।
वो मातृभूमि का कर्ज चुकाने,
संकल्प सहित उस पार चले।
🍁
दुश्मन की छाती पे चढ के,
अभिमान मिटाएगे उसका।
वो शेर का जिगरा लेकर के,
इतिहास बनाने आज चले।
🍁
स्वरचित .. Sher Singh Sarraf

संकल्प

संकल्प पथ है कर्म का..
संकल्प पथ है धैर्य का..
संकल्प पथ पर वही चला..
थामा दामन जिसने धर्म का..

संकल्प हो अडिग ऐसा..
तोड़ न पाए विपदा कोई..
भिड़ जाए हर संकट से..
या हो भीषण आपदा कोई..

संकल्प आत्मविश्वास है..
संकल्प ही हर उजास है..
अडिग रहो सदा इसपर..
तो सफलता सदा पास है..

स्वरचित :- मुकेश राठौड़

हाइकु
1
प्रीत संदेशा
संकल्प मानवता
मन दिव्यता
2
लेते ना प्रण
मानवता विरुद्ध
शांति विमुख
3
"भीष्म"सा प्रण
"पितामह"जीवन
ना है संभव
4
ले हरपल
देशहित संकल्प
स्वीकार मन
5
राष्ट्र संकल्प
जाबांज"पायलट"
युद्ध विकल्प

स्वरचित पूर्णिमा साह(भकत)
पश्चिम बंगाल

विषय:-"संकल्प/प्रण" 
(1)
रोशन जग 
सीने में धधकता 
रवि का "प्रण"
(2)
लाए दृढ़ता 
बढ़ाये आत्मबल 
"संकल्प" शक्ति 
(3)
सीमा पे खड़ा 
मातृभूमि की रक्षा 
"संकल्प" बड़ा 
(4)
दृढ़ कदम 
"संकल्प" के हाथों ने 
छुआ शिखर 
(5)
भाग्य में लिखा 
देश सेवा "संकल्प" 
सबसे बड़ा 

स्वरचित 
ऋतुराज दवे

जिससे आसमान चढ़ता हैं , 
दुश्मन का भी सर झूकता हैं।
पर्वतारोही शिखर छूता हैं , 
मजदूर पहाड़ जड़ खोदता हैं, 
नदियों का रूख मोड़ता हैं ।
विज्ञान में होते अनुसंधान, 
युद्ध लक्ष्य संधान ।
कलम समाजी व्यथा , 
तुलसी , वेद व्यास कथा ।
नाच में भरत नाट्यम, 
संगीत में सुर संगम, 
आचरण में संयम ।
सीमा पर डटा जो सीना तान, 
जांबाज ले भीडा़ मिग विमान।
दुश्मन की छाती जाती बिंध, 
जब जय घोष होता जय हिंद।
तैराक युद्ध पौत सा , 
दिखाई दे मौत सा ।
जी हाँ यह संकल्प हैं , 
पर प्रण कांटो भरा ताज न हो , 
पूरा न हो तो फिर नासाज न हो ।
सत्य वचन भरा जीवन हो , 
सभी दुर्भावनाओं का दमन हो।
हम से पल जाए वह काम करो, 
हद से आगे न बढो आराम करो।
यही प्रण यह केवल संकल्प हो, 
खुशी-खुशी जिए यही विकल्प हो ।
स्वरचित -चन्द्र प्रकाश शर्मा 
'निश्छल',


द्वितीय प्रस्तुति

आधा रस्ता तय कहलाता है
जब संकल्प लिया जाता है ।।

संकल्प शक्ति को संजोता है
संकल्प इंसान को सजाता है ।।

विकेन्द्रित मन सदा भटकाये
केन्द्रित मन उपलब्धि लाता है ।।

बार बार गिर चीटी पहाड़ चढ़े
दृढ़ निश्चय सीख हमें सिखाता है ।।

इधर उधर नही भटके वो कभी
सीधी राह उसे चलना भाता है ।।

नेक नियत दृढ़ संकल्प पहचानिये
कीर्तमान संकल्प 'शिवम' बनाता है ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"


संकल्प लिया था वीरों ने,
हर हाल में बदला लेंगे हम।
मारेंगे घर में घुसकर उनको,
चाहे छुप जाएं मांद में वो।

इस प्रण को पूरा करने हेतु,
अभिनन्दन ने उड़ान भरी।
बीच समर में अरि दल में,
उसने है हाहाकार भरी।

कांपा है देखो अरि दल भी,
उसके मजबूत इरादे से।
मैं शीश नवाता हूं उसको,
हर पल उसका अभिनन्दन है।

है मान बढ़ाया सेना का,
भारत माता है धन्य हुई।
जिस माता ने है जन्म दिया,
है कोख भी उसकी धन्य हुई।

अभिनन्दन है अभिनन्दन का।
अभिनन्दन है अभिनन्दन का।।
(अशोक राय वत्स) स्वरचित
जयपुर


चिर दग्ध दुखी वसुधा को ,
भय त्रस्त भृमित मानव को ,
अलौकिक सुख की आशा में ,
बांधने का प्रण है |

विश्रृंखलित पराजित मानवता को,
जन मानस में व्याप्त विषमता को ,
सर्वथा दूर कर बल से सम्पूर्ण कर, 
विजयनी बनाने का मेरा संकल्प है |

जड़यांत्रिकता के विरुद्ध, 
करके आवाज उच्च ,
आध्यात्मिकता के समरस ,
जीवन व्यतीत कर ,
आनंद शिखर तक ,
जाने का प्रण है |

नारी की महत्ता प्रतिष्ठा और पद को ,
महिमा से मंडित विशाल आसन पर,
पुनः विराजित करने का ,
मेरा संकल्प है ||
"© मंजूषा श्रीवास्तव "मृदुल"
लखनऊ ,उत्तर प्रदेश


एक संकल्प
बनायेंगे साक्षर
नही विकल्प।।


एक ही प्रण
जीतेंगे हम रण
देश के गण।।

सच्चा संकल्प
दिलाये सफलता 
लेना कठिन।।

प्रण में प्राण
निभाना है कठिन
चुभते बाण।।

संकल्प शक्ति
दिलाये देश भक्ति
कठिन पथ।।
भावुक


1.
नेक संकल्प
मिटाओ अज्ञानता
अच्छी पहल
2.
कैसा संकल्प
लटके अधर में
मन में खोट
3.
पक्का संकल्प
सफलता पाने को
मन बनाया
4.
टूटा संकल्प
बढ़ी अराजकता
निपटे कैसे
5.
कन्या के नाम
लिया एक संकल्प
गऊ का दान

स्वरचित
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा


संकल्प दृढ़ विश्वास कर लो अपार 
ह्रदय से कर लो अथक प्रयास 
खुले नैनों से स्वपन देखो 

छू लो ऊँचा आकाश .

लक्ष्य पर निशाना साधो 
कभी ना हो ह्रदय से उदास 
नित संकल्प से करो दिवस की शुरुवात
करो लो ऊँचा मकाम बनकर निष्काम.

जीवन में कर लो संकल्प महान 
ह्रदय के संकल्प को रखना हैं सदैव बरकरार 
बिखर जाने के चाहे विकल्प हो हज़ार 
गिर कर भी संकल्प लेकर कदम आगे कदम बढ़ाना हैं हर बार .

संकल्प ही विजय का प्रथम कदम हैं 
उद्देश्य से मत भटको ऐ राह के पथिक 
राष्ट्र की कीर्ति को ऊँचा करने की तुम करो संकल्प 
लेकर ह्रदय में ढृढ़ अटूट ललक .
स्वरचित :- रीता बिष्ट .


पाक का पाप , 
अभिनंदन प्रण ,
नष्ट विमान |

प्रधान मंत्री ,
संकल्प अरि नाश ,
कूटनीति से |

आतंकवाद ,
भारत का संकल्प ,
समूल नाश |

संकल्प दृढ़ ,
बदला पुलवामा ,
चार सौ वध |

संकल्प आज ,
भारत की जनता
सेना के साथ |

छुपे गद्दार ,
नमक हरामी है ,
संकल्प सजा |

सजग रहें 
संकल्प समर्पण ,
देश के लिऐ |

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश,

:गवाह/सबूत"22 जून 201 9

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