Tuesday, February 5

"विज्ञान"05फरवरी 2019

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             ब्लॉग संख्या :-290



विधा -कविता (छंद मुक्त )
जी हाँ मैं विज्ञान! 
उपदेशक नहीं 
कहानीकार भी नहीं , 
न समझो तो जादू
समझो तो स्वंय सिद्ध हूँ , 
सभी आविष्कारक 
सूई से लेकर टेंक- अस्त्र
जल पोत , हवाई जहाज ।
अन्तरिक्ष के जांबाज, 
रसायन में दवाई 
खाद्य में दही 
कलम में स्याही 
ड्रग्स हर तरह के
भौतिक संसाधन
सैर सपाटे आकाश पर
कृषि खाद -बीज, उपज
वर्षा , सिंचाई, बिजली 
खगौल, अंतरिक्ष पिण्ड 
अणु -परमाणु , खान-खनिज जीव , खगोल, भौतिक, रसायन विज्ञान, 
रक्षक सावधानी पर
दूर्पयोग पर भयंकर, 
जी हाँ मैं विज्ञान हूँ , 
यथार्थ और वास्तविक, 
नव जीवन देता विज्ञान 
मैं अंधविश्वास से दूर
परम्पराओं से परे 
जीता जागता सत्य . . करो प्रयोग नक्शेकदम, . . नित्य नयी खोज । सभी का सुखदाता निपूण -निधान, 
जी हाँ मैं विज्ञान! 
स्वरचित -चन्द्र प्रकाश शर्मा 'निश्छल',

जय जवान
जय किसान के बाद
अब हुआ है 
जय विज्ञान का
उद्घोष 

जब हुआ तीनों का
साथ
देश का हुआ 
चहुंओर विकास
और हुऐ 
मजबूत हाथ

विज्ञान की 
जरूरत है आज
चिकित्सा शोध 
खेती उत्पादन
अंतरिक्ष में 

विडम्बना है 
मिसाइल टैंक 
परमाणु बमों ने
विश्व को खड़ा 
कर दिया 
बर्बादी के कगार पर

विज्ञान ने दिखाई 
नयी राह जगत को
अंधविश्वास का
किया अंत
और ज्योति जलाई
सच्चाई की

सही मायने में 
सही काम के लिए 
शोध करें 
उपयोग करें 
विज्ञान का
चारों और फै लाऐ
संदेशा ज्ञान का

स्वलिखित लेखक संतोष श्रीवास्तव 
भोपाल

शुद्ध विशुद्ध परम् ज्ञान को
सब कहते जग में विज्ञान
जल भू नभ आच्छादित है
जग में तना हुआ वितान
हिमाच्छादित उच्च हिमालय
संत महऋषि रचे विज्ञान
चार वेद ऋचाएं लिख दी
वे रखते जगति का मान
त्रेतायुग में स्वयं दशानन
स्वयं विमान वह् जग नापे
वह् धरती पर चले अकेला
जन जन थर थर थर कांपे
लेपटॉप मोबाइल से तो
मिटी दूरियां इस जगति की
वसुधैव कुटुंबकम सीख दे
तमसोमाज्योतिर्ग मय करती
आवश्यकता आविष्कार है
जग में मानो होड़ लगी है
अंतरिक्ष नित बातें करते 
सागर में पनडुब्बी खड़ी है
सीमा सुरक्षा मुस्तेद हुई है
स्वास्थ्य सुरक्षा प्रिय विज्ञान
बिन विज्ञान जी नहीं सकते
रक्तदान भव्य महति है दान
पुराकाल से चला आ रहा
नव क्रांति विज्ञान ही लाई
विद्वानों के महा ज्ञान जग
धरती पर हरियाली छाई।।
स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

कभी लगे वरदान कभी लगे अभिशाप
हर जगह दो पहलू बराबर दोनो का माप ।।
विज्ञान जितना हितेषी उतना प्रलयकारी 
सोच समझ कर रखना इससे मेल मिलाप ।।

प्रकृति को नष्ट कर के हमने क्या पाया
मगर विज्ञान बिन जीना मुश्किल कहाया ।।
सूझबूझ ही रह गया अब मानव के पास
हर जगह ही आज अब संकट मंडराया ।।

जन जन में जागरूकता अब लानी होगी
विज्ञान की लाभ हानी हमें बताना होगी ।।
अविष्कार का सदुपयोग होना चाहिये
वरना ''शिवम" कीमत हमें चुकाना होगी ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 05/02/2019

विषय-विज्ञान
विधा-हाइकु

आज विज्ञान
थल से आसमान
छाया हुआ है

बेकार नहीं
वैज्ञानिक तरीके
सार्थक सोच

आज इंसान
ज्ञान बना विज्ञान 
वैज्ञानिक है

आज विज्ञान 
अभिशाप भी बना
वरदान भी

अशोक कुमार ढोरिया

स्वरचित
*
भू-नभ
चरण तल
आज सब 
विग्यान के बल।
होड़ लेकिन
अरस्त्र-शस्त्रों की
दिनोंदिन
गिन रही दिन
कुटिल कृत्यों की।
काल
मुख विस्फार
करता
दीखता बढ़ता।
चीखता 
अस्तित्व नरता का
भविष्यत्
शाप है वर भी
विध्वंस में
निर्माण भी पलता।
क्योंकि
सृष्टि प्रवाह
सतत अनन्त है।

स्वरचित..
-डा.उमाशंकर शुक्ल'शितिकंठ'
तांका,
आज विश्व में,

परमाणु ताकत,
शोर मचा या,
विनाश का तांडव,
जग को दह लाया।।१।।
२/आज विज्ञान,
मानव ता के लिए,
वर दान से,
अभिशाप बनी है,
प्रभु त्व प्रर्दशन।।
३/आज विश्व में,
बमों की राजनीति
होड़ चली है,
शक्तिशाली बनाने,
साम्राज्यवादी नीति।। 
देवेन्द्र नारायण दास बसना छ,ग,
४/पत्नी को रानी,
नौकरानी बनाना,
पति पर है।
विज्ञान वरदान,
आदमी पर ही है।।
देवेन्द्र नारायण दास बसना छ,ग,।।
आप कुछ ऐसा करें हे हनुमान।
केवल सुंदर सुखद होय विज्ञान।
मिट जाऐ अंधकार अंतरतम से,
हम सब चाहें यही एक वरदान।

वैरभाव मिट जाऐ मनमानव से।
द्वेषभाव भाग जाऐ मनदानव से।
न बम मिशाइल की पडे जरूरत,
प्रेमप्रीति हो मानव की मानव से।

सुखी जीवन हम सबका हो जाऐ।
सहृदय प्रफुल्लित अपना हो जाऐ।
उडे मनोविज्ञान के बलबूते मानस,
साकार हमारा हर सपना हो पाऐ।

कुछ जीवन दर्शन समझ पाऐं हम।
सत जीवन जीना सीख जाऐं हम।
प्रेम प्यार की सरिताऐं बहें प्रभुजी,
रहे विज्ञान मगर न उलझ पाऐं हम।

हम शिक्षित हों विनय विज्ञान पाऐं।
रह मिलजुलकर सब अज्ञान मिटाऐं।
कभी अभिशप्त नहीं बनने दें इसको,
विज्ञान अभिशाप नहीं वरदान बनाऐं।

स्वरचितःःः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.
िधा - हाईकू

1) बढ़ाता ज्ञान
महान तकनीकी 
खोज विज्ञान ।

2) जगत शोध 
अंतरिक्ष में पैठ 
ज्ञान विज्ञान।

3) नाश विनाश 
अनुसंधान नये 
देन विज्ञान ।
🌼🌼🌼🌼🌼🌼
तनुजा दत्ता (स्वरचित )

विषय - विज्ञान

बिना ज्ञान - विज्ञान के,
मानव मूढ़ कहलाता है।
अज्ञानी जो रहा सदा,
वह वृथा जन्म गंवाता है।

अपनी धरती है उर्वरा,
उर्वर इसकी संतान है।
समृद्ध हमारी सभ्यता,
अद्भुत ज्ञान - विज्ञान है।

ऋषि - मुनि के वेश में,
वे थे वैज्ञानिक संत।
नाम उनका है जग जाहिर,
जिनका आदि न अंत।

विश्व अचंभित हो रहा,
पढ़ कर वेद - पुराण।
सदियों पहले वर्णित है,
वैज्ञानिक व्याख्यान।

आओ अपनी परम्परा को
और समृद्ध बनाएँ।
विश्व पटल पर भारत को,
वास्तविक पहचान दिलाएँ।

स्व रचित
डॉ उषा किरण
1
देन विज्ञान
रोबोट करे काम
अद्भुत ज्ञान
2
वेद पुराण
दे विज्ञान का ज्ञान
अब प्रमाण
3
सूर्य से पृथ्वी
"हनुमान चालीसा"
वर्णित दूरी
4
"मंगल"यान
विज्ञान का सफर
आगे कदम
5
खोज विज्ञान
सतत् अनुसंधान
है वरदान

स्वरचित पूर्णिमा साह पश्चिम बंगाल
🌾🌴🌾🌾🌴🌾🌴🌾
नभ तल के ऊपर नभ तल रे
अय सचान ऊँचा उड़ चल रे ।।
।।🌵।।
भूतल ऊपर रेंगने वाले
तेरा अम्बर माप रहे हैं ।
अन्तरिक्ष का दोहन करने
तरह-तरह से भाँप रहे हैं।
जिनके घर विज्ञान सहारे
मची हुई हलचल रे ।।
।।🌵।।
विविध भाँति के जाल बिछे हैं
कई तरह के लटके फन्दे ।
बलशाली होकर मृगतृष्णा
खोज रही है गोरख धन्धे ।
सूख गई करुणा की गंगा
छल-बल का दल-दल रे ।।
।।🌵।।
दूषित वायु सांस लेने को
दूषित है पीने का पानी ।
भोजन भी हो गया विषैला
रोगी पल-पल है ज़िंदगानी।
द्वेष -घृणा के कोलाहल से
मन अपना विह्वल रे ।।
।।🌵।।
उडुगन के संसार में चलकर
हम तुम दुनिया नई बसाएं ।
नए चाँद सूरज के तल पर
जीवन की महती सुविधाएं ।
रंग-रंग के तालाबों में
नलिन खिलें शतदल रे ।।
स्वरचित-"अ़क्स"दौनेरिया
💐 💐💐💐
यह देश है ज्ञान का।
भण्डार है विज्ञान का।

कितने हीं वैज्ञानिक खोज हुये यहाँ।
सारे संसाधन मशीनी हो गये यहाँ।

अब घण्टों का काम।
मिनटों में होता है।

हमारे विज्ञान से।
विदेश भी अचंभित होता है।

कल्पना चावला को।
जानता नहीं कौन।

अंतरिक्ष में जाते हुये।
दे दी जान।

कितने हीं ग्रहों की।
खोज हो गई।

चन्द्रमा,मंगल पर।
लोग चले गये।

अब तो पृथ्वी से।
मंगल ग्रह पर वसने की बात हो रही है।

लोग वहाँ जाने को।
उत्सुक हो रहे हैं।

पेड़,पौधों से लेकर।
जीवों पर खोज हो गई।

देश के विकास से।
जनता खुश हो गई।

सभी मशीनी हो गये यहाँ।
सुदूर की खबरें पल भर में।
पहुँचती यहाँ।।

कितनी करूँ व्याख्या।
कितनों की लूँ नाम।

मेरा अपना देश।
भारतवर्ष महान।।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
स्वरचित
वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

क्रमबद्घ, सुव्यवस्थित ज्ञान 
यही कहलाता है विज्ञान,
वैज्ञानिक दृष्टिकोण बनाता, 
सच की तह तक हमें पहुँचाता |

युगों-युगों से चलता आया, 
आधुनिक युग में बहुत छाया, 
तकनीकी से जोड़कर इसने,
मानव जीवन आसान बनाया |

न्यूटन, एडिसन,बेल आये,
भौतिक विज्ञान के प्रयोग बताये, 
बॉयल,चाल्स के प्रयोगों ने, 
रसायन विज्ञान के गुण बताये |

मेण्डल, खुराना बड़े ही ज्ञानी, 
जीवविज्ञान में इनका कोई न सानी, 
प्राकृतिक अध्ययन में तत्पर रहे, 
आनुवंशिकी के जनक ये कहलाये |

ऐसे ही विज्ञान ने दिखाये चमत्कार,
मिसाइल, सेटेलाईट, कम्प्यूटर आदि, 
इन सबका किया निर्माण और बना, 
विज्ञान एक चमत्कारी वरदान |

स्वरचित *संगीता कुकरेती*
विधा - छंद मुक्त
विषय - विज्ञान


विज्ञान की माया
कहीं धूप कहीं छाया
एक ओर
आशा की भोर
आदियुग से होता आया
नित नया बदलाव
नए चमत्कार
मानव विकास
मुट्ठी में भरता आसमान
सागर की अतल गहराइयाँ छूता
दूसरी ओर
ईश्वर के सृजन में
हस्तक्षेप करता
स्वार्थवश
पूरे ब्रह्मांड पर
अपनी पकड़ बनाने को आतुर
ईश्वर प्रदत्त 
मेधा पर इतराता 
भूल गया
अति हर चीज की
होती विनाशकारी
विनाश के कगार पर
धधकते ज्वालामुखी के
मुहाने पर
सजाये सेज
बैठा है
उद्दंड मानव
विज्ञान उगता सूरज कभी
कभी बन जाता
अवसान उमंगों का
करें उपयोग विज्ञान का 
मानव सम्भल कर
न करें खिलवाड़ 
प्रकृति के
नैसर्गिक सौंदर्य से
तभी जी पायेगा सुख से
लाभ उठायें
विज्ञान की खोजों से
चमत्कृत हों
लाभान्वित हों
नये नये आविष्कारों से

सरिता गर्ग
स्व रचित

विधा :-हाइकु


दुष्ट विज्ञान 
भौतिक दृष्टिकोण
खोया सम्मान 

युग विज्ञान 
ऐश्वर्य परिपूर्ण
भाव अपूर्ण

नभ में छेद 
चमत्कार विज्ञान
प्रकृति खेद 

राष्ट्र उन्नति 
विज्ञान आधारित
मूल्य पारित 

विवेक ज्ञान 
विज्ञान मरहम 
धर्म है कला

तन का दास 
विज्ञान परिहास 
फिर भी ख़ास 

झाँकी विज्ञान
तकनीकी सम्राट
प्रयोग शान

जीवोपचार
विज्ञान आविष्कार 
मृत्यु की हार

मनु बेकार
रोबोट करे काम 
नहीं आराम
१०
मशीनी लत
विज्ञान की आपदा
सदुपयोग 
🌹🙏🌹

स्वरचित :-
✍️ऊषा सेठी
सिरसा 125055 ( हरियाणा )

दूर कर दे जो अज्ञान
होता वही सही विज्ञान
इससे ही विकास का पहिया
होने लगता है गतिमान। 

आज सातों समुद्र हम पार करते
पूरी दुनिया से व्यापार करते
हमारे वैज्ञानिक इसी विज्ञान से
हर दिन नये चमत्कार करते। 

चेहरा देखो बात कर लो
बैठे ही मुलाकात कर लो
कोई भी विहंगम दृश्य सुन्दर
तुरन्त आत्मसात् कर लो। 

ये सी सी टीवी ये ड्रोन कैमरे
कई रहस्यों से हैं ये भरे
ग़लत काम करने वाले
इन्हें देख रहते हैं डरे।

दूरबीन से होती शल्य क्रिया
जीवन का बुझता नहीं दिया
विज्ञान ने बहुत रोगों से
बे वक्त मौत को दूर किया। 

जीवन के बदल गये आयाम
वातानुकूल हो गये विश्राम
पलक झपकते ही हो जाते
विज्ञान के सहारे सारे काम।

फौरेन्सिक विज्ञान की अलग कहानी
इसकी नहीं मिटती है निशानी
किसी व्यक्ति की गुपचुप मृत्यु पर
यह करती दूध का दूध पानी का पानी।


विज्ञान को अनुकूल बनाओ
बनी रहेगी मुस्कान तुम्हारी
विज्ञान के प्रतिकूल मत जाओ
छीन लेगी खुशियाँ तुम्हारी

विज्ञान के सहारे छू ले हम चाँद सितारे
ये बनाये सभ्य, सँवारे जीवन हमारे
पर यदि यह रूठ जाये
नष्ट कर दे संसार हमारे

दूर बैठे नाना,नानी
तुरंत सुन ले बात हमारी
गर साजन गये विदेश
तुरंत भेजे संदेश

विज्ञान ने कर दी है चकाचौंध दुनिया हमारी
इसने जीवन आसान बनाया
हर लिए है क्लेश सारी
इसकी देन है परमाणु बम
करें हम अपनी रक्षा इससे

दुरूपयोग करे ना हम इसका
करे हम सिर्फ मानव हित प्रयोग
विज्ञान बना रहेगा सहयोगी
और हम सुरक्षित, आंनद भोगी।
स्वरचित-आरती-श्रीवास्तव।

🌹🌹🌹🌹
(1)यही विज्ञान 
मोबाइल है हाथ
सभी के पास
(2)ज्ञान के बिना 
विज्ञान भी अज्ञान 
यह भी जान
(3)विज्ञान क्रिया
करती अचम्भित
जैसे हो जादू
(4)विज्ञान देन
टेस्ट ट्यूब से बेबी
लाता है खुशी 
(5)प्रत्येक क्षेत्र 
लाभान्वित करता
ज्ञानी विज्ञान 

रचनाकार 
मुकेश भद्रावले
हरदा मध्यप्रदेश 

हुआ सृष्टि में ये चमत्कार 
विज्ञान ने किया हर दिन एक नवीन आविष्कार 
हुये नित दिन नवीन प्रयोग 

जिनमें बने नवीन संयोग.

विज्ञान ने बदला मनुष्य का जीवन 
हर कठिन डगर को बना दिया आसान 
जीवन को एक दिया एक नया आधार
जिसमें सफलता मिली अपार .

मनुष्य ने अपनी प्रतिभा कौशल को दिया आयाम 
बदल गया जीवन बदल गई सुबह शाम
हुआ नवयुग का नया अवतार 
बदल गया समस्त संसार .
स्वरचित:- रीता बिष्ट
ंद हाइकु 
विषय:-"विज्ञान" 
(1)
योग विज्ञान 
"साँसों" की साधना से 
सिंचते प्राण 
(2)
सिक्के के रूप 
विज्ञान व अध्यात्म
दो अपरूप 
(3)
सूर्य प्रणाम
आस्था संग विज्ञान
धर्म संस्कार
(4)
विज्ञान आया 
भागा अन्धविश्वास 
सत्य को लाया 
(5)
रोये विज्ञान 
हथियारों की होड़ 
अंधों की दौड़ 
(6)
आत्मा है धर्म 
विज्ञान दिखलाये 
भौतिक तन 

स्वरचित 
ऋतुराज दवे


विज्ञान बहुत बड गया लेकिन

कब ऊंचनीच का भाव मिटा है।
शिक्षा स्तर बढता दिखता पर ये,
कब निर्धन अमीर प्रभाव पटा है।

मिल भेदभाव जात पात मिटाऐं।
हम विज्ञान ज्ञान कुछ ऐसे लाऐं।
भौतिकता हमको सुख नहीं देती,
सुखशांति सुविधा वैज्ञानिक लाऐं।

सुई विमान सब विज्ञान ने बनाऐ।
सभी उपकरण विज्ञान ने बनाऐ।
क्या कुछ नहीं बनाया विज्ञान ने,
येऔजार मशीन विज्ञान ने बनाऐ।

आज मशीनी मानव बन गया है।
यह रोबोट नहीं दानव बन गया है।
जिसने क्षबना दिया है हमें आलसी,
क्या विज्ञान महामानव बन गया है।

स्वरचितःःः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.


ओ भइया ओ बहना
सुनउ ये मेरा कहना
आज तुम्हे ये बात बताऊं
विज्ञान का चमत्कार सुनाऊं
जब बचपन में हम खेले थे
गुड्डे गुड़िया ही मस्त खिलौने थे
आज ये देखो कौतुक भैया
वेब गेम में मस्त सब भैया
कल तक कृषक हल वाले भैया
आज हुए ट्रैक्टर ट्रक वाले भैया
बचपन में जब हम पढ़ते थे
खड़िया, स्लेट, स्याही से पढ़े थे
आज जमाना बदल गा भैया
स्मार्ट क्लास के दिन अब भैया
पहले पैदल खूब चले थे
बैलगाड़ी केभी क्या दिन थे
अब तो भागम भाग मची है
मेट्रो, प्लेन की होड़ मची है
चन्दा मामा की लोरी थे गाते
अब चंद्रयान की होड़ लगाते
भूख गरीबी में थे जीते
अब फ़ाइव स्टार में भोजन करते
तकनीकों ने किया कमाल
विज्ञान ने किया मालामाल
पेटीएम,एटीएम संचार क्रान्ति
लैपटॉप, मोबाइल से मिल रही शान्ति
सब चीजों का हो रहा विकास
ज्ञान विज्ञान से पटा आकाश
ई सब हैं विज्ञान के अदभुत चमत्कार
आओ सब मिल करें नमस्कार

मनीष श्री
स्वरचित
रायबरेली


🌻विज्ञान🌻

,🌺🌺🌺
तारामंडल
विज्ञान का खेल हैं
वैज्ञानिक का

🌺🌺🌺
ज्ञान विज्ञान
सूक्ष्म संज्ञान पढा
जीव,विध्यार्थी

🌺🌺🌺
विज्ञान जान
पढते सब ध्यान
भागा अज्ञान

🌺🌺🌺
देता विज्ञान
पाता अपार ज्ञान
जगत सारा

🌺🌺🌺
बना महान
विज्ञान से भारत
चमका तारा

स्वरचित
नीलम शर्मा#नीलू


सुलभ बनाया जीवन सबका ,
दी शक्तियाँ कई चमत्कारी |
भूगोल हो गया हमको संभव 
कर दी छोटी दुनिया सारी |
लाइलाज अब रहा नही कुछ 
रही नहीं कोई बड़ी बीमारी |
बना आवागमन सर्वसुबिथा युक्त ,
उन्नति की नयी दिशा दिखायी |
स्वार्थवश हमने ही दुनियाँ ,
बारूद से है सजाई |
नहीं जरूरत हमको भाती ,
ज्यादा से ज्यादा चाहत आयी |
लालची प्रवृत्ति ने ही तो लूटा ,
अच्छाई में भी घुस आयी बुराई |
विज्ञान नया नहीं अपने लिऐ ,
भारत ने प्रसिध्दि थी पायी |
शांति प्रिय था देश हमारा ,
बिघटन शक्ति नहीं अपनायी |
राज दिलों पर करना सीखा ,
नीति अहिंसा की अपनायी |
कुछ वक्त ने करवट ली ऐसी ,
दुनियाँ भर में उपजे आततायी |
विज्ञान का दुरुपयोग हो गया ,
पालक हाथ बने विध्वशंक दुखदाई |
स्वविवेक ने ही विज्ञान बनाया ,
उन्नति के लिऐ भी यही उत्तरदायी |

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश ,


जीवन जिसने आसान किया,
जन जन को साधन सम्पन्न किया।
आकाश से ले पाताल तक में,
विज्ञान ने बहुत ही चमत्कार किया।

इसने हम पर है अहसान किया,
दूरी को इसने है आसान किया
विज्ञान का क्या गुणगान करूँ,
मानवता का है कल्याण किया।

मानव को वायुयान दिया,
जल में संचालन योग्य किया।
माना यह विध्वंसक भी है।
पर हर काम है इसने सिद्ध किया।

पृथ्वी के चारों कोने में
संचार माध्यम भी है सुलभ किया।
जन जन के शयन कछ में इसने
हर समाचार का उपहार दिया।

आओ इसका गुणगान करें,
जन जन तक इसका प्रसार करें।
इसके अनमोल उपहारों हेतु,
हम विज्ञान का साधुवाद करें ।
(अशोक राय वत्स) स्वरचित
जयपुर
#स्वरचित हाइकु 
(1)

विज्ञान दीया
ज्योतित हो या स्वाहा
निर्णय लिया?

(2)
विज्ञान-यान
चढ़ी सभ्यता ज्ञान
सब हैरान 
(3)
युग है नया
विज्ञान ओतप्रोत 
सिसके मौत
(4)
जय विज्ञान!
नवल युग शान
स्वयंभू मान
(5)
है वरदान 
ज्ञानचक्षु विज्ञान 
दें सब ध्यान

#स्वरचित 5 हाइकु
डा. अंजु लता सिंह 
नई दिल्ली


सदियों पहले का वो विज्ञान
मेरे भारतवर्ष का वो अभिमान
इतिहास के पन्नो को उलटो
वैज्ञानिकता के प्रमाण समेटो
सभ्यता विश्व में जब थी सोई 
मेरे देश के मनीषियों ने तब
विज्ञान रश्मियाँ थी बिखराई
सुश्रुत, चरक, पतंजलि, आर्यभट
हरएक भारतवासी बख़ूबी जानता
शल्य चिकित्सा, योग , खगोल की
हर उपलब्धि को है पहचानता
होकर ज्ञान विषय विशेष
विज्ञान कहलाता है
हर विषय की अपनी छाप
भिन्न विज्ञान बन जाता है
सत्य का बोधक विज्ञान
प्रयोग का साधक विज्ञान
उपयोगिता की मुहर लगे तो
तकनीक रूप बनता विज्ञान
विज्ञान की निज पहचान
तरक़्क़ी का होता भान
विकास का है दूजा नाम
आधुनिकता लागे अभिराम
द्विपक्षीय आयामी विज्ञान
परार्थ रूप में वरदान
स्वार्थ रूप में अभिशाप
मनुज का विवेक कभी
ना मौन होना चाहिए
विज्ञान का केवल और केवल
सदा सदुपयोग होना चाहिए ।

संतोष कुमारी ‘संप्रीति’
स्वरचित

प्रदत्त शब्द : विज्ञान 
————————
हे विज्ञान !
तू शाप है या वरदान?
आज तक समझ नहीं पाया इंसान
ज़मीं को छोड़ आसमान
छूने चला है ये नादान!

सँजोए दिल में नित नये अरमान
हर पल भरता कलपना की उड़ान 
विवेकहीन करता नया अनुसंधान 
जुटा रहा अपनी मौत का सामान
नहीं देख पाता फूलों की मुसकान
ह्रदय बना बैठा है पाषाण!

निज स्वार्थ में डूबा करता अपना गान
न सच्चरित्र,न सद्भावना,न आत्मसम्मान 
दाँव पर लगा रहा माँ का मान।
प्रलोभनों में घिरा मूढ़ इंसान 
समझने लगा खुद को भगवान
दिल बंजर ,बस्तियाँ सुनसान
कया यही है हमारा आधुनिक विज्ञान?

उठ रहा भीषण तूफ़ान 
कैसी मूढविडंबना ,चाहता है आसमान
ढूँढ रहा ज़मीं पर अपने क़दमों के निशान
रे मानव ! विज्ञान की महानता को पहचान
अपने लिए बना ज़िंदगी के रास्ते आसान।
पहले कर सदकरम ,बन नेक इंसान!

विज्ञान तब स्वयं बन जाएगा वरदान
हमारी धरोहर ,हमारा गौरव गान 
ये हरी वसुन्धरा,ये निर्मल नीला आसमान
मानव यथार्थ में होगा विजयी और महान ।
सूरज चमकाएगा खेत खलिहान
चाँदनी फैलाएगी दुधिया मुसकान
फिर होगा स्वर्ग से भी सुंदर ये जहान!
स्वरचित (c) भार्गवी रविन्द्र ...५/२/२०१

हाइकु 
1
ज्ञान विज्ञान
मित्रता है महान 
मिले जहान 
2
शास्त्री विज्ञान
एडिसन महान 
रोशन जहाँ 
3
विज्ञान बातें 
भू लगाए चक्कर 
दिन व राते 
4
भाप इंजन 
जेम्सवाट जिज्ञासा 
पहिया घूमा 
5
ईश महान 
असफल विज्ञान 
मनु अज्ञानी 
कुसुम पंत" उत्साही "
स्वरचित 
उत्साही
**
जब नहीं था विज्ञान,जीना था कितना आसान ।
बच्चे बोझा ढो रहे ,अपनी किस्मत को रो रहे ।

न्यूटन की गति ने ,मारी है मति
किलो,लंबाई के मानक कर रहे अति ।
दिन भर दीवार को धक्का दिया 
लोगों ने फिर निकम्मा क्यों कहा ।
जो भारी है उसका अधिक जड़त्व
जल का क्यो अलग चार पर घनत्व।[ 4℃]

बॉयल ने दाब बढ़ा आयतन घटाया 
चार्ल्स ने ताप बढ़ा आयतन बढ़ाया ।
ये सब देख देख कर माथा चकराया
ताप को माइनस दो सौ तिहत्तर पहुंचाया।
केमिस्ट्री की मिस्ट्री समझ न आई
हाइजेनबर्ग ने क्या अनिश्चितता जताई ।

ज़्या कोज्या में दिल ऐसा लटका 
ब्याज औ क्षेत्रफल में माथा खिसका।
कितने आदमी कितने दिन में पूरा करें 
प्रमेय और रेखाओं से अब डर लगें।
टैक्स अभी देना नहीं तो क्यों पढ़ें
समुच्चय के सवालों से क्यों आगे बढ़े।

मैट्रिक्स तू क्यों दो जगह विराजमान है
लैमार्क ,डार्विन पर जीवन गतिमान है ।
जीव जंतु पौधों के क्यों विशेष नाम है
वायरस बैक्टीरिया कवक से जीना हराम है ।
इतने तंत्र पढ़ कर निकली छोटी सी जान है
बोस जी कह गए , पौधों में भी जान है ।

अब जब विज्ञान आया है,जीवन में उजाला लाया है
माध्यम से इसके अपना यान ,मङ्गल तक पहुंचाया है।योग के साथ विज्ञान का जब हुआ अद्भुत संजोग 
विश्व गुरु बना भारत ,करके ये उत्कृष्ट प्रयोग ।।

स्वरचित 
अनिता सुधीर

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"मिटटी"14फरवरी 2019

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