Friday, February 15

"शहीद/शहादत "15फरवरी 2019

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लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का
कब रोकोगे जाग के रस्ता मरुथल और चट्टानों का


आगे बढने वाले सैनिक के पांव मैं जंजीर है क्यों
मेरे भारत का मस्तक यह घायल कश्मीर हैं क्यों 
मोड दो रुख लाहौर कराची बमबारी विमानों का
लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का

आर्य पुत्र कहलाते तुम आती क्या कुछ लाज नहीं 
रोते हो बस कल का रोना दिखता कुछ आज नहीं
ढूंढो फिर सुभाष भगत सिंह ये काम नहीं परवानों का लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का

दस टुकड़े करके भी क्या तुम को ना चैन मिला
दीवारें चुन कर बनवा दो भारत को मजबूत किला 
उठो जागो अब वक्त नहीं पंचशील प्रतिमानों का 
लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का

चुन-चुन कर मारो गद्दारों को तभी कदम तुम धरना रोएगी वीरों की रूहे अगर जिंदा छोड़ोगे वरना
याद करो बलिदान अशफ़ाकउल्ला जैसे परवानों का लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का 

लंका ढाने वाले कितने आज विभीषण बैठे हैं 
खाते मेरा गाते उनका जाने किस बात पर ऐठे हैं
काम नहीं मेरी मिट्टी में ऐसे नमक हरामों का 
लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का

देखी दुनिया तुमने रूस चीन इजराइल अमरीका 
खाली बातें कर आए हो या फिर है कुछ सीखा 
सत्यसारथी बनो प्रधान सिर कुचलो सर्प गुमानो का लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का

मेरी कोख जनेगी हरदम बिस्मिलआजाद लाहड़ी को
कैसे दुश्मन चढ बैठा अपनी टाइगर हिल पहाड़ी को
तोपों की करो गर्जना वक्त नहीं ट्विटर आह्वानो का लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का 

मरने वाला द्रविड़ गोरखा वीर मराठा राजस्थानी है बैठके दिल्ली क्या देखोगे क्या जंगल क्या पानी है फेंको उतार तुम आज लबादा अय्याशी सुल्तानों का 
लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का

राज तुम्हे सौंपा है जनमत ने फिर क्या मजबूरी है 
सोने के मंदिर से दुश्मन की 16 किमी की दूरी है
एक बार फिर ढूंढ लो घर पंजाबी रअरमानो का 
लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का

हथियारों के बल पर कैसा नाच हुआ यथा नंगा 
देखूं खोजो मेरे मस्तक का खोया ताज तिरंगा 
रणभेरी की बेला है यह छोड़ो अब राग तरानों का 
लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का

कुर्बानी को क्या समझे जो आराम से घर में लेटा है मरने वाला नहीं सियासी मजदूर किसान का बेटा है हक है इस मिट्टी पर केवल ऐसे ही कुर्बानो का
लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का

सूखे फूल चढ़ाकर मेरे शव पर यूं ना आघात करो 
मरता जिनकी गोली से उनके घर जाकर बात करो 
सो गया क्योंआज रक्त बर्बर शेरों की संतानों का
लहू सियासत कब तक पिएगी मेरे वीर जवानों का 

विपिन सोहल

सुनो सियासतदारों अब तो छोड़ो शांती की बातों को।
करो नहीं विश्वास तनिक भी तोड़ो उनसे सब नातों को।
छुप करके वीर जवानों को धोखें से मारा श्वानों ने-
घर में अब घुस-घुसकर के मारो सेना के हत्यारों को।
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एक सर्जिकल स्ट्राइक क्या की हर मंचों उसको बोला है।
सैनिक के कर्मों को तुमने राजनीति से तोला है।
बातें छोड़ो कुछ तो शर्म करो अब छप्पन इंची वालों-
क्या कहने को ही मात्र तुम्हारा छप्पन इंची चोला है।
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सुनो शहादत को वीरों की मुद्दा सियासती मत करना।
निंदा करते हैं कह करके बस लीपापोती मत करना।
लो कीमत उनसे पूरी जिन श्वानों ने मारा वीरों को-
माफ करे हों उनको हर बारी अबकी गलती मत करना।
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जान गँवा जो चले गएं महसूस करो उनके दर्दों को।
बात नहीं अब औकात दिखाओ उन सारे नामर्दों को।
बहुत हुआ अब आलाप प्रेम का इन लातों के भूतों से-
नंगा करके गोली मारो सारे दहशतगर्दों को।
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अब निंदा कड़ी हमको नहीं चाहिए नहीं दोष आरोपण हो।
इसकी गलती उसकी गलती फालतू न कोई भाषण हो।
छानबीन की एवज में अब तो वक्त नहीं जाया करना-
बहुत हुई शांती वार्ता अब सीधे आर-पार का रण हो।
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जीने का अधिकार नही हैं फारुख जैसे गद्दारों को।
वीरों की ‌ कुर्बानी का कुछ अफसोस नहीं मक्कारों को।
सत्ता खातिर इन लोगों से गलबाहें करना छोड़ो अब-
बात समझनी ही होगी अब तो जरा सियासतदारों को।
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स्वरचित
रामप्रसाद मीना'लिल्हारे'
चिखला बालाघाट (म.प्र.)



अमरनाथ श्री शंकर का
श्री नगर डमरू गूँजेगा
कोई आका नहीं बचेगा
बम बारूद सिर फटेगा
कायराना हमला करके
नाग नहीं बच पाएंगे
अब तो तेरे फन कुचलेंगे
बिल में घुस कर मारेंगे
अमर शहीदों की शहादत
व्यर्थ कभी न जायेगी
दिव्य वीर पराक्रम सेना
पाक धरा घुस मारेगी
विषधारी अब सर्पो भागो
जंहा चाह जाकर छिपलो
मोदी की हुंकार के आगे
बच न पाओगे तुम पिल्लों
हर कतरे का बदला लेंगे
रावलपिंडी या करांची
ना पाक धरा के ऊपर 
तेरे सिर अब मौत ही नाची
शहीदों के यह अमर शहादत
अश्रु व्यर्थ कभी न होंगे
वंदेमातरम मधुर गान से
नींद चैन की खोओ गे 
सृधांजली वीर सपूतों
नत मस्तक हो करें नमन
नहीं बचेंगे वे हत्यारे
होगा अब समूल दमन।।
स्व0 रचित,मौलिक
गोविंद प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

"शहीद/शहादत"
आज उर आहत है, व्यथित है
रुदन,चीत्कार कर रहा है
चाह यही है अब बाकी
शिव सा तांडव होना चाहिये
लिए चिथड़े हाथों में 
अब, शिव सा तांडव होना चाहिए।
प्रेम की भाषा छोड़ कर अब
लिए बंदूक हाथों में
शिव सा तांडव होना चाहिए
रौद्र रूप और भृकुटि नाचे
थर-थर कापें ये आतंकी
ऐसा शिव सा ,तांडव होना चाहिए।
शहीद दिवस कितने मनाएं
कतरा कतरा लहू का अब
बदला लेना चाहिए,
हाँ, शिव सा अब तांडव होना चाहिए।
पाक ओढ़नी ओढ़े जो
लहू कफन अब उनका होना चाहिए।
......व्यथित मन से...
वीणा शर्मा वशिष्ठ
स्वरचित



बुझ गए घर के चिराग,
लगी हुई ये कैसी आग।

किसकी शै पर पल रहा,
दानव आतंकवाद का।

कब तलक बैठे हुए,
खूनी खेल यूं हम देखेंगे ?

कब तलक चुपचाप यों,
सैनिकों की शहादत देखेंगे ?

क्यों नहीं अब खात्मा,
हो इस आतंकवाद का !!

कब तलक घरों के ,
चिराग बेवक्त यूं ही बुझेंगे ?

मां का कलेजा फट रहा,
बाप की टूट गई कमर।

पत्नी का उजड़ा संसार,
बच्चों के सिर से साया छिना।

कब तलक आतंकियों को,
यूं ही पनाह मिलती रहेगी।

क्यों‌ नहीं अब अखिल विश्व
आतंकवाद को नेस्तनाबूद करे।

विश्व की समस्त जनता
एकजुट हो आतंकवाद से लड़े।

मुट्ठी भर इन दानवों के समक्ष,
हमारे हौंसले क्यों पस्त हैं ?

क्यों नहीं खून‌ खौलता,
क्यों हम आतंकवाद से त्रस्त हैं ?

झकझोरती है नृशंसता,
पुलवामा के आतंकी हमले की।

कब तलक हम इस तरह,
वीर-रत्नों को खोते रहेंगे?

कब तलक नापाक हरकतों के,
अंजाम हमारे वीर जवान भोगते रहेंगे।

अभिलाषा चौहान
स्वरचित

''शहीद की शहादत"

याद करेगा जमाना तेरी आखिरी सांस 
याद करेगा जमाना तेरा यह लिबास ।।
तिरंगे में लिपटा यह तन गौरवान्वित है
यह सबका नसीब कहाँ तूँ है खास ।।

क्यों रोये माँ तूँ क्यों है उदास 
तेरा बेटा फिर आयेगा तेरे पास ।।
वतन पर जान दी है उसने ,
वन्दनीय है माँ तेरा यह त्याग ।।

हजारों में माँ तूँ एक है 
तेरा लहु कितना नेक है ।।
देश के काम आया है ,
इतिहास में रहेगा उल्लेख है

मौत तो एक दिन सबको आना
मौत पर 'शिवम' क्या पछताना ।।
इस नश्वर तन में सांसों का कौन 
जाना कब तक का है ठिकाना ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 15/02/2019


वीर जवानों की शहादत के विषय में , उनको भावभीनी श्रद्धांजली देते हुए , आज मेरी ये पंक्तियां हैं !
दिनांक 15.2.2019
दिन शुक्रवार
विषय शहीद/शहादत
रचयिता पूनम गोयल

नमन 🙏नमन🙏नमन🙏
शतबार है नमन🙏
उन वीर शहीदों को ,
जिन पर गर्व करता सारा चमन ।।
पिलवामा में हुआ ,
कल एक नृशंस हत्याकांड ।
जिसमें कुछ हृदयहीनों ने किया ,
हमारे जाँबाज़ों का काम-तमाम ।।
हँसते-हँसते शहीद हुए सब ,
देश का नाम रोशन किया !
परन्तु क्या उन क्रूर हब्शियों पर भी ,
लेशमात्र इसका
असर हुआ ?
शायद नहीं !
इसीलिए , तो
बार-बार वे आकर इन मासूम सिपाहियों के ,
छलनी कर जाते हैं सीने ।
व सभी देशवासियों को भी ,
पड़ते हैं कड़वे घूँट पीने ।।
क्या उनके सीने की इमारत ,
किसी विशेष पत्थर से बनी है ?
जिसमें इंसानियत नाम की ,
कोई वस्तु ही नहीं है ।।
वे भूल गये हैं शायद -
बुज़ुर्गों का दिया , वो पुराना सबक़ ।
जिसमें कहा गया था ,
कि जियें
और जीने दें 
हम सब ।।


कैसी ये विडम्बना है। 
भारत देश की।
मैत्रीपूर्ण व्यवहार से सदा।
मारा जाता है।
उनहोंने अगर बन्दूक। उठाया हाथों में।
हम चुपचाप क्यूँ बैठे हैं।
अपने घरों में।
उनहोंने जो वीरों की।
जान लिये।
उनके घर,आँगन को।
सूने किये।
कितनी माँ की उजड़ी कोख।
कितनों के माथे का सिंदूर।
कितने बच्चे हुये अनाथ।
कितनी बहनों का भाई छूटा
कितने दिन और धीर धरेंगे।
कितने दरिंदगी सहेंगे।
अब वक्त कहता है।
उठाओ बन्दूक।
सभी वीर सपूत।
अपने हाथों में।
भून डालो पाकिस्तान को।
नामोंनिशान मिटा दो।
उन दरिंदों को।
छठी का दूध।
याद दिला दो।
करनी का फल तुमको।
पाकिस्तान भुगतना पड़ेगा।
एक,एक को पकड़के।
मारेगा भारत का वीर।
तब तुमको अपनी।
औक़ात का पता चलेगा।।
जैसे को तैसा कहावत को।
अब सिद्ध करना होगा।
उन भेड़ियों को पकड़कर।
बदला लेना होगा।
हमें बदला चाहिये।
शहीदों की कुर्बानी का।
उन माँ के लाल का।
सुहागन के सिन्दूर का।
तुम्हारी शहादत वीरों।
जाया ना होगा।
भारत का माथा बदला लेकर।
सदा ऊँचा होगा।।
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
अमर वीर जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि।
🌷🌷🌹🌹🌷🌷🌹🌹🌷🌷
स्वरचित
वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी


सूनी कर वो माँओं के गोद
ठहाका लगा रहा है
हम घर में दुबके मातम मना रहे है। 
वो अकेले आकर
हमारी दुनिया उजाड़ रहा है
हम आँसू बहा कर वस
स्मारक बनाना रहे है। 
बार - बार वही दर्द
हम झेल रहे है
मुट्ठी भर होकर भी वो
मौत का हमें ताण्डव दिखा रहा है। 
क्या उसके एकता के आगे
हम खण्डित हो रहे है
इसलिए चुपचाप अपने लाल का
शहादत देख रहे है। 
क्युं खामोश है वह ५६ इंच का सीना
क्युं नही हुंकार रहे है
४४ के बदले ४४ लाख
भारतवासी माँग रहे है। 

स्वरचित: - मुन्नी कामत।


शहीदों की चिताओं पर न लगाओ तुम मेले, 
कायरता को क्यों हमारे जवान झेले, 
लड़ कर शहीद होते तो ख़ुशी होती, 
इस कायरता का बदला सारा देश लेले l

राजनीती की रोटी मत सेको अब, 
एक जुट हो जाओ देश हित में सब, 
क्यों लाज तुम्हे नहीं आती सबको, 
क्यों देख रहे चुप रह कर सब l

क्या लाज शर्म बेच खायी है, 
शत्रुओं के आगे गर्दन झुकाई है, 
कैसे शांति दूत है भारत वासी, 
आज फिर जवानो जान गवाई है ll
अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि 
कुसुम पंत उत्साही 
देहरादून

आज कलम उठाऊँ, या उठा लूँ मैं तलवार, 
दुश्मन को धराशायी कर दूँ, करूँ मैं ऐसा वार, 
खाल उधेड़ दूँ उन धुर्तों की, अभी तक नहीं आये जो बाज,
ज्वाला ऐसी फूट रही, बिछा दूँ दुश्मनों की मैं लाश |

हे माँ भारती! तुझसे करूँ आज मैं सवाल, 
क्यों तेरे बच्चों की जा रही एक-एक करके जान,
हे माँ धरती! कर दे प्रलय विनती है बारम्बार, 
नहीं सुनी जाती माँ मुझसे अब रुदन भरी चित्कार |

सुनों ! देश के नौजवानों शांति की भाषा छोड़ डालों,
बंदूक हाथों में लेकर एक-एक दुश्मन को भून डालो |
कुर्सी के भूखे ये नेता, इनको भी मैदान में उतारो,
सीने पर गोली का दर्द,जरा इनको भी समझा डालो |

अश्रुपूर्ण भावभीनी श्रद्धांजलि, मेरे देश के शेरों के नाम, 
धिक्कार है ऐसे, गीदड़ रूपी उन दुश्मनों के नाम,
नमन करती हूँ उन परिवारों को जिनके बेटे हुए बलिदान, 
शक्ति, साहस उनको देना प्रभु,झेल सके दुःख का प्रहार |

जय हिंद !
स्वरचित *संगीता कुकरेती*

आओ! अब संहार करें।
देश ने पुकारा है ,
पुकार रही, मेरी मां भारती!
आतंक के रख वालों का,
आज अब संहार करें,
होगा ना तिलक !
इनके लहू से जब तलक ,
ना दम भरे ।
भ्रमित झूठे इन धर्म के अंधों को,
इनकी बहत्तर हूरों का दीदार दे ।
और शहादत अब नहीं,
पीठ पर वार करने वाले कायरों को,
अब शिव तांडव का उपहार दें ।
आओ अब संहार करें ।
इंसानियत, मानवता ,वार्ताओं का ,
अब कोई गान नहीं !
हैवानियत दरिंदगी के आकाओं का,
अब समूल नाश करें।
याद में जले दीपकों से ,
वह सूरज भी शर्माता है ,
जब सैनिक भाई मेरे ध्रुव तारे बन जाते हैं।।

नीलम तोलानी
स्वरचित

शहीद/शहादत
*😢वीरों की शहादत😢*
टूटी बुढ़ापे की लाठी 
बिछड़ गए माँ के लाल
बच्चों से छिना पिता का साया
मिट गया सिंदूर,टूट गई चूड़ियाँं 
पथराई आँंखे लिए बैठा पिता
बिलखती माँ तस्वीर लगा सीने से
कहां गया मेरी आंँखों का नूर
एक झटके में उजड़ी दुनियांँ
सपने हो गए चकनाचूर
हँस-खेल कर निकले घर से
फिर आने का वादा करके
हँसते गाते तय करते मंज़िल
एक झटके में ख़त्म हुआ जीवन
वीरों की शहादत पर अब
धरती माँ चित्कार कर उठी
पहले उरी अब पुलवामा
अब तो कुछ शर्म करो
अब धीरज नहीं अब रण करो
कब तक चलेगा कत्लेआम
कब तक यूंँ शहीद होंगे जवान
अब आर-पार की लड़ाई करो
मानवता की हत्या कर गई
पाकिस्तान की नापाक हरकतें
आदिल अहमद, मसूद अजहर
जिनके साए में पलते यह अजगर
आतंक के उस माई-बाप को
इस दुनिया से ही खत्म करो
अब सांत्वना नहीं कर्म करो
दुश्मन का संहार करो
सर्वनाश करो सर्वनाश करो
***अनुराधा चौहान***© स्वरचित
देश के वीर सपूतों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि


😥अश्रुपूरित श्रद्धांजलि😥
माँ भारती का आँचल
आज 
फिर लहू से
लथपथ हुआ।

मानवता को ताख में रख
आतंकियों ने ऐसा 
घृणित कार्य किया।

व्यथित है मन,
दुःखों के कारण
मन में शून्यता का बोध हुआ

ऐ!आतंकियों,धिक्कार है तूझे
दिल नहीं तेरे सीने में
मानवता को भी शर्मसार किया
कैसे क्रूर यह काम किया

ना समझो हम चुप हैं रहने वाले
अब ये चिंगारी बनकर शोला
सीने पे तेरे गाज गिरेगा।
देश के हर कोने से
ऐसा आगाज हुआ।।
🇮🇳नमन वीर🇮🇳

स्वरचित पूर्णिमा साह पश्चिम बंगाल


मेरा मन बहा...

कब तक

शान्ति-अहिंसा का
राग आलापें
विस्फोटक
आतंकी हमले से
पुलवामा काँपे...!

भाईचारे की
बातें-मुलाकातें
व्यर्थ लगती है
देशवासियों के
हृदय में अब
आग सुलगती है...!

सीमा पार से
अरि लगा रहा
क्रूर अट्टहास
मातृभूमि को
अर्पित कर दी
शहीदों ने सांस...!

शेष समर में 
नापाक पाक को
सबक सिखाना है
एक के बदले
सौ शीशों को
मिट्टी में मिलाना है...!

रणबांकुरों !
हुंकार भरो 
देश तुम्हारे साथ है
लाल चुनरी ओढ़ा दो
माँ भारती की
लाज तुम्हारे हाथ है...!!

पुष्पा सिंघी , कटक

आज भारत माँ के बेटे,
माँ की गोद मे सो गए,
मातृ भूमि की रक्षा में,

कितने #शहीद हो गए,
कब तक कायरो के हमले में,
खून बहना चाहिए?
ईट से ईंट बजा दो उनकी,
अब दुश्मन दहलना चाहिए !
विकास रोककर साहब जी ,
एक काम जरूर कर दीजिए,
42 जवानो के बदले मे 
अब लाहौर जलना चाहिए !

आतंक के सौदागरों को,
चीर-फाड़ कर दीजिये,
ऐसे दहशतगर्दो के,
घर उजाड़ कर दीजिये!
56"का सीना अब तो,
बाहर निकलना चाहिए,
42 जवानों के बदले में,
लाहौर जलना चाहिए !

सबक सिखा दो कमीनो को,
भारत का खून खौल रहा,
बदला,बदला,सिर्फ बदला,
अब बच्चा-बच्चा बोल रहा !
बदला लेकर मेरे देश का,
सर ऊंचा करना चाहिए!
42 जवानों के बदले में,
अब लाहौर जलना चाहिए !

अभी नही तो कभी नही,
अब वक्त है जवाब देने का,
अब तक बहुत खोया हमने,
अब समय नही है खोने का,
दुश्मनो के सर कुचल दो,
निशाँ बाकी न रहना चाहिए,
42 जवानों के बदले में,
अब लाहौर जलना चाहिए!

**************************************
#जय_हिंद_जय_भारत
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
राजेन्द्र मेश्राम-नील
चांगोटोला, बालाघाट ( मध्यप्रदेश )
15/02/2019

आतंकी जड़ें
धर्म विशेष पोषे
मौत परोसे।।


ये आत्मघाती
पीते धर्म की घुट्टी
बनें आतंकी।।

नापाक पाक
कायराना प्रयास
है गिरगिट।।

लड़ना होगा
शांति स्थापन हेतु
एकजुट हो।।

टूटी चूड़ियां
खत्म बूढ़ों की आस
बेटा शहीद।।
भावुक

पुलवामा के 44 सी आर पी एफ को शत शत नमन।
सच्ची श्रध्दान्जली उनको देश के शत्रु का करना दमन।। 
अब कुछ करके दिखाना है।
शत्रु की हस्ती को मिटना है।।

जा का शत्रु बार बार पीटे, नहीं उसे जीने अधिकार ।
ऐसे शत्रु को जिन्दा छोड़े वा के जीने को है धिक्कार।।

भारत माता हम भारतवासी, बहुत ही शर्मिन्दा है।
बार बार वार करे तुम पर, फिर भी वह जिन्दा है।।

यह जीवन हमारा माँ केवल आपकी ही अमानत है।
शत्रु मूछों पर देवे ताव, जीने पर हमारे हीलानत है।।

यह करा वो करा हम शान से बड़ी फरमाये।
हाय मार डाला, शत्रु किंचित नही चिल्लाये।।

बहुत बजाया गाल अब नहीं गाल बजाना है।
लक्ष्य एक ही हमारा शत्रु को धूल चटाना है।।

छिप कर जो करता वार वह कायर होता है।
होता है जो कायर सामने लड़ने से डरता है।।

हमारे जवानों शत्रु ने को कायरता से मारा है। 
उस नापाकिस्तानको सबक सिखाना करारा है।।

चला लिये गाल बड़े,नहीं अब गाल चलाना है।
करनी नहीं बात कोई,हस्ती उसकी मिटाना है।।

खौल रहा रक्त हमारा,बदला भयंकर लेना है ।
हटे पीछे जो,चुल्लू भर पानी में डूब मरना है ।।

वन्दे मातरम् अब तो शत्रु को धूल चटाना है ।
काश्मीर नहीं पाक पर भी तिरंगा फहराना है ।।

जय हिन्द जय हिन्द जय जय हिन्द जय हिन्द।
भारत माता की जय भारत माता की जय माता की जय..........

डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव
“व्यथित हृदय मुरादाबादी”
स्वरचित

शहीदों के रक्त से लाल हुई हैं आज मातृभूमि 
किसका रक्त था कौन शहीद हुआ हैं 
ये मत पूछो ऐ देश वासियों 

शहीद होने वाला हर जवान भारत का लाल वो बेमिसाल हैं .

कश्मीर से दिल्ली तक गूँज रही ललकारों से 
नामों निशां मिटाना हैं धरा पर दुश्मन और गद्दारों से
अबकी बार सबक सिखाना हैं इनको
इनकी ही बातों और भाषा से .

फर्ज की खातिर मर मिटे वो देश के वीर जवान 
सरहद पर बिखरा पड़ा हैं जिनके लहू का हर कतरा 
सबके दामन पर जिंदगी और ख़ुशी देकर 
खुद तिरंगे में लिपटकर अपनों को तन्हा बना गये.

आज फिर लाल हुई शहीदों के खून से हिन्द की धरा 
उजड़ा किसी का सिंदूर किसी माँ की कोख हुई सूनी
किसी बहना ने राखी का हाथ खोया 
किसी मासूम से छीन गया पिता का साया .

आँखें हमारी आज नम हैं वीरों की शहादत पर 
मन में दुश्मन को सबक सिखाने की भावना प्रचंड हैं
लेना हैं बदला उन देश के दुश्मन गद्दारों से
चाहे हमें चलना पड़े राहों में क्यों ना अंगारों से .

हर भारतवासी की यही हैं पुकार 
दुश्मन को नहीं छोड़ेंगे अबकी बार 
मिटा देंगे उसकी हस्ती को 
आग लगा देंगे उसकी खूनी बस्ती को .

पुलवामा में शहीद हुये सभी मेरे वीर जवान भाईयों को नम आँखों से भावभीनी श्रदांजलि जय हिन्द.
स्वरचित:- रीता बिष्ट


भारत के #जवानों ,,,#वीर सैनिकों🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
देश वासी तुम्हें नमन करते है💔💔🇮🇳
कायरों को करारा जवाब दिया जाएगा,,,🦊🦊🦊🦊
सभी शहीदों के नाम समर्पित ,,,विह्वल हृदयोदगार,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
गीतिका"
~~~~~~
छंद "गंगोदक सवैया छंद 
चयनित छंद " गंगोदक "
212 212 212 212 ,212 212 212 212= मापनी
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
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देश को आज ऐसी जगन चाहिए,,,,,,,,ओ शहीदों! तुम्हारी लगन चाहिए /
आज छुपकर भरे भेढिए देश मे,खोज कर इन सभी को कफन चाहिए //
**
देख लो ये किधर को सपोले छिपे, ढूंढ कर तुम जरा ,मार ड़ालो इन्हें ,
दूध जो भी पिलाते रहे जान कर,, ,उन सभी को वतन से गमन चाहिए//
**
पाक नापाक है जानते हैं सभी,,,,,,,,अन्न खाते यहाँ,धर्म खोते सभी,
हद्द है आज ऐसी सुनी ना कभी,,,,,,,जो करें बदसलूकी,शमन चाहिए//
**
सैनिकों तुम सदा देश प्रहरी रहे,,,,,,है भरोसा तुम्हीं पर वतन का रहा,
जंग ऐसी लड़ो मान सम्मान की,,,,,,,आंच आए न ऐसी जतन चाहिए//
**
देखिये हर तरफ आग ही आग है,जल रही अस्मिता देश की हर जगह ,
हो रही गंदगी दुश्मनों से बहुत,,,,,अब हमें साफ सुथरा वतन चाहिए//
*************************************************
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿

ब्रह्माणी वीणा हिन्दी साहित्यकार



पुलवामा में हुए भीषण आतंकी हमले में 
शहीद जवानों को 😢😢💐💐💐श्रद्धांजलि

कलम मेरी आज....
मुझसे रूठ सी गई..
कब तक लिखूँ शहादतें..
कहकर फिर ताना मार गई..
हर उस लफ्ज पर...
रोती रही... सिसकती रही...
जो कहता कहानी जवानों की...
जो इतिहास बनने जा रही...
शहादत वीर जवानों की...
आतंकी मंजर देखकर..
सिहर उठी कलम मेरी..
रक्तरंजित शव देखकर..
लफ्ज लफ्ज थे अश्रुपूरित..
स्याही के धब्बे से बनते गए..
कागज भी आज मेरे... 
जवानों के खून से सनते गए..
तिरंगा भी झुक सा गया..
शहादत में जवानों की..
कहता रहा..रोता रहा..
कब तक बनूं कफन मैं..
आतंक की आगोश में..
कब तक होता रहूँ दफन मैं..
होश में आओ सत्ताधीशों..
कर दो संहार दुश्मनों का..
ले लो बदला जवानों का...
ले लो बदला जवानों का..

व्यथित मन से...
स्वरचित :- मुकेश राठौड़😢😢

याचना नहीं रण होगा 
संग्राम अब भीषण होगा ।

अब हमें निंदा नहीं चाहिए 
वह आतंक जिंदा नहीं चाहिए ।

भिगोकर खून में वर्दी कहानी दे गए 
मोहब्बत मुल्क की सच्ची निशानी दे गए ।

मनाते रह गए प्रेम दिवस यहां हम तुम 
तू तू मैं मैं करते रह गए सियासी नेता तुम ।

वहां कश्मीर में जवान जवानी दे गए 
उन शहीदों का शहादत का स्मरण होगा ।

याचना नहीं महा रण होगा 
संग्राम अब भीषण होगा ।

लाख बार सर झुकाऊंगा 
नमन उनकी शहादत में ।

श्रद्धांजलि जो शहीद हो गए 
हम सब की हिफाजत में ।

सजा देना होगा मरण होगा 
याचना नहीं अब रण होगा ।

संग्राम अब भीषण होगा
संग्राम कब भीषण होगा ।

स्वरचित एवं मौलिक 
मनोज शाह मानस 
सुदर्शन पार्क 
मोती नगर नई दिल्ली






वीर सपूत
शत-
शत नमन
मन व्यथित
🇮🇳
आतंकवाद
कब तक संहार
जड़ से मिटा
🇮🇳
बम का गोला
असली श्रद्धांजलि
आतंकी सीना
🇮🇳
ये खूनी खेल
कब तक चलेगी
कुछ तो कर
🇮🇳
माता आँचल
लहू से लथपथ
वीर सपूत
🇮🇳
है शहादत
कोख की तड़पन
अश्रु अर्पण
🇮🇳
दे श्रद्धांजलि
सीने में गोला दाग
आतंकवाद
🇮🇳
हा!"पुलवामा"
शहादत नमन
आतंकी काल

स्वरचित पूर्णिमा साह पश्चिम बंगाल


रोम रोम से उठती ज्वाला ,अति क्रोधित हैं भारत वासी , 
पुलवामा में हुआ जो हमला ,पीर नहीं यह हृदय समाती |
दुष्कृत्य है ये तो कायरता का , मिशाल नहीं इससे बड़ी ,
डरपोक नपुंसक ही करता , वार पीठ पर लेकर के छुरी |

हथियार हमारे हाथों में है , तलवार के हम तो हैं धनी,
मजा चखायेंगे हम उनको ,मन में जाग उठी है चाह यही|
श्रध्दाजंलि हम देगें उनको , हुई है कल जिनकी कुर्वानी ,
हाल करेंगे दुश्मन का वो ,कभी माँग सकेगा न वो पानी |

पुकार यही है सम्पूर्ण राष्ट की ,शहीदों को सम्मान मिले ,
छुपा हुआ है जो देश का भेदी ,उसको भी मृत्यु दंड़ मिले| 
आवाज दबा दें हम दुश्मन की ,सीना उसका चाक करें ,
चुन चुन कर हम मारें उनको , पूरा जल्दी से हिसाब करें |

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश ,


--शहीदों की शहादत को सलाम--

गीदड़ के बच्चों ने दिखाई
फिर से अपनी औछी औकात
पुलवामा में आंतकवादियों ने
किया हमला लगाकर घात

लातों के भूत हैं ये सब
नहीं मानते ये कोई बात
क्रूरता भरी निंदनीय घटना से
दे दी मौत को सौगात

कर लो तैयारी युद्ध की 
ईंट का जबाब पत्थर से देना
सेना को दे दो आजादी
छाती चढ़कर बदला लेना

हे देश के राजनेताओं 
क्यों बैठे हो चुप्पी साधे
क्या सोचते हो देखते हो
कहाँ गए अब वो वादे

मिट गया कितनों का सिंदूर
कितनों के लाल खो गए
उठ गया पिता का साया 
कितने चिरनिद्रा में सो गए

शांति की बातें छोड़ो अब
मत करो इन पर विश्वास
इन्ही के घर में घुस कर मारो
मत डालो अब इनको घास

देखकर ये कायर करतूत
जन-जन का खून खौल रहा
एक के बदले दस सिर चाहिए
बच्चा-बच्चा यह बोल रहा

शहीदों से तुम करना न्याय
जन-जन की सुनो आवाज
करो भरोसा सेना की ताकत पर
दे दो छुट्टी,मिटा देंगे आंतकवाद

शहीद हुए उन वीर जवानों को
बारम्बार मैं करता नमन
शहीदों की शहादत को सलाम
मुरझाया हुआ आज मेरा चमन

बलबीर सिंह वर्मा की कलम से...

 " शहीदों की रोती आत्मा" 

सर पर कफन बांध कर निकले घर से

मरने से डर कैसा मरने को निकले घर से
घरवालों को पत्थर कर दिल पर पत्थर रख निकले घर से
देश पर करने निज प्राण उत्सर्ग निकले घर से
एक एक सौ को मार मरेंगे यही सोच निकले घर से
एक एक टुकड़ा वापस लेंगे धरा का यही ठान निकले घर से
क्या पता गीदड़ यूं सीना चीर देंगे घुस के घर में
सोये शेरों का यूं कलेजा निकाल चल देंगे घर से
मरना तो था पर ना सोचा कभी यूं मरेंगे अपने घर में
बेखबरी में ही भेट चढ़ जायेंगे, धूर्त धोखे बाज गीदड़ो के, वो भी घर में।

कुसुम कोठारी।

आज हुआ फिर एक हमला
ितनी क्रूर विध्वंश घटना।

वीर शहीद जो हमारे रक्षक
बने आज आतंक के भक्षक।
कितनो ने परिवार गवाए 
कितनों ने अपनों को खोया।

हम बैठे आज़ाद घरों में
इन वीरों के खातिर।
अब नही चुप बैठेंगे हम
बदला लेंगें जम कर ठन कर..
जिसने ये कुकृत्य किया
उनको न छोड़ेंगे अब हम।

देश वासियों मिल कर जुट लो
बाकी सारे झगड़े छोड़ो,
सबसे ऊपर देश हमारा
जो हमको है जान से प्यारा।

धर्म कोई हो जाति कोई हो
मंदिर मस्जिद को भी छोड़ो।

देश की रक्षा सर्वोपरि है
वीरो की गति ऐसी न हो।
जान लगा कर हमे बचाते
सीनों पे गोली हैं खाते।

रानी झांसी, वीर सुभाष ,
भगत सिंह फिर बनना होगा
रौद्र रूप धर हम सबको 
आतंकवाद को खदेड़ना होगा।

वीरों की कीमत हम समझें
उनके दुःख दर्दो में हो ले।
आज करे ये वादा खुद से
श्रद्धा नमन करे वीरों को।


आज किसको दुख सुनाऊँ में
कैसे उनके गुण गाऊँ मैं
कैसे अपने अश्रु को रोक पाऊँ में
उन गद्दारों को कैसे माफ कर पाऊँ मे
जिन पाकिस्तानियों ने हमारे 
जवानों पर क्या प्रहार है 
उन माताओ का छीना उन्होंने लाल है
अब सही नही जाती उस माँ की 
रुदन भरी चीत्कार है 
उस पत्नी का था जो श्रृंगार 
बहन का था जो राखी का त्यौहार
पिता की आँखों का तारा
शहीद हो गया बहादुर बेटा प्यारा 
व्यथित हूँ मैं आज कब तक
यह तांडव चलेगा 
कोई नही झ्से रोक सकेगा 
शांति प्रस्ताव कब तक यूँ ही चलेगा
और हमारे कितने जवानो 
की ये जान लेगा 
अब तो उठा लो तुम तलवार
दुश्मनों का सीना फाड़ 
और नही है कोई उपचार 
अश्रुपूर्ण भावभीनी श्रद्धांजलि 
मेरे उन शहीद हुये जवानो के नाम 
जिनको करती हूँ मैं शत-शत प्रणाम
🙏🏻स्वरचित, हेमा जोशी🙏🏻
(1)
आतंक पास 
धर्म न मजहब 
धूर्त विचार 
(2)
सेना नमन !
तिरंगे का कफ़न 
भारत रत्न 
(3)
सपूत खोये 
तिरंगा ओढ़कर 
शहीद सोये 
(5)
सेना लाचार 
फ़र्ज़ राह शहीद 
तंत्र की हार 
(6)
कौन नामर्द? 
आतंकी और तंत्र 
क्षुब्ध है प्रश्न 
(7)
देश बेचते 
राजनीति महंगी 
शहीद सस्ते 
(8)
क्षति की अति 
सेना का अधिकार 
सख्त जवाब 

स्वरचित 
ऋतुराज दवे

बिखर गया तन टुकडो़ में , फिर नयी फसल उगाने को ।
दुर्दांत धोखे से शहीद हुए, उनकी नजरें झुकाने को ।।
लहू शितल बहता हैं जिनका उसको ही गरमाने को ।
आतंकवादियों क्या नहीं मिला चूल्लू भर पानी मर जाने को ।।
माँ की गोदी का लाल गया जीवन अंधियारे में।
भाई-बहन का प्यार गया वसंत के गलियारे में ।।
बच्चों की आशाएँ , बुढी़ आँखें देहरी निहार रही ।
घर सूना , जीवन सूना, पत्नी इंतजार कर रही ।।
मेंहदी गीली , पलके भिंगीं , नागिन नथ फुंफकार रही ।
साडी़ से सिंदूर मिटा पति -शोक चित्कार रही ।।
बेटा रोता, नहीं सोता , बेटी के आँसू न टूटते हैं।
विश्वास अभी नहीं होता क्या पिता कभी 
रूठते हैं ।।
देशभक्ति का जज्बा जो भी ले करके जाते हैं ।
सैनिक अधिकार भी न हो जान लूटा आते हैं।।
सचेत हो देश हमारे क्यों नाहक जान गँवाते हो ।
हर बार पागल पाकिस्तान से समझोता कर आते हो ।।
स्वरचित -चन्द्र प्रकाश शर्मा 
'निश्छल, '


Janardhan Bhardwaj आओ हम मिलकर पुलवामा के वीर शहीदो को श्रद्धांजलि देते है 
आओ हम मिलकर शहीदों के परिवारों का 
दुःख साँझा कर लेते है 
आओ हम मिलकर सभी देशभक्तों को 
साथ आने का न्योता देते है 
क्योंकि अब रोने का वक्त नहीं है 
बदला लेने का वक्त यही है 
आओ हम मिलकर शहीदों के लहू की 
इक इक बूँद का बदला लेते है
आओ हम मिलकर सभी दुश्मनों को 
खाख में मिलाकर रख देते है
और पुरे विश्व को हम यह बतला भी देते है 
की चुप रहने वाला यह मुल्क नहीं है 
हम सहने वाले अब जुल्म नहीं है 
आओ हम उनकी छाती को चीर कर 
तिरंगा फहरा वहां देते है 
आओ हम मिलकर अपने दुश्मनो को
जड़ से मिटा ही देते है 
आओ पुलवामा के शहीदों को एक बार फिर से 
सलामी देते है 
स्वरचित : जनार्धन भारद्वाज 
श्री गंगानगर (राजस्थान)


विधा- नज़्म
======================
मुल्क पर कु़र्बां हुए उनके इरादे क्या कहूँ ।
जुर्म के कट्टर विरोधी जिसको दिल में रख रहूँ ।
हम ऋणी एहसान के जिसको भुला सकते नहीं ।
दिल जगा है प्यार में उनके सुला सकते नहीं ।
हम हैं शाइर शौर्य उनका ज़िन्दगी भर गाएंगे ।
चाँद ओ सूरज है जबतक याद हम दुहराएंगे ।
जो पधारे मनुज बन इन्सानियत के दूत थे ।
स्वर्णाक्षरों में लिख गए भारत के सच्चे पूत थे।
वो मरे हैं देश पर उनके लिए मर जाएंगे ।
मेंट देंगे हम उन्हें जिनसे ये हरकत पाएंगे ।
हिन्द को है नाज़ उनपर थे धरोहर हिन्द की ।
देश पर वलिदान होकर ज़ीस्त शुहरतमंद की ।
इस लिए ऐ पाक! पढ़ ईमानदारी का सबक ।
होश मत खो याद रख परहेज़गारी का सबक ।
अब हिदायत है यही रुख़ बदनीयत का मोड़ दे ।
जो इरादा दिल में नापाक उसको छोड़ दे ।
जिससे हम कुछ बात सोचें जगभलाई के लिए ।
विश्व की जानिब कदम दे रहनुमाई के लिए ।
स्वरचित-राम सेवक दौनेरिया "अ़क्स"


ब से ख़बर सुनी पुलवामा की 
दूध माताओं का है शर्मिंदा ।
दुश्मन बच कर निकला है कैसे ,
सियार अभी तक हैं कैसे ज़िंदा ।

कायर ने छुप कर घात लगा ली ,
साहसी होते तो नहीं भागते ।
दुम दबा कर भागे कुत्ते गीदड़ ,
घायल वीरों को देख दहाड़ते ।

टक्कर ट्रक बारूदी से मारी ,
आसमान तक था गया ग़ुब्बार ।
वीरों की वहाँ लाशें बिखरीं ,
चीख़ उठे घर में माँ के उद्गार ।

बहन बेटियाँ आह्वान हैं करती ,
आक्रमण करिए ठान विध्वंस ।
केश खोल प्रलयंकारी जैसे ,
करो तांडव तुम वीभत्स नृशंस ।

क्षमा किया सौ बार दुश्मन को ,
अब उसके घर जाकर मारो ।
मुण्डियाँ मेघनादों की काटकर , 
भारत माता का क़र्ज़ उतारो ।

विष दन्त गाड़ वैरी के वक्ष में ,
पेट से आँतडियाँ लो तुम खींच ।
तप्त दंड आँखों में घोंप कर ,
लेलो प्राण बैरी का मुख भींच ।

समूल नाश हो रक्त बीजों का ,
नक़्शे से पाकिस्तान मिटाओ ।
बहत्तर वर्ष का बिगड़ा नक़्शा ,
भारत में अब पुन: मिलाओ ।
🙏🙏🙏🙏🌹🙏🙏🙏🙏

स्वरचित:-
ऊषा सेठी
सिरसा 125055 ( हरियाणा )

युद्ध !!
खौलते लहू का
मात्र उबाल नहीं, 
फड़कती भुजाओं का
मात्र प्रदर्शन नहीं, 
युद्ध नहीं है नर्तन,
ये है महा ताण्डव,
जिंदा मृत्यु का ।
शहादत
सरहद पर,
तिरंगे में लिपटे
शहीद जवान,
क्रोध से तिलमिलाती
सियासत और जनता, 
गर्व और गम के साये में 
आजीवन सिसकते
उनके परिवार ।
फिर भी.....
आते नहीं बाज,
पड़ोसी देश, 
आतंकवाद ।
पर करें न चिंता...!!
उनके विस्फोटक का
मूल्य अदा करेंगे, 
आगाज़ किया उन्होंने 
अंजाम हम ही देंगे ।
#जय_हिन्द#जय_भारत

-- नीता अग्रवाल
#स्वरचित


माटी के लाल,तूने माँ भारती संग प्रेम की गाथा रची
अपना सर्वस्व न्योछावर कर प्रेम की पराकाष्ठा लिखी
तुम्हारी विरासत सहेजने का वादा हम करते है
वीर सैनिकों की शहादत को हम नमन करते है।

हम सीमा पर नही डटे ,न खाई दुश्मन की गोली
बस इतनी ख्वाहिश है तुम हम संग खेलो होली
पर अंदर बाहर दुश्मन घात लगाए बैठा है
हमारी रक्षा हेतु तुम खा जाते सीने पर गोली।

शहादत का सेहरा बांध मृत्यु संग ब्याह रचाते हो
जन्मभूमि की रक्षा हेतु तुमअपने प्राण गवांते हो 
भारत माँ के बेटे बन इस दुनिया से जाते हो
तिरंगे मे लिपट शादी का जोड़ा पहन घर आते हो।

कर्म ऐसे कर तुम तो गर्व से इठलाते हो
शहादत सिर्फ तुम नही ,माता पिता भी देते हैं
पत्नी बच्चों की शहादत पर मन व्यथित होता है
आंखे नम कर इस शहादत को हम नमन करते है

खून खौलता है जब मौत पर राजनीति होती है
पुलवामा उरी जैसी घटनाओं की आवृत्ति होती है
कसम खाते है तुम्हारी शहादत व्यर्थ नहीं जाने देंगे
तुम्हारे लहू के कतरे कतरे का हिसाब लेके रहेंगे ।

स्वरचित
अनिता सुधीर


लो फिर ,छुरा घोंप दिया पीठ पर
सेंध लगा कर , किया फिर वार 
खौल गया हर देशवासी का खून
ऐसे कायर ,दुश्मन को धिक्कार 

मांगे उजाड़ी ,बच्चे किये अनाथ
छिप छिप कर भीरु वार है करता 
आमने सामने का युद्ध कर कायर 
बलिदान से ये रक्त भी नही डरता 

अपना सब सुख चैन भुला कर 
वो सजग ,सीमा पर करे निगरानी
उसके खून का कर्ज हम चुकाएंगे
व्यर्थ न जाएगी शहीद की कुर्बानी

अब पड़ोसी का वास्ता नहीं देना 
अब सुनना तुम ,गांडीव की टंकार 
हर आँसू का हिसाब देना पड़ेगा
हर हिदुस्तानी की यही ,ललकार

शब्दों ,छंदों से ,ये आग न बुझेगी
आँखों में ,सुलगते लाल अँगारे हैं
ये कलम भी अब तलवार बनेगी 
स्याही रक्त ,अक्षर ढोल नगाड़े हैं 

जय हिंद 
स्वरचित
संध्या बक्शी 
जयपुर ,राजस्थान।

विषय-हाइकु

1.

दें श्रद्धाजंलि
शहीदों की कुर्बानी
नमन करें

2.

देश की आन
पुलवामा में ढेर
प्यारे शहीद

3.

मुरझा गए
पुलवामा घाटी में
खिले प्रसून

4.

शहीद हुए
वीर जवां हमारे
देश के लिए

5.

दे गए ज़ान
बने देश की शान
वीर शहीद

6.

भीगे नयन
कोटि कोटि नमन
उदास मन
*******
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा


पुलवामा में शहीद वीरों 
विनम्र श्रद्धांजलि 
==============
(1)मातम छाया 
वीरों पे आतंक ने
कहर ढ़ाया
(2)आरती थाली 
लेकर खड़ी मैया 
बुझा दीपक
(3)उजड़ी मांग 
बिलख रही धरा
आए ना राम
(4)बहे ना नीर 
पथराए नयन 
बेटा शहीद 
(5)देश प्रेमियों 
पुलवामा शहीद 
दे श्रद्धांजलि 

===रचनाकार ===
मुकेश भद्रावले 
हरदा मध्यप्रदेश


पुलवामा में शहीद हुए , 
हर वीर को नमन करता हूँ ,
भारत की सरकार सुनो , 
मैं हाथ जोड़कर कहता हूँ ।
कायरता के पुतले पाक को , 
नक्शे से मिटा डालो ,
हर एक हिंदुस्तानी के , 
दिल की बात मैं कहता हूँ ।।

पीठ पीछे वार करके , 
औकात पाक ने बता डाली ,
भारत माँ की रक्षा खातिर , 
वीरों ने जान गवाँ डाली ।
बदला तो लेना ही होगा , 
सर्जिकल स्ट्राइक कर डालो ,
आंतक को जड़ से मिटा कर , 
पाक को कर दो खाली ।।

वीरांगना का सिंदूर मिटा है ,
माँ बापू की टूटी लाठी ,
उठा साया बेटे के सर से , 
बहना की रूठी राखी ।
भारत माँ की माटी का , 
कर्ज चुका कर वो चले गये ,
भारत माँ के वीर शहीदों को ,
इंसाफ दिलाना है बाकी ।।

दिन-रात सीमा पर सैनिक , 
देश के खातिर लड़ते है ,
चैन से सो सके हम सब , 
सैनिक रातभर जगते है ।
लेकिन जब-जब पाक , 
कायराना हरकत करता है ,
तब जाके भारत के सैनिक ,
मौत का तांडव करते है ।।

बहुत हो गया भाईचारा ,
अब औकात उन्हें दिखाते है ,
पाक को इस भारी गलती का , 
सबक आज सिखाते है ।
निकाल कर अपने हथियार , 
नया इतिहास बना डालो ,
दुश्मन को धूल चटा कर , 
कारगिल की याद दिलाते है ।।

सुनो सरकार करो तैयारी , 
"जसवंत" हाथजोड़ कहता है ,
पुलवामा में शहीद वीरों के ,
इंसाफ की मांग करता है ।
कायरता के पुतले पाक को ,
नक्शे से मिटा डालो ,
हर एक हिंदुस्तानी के ,
दिल की बात ये कहता है ।।

शत शत नमन ! 
जय हिन्द ! जय भारत !

जसवंत लाल खटीक
देवगढ़ , राजसमन्द , राजस्थान


 शहीद की माँ"
जल्दी वापिस घर आ जाओ,
याद बहुत ही आती है,
कहाँ गए हो लाल मेरे तुम,
माँ आवाज लगाती है,
मेरी ममता अब भी दर पर,
आस लगाए रहती है,
आएगा एक दिन तू वापिस,
पल -पल मुझसे कहती है,
दरवाजे पर होती दस्तक,
एक उम्मीद जगाती है,
तुझे ना पाकर लाल वहाँ पर,
आस फिर टूट जाती है,
कहाँ गए हो लाल मेरे....
जब भी रोटी चूल्हे पर ,
मैं तेरे लिए बनाती हूँ,
तेरी थाली रख पहले,
जल लोटा भर ले आती हूँ,
तेरी बीवी रो-रो कर फिर,
मेरा भ्रम मिटाती है,
आँसू पीकर सारे अपने,
माँ तेरी सो जाती है,
कहाँ गए हो लाल मेरे..
परमवीर तमगे को तेरे,
रोज सजाकर रखती हूँ,
खाली होते दाल के डिब्बे,
आँसू भरकर तकती हूँ,
रूई के फाहे को मक्खन,
बता बता भ्रमाती है,
बिट्टू की माँ रोज इस तरह,
रोटी उसे खिलाती है,
कहाँ गए हो लाल मेरे...
तेरी बीवी का माथा,
अब सूना-सूना रहता है,
उसकी चुप्पी से सन्नाटा,
घर में पसरा रहता है,
ना करती है श्रंगार कोई,
गीत ना कोई गाती है,
सबसे छुपकर तन्हाई में,
आँसू रोज बहाती है,
कहाँ गए हो लाल मेरे...
तेरे बेटे का मुखड़ा अब,
मुरझाया सा रहता है,
रोते-रोते आकर मुझसे,
रोज-रोज ये कहता है,
दादी कब आएँगें पापा,
उनकी याद सताती है,
उसकी भोली बातें सुनकर,
चुप्पी मुझपर छा जाती है,
कहाँ गए हो लाल मेरे...
मेरे वीर सपूत की जान,
लिपट तिरंगें में आई,
भारत माँ ने चुना तुझे,
मैं माँ शहीद की कहलाई,
आँखें नीर बहाती अब तक,
ममता मुझे रूलाती है,
रात-रात भर लोरी गाती,
गोदी तुझे बुलाती है,
कहाँ गए हो लाल मेरे तुम,
माँ आवाज लगाती है।
*****
स्वरचित-रेखा रविदत्त
15/2/19
शुक्रवार

देश के अमर शहीदों को समर्पित)

किस जयचंद ने फिर लिया जन्म
उसने कितना घटिया किया कर्म
ग़द्दारों को राज़ बताया
आत्मघाती हमला करवाया
वीरों के जिस्म का लहू बहाया
पुलवामा को लहूलुहान बनाया
सीमा के प्रहरी हो वीर जवान
धरती पुत्र हो तुम महान
जननी माँ के दूध का ध्यान
जन्मभूमि की रक्षा का भान
देश सेवा का सदा करते गुणगान
तेरी शहादत का करते सम्मान
तुमसे देश की आन बान और शान
तेरे लहू की बूँद बूँद पुकार रही
तेरी शहादत का बदला माँग रही
तूने तिरंगे का जो मान बढ़ाया
तेरे तन पर उसने ख़ुद को सजाया
ए शहीद! तेरी शहादत को नमन
इतिहास पन्ने करेंगे तेरा चयन
हृदय की वेदना को कैसे दे दूँ तिलांजलि
आँसू की स्याही से लेखनी दे रही श्रद्धांजलि ।

संतोष कुमारी’ संप्रीति’
स्वरचित

#विषय - शहीद/शहादत
#विधा - रोलाछन्द
======
कभी न होगी व्यर्थ, शहादत वीर दिया जो I
मारेंगे घर जाय , उन्हें अतिचार किया जो ll
नहीं समझते बात , अहिंसा प्यारी हमको l
अगर किया दम नाक,बुलाओ तुम खुद यमको ll

धन्य हुये वे वीर शहादत अपनी दे दी I
खूब निभाया फर्ज , अमर गाथा जो लिखदी ll
वतन करेगा याद , सदा अनमोल जनों को l
रखी मातृ भू शान , नमन जाँबाज धनों को ll

#स्वरचित
#सन्तोष_कुमार_प्रजापति_माधव
#कबरई_जि_महोबा_उ_प्र_


रो रहे हैं लोग सारे।
मातम छाया घर घर में।।
कौन किसको ढ़ाढ़स बंधाये।

डूबे हुए सब शहीदों के गम में।।

जिस माँ ने बेटा खोया।
सीना उसका फट गया।। 
सुहागन का सिंदूर गया।
खून माँग जो भर गया।।

बच्चों ने पिता को खोया।
बहन ने भाई को रोया। 
पिता राह निहारे बेटे की-
आज तिरंगा उस घर सोया। 

आँसूओं से भीग रहा है।
चूड़ियों से जूझ रहा है।
सिंदूर के रंग में रंग कर-
वजुद अपना ढूंढ रहा है।

तिरंगे तेरी तो ऊँचाई पर शान है।
हवाओं संग लहराना तेरी आन है। 
आज शहीदों संग जमीन पर लेट-
क्यूँ भारत का हो रहा अपमान है।

कब तक भारत धीरज धरेगा 
कब तक आतंकी मार सहेगा 
कब आतंकियों के छक्के छुड़ा 
जय हिंद जयजय भारत कहेगा

स्वरचित कुसुम त्रिवेदी

कबतक बहने दें शोणित कोआप हमेंबतलाऐं। 
कबतक इस पापी को छोडें आप हमेंजतलाऐं
नहीं रहा अब धैर्य खून खौल उठा है वीरों का,
क्योंखून पिलाऐंग द्धारों कोआप हमेंसमझाऐं।

कबतक आतंकी हमले हम सब रोज सहेंगे।
कबतक वीरजवान हमारे यहां पर रोज मरेंगे।
कैसे पालेआस्तीन में सांप आप हमें बतलाऐं
कबतक ऐसे गद्धारी इस भूमि पर रोज पलेंगे।

वीर सपूत भारत के अब हम नहीं मरने देंगे।
खुली छूट है इनको अब सब कुछ करने देंगे।
पत्थरबाज चैनुऐ अब पत्थर फेंकें मारे जाऐंगे,
मीरजाफर जयचंदों को यहां नहीं पलने देंगे।

वलिदान व्यर्थ नहीं जाऐ हमें ध्यान में रखना।
खूनीबदला खूनसे लेना नहीं फजीहत सहना।
श्रद्धासुमन अर्पित करते हम वीर शहादत को
आरपार की हो जाने दो यही सभी का कहना।

स्वरचितःःः स्वप्रमाणित
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.

विषय -शहीद /शहादत
मेरी प्रस्तुति सादर.... 
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ये वक्त नहीं है बातों का अब करके दिखलाना है |
नापाक हिमाकत की है जो उसे सबक सिखलाना है ||

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बहुत हुआ ये छद्म युद्ध अब आर-पार की जंग लड़ो |
जैसे को तैसा दिखला दो मत मानवता का पाठ पढ़ो ||
किया पीठ पर वार उसे अब छाती पे चढ़कर मारो |
सिंहनाद कर टूट पड़ो दुश्मन को अब तो संहारो ||
कायर ने कायरता की है वीरता हमें दिखलाना है |
नापाक हिमाकत की है जो उसे सबक सिखलाना है ||

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वो हृदय विदारक दृश्य अभी भी है आंखों में झूल रहा |
स्तब्ध हर एक भारतवासी खून सभी का खौल रहा ||
माँ की उजड़ी कोख और बहनों से भाई विदा हुए |
सिंदूर छिना कई मांगों का बच्चों से पापा जुदा हुए ||
घाव बहुत ही गहरे हैं मुश्किल जिनका भर पाना है |
नापाक हिमाकत की है जो उसे सबक सिखलाना है ||

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जो बने समर्थक हैं इनके उनको भी न बख्शा जाए |
हुर्रियत सरीखे संगठनों को भी जमींदोज किया जाए ||
वो खाते हैं इस देश का पर गुणगान पाक का करते हैं | 
हैं आस्तीन के सांप यही जो विष ही उगला करते हैं ||
इनको और इन जैसों को इनकी औकात बताना है |
नापाक हिमाकत की है जो उसे सबक सिखलाना है ||

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क्या सिर्फ सजावट के ही लिये हमने हथियार जुटाये हैं |
क्यों अब तक ये नापाक शत्रु मिट्टी में मिला न पाए हैं ||
वीरों की शहादत व्यर्थ न अब जाने पाए ये याद रखो |
कभी सँभल न पाए दुश्मन अब ऐसी बुनियाद रखो ||
फैल रहे आतंकवाद जो जड़ से हमें मिटाना है |
नापाक हिमाकत की है जो उसे सबक सिखलाना है ||

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शत शत वंदन उन वीरों को जो भारत पर कुर्बान हुए |
सच्चे सपूत माँ भारती के वो अनुपम गौरव गान हुए ||
हे!ईश प्रार्थना यही आपसे परिजन को संबल देना |
इस दुखद घड़ी से सँभल सकें सबको इतना बल देना ||
हर भारतवासी साथ आपके यह एहसास कराना है |
नापाक हिमाकत की है जो उसे सबक सिखलाना है ||

ये वक्त नहीं है बातों का अब करके दिखलाना है |
नापाक हिमाकत की है जो उसे सबक सिखलाना है ||

🌹 भारत माता की जय 🌹
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प्रमोद गोल्हानी सरस 
कहानी सिवनी म.प्र
#स्वरचित


अरे कायरों क्या तुमने माँ का दूध नहीं पीया
जानवर से बदतर होकर कायराना कृत्य किया

छुपकर करते वार सदा कैसी ये बहादुरी है
मुख से कहते राम पर रखते बगल में छूरी है

जिसने तुमको शह दिया वो भी संग हत्यारा है
गद्दार है वतन का वह जिसने तुम्हें स्वीकारा है

भूलना मत भूलकर भी
तुमने जिसे ललकारा है
आजाद सुभाष का देश 
भगतसिंह का प्यारा है

छेड़कर सिंहों को श्रृंगालो 
खुद खैर मनाना तुम
भारत के सपूतों करालों से
जान बनाना तुम

निर्दोष जवानों के लहू का 
अब तो हिसाब करना ही होगा 
कसम भारती पुत्रों को है
दो दो हाथ करना ही होगा 

नहीं किसी से बैर भाव 
छल प्रपंच अपनाते हैं 
कोई दुश्मन सामने आए 
तनिक नहीं घबराते है

बार बार जवानों की लहू धारा नहीं बहेंगे
बहुत सह चुके बर्बरता 
अब बिल्कुल नहीं सहेंगे

कब तलक शान्ति दूत बन 
अहिंसा का गीत गाएंगे
कर पकड़ तलवार काट
शीश शत्रुओं का लाएंगे

आह्वान है भारत पुत्रो
सिंहनाद करना होगा 
आतंकियों का शीश काट
माँ के पग धरना होगा

स्वरचित 
सुधा शर्मा 
राजिम छत्तीसगढ़ 

आक्रोश है,दर्द है, 
कायरता की हद है,
आतंक है मजहब, 
इंसानियत न धर्म है l

आतंक का नासूर, 
धूर्तता का चेहरा है, 
नापाक है ईरादे, 
ईमान तेरा बहरा है l

शहीदों की शहादत, 
खुदा की ईबादत है, 
फर्क है वार करने में, 
धोखा तेरी आदत है l

सामने आ ललकार, 
चुनौती को स्वीकार 
भाड़े टट्टू न आगे कर, 
पाक साहस हो तो युद्ध कर l

व्यथित 
ऋतुराज दवे

मन व्यथित बहुत है,ये कायरता जब आंतकी करते,
पुलवामा की सड़को में ,बहता रक्त शहीदों का देखे,
देशद्रोही जो पनाह देते है, इन गीदड़ों को कश्मीर में,

मानवता होती शर्मशार जब,इन गद्दारों की करतूतों से,
कायरता से प्रहार करते,वरना वीरों के समक्ष ना टिकतें,
अब रूकेंगी नही ये चिंगारी,तुमने जो पीठ पीछे छेड़ी है,
आहत है,आज हर हिन्दुस्तानी,नम आंखों में आक्रोश लियें,
बहुत हुआ मित्रता का ये धर्म,अब बदलें की ज्वाला फैलेगी,
आज तिरंगे का कफ़न ओढें,शहीदों की शहादत कीचिंगारी

माँ भारती की रक्षा के लिये अमर वीर जवानों को अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि 
🇮🇳💐💐💐💐 🇮🇳

🇮🇳 👏 शत-शत नमन वीर अमर शहीदों को 👏 🇮🇳
🇮🇳जय हिन्द, जय भारत । 🇮🇳
स्वरचित : सुनीता पँवार, देवभूमि उत्तराखण्ड
(१५/०२/२०१९)

हा ! निर्दयी, क्रूर आतंकी 
कांपी नहीं क्या तेरी छाती ।
फट नहीं गया कलेजा तेरा ,
क्या पाया तुने? 
कुछ जन्में कुछ अजन्मे 
कुलदीपकों से छीनकर उनका सबेरा 
लील नहीं गया तुझे? 
तेरे भीतर का कलुषित अंधेरा ।
हे वीर शेरों धार अपने नखों की 
दिखाने का वक्त आ गया ।
चीर चीर छाती ,
पी जाओ लहू कि 
काल भी चीत्कार उठे।
दहाड़ो फिर अबकी 
कि ब्रह्मांड तुम्हारी हुंकार से थर्रा उठे ।
काट काट कलेजा 
थूक दो चबाकर गंदे नालों मे 
भर लो जहर इतना दंतो में 
कि ना समाये विष बुझे भालो में ।
उठो वीर! कर दो निःशेष धरा 
दुश्मनों के प्राणों से ।
हे कालाग्नि हो प्रज्वलित ,
भस्म कर राख कर दे ।
शहीदों की चितायें बुझे 
उससे पहले दुश्मनों के 
खेमों में नरक की आग भर दे ।

(स्वरचित )सुलोचना सिंह
भिलाई (दुर्ग )

पुलवामा हमले के शहीदों को सादर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

लाल की शहादतें मलाल हो गयी ।
आज मेरी लेखनी भी लाल हो गयी ॥

थोथे बोल वालों की रीढ़ कहां है ।
राजनीति देश की सवाल हो गयी ॥

अब ना सुलझ पाएगी बातों से समस्या ।
आकृति आतंक की विकराल हो गयी ॥

सामने से लड़ने का सामर्थ्य नहीं है ।
इनकी सारी पीढ़ियां मराल हो गयी ॥

दीपक बुझे हैं अर्धशतक मेरे देश के ।
तीरगी में डूबी सब मसाल हो गयी ॥

बन क़फन तिरंगा भी आंसू बहा रहा ।
क्यों सफल ये दुश्मनों की चाल हो गयी ॥

अश्कों को थाम बोली पिता मेरे अमर हैं ।
शहीद की शहादतें मिसाल हो गयी ॥

स्वरचित एवं मौलिक रचना ।
©®🙏
-सुश्री अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू'
छिंदवाड़ा मप्र
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शब्दकोष
* मराल = दुष्ट





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"भाषा"19 जुलाई 2019

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