Monday, March 18

"चयन" 18मार्च 2019

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             ब्लॉग संख्या :-331

चयन करना एक कला है
जीवन चयन नित हम करते
कभी बुराई कभी अच्छाई
जैसा करते वैसा जग भरते
चयन मित्र का सहज नहीं है
चयन आत्मविश्वास दिलाता
चयन आध्यात्मिक सुख है
चयन रुलाता चयन हँसाता
कभी चयन शिक्षा का करते
सद्संस्कार जीवन चलता
बुराई चंहु ओर विस्फारित 
सद चयन हर विपदा हरता
चयन चैन है चयन बुराई
चयन सुख भरता जीवन मे
चयन पौध करें खेतों में
खुशहाली आती उपवन में
लोकतंत्र के महायज्ञ में
हम सबको आहुति देना है
आदर्शों का चयन करके
नयी सरकार निर्मित करना है
सुख संपदा हँसी खुशी
चयन सदा हिय से करना है
चयन विधा जीवन की सुन्दर
नव रंग ही जीवन भरना है।।
स्व0 रचित ,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।
************
जिन्दगी न मिलेगी दोबारा, 
ये मानता है संसार सारा,
जिन्दगी के इस सफर में, 
दो राहें कदम कदम पर मिलेंगीं, 
सोच समझ के चयन करना यारा,
क्योंकि जिन्दगी न मिलेगी दोबारा |

ये जीवन तो नसीबों से मिलता है,
चयन हमारे हाथों से खिलता है, 
ना और हाँ पर टिका है जमाना, 
कभी सच तो कभी लगेगा फसाना, 
चयन सच्चाई का करना यारा, 
क्योंकि जिन्दगी न मिलेगी दोबारा |

घमंड के पंख तुम मत फैलाना ,
जमीं पर पाँव जमाकर चलना, 
आत्मविश्वास का शरबत पीना, 
जीवन को खुशी से जीना, 
शब्दों का चयन हो करारा, 
क्योंकि जिन्दगी न मिलेगी दोबारा |

स्वरचित *संगीता कुकरेती*

विधा-मुक्तक
++++++++++++++++++++++
दोस्ती में तेरी चाहों का चयन करता हूँ मैं।
बे वफ़ा!तुझ पर पता हो रात व दिन मरता हूँ मैं ।
छोड़ दूँगा इस जहाँ के कार नौबत आयगी जब,
मेरे ख़ुदा !इस ज़िन्दगी के, दम तेरा भरता हूँ मैं ।।
++++++++++++++++++++++
ज़िन्दगी अनमोल है तुमको मनन करना पड़ेगा ।
कौन सा रिश्ता सँभालोगे चयन करना पड़ेगा ?
जो तुम्हारी चाहतें होंगीं क़दम उतने धरूँगा,
ख़ैर मुझको वासनाओं का हवन करना पड़ेगा ।।
++++++++++++++++++++++++++
"अ़क्स " दौनेरिया 
चयन प्रक्रिया
गुरुतर कार्य
ठोक बजा कर
करो चुनाव
सोचो समझो और विचारो
तब कहीं अपने पांव पसारो
नेता अगर चुनो तुम कोई
हो ऐसा जो
सुख दुख समझे
जनता का हित
करता जाय
विषय चुनो पढ़ने को ऐसा
जो मन को तृप्ति दे जाय
मित्र चुनो जीवन में ऐसा
दांया हमरा हाथ कहाय
विपत घड़ी में आगे आकर
सब संकट से हमें बचाए
संगी साथी वही चुनो
जो पथभृष्ट न करने पायें
गुरु वही उत्तम जीवन में
जो सन्मार्ग हमें दिखलाये
जीवन साथी वही चुने
दिल में अपने जो बस जाए
पलकों पर जो हमें सजाये
दामन खुशियों से भर दे
पूरा जीवन साथ निभाये
प्रेमी वही चुनो जीवन में
प्यार भरा हो जिसके मन में
चाहे कितनी कठिन परीक्षा
सब में खरा उतर जो पाये
चयन करो जिसका भी तुम
मन में भर विश्वास
सपने सारे होंगें पूरे
गर खुद पर विश्वास

सरिता गर्ग
स्व रचित
चिंतन मनन करो समुचित,
चयन करो जो पथ है उचित।
हो गए तुम यदि दिग्भ्रमित,
हो जाओगे सफलता से वंचित।

चयन लक्ष्य जो है अपेक्षित,
परिश्रम हो सदा वांछित।
श्रम से भागे जो किंचित,
फल न मिलेगा कभी इच्छित।

त्याग वासनाएं सदा अनुचित,
सत्पथ, सत्कर्म सदा ही उचित।
आकर्षण यौवन का किंचित,
कर देता है सदा पथ से भ्रमित।

चयन उचित जीवन हर्षित,
चयन सत्संगति जीवन गर्वित।
चयन प्राप्ति सदा मनोवांछित,
चयन सुधर्म जीवन पुष्पित।

अभिलाषा चौहान 
स्वरचित मौलिक

मुश्किल घड़ी 
पहचान हो रही 
चयन सही |

मित्र हमारे 
बने सदा सहारे 
चयन वारे |

आया दोराहा 
ये चयन हमारा 
कहाँ है रास्ता |

वस्त्र चयन 
सुशोभित आनन 
हो पहचान |

वधू चयन 
प्राथमिकता धन 
हुआ पतन |

खोज सत्य की 
उत्तम चयन की 
बात मति की |

जीवन साथी 
चयन हमराही 
हों दिया बाती |

चयन कैसा 
हो गया है अकेला 
रिश्ता झमेला |

करें नमन 
ईश्वर का चयन 
मिला जीवन |

ये अहंकार 
नफरत दुत्कार 
चयन प्यार |

पापी संसार 
चयन व्यवहार 
कैसा आचार |

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश

जनादेश का बिगुल बजा है ,
प्रत्याशी चुन लें सम्हल के ।

बहकावे से दूर रहें हम ,
खेल चलेंगे नित धन-बल के ।

सब का विकास , देश सुरक्षा 
को तत्पर ,वह सच्चा प्रतिनिधि --

मतदान करना है जरूरी ,
प्रथम कार्य है सुबह निकल के ।।

🏵🌲☀️🌻🌷🌴🌹

निर्वाचन का बिगुल बजा है ,
सब अपनी घुट्टी को पिलाते ।

तुष्टीकरण की चाल चल कर ,
दर-दर नेता गण दुम हिलाते ।

देश हित में कार्य जो करते , 
चुनेंगे हम तो सुयोग्य प्रतिनिधि--

वोट देना कर्तव्य अपना ,
जायेंगे मीत हाथ मिलाते ।।
चयन हमें ही करना है
फूल बनना है या शूल।
चुभन देनी है जग को,
या देनी है खुशबू भरपूर।।

प्यार से सिंचना है चमन,
या नफरत के बीज बोने हैं।
मुस्कानों के दीप जलाने,
या अश्कों के तम ढोंने हैं।।

जो बीत गया उसे याद कर
जीते जी मर जाना है।
या हौसलों के पंख लगा,
दूर गगन में जाना है।

कर्मवीर बनकर निरंतर,
आगे कदम बढ़ाना है।
या निठल्ले खाली बैठकर,
वक्त को यूं ही गंवाना है।।

तितलियों के ऱग चुराकर,
मुरझाए ख्वाब सजाने हैं,
या लोभ, क्रोध, घृणा के,
दलदल में फंस जाना है।

चयन हमें ही करना है,
धूप बनना है या छांव।
झुलसा देना है पथिक को,
या देनी है ठंडी ठांव।।
स्वरचित- निलम अग्रवाल, खड़कपुर

त्याग दे तू आलस में जीना,
संताप,विलाप तू छोड़ दे,
रख हौसला अपने दम पर,
आँधियों का रुख अब मोड़ दे !
अपनी मंजिल तक बढा कदम,
न समझ खुद को किसी से कम !
हासिल कर दुनियां को तू,
सारी बाधाओं को तोड़ दे !
त्याग दे तू आलस में जीना,
संताप,विलाप तू छोड़ दे .........

खुद चुन ले तू अपनी डगर,
चलता रह तू होकर निडर!
#चयन कर पथरीले राहो का,
आसान सफर को छोड़ दे !
त्याग दे तू आलस में जीना,
संताप,विलाप तू छोड़ दे..........

मुश्किल को आसान बना,
कर्तव्य गीत तू सबको सुना!
हरदम चलते रहना तू,
दुनियाँ को नव भोर दे!
त्याग दे तू आलस में जीना,
संताप,विलाप तू छोड़ दे….........

विस्तृत कर उड़ान को,
छू ऊंचे आसमान को!
धरती का "नील"अम्बर से,
हर एक हिस्सा जोड़ दे !
त्याग दे तू आलस में जीना,
संताप ,विलाप तू छोड़ दे .....

**************************************
रचनाकार:-राजेन्द्र मेश्राम "नील"
चांगोटोला, बालाघाट ( मध्यप्रदेश )

🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸
चयन की घड़ी है
दुविधा विकट खड़ी है
मन में जगी आस है
थोड़ी सी प्यास है
दोराहे पे खड़ी हूँ
माया से बंधी हूँ
जाऊँ इस पार
या उस पार
समझ से परे है।

चयन की घड़ी है
दुविधा विकट खड़ी है
किस डगर पे भँवर है
अनजान ये शहर है
ज्ञान ना मेरे पास है
दूरदर्शिता का अभाव है
सागर सा रहस्य है ।

चयन की घड़ी है
दूविधा विकट खड़ी है
प्रभु अब ना देर करो
नैय्या मेरी पार करो
दुविधा से उद्धार करो
सुपथ का चयन करो।।

स्वरचित पूर्णिमा साह पश्चिम बंगाल

चयन आपके शब्दों का...
है परिचायक आपके संस्कारों का...
चयन आपकी राहों का...
है परिचायक आपके सिद्धांतों का...
चयन आपके कर्मों का...
है परिचायक आपके आदर्शों का..
चयन आपके विचारों का...
है परिचायक आपके संतोष का..
चयन आपके आचरण का...
है परिचायक आपके धैर्य का...
चयन आपके सपनों का...
है परिचायक आपकी प्रतिबद्धता का...
चयन आपके संकल्प का...
है परिचायक आपकी सफलता का...

स्वरचित :- मुकेश राठौड़

सुन ये मन
तुझे है हक
तू स्वयं कर सकता
अपने जीवन की
प्रत्येक बात का
चयन ।
बस तुझे करना
होगा मनन
हो चाहे वो तेरे
जीवन का लक्ष्य
और हो उसको पाने का पथ ।

सुन अपने मन को
गुन तू अपने ही
मन को क्या
वो चाहे तुझसे
होगा जब चयन
तेरा ,करना ही
चाहेगा तू उसे
पूरा,रहेगा मन
हर्षित पायेगा तू
सफलता निश्चित
ही।

देखो भटक नजाना
निगाहों को लक्ष्य
से न हटाना
मिलेंगे तुझे साथी
बहुत से
भरेंगे दम होने का
हमसफ़र पूरा पूरा ।

तू करना चयन उसका जो तुझे
सहेजे ,अपने ख्वाबो में बसाये
देखे सपने तेरे,
तुझे ही अपना बनाये, तेरा होकर
रह जाये,तेरा ही
होकर रह जाये ।।।
अंजना सक्सेना

चयनित करने निकले जब हम
देख कर रह गया मैं दंग
कौन अपना कौन पराया
ये जग ने मुझे खूब भरमाया

तुम करो प्रभु मदद हमारी
मैं अज्ञ,अबोध अनाड़ी
चुन चुन कर भरो झोड़ी मेरी
सब हो निर्मल प्रभु तेरे जैसी

प्रभु ने सुनी मेरी गुहार
भर दी मेरी खुशियों का संसार
एक एक मोती है मेरे पास
सगे संबंधी मित्र घनेरे

सबने दी मुझे सुखद एहसास
नमन करूँ मैं प्रभु बारम्बार
मैंने सौंपी अपनी जिम्मेदारी
चयनकर्ता सिर्फ आप हमारी

समझा मैने यह सार भारी
जीवन है सिर्फ दिन चार
क्यों करें मगजमारी
चयन करो सिर्फ ईश को
जिसने बनाई ये सृष्टि सारी।
स्वरचित-आरती-श्रीवास्तव।

विधा -हाइकु

1.
वक्त पुकार
चयन रोजगार
हाथ की कला
2.
चयन नेता
बनाते सरकार
देश के लोग
3.
रंग चयन
हुनर निखारता
सुंदर मूर्ति
4.
आसान नहीं
दुविधा में चयन
सही रास्ते का
5.
शिक्षा में रुचि
विषय का चयन
प्राथमिकता
*******
स्वरचित
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)

हरियाणा

दर्द,-ए-दिल कुचल कर चल दिए,,,,,,,,
देखिए जनाब पैतरे बदल कर
चल दिये
कभी देख मुस्कराती थी आँखें
उनको
आज मुस्कराती आँखों में आँसू
देके चल दिये
चयन चाहतों का था तो दे दिया
दिल उन्हें
कहाँ ,कब दिल दुखाया इरादों
ने मेरे
चुप चाप दिल के कूँचे से सर झुका
के चल दिये
गुमान था इरादों पर बडा आफताब
है वो
आया मौसम होली का,रंग उडा के 
चल दिये
स्वरचित
नीलम शर्मा#नीलू

विधा=हाइकु 
=========
(1)सर्वे आधार 
टिकट का चयन 
करेगी पार्टी 

(2)कर चिंतन 
किसका हो चयन
धर्म अधर्म 

(3)कर चयन 
पूर्ण जिसकी उम्र
ले जाता यम

(4)जीवन साथी
पसंद का चयन
करते बच्चे 

(5)अच्छा या बुरा 
कर्म कर चयन
बुद्धि अपनी

(6)सेना चयन 
सम्पूर्ण हो विनाश 
आतंकवाद

(7)निष्पक्ष भाव
चयन प्रतिक्रिया 
देती न घाव

===रचनाकार ===
मुकेश भद्रावले 
हरदा मध्यप्रदेश 
देखो बात बात में बात बढ़ गयी , 
नहीं चयन सही था शब्दों का |

छुपा हुआ जानवर सामने आया ,
लेकर के सहारा लफ्जों का |

हमने सोच समझकर की न संगत , 
किया गलत चयन था मित्रो का |

विद्यार्थी चप्पल चटकाते घूम रहे हैं , 
नहीं चयन कर पाया सही शिक्षा का |

युवा रोज कोसते अपने आप को , 
नहीं चयन हो पाता व्यवसाय का |

भटक रही है यहाँ आज जिदंगी ,
नहीं चयन लक्ष्य कोई जीवन का |

मनमर्जी का जीवन है सबका , 
नहीं चयन हो सका दिनचर्या का |

घर समाज न देश की परवाह करना , 
हो न सका चयन अपने कर्तव्यों का |

भोग विलास को जीवन समझा ,
नहीं चयन हो जीवन के यथार्थो का |

तब जीवन सही दिशा पकड़ता है ,
चयन अगर हो जाये सही कर्मों का |

दोनों ही लोक सुधर जाते हैं ,
हम को साथ मिले सत्कर्मो का |

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश 

विषय-चयन

चलते-चलते रुक मत जाना
मंज़िल को अगर पाना है
चयन करना सदा मार्ग सत्य का
राह में कहीं भटक नहीं जाना

किया दृढ़संकल्प तो बढ़ो तुम
कठिनाइयों से नहीं डरो तुम
दुःख का अँंधेरा भी हट जाएगा
सच्चाई की राह पर चलो तुम

माना राह में बिछे कांँटे हजार
पर लगेगी नैया भवसागर पार
हौसलों को अभी बुलंदियाँ छूना है
क्यों डरकर तुम मानतेे हार

सत्य का मार्ग जो चयन किया
उसपर आगे बढ़ते जाओ तुम
सुख की सुहानी भोर भी होगी
अपनी मंज़िल को भी पाओगे तुम
***अनुराधा चौहान***©®स्वरचित

"चयन"
पिरामिड
1)
हो
श्रेष्ठ
चयन
देशहित
प्रगति रथ
सत्यता सुपथ
कल्याणकारी चित्त।।

2)
हो
शांत
सरल
कर्मशील
विनीत भाव
छिड़क दुर्भाव
वांछनीय चयन।।

वीणा शर्मा वशिष्ठ
स्वरचित मौलिक

युद्ध बना अंग जीवन का
मन में निरंतर चलता है
वैचारिक उहापोह में मन
निज आदर्शों को छलता है
हे कृष्ण कठिन क्यूँ सत्य-डगर
क्या यह विधि की विफलता है?
क्रूर कंस के अट्टहास से 
जन-गण-मन दहलता है
विध्वंसक विस्फोटों में ही क्यों
सत्ता का सुख पलता है
है अनगिन धृतराष्ट्र भरे भुवन में
अभी मरी कहाँ है गांधारी 
खुली आँखों से देख न पाते
चहुँ मोह विकट है महामारी 
पार्थ यथार्थ को देख न पाता
कबतक सुनोगे गीता सार
युग,बरस कितने बीत गए
समझे न दुर्योधन का व्यापार
पग-पग पर शकुनि बैठा है
चतुर चौपड़ का जाल बिछाये
फँसे जो पाँसे के झाँसे में
वो अपना सर्वस्व लूटा आये
ऊहापोह से निकल पथिक
सन्मार्ग वरण करना होगा
कबतक छलोगे आंखें मींचे
कभी तो उन्नयन करना होगा
पन्नों में भड़े पड़े राज का
अब अध्ययन करना होगा
किसके माथा सजे मुकुट
विवेकपूर्ण चयन करना होगा
-©नवल किशोर सिंह
स्वरचित

स्वस्थ चयन
बना गधे की सींग 
गायब नींद।।


चयन शुरू
प्रतियोगी सुर्खरू
जियूँ या मरूँ।।

ये आरक्षण
चयन में बाधक
बुझी प्रतिभा ।।

मार्ग चयन
जगन्नाथ मिलेंगे
करें प्रयास।।

आज चयन
प्रतिभा विपरीत
है यही रीति।।

भावुक

विषय चयन 
कल्लू लाल 
दो बीवियों के चयन कर, 
फंस गए कल्लू लाल
एक ने उसको बेलन मारा, 
दूजी पकड़ रही थी बाल l

पहली बोली मुझको लादे, 
सुंदर सा... परिधान... 
दूजी वहां से चिल्लाये रही, 
लादे.. बालम साड़ी लाल ll

सिर पकड़ कर साजन बोले, 
क्यों करती यूँ बवाल 
तन्खा मेरी चूजे जैसी, 
काहे करे रोज सवाल l

माफ़ करो.. क्या दिन था वो, 
मति फिर गयी थी मेरी, 
अब क्या होगा जो करे तू मलाल 
अब मै तो हो गया हूँ हलाल, 
सुनलो सब कान खोल कर न करना ये काम, 
दो बीवियों के चयन मे ना बनना कल्लू लाल l
कुसुम पंत उत्साही 
स्वरचित 
देहरादून

आज चुनाव की वेला आई ।
नेता करें हम सबकी अगुवाई।
अच्छे नायक चयन करें सब,
होगा तभी ये जीवन सुखदाई।

पतन हुआ नैतिक मूल्यों का
कहें किसे हम अच्छा नेता ।
चयन करें कहीं भले मानव के,
मिल जाऐ कोई सच्चा नेता।

सज्जनता का चयन करें हम।
सच मानवीयता वरण करें हम।
सुखद वातावरण हो दुनिया में,
रखें सहिष्नुता सहन करें हम।

स्वरचितः ः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.

महत्व बहुत है
जिंदगी में 
चयन का
सही हो तो
जीवन सफल

होता है 
पहला चयन 
सही दोस्तों का
संगत हो अच्छी 
तो जीवन की
राह होगी सदमार्ग

जीवनसाथी का 
जब हो चयन उचित 
रहेगा दाम्पत्य जीवन 
सदा सुखी

स्वविवेक से 
काम लो हमेशा 
चयन गलत 
न होगा 
कभी जिन्दगी में 

स्वलिखित 

लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

जीवन के सफर में कई पड़ाव आये 
समझ नहीं आये हमें किस तरफ जायें
फूल बने हम या कांटें

ये हर मोड़ पर चयन हमें करना हैं .

फूल बनकर सुरभि बनकर खिलना हैं 
या अश्रुधारा में मिट जाना हैं 
तितली बनकर सपने सजाने हैं 
या मोह माया लालच में खो जाना हैं .

धूप बनना हैं या छाँव
देनी हैं सबको ठंडी छांव 
ये चयन हमें करना 
हर पल एक नये रंग ढलना हैं .
स्वरचित:- रीता बिष्ट

यह अयन, न अधिक शयन
खुले नयन 
हमारा चयन! 
एक राह 
एक बाँह 
मिलेगी थाह! 
हमारा चयन! 
जीवन-चलना 
संकटों से लड़ना , 
पीछे न हटना ! 
हमारा चयन! 
भाग्य का भरोसा, निराशा नहीं आशा ! 
जीत की अभिलाषा ! 
हमारा चयन! 
जिओ जीने दो
भूले तो याद करो ! 
फिर जीवन सार्थक़ ! 
हमारा चयन! 
अकेले चल 
हर ऊँचाई पर बढ़ ! 
चढ जाएँगा कल! 
हमारा चयन! 
स्वरचित -चन्द्र प्रकाश
शर्मा 
'निश्छल ',

करो सार्थक अपने चयन को,
आगे बढो गंभीर समर को।
दुश्मन को धूल चटाओ रन में
करें नमन सब तुम्हारे पौरुष को।

मिलेगा यश तुम्हें रण भूमि में,
करेंगे सभी नमन कर्म भूमि पे।
रुकना नहीं झुकना नहीं आगे बढ,
पहचान बनाना अपने बल पे।
(अशोक राय वत्स) स्वरचित
जयपुर

दर्द ये कैसा , आज मन व्यथित क्यों है ?
क्या हुआ तुझको , प्रकृति बोझिल सी क्यों है ?

क्या उभर आई , कोई पीड़ा पुरानी ।
मौन क्यों है पगले ! खोल तू अपनी वाणी ।।

हो व्यथा अवरुद्ध , वाणी कम बोलती है ।
वेदना के तार , अश्रु जलधार खोलती हैं ।।

कर्म पथ तेरा , “चयन” तुझको करना ।
है संसार का सार , यही पर जीना मरना ।।

"मीना भारद्वाज"

चस्का 
चयन 

फिल्मी ढंग 
आधुनिकता
हास्यास्पद बना 
भारतीय संस्कृति |

वो 
दिल 
दिलेरी 
देश प्रेम 
अपनापन 
प्रेरक चयन 
भारतीय सैनिक |

थी 
कभी
मर्यादा 
परिवार 
अपना घर 
प्रथम चयन 
प्रामाणिक संस्कृति |

स्वरचित , मीना शर्मा, मध्यप्रदेश

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