Thursday, March 28

'''युवा " 27मार्च 2019

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27/3/2019
"युवा"
पिरामिड
1)
ये
पीढ़ी
विहान
ऊर्जावान
देश की जान
भविष्य की नींव
युवा शक्ति महान।।

2)
न 
रार
क्यों हार
शक्तिपूर्ण
दैदीप्यमान
हौसले बुलंद
युवा देश की शान।।

3)
ये
युवा
अद्भुत
संयमित
चैतन्य युक्त
समाज की छड़ी
वर्तमान की घड़ी।।

वीणा शर्मा वशिष्ठ।
स्वरचित मौलिक

कब जागेगा देश हमारा
युवा रो रहा है बेचारा ।।

डिग्रियों की लिस्ट बना
सड़क पे फिरे मारा मारा ।।

हताशा निराशा पसरी है
घर का बोझ उठा बाप हारा ।।

पैसे जो थे खर्च किये सब 
अब कर्जा हुआ बहुत सारा ।।

युवा की आँख में आँसू 'शिवम'
गर्दिश में देश का भाग्यसितारा ।।

युवाशक्ति सदुपयोग न होना
देश की अवनति का है द्वारा ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 27/03/2019

उठो जागो है नवयुवकों
माँ भारती तुम्हे बुलाती
तेरे साहस और विक्रम से
भारत माता धन्य कहाती
शंखनाद का अलख जगाओ
भीम हनुमत की शक्ति तुम
स्व नख से रद सिंह गिनलो
स्वाभिमान नित गर्व करें हम
तुम रक्षक भारत सीमा के
तुम हो वीर धीर सिपाही
सीमा ऊपर डटे हुये नित
तुम निडर मेरे प्रिय भाई
तुम लाओ सागर से मोती
तुम गिरी चीर सड़क बनाओ
प्रक्षेपास्त्र से गगन भेद दो
सबको सुख की नींद सुलाओ
भगतसिंह सुखराम राजगुरु
बैठ स्वर्ग लख रहे जवानी
कँही व्यर्थ तो न जावेगी
जो दी थी हँस कर कुर्बानी
राणा सांगा शिवा भरतों का
नहीं कोई इतिहास में सानी
यह भारत की पुण्य धरा है
युवा शक्ति जग जानी मानी
युवावाहिनी उठना होगा
शौर्य पराक्रम परिचय दो
सकारात्मकता हो हिय में
प्रिय भावों के मोती भरदो।।
स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

हाइकु 
1
जाग जा युवा 
घटिया राजनीति 
चुनाव जुआ 
2
आज का युवा 
फैशन सरताज 
नशे का हुआ 
3
खो गया युवा 
पाश्चात्य है संस्कृति 
संस्कार भूला 
4
हुक्का के बार 
युवा हुए बेकार 
गुम संस्कार 
5
नशे में युवा 
रोये हैं माता पिता 
कौन सहारा 
6
समयाभाव 
माता पिता बताते 
युवा भागते 
कुसुम पंत "उत्साही "
स्वरचित 
देहरादून

विषय-युवाविधा-छंद मुक्त कविता
🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁
🌹🌺युवा🌺🌹

लेकर फौलाद दिल मे आज जागा देश 
का युवा है
देख रही है दुनिया जिसको आज सम्मान 
सेबडे बहादुर वीरों का देश बना 
अब समूचा है
आन न इसकी जाने पाये युवाओं
को ही सम्भालना
देश पर जो मर मिट जाऐ अपने
ऐसा देश है ढालना
देश मिट्टी बनी चंदन है माथे इसे
लगा लेना
जिम्मेदारी अब है तेरी तू ही माँ
बहनों का गहना
आन,बान और शान है देश का युवा
ही महान है
कर जाये जान भी हाजिर ऐसे बलिदानो
की शान है
गढता रहता देश का युवा नित नये 
आयाम है
देश तरक्की करे हमारा यही इसका
पैगाम है

स्वरचित
नीलम शर्मा # नीलू

विषय - युवा

युवा युवती
मिलन समारोह
विवाह रस्म

देश के युवा
कटिबद्ध सैनिक
चर्या दैनिक

सेना जवान
सैनिक अभियान
सोया जहान

युवा इंसान
स्वप्निल आसमान
ऊँची उड़ान

सरिता गर्ग 
स्व रचित
हे दीनदयाल दया करना।
जोश युवाओं में भरना।
श्री गणेश तुम बुद्धि दाता,
ज्ञानबृद्धि मनशुद्धि करना।

प्रभु नहीं कभी बदहाल रहे।
ये युवाशक्ति खुशहाल रहे।
करें सदा जग में उजियारा,
यहां नहीं कोई फटेहाल रहे।

जोश रखें पर होश न खोऐं।
होश रखें ये मदहोश न होऐं।
भारतभू का सम्मान बढाऐं,
कभी युवजन बेहोश न होऐं।

बलवान बनें सभी युवाजन,
गौरवशाली भारतमाता हो।
धीरवीर गंभीर बनें सभी तो
पुलकित अपनी हर माता हो।

स्वरचितः ः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
कविता:-
वर्तमान है युवा पीढ़ी 
देश की भावी निर्माता 
उसके ही कंधों.परचढ़ 
देश कोई आगे बढ़ पाता 
सपनोंको पूरा करती है 
अपनों को सम्बल देती 
विन युवा के देश कोई 
कभी नही बढ़ पाता है 
नई उमंगें जोश नयाहै 
नई तरंगे हुई तरंगित हैं
विकास के स्वप्न संजोती
मंजिल पर दृढ़ संकल्पित ः
नवसृजन सदा वह लाते ।
उनको हरा सके न कोई 
शक्ति ओज का भरते हैं
उनके विना देशनही चलता
न घर समाज परिवार चले।
स्वरचित :-उषासक्सेना
युवा

कर्णधार हैं 
देश के युवा
बदल सकते है
रूख हवा का युवा

समाज की
ताकत है 
ये युवा
वक्त के प्रहरी 
ये युवा

लूटा देते है जान
भारत की
रक्षा के लिए 
ये युवा
हर मोर्चे पर 
डेट रहते हैं 
ये युवा

हैं 
शान और मान
हर घर की
ये युवा
छूते हैं 
ऊँचाइयाँ
आसमां की
ये युवा

है गर्व
हर भारतवासी
तुम पर 
युवा
लाज रखना 
भारत माँ की
तुम युवा

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल
विषय :/।युवा।
विधा:-वर्ण पिरामिड
ए 
युवा 
देश का
भविष्य है ।
उसके कंधे
मजबूत यहां
भारी बोझ को ढोते 
स्वरचित :-उषासक्सेना
(2)
ए 
कैसा
देश है
जहां पर 
युवा बेकार
बेरोजगार हो
पथभ्रष्ट भटके ।
स्वरचित :-उषासक्सेना
शीर्षक: "युवा "
युवा हैं कल के भारत के कर्णधार,
भारत- माता का हैं उज्ज्वल भाल।
घोर-परिश्रम करने को है तैयार।
युवा माँ-भारती का गौरव विशाल।।
***************************
इनमें शक्ति असीमित समाई।
शौर्य और बुद्धि की कमी ना भाई।
जरूरत है बस सही मार्ग-दर्शन की,
सहज-सुलभ उचित संसाधन की।।
***************************
विश्व का महान लोकतंत्र है भारत।
पर राजनीति का यहाँ होता दोहन।
सब नेता ख़ुद को बनाने में मस्त है।
सारे युवा देश में परेशान व त्रस्त हैं।
***************************
उचित अवसरों का अभाव है।
ज्यादातर युवा बेरोजगार हैं।
हर ओर लूट और भ्रष्टाचार है।
राजनीति यहाँ पड़ी निढाल है।
************************
आओ! सब मिल बनाएं देश नया।
जहाँ सत्य-अहिंसा का हो लोकतंत्र।
झूठ,फरेब,लूट-मार का कर दें अंत।
सम्पन्नता से भारत हो सच में स्वतंत्र।।

है अपरिमित जोश फिर भी 
क्यों विकल है आज युवा,
प्रगति के स्वर्णिम सुपथ पर 
क्यों शिथिल है आज युवा।
है खुला आकाश उसके 
स्वप्न की ऊंचाइयों का,
फिर गगन को चूमने में 
है विफल क्यों आज युवा।

क्या कहीं उसकी वितृष्णा 
लक्ष्य धूमिल कर रही है,
संस्कारों की उपेक्षा 
क्षीण मन को कर रही है। 
देश का उत्थान उसके 
उच्च लक्ष्यों पर टिका है,
फिर समय की माँग से क्यों 
बेखबर क्यों आज युवा । 

क्यो नहीं जग की विषमताएं 
उसे झकझोरती हैं ,
क्यों नहीं नारी समस्याएं 
हदय में खौलती हैं,
क्यों नहीं भोले शिशु की 
वेदना उसको अखरती ,
कठिन जीवन की चुनौती 
से विलग क्यों आज युवा।

आज तन्द्रा छोड़ उसको 
स्वयं से लड़ना पड़ेगा,
देश के निर्माण - हित 
संघर्ष करना ही पड़ेगा।
तब कहीं इस देश में फिर
तेजमय सूरज उगेगा, 
और फिर स्वर्णिम सवेरा 
ला सकेगा आज युवा।

स्वरचित 
डॉ ललिता सेंगर
ऐ मेरे भारत के युवा, 
जिन्दगी नहीं है जुअा,
समझदार तुम बन जाओ, 
अपने कर्तव्यों को निभाओ |

फैशन और दिखावे में हो चूर, 
संस्कार भी तुमसे हो गये दूर,
भारतीय संस्कृति को पहचानो, 
माटी की कीमत को जानो |

देश को गौरवान्वित करो, 
देश के लिए जीयो और मरो,
प्यार की भावना रखो अपार, 
इस कलयुग के तुम ही कर्णधार |

स्वरचित *संगीता कुकरेती*

अभी इश्क के इम्तिहां और भी हैं।
एक तुम ही नहीं जवां और भी हैं।


जिससे मैं मिला वो रोता ही मिला। 
तुम ही तन्हा नहीं परेशां और भी हैं। 

मुश्किलों से हौसला बडी चीज है। 
न डर ए दिल किश्तियां और भी हैं।

अब क्यों आईने से डरने लगे तुम। 
दूर हो जायेंगे जो गुमां और भी हैं। 

कर आजमाइश हवा के पैतरों की। 
सितारों के आगे जहां और भी हैं।

तरक्की की कोई हद हो तो बता दो।
तय करने अभी आसमां और भी हैं।

रुका तेरे दर पर तो तेरी ही खातिर। 
वरना इस शहर में मकां और भी हैं। 

विपिन सोहल

शीर्षक-युवा (नौजवान ) 

वीर देश के गौरव हो तुम
माटी की शान तुम
भूमि का अभिमान तुम
देश की आन तुम
राह के वितान तुम। 

ओ नौजवान बढ़ो चलो
धीर तुम गम्भीर तुम। 

राहें विकट,हौसले बुलंद रख
चीर दे सागर का सीना
पांव आसमां पे रख
आंधी तुम तूफान तुम
राष्ट्र की पतवार तुम। 

ओ नौजवान बढ़ो चलो 
धीर तुम गम्भीर तुम। 

भाल को उन्नत रख
हाथ में कमान रख
बन के आत्माभिमानी
शीश झुका के पर्वतों के
राह पर कदम रख। 

ओ नौजवान बढ़ो चलो
धीर तुम गम्भीर तुम। 

दुर्जनों को रौंद दे
निर्बलों की ढाल तुम
नेकियाँ हाथों में रख
मान तुम गुमान तुम
सागर के साहिल तुम। 

ओ नौजवान बढ़ो चलो
धीर तुम गम्भीर तुम। 

तूं महान कर्मकर
अर्जुन तुम कृष्ण तुम
राह दिखा दिग्भ्रमित को
गीता के संदेश तुम
अबलाओं के त्राण तुम। 

ओ नौजवान बढ़ो चलो
धीर तुम गम्भीर तुम।

स्वरचित 

कुसुम कोठारी ।

स्वामी विवेकानंद की युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के युवा वर्ग से अपील ....(कल्पना)
***
मैं .......विवेकानंद बोल रहा हूँ

मैं बदलता भारत देख रहा हूँ
मैं युवा भारत की आहट सुन रहा हूँ
मैं ये सोच आनंदित हो रहा हूँ ( तुम) 
लक्ष्य निर्धारित कर ,कर्म पथ पर चले 
मिले मार्ग मे शूल ,निडर बढ़ते चले
सर्वस्व न्योछावर करने को तत्पर खड़े
सपनोँ को पूरा करने की ऊँची उड़ान भरे।

मुझे तुम पर है पूरा विश्वास ,मगर
मैं कभी ये देख कांप जाता हूँ
जब तुम्हें नशे की गिरफ्त में पाता हूँ
नारी का अपमान सहन न कर पाता हूँ
भ्रष्टाचार में लिप्त तुम्हे देख नही पाता हूँ
अपशब्द देश के लिये सुन नही पाता हूँ
हिंदी की अवस्था पर घबरा जाता हूँ।

मैं युवा भारत से आह्वान करता हूँ 
सांस्कृतिक विरासत को सहेज आगे बढ़ो
चरित्र निर्माण,पौरुष में सतत लगे रहो
तुम्हारे नाम पर दिवस का नाम हो
सत्कर्म करो ऐसे, जग मे अमर रहो
मैं ........विवेकानंद बोल रहा ......

स्वरचित
अनिता सुधीर श्रीवास्तव
हे युवाओं...
तुम हो भविष्य राष्ट्र का..
हो सुखद स्वप्न राष्ट्र का..
करो कुछ ऐसा जग मे..
हो अमर नाम राष्ट्र का...
वो भी युवा थे..
जिसने दर्शन कराए धर्म के...
विश्व पटल पर किए कर्म से..
वो भी युवा थे..
हंसते हंसते जिन्होंने मौत चुनी...
कर दी चूनर माँ भारती की धानी...
खिलौने खेलने की उमर में...
जिन्होंने बंदूकें तानी दुश्मन पर...
कमसीन उमर में कोढ़े सहे तन पर...
हम आप भी तो युवा है...
फिर क्यों दिग्भ्रमित है...
क्यों घिरे है अकर्मण्यता से..
क्यों नहीं संकल्पित है...
आओ राष्ट्र हित के काम करें..
जग में नाम सुनाम करें..
है युवा आज उलझा हुआ...
नशे और विलासिता में रमा हुआ...
उठो जागो संकल्प करो...
उड़ान उन्मुक्त गगन में भरो...
फैले संशय अकर्मण्यता के...
हौसलों से परास्त करो..
प्रगति के नव सोपान गढ़ो...
जग में नव किर्तिमान गढ़ो..

स्वरचित :- मुकेश राठौड़

तन ढ़ल जाए भले ही
मन में चंचलता भरे रहो, 
रुको नही, थको नही, 
तुम युवा बन चलते रहो। 
बदल दो तस्वीर
करके बुलंद अपनी आवाज
जिससे गौरवान्वित हो हिंदुस्तान
लहराओ फतह का तिरंगा
जमी हो या आसमान। 
मन से हार गये तो
तन नही देगा साथ
बनाने जग में पहचान अपनी
बढ़ाओ एकता का हाथ, 
न लड़खडाए, न झुके
युवा के तरह अडिग
चलो चलें हम साथ - साथ। 

स्वरचित : - मुन्नी कामत।
"शीर्षक-युवा"
उठो देश के कर्णधारों
कृष्ण नही अब आनेवाले
अपने गांडीव तुम स्वयं सम्भालो
लो निर्णय तुम तुंरत आज

अपने संर्घष को नाम ना दो
बस दो उन्हें दिशा सही
हर्ष विषाद तो संर्घष के बाद
बस रखो तुम स्वाभिमान का मान

अन्तःकरण है साथी तुम्हारा
सृजन करो नव भारत का
विश्व गुरू यह बनकर उभरे
करो युवा तुम ऐसा काम

क्षणिक सुख का करो त्याग तुम
देश की धरा कर रही पुकार
शयन नही यह जागरण का समय
उठो देश के युवा, कर्णधार।
स्वरचित-आरती-श्रीवास्तव।

विषय - युवा 
विधा - पिरामिड 

1) है 
2) युवा 
3) अद्भुत 
4) विलक्षण 
5) आत्म विश्वास 
6) सकारात्मकता 
7) कटिबद्ध कर्मों से । 

1) ये 
2) युवा 
3) विशेष 
4) नवयुग 
5) राजनीतिक 
6) भ्रष्टाचार युक्त 
7) अधकचरा ज्ञान ।

तनुजा दत्ता ( स्वरचित )
ख्याल आया
एक दिन 
बैठे बैठे
नेता कभी 
बूढ़ा होता नहीं 

हिरोईनें
कहलाती
सदा बहार 
अभिनेत्री 

तो फिर मैं 
सफेद बालों का
बूढ़ाऊ पति
कहलाए क्यो ?

बचा के रखे
पेंशन के पैसों से
ले के आया 
सिर की कालिख
इन्तजार किया
सब के सोने का

क्लीन सेव 
के बाद
बालों में लगाई
खूब कालिख 
बन ठन कर 
पहनी जिन्स टाप

फिर बोला :
साला मैं तो
साहिब बन गया 
चाल मेरी देखो
रूप मेरा देखो 
मैं तो मियाँ 
अपनी बीबी का "

बीबी ने किया 
पहचानने से इनकार 
नाती पोतों ने किया
डंडे से वार
है कोई लफंगा 
घुस आया
घर के अंदर 

सिर पकड़ 
कर बैठा हूँ 
बाहर 
इन्तजार में 
इसके कि
कब हटे 
सिर से काली

स्वलिखित लेखक 
संतोष श्रीवास्तव भोपाल

विषय--युवा


युवाओं के लिए मैं आज एक सौगात लाया हूँ,
करें वे देश की सेवा यही पैगाम लाया हूँ।
नहीं निज देश से.बढकर जहां में और कुछ भी है,
यही समझाने ही तो मैं यहाँ थक चल के आया हूँ।

करोगे देश की सेवा तो तुम जन्नत में जाओगे,
अपने ही प्रयासों से तुम मंजिल को भी पाओगे।
मानों तुम मेरी बातें यदि आगे है तुम्हें बढना,
नहीं तो अपनी करनी पर.तुम बस पछताओगे।
(अशोक राय वत्स).स्वरचित
जयपुर

युवा रहें हमेशा हम भाव यही तो , सबके मन में रहता है |

जीवन की पथरीली राहों पर ,युवा ही तो हसकर आगे बढता है |

अपने घर समाज और देश सभी का, भार इसी पर रहता है |

पत्थर में भी फूल खिला दे ,निश्चय अटल युवा का होता है |

शौर्य और वीरता का परचम , हमेशा युवा ही तो लहराता है |

दुनियाँ में बल बुध्दि और प्रतिभा का ,जिसको सदुपयोग आता है |

यहाँ नाम सुयश शिक्षा विकास का , अवतार वही बन जाता है |

जब कभी भ्रमित होकर के युवा , गलत राहों पर मुड़ जाता है |

दुश्मन अपना वो हो जाता , विनाशक तत्वों का खिलौना बन जाता है |

दायित्व अपना युवा जो समझे , जीवन सुखदाई बना सकता है |

युवा दीन दुखी निर्बल असहाय का , सहारा भी बन सकता है |

जो उद्देश्य कोई जीवन में हो तो , सफल जीवन हो सकता है |

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश
विधा -----कविता 27/3/19
हे उठो युवा सब
माँ भारती पुकारती
गगन सदृश्य प्रेम से
ये तुम्हें निहारती
पले बढे इसकी माटी मे
कर्ज इसका चुकाना है
बन लाठी दिव्यांग बुजुर्ग की
उन्हें मंजिल तक पहुचाना हे
सत्य सहित अविराम रुप से
सेवा में लग जाना है ।
अन्नाय अत्याचार से तुम्हें 
हर असहाय को बचाना है
देकर अपना लहू तुम्हें
करनी हे इसकी आरती
हे उठो युवा सब 
माँ भारती पुकारती ।
स्वरचित ---🙏🙏
तुम युवा हो!
नहीं शोभता तुम्हारा
नशे में यूँ डगमगाना
यौवन को तन में नहीं
मन में सदा बिठाना
सद्मति की खिड़की का
दरवाजों का खुल जाना...

तुम युवा हो!
निडर रहो, साहसी बनो
कि मुट्ठी में हो जमाना
पर ठहर जरा!
यह बात समझते जाना
निज-अनुशासन से सज्जित
संयमित आचार अपनाना...

तुम युवा हो!
मत ढूँढो न करने का
हरदम नया बहाना
एक बार जो ठान लिया
वह पूरा कर दम पाना
तुम्हें शोभता ढूंँढ-ढूंँढ कर
चुनौतियों से जा टकराना...

तुम युवा हो!
नहीं बाँधती तुमको निर्मित राहें
है तुम्हें शोभता नूतन राह बनाना
खुद निर्मित कर नई चुनौती
उसमें हीं सुख पाना
युग प्रवर्तन के वाहक को
दुनिया कहती रहे दीवाना...

तुम युवा हो!
बाधाओं को चीरकर
चुनौतियों से जा टकराना
बनी-बनाई लिकें टूटें
चाहिए नए सवाल उठाना
बदलाव बिना न चली प्रकृति
न हीं बदल सका जमाना...

तुम युवा हो!
खलनायक के चेहरे वाली
हर तस्वीर मिटाना
तुम्हें शोभता देश का हित
उस पर सर्वस्व लुटाना
तेरे कांधे पर सिर रख कर
धरा चाहती है मुस्काना...

स्वरचित "पथिक रचना"

विषय=युवा 

विधा=हाइकु 
=========
(1)रखता सदा 
सकारात्मक सोच 
आज का युवा

(2)शिक्षा का अर्थ 
नौकरी पाना नहीं 
जानते युवा 

(3)चली बयार
युवाओं की कतार
फौज में भर्ती 

(4)लेकर साथ
मार्गदर्शन करे
युवा को आज

(5)भटके नहीं 
युवा की गतिविधि 
रखिए ध्यान 

===रचनाकार ===
मुकेश भद्रावले 

हरदा मध्यप्रदेश 
(एक अलग नजरिये से)
बैठी गए नाक अरु धँसी गए आँख
माथ नहीं साथ, बस लिए एक मथानी है
पिचक गए गाल जैसे शुष्क रसाल
कमरिया कमाल एक पतली कमानी है
तेज से विहीन काया, देखने में दीन
चेहरे का रंग जैसे पोखरे का पानी है
बांहे है बेदम,बेटा बाप से भी कम
रहत सरोष सदा भृकुटि तानी है
पैर के नाम पर लकुटिया है बैर की
चाल लटकदार देखो बड़ी मस्तानी है
बौने ठिगने कद और बोलने की हद
जीवन अजब एक गजब कहानी है
फेसबुक,मोबाइल में निरत रहत है
ऑनलाइन गेमिंग में जीतने की ठानी है
पोथियन से दूर, रहत मगरूर है
ज्ञान के वरदान भरो गूगल के ज्ञानी है
शरीर भयो काठ, पढ़ि रहे प्रेम पाठ
गाँठ में न साँठ,पर नखरे अम्बानी है
संहर्ता के दूत है सच्चे अवधूत है
मद मदिरा में रमी बने औघड़दानी है
करते मुनादी है इनको आजादी
रीति-नीति ताखा धरि बोलते ये वाणी है
कहूँ क्या ज्यादा,भैया भाँप लो इरादा
हिप्पीकट युवकों की बेढ़ब जवानी है
-©नवल किशोर सिंह
स्वरचित
27/03/2019
तू चिंगारी

तू जोश

तू उमंग

तू उत्साह

तू अटल

तू अविचल

तू चट्टान

तू विद्रोही

तू प्रहरी

तू रक्षक

तू उम्मीद

तू किरण

तू वैभव मानवता का

तू गरिमा न्याय की

तू कविता भविष्य
की

हो तुम युवा इस
देश के ।।
अंजना सक्सेना
ख्याली पुलाव पकाते हैं,
ख्यालो के महल बनाते हैं।

बातों के बताशे फोडें जो,
वे युवा नहीं कहलाते हैं।

हैं सतरंगी सपने उनके,
घूमें वे भंवरा बनके।

करें हरकतें जो छिछोरों सी,
वे युवा नहीं कहलाते हैं।

फैशन के हैं दीवाने वे,
शमा के हैं परवाने वे।

मांबाप की सारी मेहनत को,
सरे राह धुएं में उडाते हैं।

वे युवा नहीं कहलाते हैं,

जीवन का भार लिए फिरते।
पतन की राह हैं जो चलते,

हैं ऐशो आराम की चाह जिन्हें।
परिवार की नहीं परवाह उन्हें,

वे युवा नहीं कहलाते हैं।

व्यसन जिन्हें अति प्यारा हो,
मेहनत से किया किनारा हो।

दुर्दैव का रोना रोते जो,
वे युवा कहां कहलाते हैं?

समय की बदले धारा जो,
मुटठी में जिनके आसमां हो।

जो चट्टानों से टकराए,
बस युवा वही कहलाते हैं।

अभिलाषा चौहान
स्वरचित ,मौलिक
विधा हाइकु

युवा चिंतन
करता उदघोष
विश्व विजय

युवा सामर्थ्य
परिवर्तन सार
देश विकास

युवा मस्तिष्क
संकल्प का आधार
सम्पूर्ण सिद्धि

भाव विभोर
युवा की धड़कन
राष्ट्र सुरक्षा

जीवन सृष्टि
आलिंगन में युवा
आबद्ध प्यार 

@स्वरचित
मनीष श्री
रायबरेली

चलो युवा आगे कदम बढ़ाओ 
बुलंदियों पर रखो कदम 
ऊँचें नभ पर फैलाओ अपने पंख 

दिखाओ दो दुनियाँ को अपना दम.

बदल दो पवन के वेग को 
बदल दो सरिता की धारा को 
बदल दो पीढ़ियों से सड़ी गली विचारधारा को 
लिख दो मेहनत परिश्रम की नई कहानी को .

नव युग नव सृष्टि का करो आगाज 
दिनकर की किरणों संग लिखो खुद का भूत भविष्य 
ये मत सोचो कितनी कठिन हैं डगर 
हर दिन करो तय एक नया सफर .

बन जाओ आज के जागरूक युवा तुम 
क्रांति की लिखो एक नवीन अध्याय तुम 
मोदी और कलाम की तरह देश का बढ़ाओ मान 
भगत चंद्रशेकर सुभाष के सपनों के भारत का करो निर्माण .

रुको नहीं तुम झुको नहीं तुम 
चाहे राहें हो तूफानी या पथरीली 
हिम्मत धैर्य और वीरता की बनो मिशाल 
मिलकर चलो कदम आगे बढ़ाओ एक संग ताल से ताल .
स्वरचित:- रीता बिष्ट

विषय -युवा 
ओ देश के नौ जवानों 
गरीबो और धनवानों ! 
कब तक बाट जोहते रहोगो ! 
क्या शिक्षानीति सहते रहोगे ? 
याद करो महावीर हनूमान को 
गया लांघ समंदर लंका दहन को , 
इतिहास दिखाता वीरों को
हाथों से चलती शमशीरों को ।
देश हाथ युवा पीढी़ के हैं 
कुशल युवा श्रम सीढी़ के हैं।
जिस घर में सुखी हैं बुजुर्ग 
उस घर देव रमण जैसे स्वर्ग ।
देश जवानों का फिर डर कैसा ? 
पाँव रखे पानी , श्रम पैसा ही पैसा ।
सरकार शराब दुकान लगाओ ताले
नशाबंदी करो युवा हैं भोले-भाले ।
नीजी सरकारी स्कूल हो नि:शुल्क 
नहीं पढा़ये उत्तम हो बंद स्कूल ।
युवाओं को राजनीतिक झंडे न दो
जाति-पाँती के झगडे़ - दंगे न हो।
लाखों पढ़ बेकार होजाते बेरोजगार
आत्महत्या चर्चे होते भरेअखबार।
कब नेताओं का बंद होगा बंदर बाट
भ्रष्टाचार मिटेगा कब करेंगे शांत? 
युवा शक्ति को आगे आना होगा . भ्रष्ट नेताओं से देश बचाना होगा ! 
युवाओं को फौलाद बनना होगा
परमवीर औलाद सा तनना होगा ।
स्वरचित -चन्द्र प्रकाश शर्मा 
'निश्छल',
ाइकु (5/7/5) 
विषय:-"युवा" 
(1)👨‍🎓
डिग्रियाँ रोये 
बेरोजगार युवा 
चप्पल घिसे 
(2)🕵️‍♂️
समझो चाल 
नेट, नशे का जाल 
युवा कंगाल 
(3)💃
अंदाज युवा 
आयु एक नंबर 
ज़िंदगी मज़ा
(4)👷‍♂️
युवा सपने 
भारत के हाथों से 
विकास बुने 
(5)👨‍💼
ऊर्जा का स्त्रोत 
सम्भावना अपार 
युवा संसार 
(6)🌱
प्रेम की वर्षा 
धरती हुई युवा 
बूँदों ने छुआ 

स्वरचित 
ऋतुराज दवे

गरम हवाओं में जो विचलित न हो
अफ़वाहों में जो प्रज्ज्वलित न हो
अपनी गरिमा भी बनाये रखे
संयम रखे और कभी रंजित न हो। 

विपरीत लहरों में भी जो निकल जाये
यदि चोट लगे तो फिर सम्भल जाये
जिसके आकर खडे़ ही होने से
आपत्ति जो भी आये वो टल जाये। 

जिसमें पूरा आत्म विश्वास हो
लोगों की पीड़ा का आभास हो
जिसमें कुशल नायक की प्रतिभा हो
जो कई दिलों की महकती श्वास हो। 

हो सकता है यह अतिशयोक्ति हो 
इसमें किसी की न स्वीकारोक्ति हो
पर उसमें राष्ट्र प्रेम की असीम भक्ति हो
और मन में सुदृड़ इच्छा शक्ति हो।

जिसमें पूरा स्वाभिमान हो
निष्ठा जिसका अनुष्ठान हो
कौन सी समस्या कैसे सुलझे
इसका सदा उसे अनुमान हो।

विषय - युवा
विधा - हाइकु

आज का युवा
नशे में हुआ लिप्त
जिंदगी नाश

खाएं ठोकर
बेरोजगार युवा
शिक्षा बेकार

ये युवा पीढ़ी
देश की कर्णधार
जोश अपार

जोशिला युवा
भरपूर विश्वास
जगती आस

युवा भारत
हौसला बेमिसाल
विश्व में धाक

स्वरचित
बलबीर सिंह वर्मा
रिसालियाखेड़ा सिरसा (हरियाणा)

विधा-हाइकु 

🌼🌹🌼🌹🌼🌹🌼
🌹
युवा पुरुष 
कर सकें सघर्ष
जीवनी शक्ति//
🌹
आज का युवा 
वक्त से पराजित 
शक्ति विहीन//
🌹
डिग्री धारण
भटकें गली-गली 
रोजी के लिए//
🌹
आजादी मिली 
युवकों की जोश से 
अपार शक्ति//
🌹
यूवा-हृदय 
अति साहसपूर्ण 
युगांतकारी //
🌹
यूवा-जागृति 
क्रांतिकारी प्रगति 
देश उन्नति//
🌹
मन का वेग
अद्भुत ओजपूर्ण 
सृजनशील//
🌹
जय जवान 
युवा शक्ति प्रधान 
देश-प्रहरी //
************
🌼🌹🌼🌹🌼🌹
ब्रह्माणी वीणा हिन्दी साहित्यकार
#स्वरचित

विधा-हाइकु

1.
कैसे बचाएं
आज युवा पीढ़ी को
टूटते रिश्ते
2.
युवा जागृति
ये औद्योगिक क्रांति
देश प्रगति
3.
बेटी पढ़ाओ
युवा हाथ बढाओ
बेटी बचाओ
4.
युवा संसार
तकनीकी सुधार
आस अपार
5.
नशे की लत
युवाओं की आफत
जीवन नष्ट
6.
युवा संसार
रेडियो कार्यक्रम
सब सुनते
7.
युवा संदेश
हरा भरा हो देश
सृष्टि बचाओ
********
स्वरचित
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा

विषय-युवा

अभद्र युवा
परिवार पे दाग
नाम डुबाता

भविष्य सीढ़ी
कामयाबी मंजिल
कदम युवा

भटके राह
बेरोजगार युवा
बढ़े गुनाह
****
स्वरचित-रेखा रविदत्त
27/3/19
बुधवार



तुमसे ही जीवन की आशा 
और बंधी. सारी प्रत्याशा 
नमन तुम्हें युवा शक्ति 
बन जाओ तुम प्रेम की भाषा 

तुम जालो जंजाल में फंसो नहीं 
अभिमन्यु से लड़ो , मरो नहीं 
आशीष तुम्हें युवाशक्ति
तुम अत्याचारी बनो नहीं 

तुम देश प्रेम की आन बनो 
हर विकास का सोपान बनो
सद बुद्धि तुम्हारी बनी रहे
तुम भारतमाता की शान बनो

शक्तिपुंज बनो,पड़ो सभी पर भारी
दुखी दीन पर कर दो जीवन वारी 
ह्रदय तुम्हारा निर्मल हो 
मानवता के तुम बनो पुजारी

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"कांच /शीशा ""10अक्टुबर 2019

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