Friday, April 19

"समय"19अप्रैल 2019

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#नमन मंच भावों के मोती:::
#वार शुक्रवार:::::
#दिनांक १९,४,२०१९::::
#शीर्षक समय::::::::
#रचनाकार दुर्गा सिलगीवाला सोनी

"*"*"*" समय "*"*"*"
           "*"*"*"
चले सतत निरन्तर और लगातार,
 बढ़ते रहना ही जिसका आधार,
वह नित्य क्रमश:ही चलता जाए,
जो ना रुके वही तो समय कहलाए,

वह भूतकाल कभी हुआ करता था,
  अब भविष्य अपना कहलाता है,
  एक क्षण को कभी ये रुके नहीं,
 यह वर्तमान भी अपना बन जाता है,

  पल पल बदले समय का मिजाज,
   खेल समय के भी बड़े निराले हैं,
  ये प्रतिकूल हुआ अंधकार है जग में,
   अनुकूल हुआ तो फिर उजाले हैं,

 एक पल एक क्षण या घड़ी भर को,
  वश इसपर ना किसी का चलता है,
 जैसे चढ़ता है सूरज हर एक पल में,
 सांझ ढलते ही पराक्रम भी ढलता है,

  यह राजा को भी एक रंक बना दे,
हरिश्चन्द्र की कहानी भी एक सीख है,
  धर्मराज भी खुद उलझे थे पांसों में,
  समय को तो शकुनि से भी प्रीत है,

  कभी यह समय ना काटे कटता है,
 कभी तो समय का बड़ा ही अभाव है,
 कैसे काटे होंगे उन्होंने वो चौदह बरस,
  ह्रदय में श्रीराम के कितने ही घाव हैं,

   दुर्गा तुम समय की करो प्रतीक्षा,
 निश्चय ही वो दिन भी जरूर आएगा,
 वक़्त के घावों ने तुम्हे जो दर्द दिया है,
  खुद मरहम भी समय ही लगाएगा,

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भावों के मोती दिनांक 19/4/19
समय

है जिन्दगी की दौड़
जीवन में हैं कई मौड़
मची है आपाधापी
हर और
इन्सान लगा है
पकडने समय को
आता नहीँ हाथ
वो कहीं और

पहचान लिया
 समय का
महत्व जिसने
नहीं हारी
कोई बाजी उसने

फिसलता जाता है
समय मुट्ठी से
रेत की तरह
फिर भी करता
रहता है इन्तजार
वो समय का
अनजानों की तरह

पहचानी कीमत
जिसने समय की
नहीं किया बरवाद
जिसने समय को
जीवनपथ बढ़ा
सदा वो सदा
विजयी हो कर

क्षणिक है जीवन दोस्त
नहीं है भरोसा कल का
पा लो  लक्ष्य जिन्दगी के
यह तो खेल है
समय के उलट फेर का

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव  भोपाल

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नमन- भावों के मोती

 दिनांक-19/04/2019

शीर्षक - समय

समय रुकता नहीं कभी

पीडा की झंझावात में।

समय रुकता नहीं कभी

काली अधियारी रातों में।

दुख की काली बदली छाई

समय के उजियारे राहो में।

समय है रहा समय पर भारी

जिससे सारी दुनिया हारी।

पलक झपकते जख्म मिलते

पलक झपकते वाम।

देखो समय की बलिहारी

जंगल-जंगल भटके भगवान राम

अपनों से ही युद्ध किए

कृष्ण कन्हैया घनश्याम।

स्वरचित
सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज

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सुप्रभात"भावो के मोती"
🙏गुरुजनों को नमन🌹
🌹मित्रों का अभिनंदन,🌹
19/04/2019
    "समय"
1
है गतिमान
समय का पहिया
तेज रफ्तार
2
सबपे भारी
समय बलवान
दुनिया हारी
3
इंसान बंदी
समय की पाबंदी
स्व परिधि में

स्वरचित पूर्णिमा साह(भकत)
पश्चिम बंगाल

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मंच को नमन🙏
सभी गुणीजनों को सादर प्रणाम 🙏🌹😊
दिनांक-19/4/2019
शीर्षक-"समय"
विधा- कविता
**************
मैं समय हूँ, स्थिर नहीं मैं,
किसी के बस में नहीं मैं,
बंधन कोई न भाये मुझे,
मेरे ही आगे दुनियां झुके |

हर काम समय पर अच्छा,
कद्र करने वाला है सच्चा,
समय को न करना बर्बाद,
वरना हमेशा मिलेगी हार |

   स्वरित *संगीता कुकरेती*

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"नमन भावों के मोती"
शीर्षक-समय
दिनांक-19 अप्रेल 2019
विधा-लघु कविता

बीते पलों की सोचकर
खो गया मैं
अतीत के गलियारों में
सीखा जमाने से बहुत कुछ
कमाई इज्जत और मान-सम्मान
स्वर्णिम पल था
मेरी जिन्दगी का
निकल गया बड़ी तेजी से
तूफान की मानिंद
और छोड़ गया अमिट निशान
मेरे हृदय पटल पर।

राकेशकुमार जैनबन्धु
रिसालियाखेड़ा, सिरसा
हरियाणा,

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एक समय की बात है, भारत रहा विशाल।
कई टुकडो मे बँट गया आज का देखो हाल।
...
विक्रमादित्य के राज्य था फैला पारस अब ईरान।
मलय श्याम कम्बोडिया हिन्दू का था मान।
...
धीरे-धीरे टूट गया वर्मा अरू अफगानिस्तान।
बांग्लादेष भी अलग हुआ बनकर पाकिस्तान ।
....
समय बदलता देश का साथ ही उसका भाग्य।
शेर लिख रहा ये कविता  भारत तब सुदृण राज्य।

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नमन मंच भावों के मोती
शीर्षक      समय
विधा        लघुकविता
19 अप्रैल 2019,शुक्रवार

समय बड़ा बलवान होता
भावी का कुछ पता नहीं रे
जो समय पूर्व  पहचान ले
जीवन उसका नेक सही रे
      समय बहती नदी है
      हाथ भी आती नहीं रे
      भागती ही जा रही यह
      दूर भी जाती नहीं रे
कालचक्र टिक टिक चलता
नित परिवर्तन फिरता रहता
दुःख सुख आँख मिचौली जैसे
होनी अनहोनी नित कहता
         पल पल में इंसान बदलता
         किस पर जन विश्वास करे
         कथनी करनी अति अंतर है
         स्वार्थरत वह क्या न करले
ठोकर खाते उठते पड़ते
हँसते रोते जीवन जीते
बचपन बीता यौवन बीता
फिर भी हम हैं रीते रीते
            समय सत्य जीवन मिथ्या
            जीवन तो बस आना जाना
            तेरे मेरे चक्कर में फस
            अब भी है सच से अंजाना
जो निरंतर चलता रहता
खून पसीना सदा बहाता
संघर्षों से पल पल जूझे
वह नर नरोत्तम कहाता।।
स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा ,राजस्थान।

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19/4/2019
           समय
नमन भावों के मोती।
नमन,वन्दन गुरुजनों, साथियों।

हम रहते हैं, जहां थे वहीं,
समय आगे बढ़ता जाता है।

समय से बचा नहीं कोई,
सबको पीछे छोड़ जाता है।

समय के साथ जो चलते,
वो कभी पीछे नहीं रहे,

पर जो समय पर नहीं काम करते,
वो पीछे रह गए।

समय आगे भागता रहा,
एक साल हो गया।

भावों के मोती का देखो,
जन्मदिन आ गया।

हंसते,गाते हुए सब,
प्रतिभा अपनी दिखलाते रहे।

कलम में कितनी है ताकत,
दुनियां को बतलाते रहे।

समय से जीत,हार है,
समय पर टिका संसार है।

समय के साथ जो चलते,
उसी का बेड़ा पार है।।

स्वरचित
वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी

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नमन मंच 'भावों के मोती' को
सुप्रभात सभी गुणी जनों को
दिनांक -19/4/2019
शीर्षक - समय
समय बड़ा बलवान,
 रहे निरंतर गतिमान ।
इसके आगे सब लाचार,
 ईश्वर से सब करें पुकार ।
सदा समय है अच्छा रखना ,
जीवन हरदम सुखमय रखना ।
पर इससे क्या होने का,
समय बताए जो होने का ।
समय और लहरें एक ही जैसी,
नहीं प्रतीक्षा करती किसी की ।
हमें सिखाती एक ही भाषा ,
समय का पालन करो हमेशा ।
समय का लोहा जिसने माना ,
उसी का हुआ यह जमाना ।
समय के आगे सब ही हारे,
चाहे राम हों या पांडव बेचारे।
चाहे हो मात-पिता की आज्ञा,
या हो छल प्रपंच का धोखा।
वन में फिरे सब मारे-मारे ,
समय के आगे सब ही हारे ।
कहीं न हिलता एक भी तिनका,
ऐसा चलता समय का सिक्का ।
स्वरचित
मोहिनी पांडेय

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सादर नमन

    " समय"
ना कर गुमान किसी बात का,
समय बदलते देर नही,
रह जाएगा सब यहाँ,
दुनियाँ का दस्तूर यही,
समय बड़ प्रबल है,
यौद्धा भी समक्ष इसके ध्वस्त हुए,
समय के चलते तू क्या जानें,
क्या- क्या यहाँ कारनामें हुए,
समय अनुसार तू कदम बढ़ा,
कामयाबी कदम चूमेगी,
फिर इच्छा अनुसार तेरे,
लोगों की सुई घूमेगी।
****
स्वरचित-रेखा रविदत्त

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दिल  क्यूं  उदास  है  बाकी । 
यह  कैसी  प्यास  है  बाकी ।
पी  लिया आग  का  दरिया।
कुछ  और  खास  है  बाकी।

इक  उम्र  हुई    है   तुमको ।
 देखा  नही  इन  आखो  ने ।
तुम  नजरो  मे   नुमाया  हो ।
 फिर तलाश है  क्या  बाकी।

दिल  क्यूं  उदास  है  बाकी ।
यह  कैसी  प्यास  है  बाकी।

चले  आए  तो  महफिल मे ।
देखा  नही   मुड़   कर  भी ।
तेरे  दिल  मे ही सितम-गर  । 
कोई  फांस  है  क्या  बाकी।

दिल  क्यूं  उदास  है  बाकी ।
यह  कैसी  प्यास  है  बाकी।

वोह   एक  वक्त   तेरा  था ।
और यह एक वक्त  मेरा  है ।
मुझे  अब  भी  मुहब्बत  है ।
यूँ  तु  उदास है  क्या बाकी।

                 विपिन सोहल

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नमन भावों के मोती
दिनांक - 19/04/2019
आज का विषय - समय

-----वक्त-----

वक्त हैं ये
कहां टिक पाता हैं,
निकल जाता हैं पल भर में
देखते ही देखते
ज्यों चुल्लू से पानी,
समय की ताकत जानो
समय कभी रुकता नहीं,
देखो चांद, सितारे, धरती, ग्रह,
रुके हैं कभी
जीना है तो जियो आज में
किसने देखा हैं कल,
कल कभी आता नहीं,
आज कहीं जाता नहीं,
मुनासिब नहीं वक्त को थाम पाना
फिसल जाता हैं मुट्ठी से
रेत की तरह,
समय ही हाथ की लकीरें,
समय ही हैं किस्मत,
समय अपना तो सब कुछ अपना,
नहीं तो सब पराया,
सीख लिया जिसने चलना वक्त के साथ
वही इंसान सफल कहलाया।

        स्वरचित
    बलबीर सिंह वर्मा
रिसालियाखेड़ा सिरसा(हरियाणा)


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ठहरा हुआ समय

ठहरा हुआ समय
बीती यादों को
कचोटता हुआ,
मन -मष्तिक पर
प्रहार करता है ।
झुलझती शाम
छेड़ती है मन को
कई छूटे हुए मंजर
बिखरे हुए सपने
औंझल हुए असंख्य
 अपने-पराये लोग,
याद करके जी लेता है मन
पूरी जिंदगी-सारी उम्र
जीवन के अंधेरे,उजाले
अपनों के संग, परायो के संग
उल्हाने,प्रेम, संशय
जीए हुए पल,कहे हुए शब्द
लाखों बीते हुए वाक्यात,
जो अक्सर याद आते हैं
अकेले पन को झंझोड़ता हुआ
ये समय कभी-कभी
इस बेचारे मन को बेज़ार
जाने कितनी बार करता है ।

ठहरा हुआ समय
हाँ, ठहरा हुआ समय।

श्री लाल जोशी "श्री"
तेजरासर, बीकानेर।
(मैसूर)

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।। समय ।।

समय सदा न बेरहम इसकी आहट जान
समय बनाता है कभी पत्थर को भगवान ।।

समय यहाँ सबका आता है एक दिन
हर समय का सीखा कर मान सम्मान ।।

जो भी हो जैसा भी हो जानो पहचानो
हर समय में छुपा होता कोई कल्यान ।।

वर्तमान ही पोषक होता है भविष्य का
वर्तमान में भविष्य का ढूढ़िये निदान ।।

बुरा समय तो सीख सिखाता है सबको
सीख सीख कर ही बने हैं लोग महान ।।

श्री राम हों या कृष्ण हों सब का ही
बुरे समय से हुआ है कभी मिलान ।।

समरसता जो हर समय से रखा यहाँ
वही कहाया 'शिवम' ज्ञानी और सुजान ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 19/04/2019


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भावों के मोती
बिषय- समय
सब कुछ बदल जाता है
समय के साथ-साथ
रिश्ते-नाते, शौक, ख्वाहिशें
बस नहीं बदलता तो वो है
रूह की धरातल से उपजा
किसी के प्रति स्नेह सम्मान।
जिसे कोई नहीं छीन सकता
और ना ही कोई बदल सकता है।
स्वरचित- निलम अग्रवाल, खड़कपुर

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नमन
"भावों के मोती"
दिनांक-
19/4/2019
विषय-समय
समय
कभी रुकता नहीं
कभी थकता नहीं
कभी थमता नही
चलता है
हमसफ़र बनकर
मनुष्य ने की कोशिश उसको बांध लें जान ले वो
दिया घड़ी का रूप
बन्ध कर कलाई मे
तो दीवार पर टँग कर
टिक टिक की आवाज़
से हमे चेताता  रहता
बन कर क्षण,पल
लम्हा हमारी जिंदगी को अनुभवों से
अहसासों से भरता रहता
कहता सुन
मुसाफिर
 चलना ही जिंदगीहै
 रुक गया तो मंज़िल
न  पायेगा
मैं समयअगर  रुका
तो
कायनात रूक जायेगी
सोचती हूं बैठकर ये समय थकता नही कभी
फिर सोचती हूं  मैं थककर
बैठ गयी तो समय
के साथ न चल पाऊंगी
जानती हूँ जो दौड़ है
जिंदगी की वो असल
मंजिल नहीँ
लेकिन समय के साथ चलना
मांग है
जिंदगी की ।।
    स्वरचित
अंजना सक्सेना
 इंदौर(म.प्र.)

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नमन भावों के मोती ,
आज का विषय , समय ,
दिन , शुक्रवार ,
दिनांक, 19, 4 , 2019,

समय पंछी
भावनायें हमारीं
 ढूंढे धरती |

हारा विज्ञान
समय बलवान
जाने जहान |

आलस ठग
दुनियाँ है बाजार
समय पूँजी |

समय रूका
सब कुछ ही लुटा
अंतिम यात्रा |

सब बेकार
समय का प्रहार
किया स्वीकार |

जाने मानव
उपयोगी समय
मंगलमय |

कितने नेता
समय पुकारता
चाहिऐ शिक्षा |

भ्रम को छोडो
समय को पकडो
बढते रहो |

होता विकास
चलो समय साथ
रख विश्वास |

भारतवर्ष
हो स्वर्णिम समय
मिलाओ हाथ |

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश ,

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नमन भवों के मोती💐
कार्य:- शब्दलेखन
शीर्षक:-समय
विधा:-स्वतंत्र कविता

एक-
       दिशा के भाल पर फैली
       अरुण-प्रभा चुपके से
       शून्य दस्तक दे रही
       सम्हलो
       समय बड़ा चतुर है
       जो
       चुपचाप खिसक जाता है
       उठो
       तुम समय के हस्ताक्षर हो
       ए- नवयुवक।
दो-
       तुम्हारा शरीर
       अनादिकाल से
       घड़ी की तरह
       दिन रात ,कांटों में
       चक्कर लगा रहा
       और मन
       पेंडुलम की भांति
       फंसा है सीमित दायरे में
       कैदी की तरह
       फिर भी
       तुम चुपचाप हो
       ए - नवयुवक ।

(मेरे कविता संग्रह से )
डॉ.स्वर्ण सिंह रघुवंशी, गुना(म.प्र.)

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नमन🙏🌹 भावों के मोती 🌹🙏
आज का विषय , समय ,
दिन , शुक्रवार ,
दिनांक, 19, 4 , 2019,
🍁🍂🍁🍂🍁🍂🍁
विधा-छ़ंद मुक्त कविता

समय बडा बलबान है ले हनुमन्ता का नाम
काज संवरते जायेगे जितने बिगडे काम

राम भक्त हनुमान हैं जपे राम ही राम
संग बिराजे हृदय में सीता के संग राम

लक्ष्मण हैं अनुरागी बडे भाई का ले नाम
छोड़ दिये सुख ताज भी चले राम के साथ

लंका के राजा गुणी रावण उनका नाम
सद्बुद्धि खोई बडी जब लिया पर नारी नाम

भूत पिशाच भागें सभी जपे नाम हनुमान
रोगों से मुक्ति मिले मिले दर्शन हनुमान

स्वरचित
नीलम शर्मा#नीलू

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🌹भावों के मोती 🌹
🌹सादर प्रणाम 🌹
   विषय =समय
    विधा=हाइकु

समय सोना
कर सदुपयोग
नहीं हैं खोना

बदल जाते
समय पे अलग
शब्दों के अर्थ

दिखाता हमें
समय जादूगर
कर्मो का खेल

हाथ न आए
बात यह है सच्ची
समय पक्षी

करते लोग
समय की कीमत
बात के धनी

समय डंक
गलती पर मारे
राजा या रंक

मौत का आना
समय है निश्चित
नहीं ठिकाना

===रचनाकार ===
मुकेश भद्रावले
हरदा मध्यप्रदेश
19/04/2019

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"नमन भावों के मोती"
19 /04 /19 --शुक्रवार
आज का शीर्षक --"समय"
आ०  संगीता जोशी कुकरेती जी
===========================
समय दर्द है जगत में ,..समय दवा का नाम,
दुःख का कारण समय है,.और समय आराम।
कठपुतली से नाचते ,.....  जग में सारे लोग,
और डोर जिस हाथ में,.. समय उसीका नाम।
हार जीत सब उसी से,... वही मान अपमान,
बिना समय के ना चले ,यहाँ किसी का काम।
है प्रयास भी ज़रूरी,.. . और अक़ल भी ठीक,
मग़र समय जब साथ दे,तब आये परिणाम।
 कभी न ऎसा बोलिये,. .. समय होय नाराज़,
समय बुरा जो मान ले ,.. बुरा होय अंज़ाम।
===========================
"दिनेश प्रताप सिंह चौहान"
(स्वरचित)
एटा --यूपी

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*******चंद हाइकु*******
         शीर्षक-"समय"

1)

        समय चक्र
     निरन्तर चलता
       नहीं दिखता

2)
       समय सिक्का
    जेब में न टिकता
        है अनमोल

3)
    सुख व दुःख
    समय के पहलु
    जीना सिखायें

4)
       समय गाड़ी
     रफ्तार हो हमारी
      अच्छा सफर

5)
      समय चाल
   सदुपयोग सही
     जीत दिलाये

6)
      अच्छा समय
   खुशियाँ बिखेरता
       मन प्रसन्न

7)
       बुरा समय
   पहचान कराता
    जीवन सीख

    स्वरचित *संगीता कुकरेती*

@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@


नमन भावो के मोती मंच
आह का विषय: समय
दिनांक;19/04/19
अतुकांत रचना

दो पीढ़ियों के बीच ,
आज हुआ टकराव है !
मंच सज गए बैठी पंचायत
आज होने बड़ा घमासान है!
धर्मराज सरपंच के पद पर देखो
आज स्वयं 'समय ' विराजमान है!

गुजरी पीढ़ी के वक्ता बोले,
चारों ओर मचा हाहाकार है!
बदलते  दौरका बिगड़ता अंदाज है!
मी टू, धारा 377 ,बलात्कार, रिश्वत ,
मोबाइल, अंधी सत्ता, लोभी जनता,
पतन का तो  निरंतर बढ़ता ग्राफ है!
चोंचलों से भरा पड़ा ये बाजार है !

तर्क अकाट्य बड़े ही तीखे,
दिखता सबका उस ओर झुकाव है!

दद्दू!! जरा थोड़ा सा ठहरो,
ध्यान जरा इधर भी धर लो !
मैं प्रतिनिधि इस नए समाज का,
परिवर्तन को दिल से अपनाऊ!

सतयुग ना है ,कलयुग है यह!
कंप्यूटर से भी तेज है बच्चे !
रोज नितनवीन अविष्कार है!

चाहे रोज नई चुनौती ,
नए-नए अभ्यास हैं!
हर युग की एक जुदा कहानी,
जुदा जुदा अंदाज है !
सीख लो नए से जीना ,
छोड़ो करना यू जुगाली !

सरपंच जी की अब थी बारी!!
कहे कौन पड़ा किस पर भारी !!

# समय बड़ा बलवान,,
 हंसकर बोला !!

हर जमाना हर दौर में
एक नया जमाना मांगे!
ना कोई जीता कोई हारा!
मैं ही जीता में ही हारा!
मैं था हूं और रहूंगा
परिवर्तन के साथ हमेशा!!
नीलम तोलानी
स्वरचित

@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@
नमन मंच को 🙏🙏
दिनांक - 19/4/2019
विषय -समय
विधा - स्वतंत्र

वक्त आज है कल नहीं
 किसी के लिए रूकता नहीं
किसी के लिए ठहरता नही
आज तुम्हारे पास, 
कल किसी और के
अच्छे कर्म करो, ताकि
कल पछताना न पड़े
रेत की मानिंद ये हाथ से
फिसलता जाये।
समय के फेर से भगवान
भी बच न पाये
राम हों या कृष्ण समय के
आगे सबको झुकना पड़े
चाहे कोई भी बलवान हो
और अंत में यही कहना
चाहूँ गी।
जितना भी समय मिले
अपनों के संग अपनेपन से
बिताईये। 

तनुजा दत्ता (स्वरचित)

@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@
जीना सीख लो समय के साथ
मुस्कराना सीख लो समय के साथ
हर दुःख दर्द को भूल जाओ समय के साथ
आगे कदम बढ़े चलो समय के साथ .

समय बदलता हैं समय के साथ
कभी दिन हैं तो कभी रात
कभी गम हैं तो कभी खुशियों की बरसात 
कभी धूप तो कभी छाँव समय खेले हर दिन एक नया दाँव.

कर लो आओ समय से गहरी दोस्ती 
चलो ईमानदारी विश्वास दृढ़ लग्न से हर कदम
फिर समय की रेत पर ना होंगे कोई गम
दुनियाँ करेगी नमन हर कदम .

समय का चक्र भी चूमेगा कदम
नभ का दिनकर भी रुक जायेगा किरण संग
एक नवीन समय की रोशनी राह देखेगी 
हर कदम संग एक नवीन आत्मविश्वास जगा  जायेगी .

माना की अभी लक्ष्य बहुत दूर हैं
समय पर एक दिन वो भी मिल जायेगा
हर लक्ष्य हर मंजिल मिल जायेगी
समय के संग जिंदगी में खुशियों के सुमन खिल जायेंगे.
स्वरचित:-  रीता बिष्ट

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घड़ी की टिक टिक
समय का रफ्तार
लक्ष्य की दूरी
अपनी मजबूरी
डर नहीं पहुंच पाने का ।
सुन वीर विवेक की वाणी
आंखें चमकी शक्ति बढ़ी
मन में नया जोश जगा
समय नहीं घबराने का
लक्ष्य ज्यों दौड़कर आया
समय ने ही माला पहनाया।
शब्दातीत गीत गाने का।

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आप सभी को आत्मीय अभिवादन

आज के विषय पर
प्रस्तुति

दिन-शुक्रवार

विषय-समय
ऐ वक्त ठहर ज़रा !
आ लिख दूँ
सीने पर नाम तेरा
बाँध लूँ तुझे  मुठ्ठी में
मोड़ दूं तेरा रुख
नदी की धाराओं की तरह
सतत अविरल
प्रवाहित कर दूँ
उस ओर
जहाँ मुकम्मल आकाश हो
मन पंछी उन्मुक्त ,
कलरव करता हो
मरोड़ दूँ ,
अपने सख्त- कदमों तले रौंद कर

मांसाहारी चीलों के, आघाती डेने
और ,
एक सुखद माहौल का,

जन्मदिन मनाऊँ ।

तुझे भी एक ,
चिर- शान्ति की तलाश है
और मुझे भी अटूट प्यास।
ओ समय !
ठहर जरा
मुझे हस्ताक्षर करने दे
तेरी छाती पर।

सुधा शर्मा
राजिम छत्तीसगढ़ 19-4-2019

@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@
आज का विषय समय,
गजल पेश है साथियों नमस्कार,
गजल,
दुखों को हर पल प्यार करते रहिये,
जीवन  के गीत हर पल लिखते रहिये।।1।।

जीवन की अमा रात भी हंसेगी,
ऩन्हें दीपों को हरपल गढ़ते रहिये।।2।।
जिदंगी की अधेरी रातो को हंसना है,
दिल के दीये हरपल जलाते रहिये।।
3।।
अब सच का जमाना ही कहाँ रहा,
समय के संग हर पल चलते रहिये।।4।।
समय हर पल करती है इशारे,
समय संग जीवन ढालते रहिये।।5।।
स्वरचित देवेन्द्र नारायण दासबसना छ,ग,।।

@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@
नमन मंच को
विषय : समय
दिनांक : 19/04/2019

समय

समय चलता रहा,
अक्सर छलता रहा,
जख्म देता असीम
रहता मौना है।
वो खिलाड़ी बड़ा,
हर शख्स खिलौना‌ है।
उसकी शक्ति असीम,
आसमां क्या ज़मीन ।
उसी के हैं रंग सारे,
शोक स्वप्न हसीन।
धरा से आकाश वो
समझो न बौना है
वो खिलाड़ी बड़ा,
हर शख्स खिलौना‌ है।
खुद ही देता जख्म,
लगे बहुत बेरहम।
ज्यों ज्यों बीते समां,
बनता जाए मरहम।
कभी दुश्मन कभी,
लगता सलौना है
वो खिलाड़ी बड़ा,
हर शख्स खिलौना‌ है।
वो है बड़ा बलवान।
उसको ह्रदय से मान।
समय रहते ही कर,
समय की पहिचान।
वो बहुत विशाल मुश्किल,
कविता में पिरोना है
वो खिलाड़ी बड़ा,
हर शख्स खिलौना‌ है।

जय हिंद
स्वरचित : राम किशोर, पंजाब ।

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नमन भावों के मोती
शीर्षक  --समय
शुक्रवार/19-4-19
विधा--दोहे
1.
समय पढा तो सब पढा, बाकी सभी फिजूल।
समय बीतने पर सदा , होता ऊल जलूल।।
2
वक्त वक्त  के मोल को,जो समझें हैं मीत।
समय के सदुपयोग से, पा जाते वो जीत ।।
3.
मनुष्य का बीता समय, गहरी स्मृति बन जाय।
गुजरा समाज का समय,खुद इतिहास कहाय।।
4.
नियत समय पर काम की,आदत लें गर डाल।
काम ठीक होता सदा, हो हर समय कमाल।।
5.
श्रम करें पालें समय,बढ़ जाए विश्वास।
समय के सदुपयोग से,हम बन सकते खास।।

******स्वरचित*******
     प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551


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नमन--भावों के मोती
शीर्षक---समय

समय की अदालत में
हाजिर सब हुये
राजा हो या फकीर
हुये सबके कर्मों के हिसाब
पाप हो या हो पुण्य नसीब
समय ने मिटा दिये
सिकंदर हो या हो फकीर
समय ने छोड़े सिर्फ निशां
और बदली हैं तकदीर
इसके साथ जो चला
जीता वही फिर
किस्मतों की जंग और
बदली हाथों की लकीर
----नीता कुमार(स्वरचित)

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दौडती भागती जिन्दगी रह गई।
फुर्सते  वक्त  बस ढूंढती रह गई।

भागता - दौडता मै रहा उम्र भर।
छूट पीछे कहीं हर खुशी रह गई।

मुस्कुराती जहां उम्मीद थीं कभी।
चेहरे पर  फकत  मायूसी रह गई।

थम गए पांव जब मेरे जज्बात के।
पलकों पर मेरी कुछ नमी रह गई।

चल दिए तोड कर  वो दिल मेरा।
मेरे साथ बस यह शायरी रह गई।

                    विपिन सोहल


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नमन भावों के मोती
दिनांक : -१९/४/०१९
विषय : - समय
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भाग - दौड़ भरी जिंदगी में
समय के साथ दौड़ती
शायद,  सबसे व्यस्त स्त्री है
करती निर्वाह हर दायित्व का
वह सृजनात्मक, जननी है।

घड़ी की टिक-टिक सी
अनवरत चलती रहती है
दिन - रात यूँ ही कटती उनकी
कभी अपने लिए नहीं रूकती है।

बहुत मुश्किल से जब कभी वह
खुद के लिए वक्त चुराती है
चिंतन वहाँ भी संग होता,
फिर कोई कोना  उसे बुला लेती है।

स्वरचित: - मुन्नी कामत।

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नमन मंच-भावों के मोती
दिनांक-19.04.2019
शीर्षक- समय/वक़्त
विधा-मुक्तक
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                   (01) समय
विजयी बनोगे एक दिन इतना समय से मत डरो ।
शत्रुओं से तुम नहीं अपनत्व से ही रण करो ।
खड्ग लेकर रेत दो इन कुप्रथाओं का गला ,
अधिकांश समता के लिये सच बात के पीछे लड़ो ।।
               (02)
बाद सहर आमद के ज़ुल्मतों का डेरा है ।
आँख भी उनींदी है क्या यही सवेरा है ।
आदमी खिलौना है रंजो ग़म के हाथों का,
फ़िक़्र एक नागिन है वक़्त इक सपेरा है ।।
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     "अ़क्स " दौनेरिया

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नमन भावों के मोती ,
आज का विषय , समय ,
दिन , शुक्रवार ,
दिनांक, 19, 4 , 2019 ,

हुस्न, इश्क, त्याग ,तपस्या, संस्कार , जग में नफरतों की  जो बनतीं हैं  कहानी ,

कब क्या हो ये कोई न जाने , है सारी दुनियाँ इस सबसे  अनजानी |

होता समय सभी का भाग्य विधाता , हुआ  वही जो उसने   ठानी ,

कोशिश करते  करते  थक गये कितने ही , बडे़ बड़े ऋषि मुनि और ज्ञानी |

बड़ा ही बेबस और लाचार हुआ जन , कर कर उपाय बीती जिन्दगानी |

मानव  कृत  घड़ी हमें जो समय दिखाये , उस पर तो चल लेता प्राणी ,

इसकी ताल पर नित  रैन दिवस अब ,  फिरकी जैसा  नचता है  प्राणी |

दिन सप्ताह महीना साल युग बीते , हो गईं  कितनीं ही सभ्यता पुरानी ,

कहीं पर  विकास कहीं पतन हुआ है ,नहीं बात छुपी है  सबकी जानी |

इस दुनियाँ में जुडी हुई है घड़ी से ,  मेहनत और आलस्य की कहानी ,

सदुपयोग समय का करके कितनी ही ,  लोगों ने लिख डालीं अमिट कहानी |

समय रहते हम  कुछ अच्छा कर लें , हमारी  चार दिन की है जिदंगानी ,

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश , |

जोड़ घटाना धन का छोड़कर रहें प्यार से ये दुनियाँ है आनी जानी |

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सादर नमन

   "  समय"
1 ) चोट के घाव समय भरता,
      पीड़ पराई कोई ना हरता,
      सुख-दुख की लेकर सुई,
      समय यूँ ही चलता रहता,
2) तन में आलस तू भरकर,
     क्या करेगा आगे चलकर,
     समय ना देखे राह किसी की,
     मारे तमाचा आगे बढ़कर,
3). कीमत समय की तू पहचान,
      पाएगा जग में फिर सम्मान,
      समय हाथ से जो निकलेगा,
      पछताएगा फिर तू नादान।
******
स्वरचित-रेखा रविदत्त
19/4/19
शुक्रवार

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भावों के मोती
19/04/19
शीर्षक- समय

समय थमा रहा हम आगे बढते गये
ऐसी राह जिसकी कोई वापसी नही
जिन लम्हों को आये छोड़
अब आगे को कभी न मिलने
कालचक्र  का चक्कर नही
हम ही बस हैं गतिमान
आगे बढते एक ही मान
पीछे छूटे पलों मे  क्या
कितने सुख और कितने गम
बस सब साथ छोड़ वहीं
हम आगे बढते गये
समय वहीं रुका रहा ।
स्वरचित
      कुसुम कोठारी ।

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नमन"भावो के मोती"
19/04/2019
    "समय"
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समय को किसने रोका है
तेज रफ्तार से यह चलता है
किसी को उलझाता सवाल में
तो किसी को देता जवाब है।

समय को किसने रोका है
सुख-दु:ख का रखे पिटारा है
किसी को किसी से मिलाता है
कब किसको जुदा कर देता है
इसे किसी नें नहीं जाना है

समय को किसने देखा है
अपनी धुन में ही चलता है
दुनिया को भी लपेटा है
और चक्र अपना चलाता है।

समय को किसने रोका है
भविष्य को किसने देखा है
समय ही वो पहिया है
सभी का करता हिसाब है

समय को किसने रोका है
यादों का बनाता झरोखा है
जिंदगी को दे रहा धोखा है
मौत से इक दिन मिलाता है।

स्वरचित पूर्णिमा साह(भकत)
पश्चिम बंगाल


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नमन भावों के मोती
विषय -समय
19 /4 /19

समय की तान
ओ बंधु ! पहचान ।
सफलता हुई मेहमान
यति की फिरी मति
हुई दुर्गति ।
पल में राजा रंक बने 
रंक बने धनवान
ले समय को जो पहचान ।
ओ बंधु! समय बड़ा बलवान
घाव भर तो जाते
पर छोड़ते गहरे निशान ।
ढल जाते महल दु महले
खंडहर बने मकान
रे प्राणी! समय को तू  पहचान ।
समय चक्र कहे चल बेफिक्र
संग मेरे अनवरत चलता चल ।
ठहर जो तुू गया तो
बस रो रो पछता
और रह जा हाथ मल ।
आज की करनी आज ही कर
किसने देखा है कल ।
ओ बंधु !सुन समय की तान
कर सही गलत की पहचान ।
मिलेगा मान बढेगी शान
सुन समय की पदचाप
बढ़ता चल चुपचाप ।
आसमान छूना हो अगर
रोज दो चार डग नाप ।
बढ़ता चल चुपचाप
बढ़ता चल चुपचाप ।

(स्वरचित )सुलोचना सिंह
भिलाई  (दुर्ग )

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19/4/19
भावों के मोती
विषय-समय
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यह कैसी बलिहारी समय की
   यह कैसी बलिहारी
   घर में मां बाप भूखे सोते
   बच्चे बाहर मौज करें
   इतनी पीड़ा दे
  अपने जनक को
  कैसे उनको चैन पड़े
  फेसबुक पर ज्ञान बिखेरते
  फादर डे,मदर डे
  सेलिब्रेट करें
  घर पर दो घड़ी वक्त नहीं
  बैठ कर उनसे बात करें
  कैसे तुमको पाल-पोस कर
  उन्होंने इतना बड़ा किया
  अपनी शानो-शौकत की खातिर
  तुमने उन्हें भुला दिया
  कल तुम भी मां बाप बनोगे
  इस बात का ध्यान करो
  इतिहास खुद को दोहराता है
  इसलिए उनका सम्मान करो
      ***अनुराधा चौहान***स्वरचित

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II  समय II नमन भावों के मोती....
विधा: हाइकु

१.
समय संत
कालजयी अनंत 
आदि न अंत

२.
प्राण विहान
समय अवधान
योग विज्ञान

३.
समय ज्ञान
कर कर्म संधान
होगा कल्याण

४.
सांसें कर्मण्य
समय का अरण्य
दैहिक जन्य

५.
प्राण सारथि
पर समय स्वार्थी 
निकाली अर्थी

II स्वरचित - सी.एम्.शर्मा II
१९.०४.२०१९

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नमन सम्मानित मंच
        (समय)
         *****
स्वर्णिम स्वप्न मनुज मानस के,
  आधारित   प्रत्याशा   बल  पर,
     अवनितल पर  मात्र  समय  ही,
       पूर्ण  कराता  मानव  मन सपने।

समय  सुनिश्चित  करता  लक्ष्य,
   सुख जिसमें  आनन्द समाहित,
     मिलते  उन्नति  के  नव  सोपान,
        जीवन- भर   मिलता   सम्मान।

महत्त्वपूर्ण बलवान समय अति,
  सब   में   बसते  जिसके   प्राण,
     समयधार  संग  जो  भी चलता,
        सतत  सफलता   कुँजी  पाता।

समय  विरुद्घ  धरा पर  जो भी,
  घिरा  घटाओं  में  वह  दुख  की,
    समय  आत्मनिर्भर  गतिमय सा,
      नहीं  पुनः  आता   जो  लौटकर।
                             --स्वरचित--
                                 (अरुण)

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रोके न रुके
समय गतिमान
जीवन झुके।।

राजा से रंक
समय बलवान
कैसा विधान??

वक्त की मार
बेमेल गठजोड़
अस्तित्व युद्ध।।

वक्त पुकारे
आतंकी हरकारे
मृत्यु पुकारे।।

भावुक

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नमन  मंच
19/04/19
**
समय
**
समय के अनवरत चक्र मे
सब कुछ चलता हुआ,
समय कहाँ ठहर पाया है,
न बीता लौट के आया है।
पर कहाँ बाधँ पाई अपने मन को
वो बीते लम्हों मेँ ठहर ठहर जाता है,
और कभी लग जाता है,
आने वाले लम्हों के
ताने बाने बुनने मे,
कोशिश है,
आज में समेट लूँ
अपने मन  को
समय के साथ चलते हुये।

स्वरचित
अनिता सुधीर


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शुभ संध्या
शीर्षक- ''समय/वक्त"
द्वितीय प्रस्तुति

प्रभु में मन को रमाया कर
हर वक्त उसको ध्यायाकर ।।

वही है जग का पालनहार
उससे प्रीति लगाया कर ।।

कल को कौन देखा है बन्दे
कल में वक्त न गंवायाकर ।।

सांसों की दौलत मिली है
हर सांस में उसे बुलायाकर ।।

दौलत रोज यह खत्म हो रही
इसका मुनाफा तूँ उठायाकर ।।

नेक कर्म की राहों पर चल
लोक परलोक बनाया कर ।।

जो भी हो जैसा भी हो वक्त
कुछ नेक कमाई कमायाकर ।।

अच्छे की चाहत को बढ़ाकर
अच्छाई मन में तूँ लाया कर ।।

जन्म जन्म की बिगड़ी करनी
उस खातिर कुछ सुझाया कर ।।

हर वक्त अनमोल है ''शिवम"
कोई वक्त न कभी जाया कर ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 19/04/2019


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1भा.19/4/2019/शुक्रवार
बिषयःःः समय
विधाःःःकाव्यःःः

समय की वक्रगति में फंस गया।
मैं कहीं उलझता ही चला  गया।
ईशाशीष जब कभी मिला मुझे,
सचमुच कठनाईयों से उबर गया।

समय बांधने का प्रयास किया।
समय का क्यों उपहास किया।
समय की समय पर जरूरत हमें,
समय ने कभी अट्टहास किया।

समय को जीतना मुमकिन नहीं।
समयबद्ध चलना कठिनता नहीं।
समयानुसार चलना ही सफलता,
क्या समय मिलना मुश्किल नहीं।

समय की नब्ज मैंने टटोली नहीं।
समय समय कुछ  खकोली नहीं।
जीवनभर जिसे पाने भटकता रहा,
समय पर समय की खटोली नहीं।

स्वरचितः ः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.
जय जय श्री राम राम जी

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#समयः#ःःकाव्य
1भा.19/4/2019


नमन मंच को
दिन :- शुक्रवार
दिनांक :- 19/04/2019
शीर्षक :- समय

समय ये बिता जाए,
कर ले बंदे सद्कर्म।
अंतःपुर जाना है तो,
जान ले जीवन मर्म।
समय का घोड़ा,
जाए दौड़ा दौड़ा।
कर्मों का टोटा,
बदले क्यूं मुखौटा।
स्वर्ग नरक का भय,
खाये सबको जाता।
कर्म सुधार अपने,
न हो फलों का टोटा।
बदले क्यूँ मुखौटा,
संगत कर्म अनंत धाम।
सुखद हो हर याम,
कर जग में सुनाम।
क्यों खाए भवसागर में गोता,
बदले क्यूँ मुखौटा।

स्वरचित :- मुकेश राठौड़


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नमन मंच भावों के मोती
दिनांक 19 अप्रैल 2019
दिन शुक्रवार
विषय समय
विधा गीत

🙏      समय-गुरु

ये समय गुरु है सबसे बड़ा,
कब इससे कोई जीता है ।
जो समय सिखाता है सबको,
रामायण है वह गीता है ॥

हाथों में रखी रेती की तरह,
ये जीवन फिसल रहा देखो ।
धीरज धारण करने वाला,
ही तो इस जग में जीता है ॥

ये समय की सुई नुकीली है,
घायल सब मन कर देती है ।
करता है समय तुरपाई भी,
घावों को भी ये सीता है ॥

ये समय है गुरु सनातन से,
आगे भी रहेगा ये भारी ।
मान किया न जिसने गुरु का,
उसका ही दामन रीता है ॥

कैसे भी हो प्रश्नों के पत्थर,
हर प्रश्न का देता है उत्तर ।
ये बड़ी महारत रखता है,
ये ज्ञान का सागर पीता है ॥

ये समय गुरु है सबसे बड़ा,
कब इससे कोई जीता है ।
जो समय सिखाता है सबको,
रामायण है वह गीता है ॥

स्वरचित एवं मौलिक रचना
©®🙏
अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू' ✍


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मंच को नमन
दिनांक -19/4/2019
विषय -समय

समय में समाहित है घात-प्रतिघात
समय समय की ,अपनी अपनी बात ।

✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
समय बना दे
समय मिटा दे
राजा को यह रंक बना दे
कैसे -कैसे कर्म करा दे
समय -समय की बात है ।

संयोग करा दे
वियोग करा दे
जन्म जन्मांतरों को भेंट चढ़ा दे
प्रयास सारे विफल बना दे
समय-समय की बात है ।

भाग्य बना दे
भाग्य मिटा दे
झोपड़ियों का चारण बना दे
रूखे-सूखे से पेट भरा दे
समय-समय की बात है ।

घर बनवा दे
घर बिकवा दे
हालातों से पल में हरवा दे
पल भर में हालात बदल दे
समय-समय की बात है ।

समय का मोल
मानो अनमोल
यह ठहर ना पाएगा
हाथ किसी के ना आएगा
आगे बढ़कर करो सम्मान
समय होता है बड़ा बलवान ।

✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
संतोष कुमारी ‘संप्रीति ‘
स्वरचित

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नमन भावों के मोती
दिनाँक-19/04/2019
शीर्षक-समय
विधा-हाइकु

1.
रुकती नहीं
समय की रफ्तार
ढलती उम्र
2.
पढ़ते हुए
बीत गया समय
ज्ञान अधूरा
3.
बनी पहेली
समय की कहानी
किसने जानी
4.
नित्य घटाता
समय का सूरज
आयु हमारी
5.
पौधों में फूल
समय पे लगते
ये मीठे फल
6.
लाता है स्फूर्ति
उगता हुआ सूर्य
भोर समय
7.
बीता समय
बचपन रंगीला
माँ की गोद में
*********
स्वरचित
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा

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19-04-2019
सादर अभिवादन
समय
समय का चक्र
सरल या वक्र
बस बीत रहा है
मन रीत रहा है
पल-पल जो घट रहा है
कोष से पल कट रहा है
जो पल अतिशेष है
यह कहाँ निर्विशेष है
अतीत का एक अवशेष
पल--भविष्य का अनिमेष
आओ समय को साध लें
वर्तमान पल को बांध लें
-©नवल किशोर सिंह
      स्वरचित

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नमन
भावों के मोती
१९/४/२०१९
विषय-समय

अंत समय जब आयेगा,
तब प्यारे पछतायेगा।
स्वामी बन बैठा है तू,
कुछ न लेकर जाएगा।

ये दुनिया का मेला है,
प्रभु ने खेल खेला है।
सब उसकी कठपुतली हैं,
वह जैसे चाहे नचाएगा।

आदि का अंत निश्चित है,
करले कर्म जो उचित हैं।
माया में तू क्यों भ्रमित है,
जब खाली हाथ ही जाएगा।

नश्वर है संसार ये सारा,
इस सत्य को कभी विचारा,
आंखों पर क्यों बांधे पट्टी,
जो आया सो जाएगा।

अंत शरीर का होना है,
जो पाया सो खोना है।
बांध पोटली सत्कर्मों की,
वही साथ ले जाएगा।

मेरा-तेरा क्यों है करना,
अंत समय से कैसा डरना।
जीवन के हर पल को जी ले,
बीता समय न वापस आएगा।

धर्म-जाति के क्यों पाले झमेले,
मंदिर-मस्जिद में क्यों तू उलझे?
कितने पापड़ बेल रहा है,
सब यहीं धरा रह जाएगा।

अभिलाषा चौहान
स्वरचित,मौलिक

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नमन मंच

समय
पिरामिड

है
काल
समय
गतिशील
अनवरत
अनन्त अनादि
ईश्वर उपहार।

है
नित्य
गतिज
परिवर्तन
समय चक्र
स्वच्छन्द विहग
सुख दुःख दर्पण।

स्वरचित
गीता गुप्ता 'मन'

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