Sunday, April 28

"निष्ठा "27अप्रैल l2019

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                                           ब्लॉग संख्या :-369

नमन मंच -भावों के मोती
दिनांक-27.04.2019
शीर्षक- निष्ठा
विधा-चतुष्पदी
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स्पृहा प्रियवर! तुम्हारी भावनागत सहचरी है ।
पूछते हो तथ्य मुझसे प्राणपण निष्ठा मेरी है ।
जब विलय अवचेतना का सत्य में विश्राम लेगा।
तब हृदयग्राही प्रबोधन आप्त धी से काम लेगा ।।
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      " अ़क्स " दौनेरिया
           (मंच सहचर)
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।। निष्ठा ।।

कर्तव्य के प्रति निष्ठा
दिलाये हमें प्रतिष्ठा ।।

कर्तव्य के प्रति उपेक्षा
कैसी फिर शुभेक्षा ।।

रिश्तों में यह जरूरी
बिन निष्ठा हो दूरी ।।

निष्ठा से हैं भगवान
निष्ठा से न हो अन्जान ।।

एकलव्य निष्ठा मिसाल
धनुर्विद्या सीखी कमाल ।।

हो दुश्वारी हर खतम
जब निष्ठा भरे दम ।।

निष्ठा पहचानो 'शिवम'
निष्ठा लहराये परचम ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 27/04/2019
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सुप्रभात"भावो के मोती"
🙏गुरुजनों को नमन🙏
🌹मित्रों का अभिनंदन,🌹
27/04/2019
    "निष्ठा"
1
"निष्ठा" हो सच्ची
समझे मूर्ख लोग
आज का दौर
2
निष्ठापूर्वक
कार्य हो संपादन
सुफल हाथ
3
निष्ठा, ईमान
कठिन इम्तिहान
डिगा न पाँव
4
स्वार्थी दुनिया
निष्ठा पर सवाल
लाते बवाल
5
स्वरचित पूर्णिमा साह(भकत)
पश्चिम बंगाल
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27अप्रैल2019
      निष्ठा
नमन मञ्च।
अभिनन्दन गुरुजनों,मित्रों का।

निष्ठा हो अगर मानव मन में,
हर कार्य सफल हो जाता।

लगन लगाकर काम करे जब,
जीवन नैया पार हो जाता।

निष्ठा जो ईश्वर में होय,
ध्यान मगन हो जाये पूजा में।
उसे जग वैतरणी से,
पार करने से,
कोई भी रोक नहीं सकता।
हर काम में जरूरी निष्ठां।
परिवार में जरूरी निष्ठां।
मित्रता में जरूरी निष्ठा।
ईश प्रेम में जरूरी निष्ठा।
स्वरचित
वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी
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नमन मंच
दिनांक .. 27/4/2019
विषय .. निष्ठा 
विधा .. लघु कविता 
***********************
....
मेरी निष्ठा सदा रहेगी, भारत माँ के साथ।
एक नही है जन्म-जन्म का, उसका मेरा साथ।
...
माता के सम्मान के आगे, यह जीवन  कुर्बान।
कभी नही गिरने दूँगा मै, माता तेरी मान।
....
वही पुरातन तेरा वैभव, लाना मेरा प्रयास।
अन्तर्मन मे नारायण है, जो तेरे भी पास।
.....
दिव्य धरातल अमृत वर्षा, भारत है वो नाम।
शेर के मन मंदिर मस्तक मे, गुँजे बस नाम।
....
स्वरचित एंव मौलिक 
शेर सिंह सर्राफ
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माँ शारदा कोनमन । मंच भावों के मोती ।दिन शनिवार:-27/4/2019।विषय :-निष्ठा
विधा :/पद्य
सच्ची निष्ठा और आस्था 
श्रद्धा भाव जगाती है ।
नही बदलती वह कहने से
अपना परचम फहराती है ।
निष्ठावान् सदा यश पाता
कांटों के पथ पर चलता है
लहूलुहान हुये पग कितने
वह कभी नही उनसे डरता है।
जीवन  है संघर्ष जहां पर
फिर उससे क्या क्यूं डरना है
 निष्ठा पर जब चोट पड़ी तो
उन चोटों को हंस सहना है ।
स्वरचित :-उषासक्सेना
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जिंदगी कुछ और ही होती अगर।
वक्त न तकदीर जो खोती अगर।

कुछ सुकूं  मुझको भी  आ जाता।
बोझ यूं  सांसे  न जो ढोती अगर।

हो गया  होता  मुकम्मल ये सफर।
ये  मंजिलें  कांटे नही बोती अगर।

हाथ  उसके भी पाक थे ईमान से। 
दाग़ वो बेदाग़ जो ना  धोती अगर। 

जागता  हूँ  नींद में  और  ख्वाब में। 
लगती भले आंखें मेरी सोती अगर।

मैं फरिश्ता हो गया होता "सोहल"।
अकीदत तुम्हे इश्क में होती अगर।

                       विपिन सोहल

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नमन मंच भावों के मोती
शीर्षक        निष्ठा
विधा        लघुकविता
27 अप्रैल  2019,शनिवार

निष्ठा और लगन हो मन में
असंभव सब संभव होता
ज्ञान पिपासु इस जगति में
कभी नहीं जीवन मे रोता
       निष्ठा और स्नेह बल पर 
       हम सदा ही मंजिल पाते
       कर्मवीर नित सद्कर्मो से
       रसमय मधुर वे फल खाते
निष्ठा और विनय मिलाकर
हम शिक्षा साकारित करते
अनुशासन और संस्कारों से
जीवन मे नव खुशियां भरते
      निष्ठा हिय का गुण अद्भुत
      सकर्मकता जीवन में भरते
      खून पसीना सदा बहाकर
      हर विपदाओं को मिल हरते
निष्ठा और भक्ति के बल पर
पुरुष सदा पुरूषोत्तम बनता
दीन दुःखी की करता सेवा
परहित डग नित चरण बढ़ाता
        निष्ठा प्यार दया समर्पण
        से मिलते हैं जग में मोती
        निःस्वार्थ जीवन में नित
        ज्ञान अखंडित जले ज्यौति।।
स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।
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🌹नमन  भावों के मोती🌹
◆तिथि_27\04\2019
                 (निष्ठा  )
     भारोसा   कर
     देखना उस पे 
     जो  रात  के  बाद जो 
     सुबह  बनाता  हैं ।
     रखना निष्ठा  उसके  लिए ,
     जो रात  के  
     सीने  में  भी 
     सूरज  ऊगाता  हैं ।

     नहीं  हैं ,वो मामुली ,
     लोग भगवान  कहते  हैं ।
     अदृश्यता  में  
     छुपे राज  कितने  ही ,
     ज़र्रे  जर्रे  में मौजूद उसके  '
     निशान  रहते हैं ।

     मूंद कर  आँख  
     भी  देखों  तो 
     वास्ता  नजर  आता  हैं 
     घिर आए  तूफान भी
     तो रास्ता  नजर  आता  हैं ।

     लाख  अंधेरे  हो  
     हो  सितम  आंधियों  के  भी "
     तिनके भी  बचा लेते हैं ।
     न जाने  कहां  से  
     फरमान  आता  हैं ।

     लोग  कहते पत्थर
     बेजान  होते  हैं ।
     वही  पत्थर  को  
     तराशो  तो  ,
     जान  होते  हैं ।
     करम के फ़ूटों को
     दिखता  न  जाने  क्यूँ?
     जरा आस्था 
     कर के कर  देखो
     आस्था  के  बल में  ही 
     भगवान  होते   हैं ।
~~``
पी राय राठी
भीलवाड़ा, राज

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1भा.27/4/2019,शनिवार
बिषयःःः #निष्ठा #ः
विधाःःःकाव्यःःः

लगन और अपनी निष्ठा से माँ,
तेरी पूजा भजन मै कर पाऊँ।
आस्था जाग्रत हो हृदयांचल में,
कुछ सुखद सृजन मै कर पाऊँ।

सदा लगनशीलता बनी रहे माँ,
कुछ परोपकार यहां करने की।
कर्म प्रधान सदैव मानस में हो,
सदेच्छा सरोकार यहां रहने की।

नित निष्ठाऐं फलीभूत होती  हैं,
बस प्रभु लगनशीलता बनी रहे।
कर्मठता हो  कुछ भी करने की,
इस हृदय सहनशीलता बनी रहे।

भक्तिभजन नहीं किसी मतलब के,
जबतक मनमानस में नहीं आस्था।
हो शीतलता मनोमालिन्य नहीं उर,
परिणाम मिले जब हो सच्ची निष्ठा।

स्वरचितः ः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.
जय जय श्री राम राम जी
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1भा.#निष्ठा# काव्यः ः
27/4/2019/शनिवार

नमन् भावों के मोती
27अप्रैल19
विषय निष्ठा
विधा हाइकु

लालच आती
'निष्ठा' धूल फांकती-
परिवर्तन

कर्तव्य'निष्ठा'
जीवन सुखमय-
मनुष्य धर्म

देश प्रतिष्ठा
जन्मभूमि की 'निष्ठा'-
सतत रक्षा

उत्तम शिक्षा
गुरू के प्रति 'निष्ठा'-
जीवन ज्ञान

ज्ञान विवेक
ईश्वर प्रति 'निष्ठा'
मनुष्य धन्य

मनुष्य जन्म
माता पिता की सेवा-
पहली 'निष्ठा'

मनीष श्री
स्वरचित
रायबरेली
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आज का विषय निष्ठा,।
झूठ को सीने से हम लगा बैठे है,
सच के जलते दीये हम बुझा बैठेहै।।1।।
मानवता की बगिया मेतुम देखो,
दानवलीला नेता चला  बैठे है।।2।।
हिंसा घृणा के बीज हम ही बोते रहे है,
सत्य निष्ठाप्रेम को हम जला बैठे है।।3।।
जनसेवक कहाँ है ,झूठों वादो से,
देश के नेता हमें बहला बैठै है।।4।।
स्वरचित गजल गजलकार देवेन्द्र नारायण दासबसना छ,ग,।।
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भावों  के मोती दिनांक 27/4/19
निष्ठा

विधा - पिरामिड वर्ण 

है
निष्ठा
ऐ माता
हो कल्याण 
वंदन   वंदना 
दंडवत प्रणाम 

छंदमुक्त कविता 

रखें निष्ठा अपने मौला पर
रहेगा साथ   साये सा
फकीर ने खोल दी छोली 
नियामत बरसी दुनियाँ  पर

गर रहेगा इंसा मेहनतकश
चलेगा दीन ईमान  पर
रहेगी रहमत  उस मौला की
बने रहे बस निष्ठावान 

रहेगी  निष्ठा  जब ईश पर 
बनेंगे  सब बिगड़े  काम
राह बनेगी आसान
छूऐगा सफलता के कदम इन्सान 

स्वलिखित 
लेखक संतोष श्रीवास्तव  भोपाल
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मंच को नमन🙏
शुभ दिन साथियों 😊
दिनांक- 27/4/2019
शीर्षक-"निष्ठा"
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निष्ठा का आज मैं बखान करूँगी, 
उन महान हस्तियों को याद करूँगी, 
हर युग की झलकियाँ पेश करूँगी, 
अपने छोटे से ज्ञान से कुछ रोशनी करूँगी |

सतयुग का हुआ शुभारंभ, 
विष्णु भक्त प्रह्लाद उत्पन्न, 
भक्ति में थी इतनी निष्ठा,
छू न पायी नकारात्मक शक्तियां |

नरसिंह रूप में विष्णु आये, 
प्रह्लाद की जान बचाये,
निष्ठा भक्ति से हुए प्रसन्न, 
दिये बालक को इच्छित वर |

त्रेता युग में श्री राम पधारे, 
वचन पिता का निष्ठा से निभाया,
चौदह वर्ष वनवास में बिताया, 
दु:खियों को गले से लगाया |

उर्मिला की निष्ठा सर्वोपरि, 
चौदह वर्ष पति विरह में वो जली, 
पतिव्रता की महान मूरत बनी, 
लक्ष्मण संगनि कमजोर न पड़ी |

द्वापर युग में कृष्ण पधारे, 
रास रसइया सबको प्यारे, 
राधा की प्रीत में निष्ठा, 
राधे रटो तो मिलते कृष्णा |

मीरा की भक्ति में थी निष्ठा,
हो गई वो तो कृष्ण दिवानी,
विष का प्याला ऐसे पी गई, 
पीता जैसे कोई शीतल पानी |

कलयुग जब धरा पर आया, 
घोर अंधेरा खूब छाया, 
महात्मा बुद्ध अवतरित हुए, 
कष्ट जनों के उन्होंने हरे |

कर्तव्यनिष्ठा उनमें बहुत थी, 
राजगद्दी तक यूँ ही छोड़ दी,
जन कल्याण को लक्ष्य बनाया, 
सत्य, ज्ञान का मार्ग दिखाया |

     स्वरचित *संगीता कुकरेती*
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निष्ठा
🎻🎻🎻🎻

मन का आभूषण है निष्ठा
यहाँ हस्ताक्षर करती प्रतिष्ठा
मिलता अलग आत्म संतोष
स्वयम् का स्वयम् को यह पारितोष।

निष्ठा जब जब खोई है
आबोहवा पूरी रोई है
 मनुष्य शरीरमय तो होता है
पर उसकी आत्मा ही सोई है।

जहाँ से हमारा उदर भरता
बादल हमारे लिये तत्पर रहता
खुशी का झरना झर झर बहता
पवन का झोंका मत डर कहता।

निष्ठा न हो यदि उसके प्रति
तो कुँठित है हमारी यह मति
हम भूल गये हम भूल गये 
भावना जो होती देश के प्रति।
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शुभ साँझ 🌇
नमन "भावों के मोती"🙏
27/04/2019

विषय:-"निष्ठा"  

समय की एक आंधी और निष्ठा बिखर जाती है, 
घृणा आखिर श्रद्धा और विश्वास  निगल जाती है,
मतलबी निष्ठा कहीं जुड़ नहीं सकती , 
एक परख में ही उसकी आवाज बदल जाती है l

बदलते हैं विचार भाषा बदल जाती है, 
आवरण की परतें उतरती चली जाती है, 
निष्ठा माँगती है निःस्वार्थ समर्पण, 
रूठी तो व्यक्तित्व छोड़ चली जाती है l

स्वरचित 
ऋतुराज दवे
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नमन  मंच : भावों के मोती
तिथि       :27/04/19
विषय      :निष्ठा 
विधा      :हाइकु      
***

कर्तव्य निष्ठा
राष्ट्र प्रगति पथ
समाजोन्नत

स्वयं में निष्ठा
मूल तत्व जीव का
आध्यात्मिकता

रिश्तों में निष्ठा
प्रभु का वरदान 
सहभागिता

सीमा प्रहरी
कर्तव्यनिष्ठ  सेना
प्राण उत्सर्ग

समय निष्ठा
ऋतु  परिवर्तन
प्रकृति चक्र

स्वरचित
अनिता सुधीर श्रीवास्तव
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आप सभी को 
हार्दिक नमस्कार 

भागम-भाग मची हुई,चली होड़  की  नाँव।
स्वप्न लहर में डूबता,जाना है किस ठाँव।।

अभिलाषित मन भागता,तृषित मृगा सी छाँव ।
तृप्ति बूँद की खोज में,थकते कभी ना पाँव।।

जीवन चलता अनवरत,कहीं ओर ना छोर।
निशा कभी घनघोर है,कभी सुहानी  भोर।

कंटक पथ को देखकर,पीछे हटे न पाँव। 
मंजिल ऐसे  पथिक की,सदा चूमती पाँव।

आशा निष्ठा है जहाँ,और हृदय  विश्वास। 
पा लेता गंतव्य है,होता नहीं निराश।।

स्वरचित 
सुधा शर्मा 
राजिम छत्तीसगढ़

 27-4-2019
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नमन भावों के मोती
शीर्षक  --निष्ठा
दिनांक -27-4-19
विधा --दोहे
1.
निष्ठा हो गर सोच पर , कल भी अपना होय।
जगत विश्वास पर टिका,अभाव में सब खोय।।
2.
आपस में निष्ठा अगर, मिले स्वस्थ आलोक।
इक दूजे की मदद से, टल जाता है शोक।।
3.
भावना की दरिद्रता, बढ़ती सतत प्रमाण।
निष्ठा नित मृत हो रही, बढ़े सन्देह मान।।
4.
समझें अवसर को सदा, अपना पूरा दास।
चरण चूमती सफलता, निष्ठा बनती खास ।।

******स्वरचित*******
     प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551
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🌹भावों के मोती🌹
27/4/2019
"निष्ठा"

निष्ठा चीरती रात्रि का अंधकार है
निष्ठा की बाती से
प्रेम लौ में तपकर
समर्पण भाव की ज्योति से
प्रकाशित होता सद्भाव है।।

निष्ठा चाहती त्याग बैर-भाव का
निष्ठा की महत्ता
मजबूत डोर सी
अनमोल बंधन का ख्याल
बनाता अद्भुत संसार है।।

वीणा शर्मा वशिष्ठ

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नमन मंच को
विषय : निष्ठा
दिनांक : 27/04/2019

निष्ठा

हरि मिलन की चाह हो,
शुद्ध ह्रदय प्रेम बसा हो,
मूर्तियाँ भी बोल उठी हैं,
अक्सर यहां भगवानों की,
हार कभी न होती है,
सच्चे निष्ठावानों की।
रंग प्रेम का लगा के मीरा,
कृष्ण दीवानी हो गयी ।
उसकी निष्ठा के ही कारण,
अमर कहानी हो गयी ।
प्रेम से उसके हारे कृष्णा,
सेज सजी अरमानों की,
हार कभी न होती है,
सच्चे निष्ठावानों की।
शबरी की निष्ठा रंग लायी,
राम बंध गये प्रेमपाश में ।
द्रवित नैन हुए रघुबीरा,
अद्भुत प्रेम के अहसास में ।
निष्ठा को कोई आंक सके,
औकात कहां पैमानों की,
हार कभी न होती है,
सच्चे निष्ठावानों की।
निष्ठा से करे देश की सेवा,
सीमाओं पर सेनानी।
अपना सुख,अपने भी छोड़े,
देश रक्षा की है ठानी।
हौसलों से बिफल करते,
चाल उन शैतानों की,
हार कभी न होती है,
सच्चे निष्ठावानों की।
हार कभी न होती है,
सच्चे निष्ठावानों की।

जय हिंद
स्वरचित : राम किशोर, पंजाब ।
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नमन मंच को
दिन :- शनिवार
दिनांक :- 27/04/2019
विषय :- निष्ठा

निष्ठा हो कर्तव्य की..
तब इंसां कर्तव्यनिष्ठ बन जाता...
निष्ठा हो सत्य की..
तब इंसां सत्यनिष्ठ बन जाता..
सत्य अंहिसा का पाठ कोई..
धर्मनिष्ठा से पढ़ा जाता..
सच्ची मानवता का पाठ कोई..
निज कर्म से पढ़ा जाता..
मानव प्रवृत्ति संकुचित हो..
निष्ठा गर न समुचित हो..
आशा,निराशा जिंदगी के पहलू दो..
बन कर्मनिष्ठ जीवन को आधार दो..
संघर्ष अगाध जीवन है..
जो लड़ा वही जीवंत है..
हरती तिमिर ज्ञान निष्ठा हर..
हर मन कोना उज्ज्वल कर..
जीता हर बाजी जिंदगी की...
लड़ा जो संकल्पनिष्ठ हो..
प्रगति का हर सोपान चढ़ा..
जिया जो कर्मनिष्ठ हो..

स्वरचित :- मुकेश राठौड़

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भावों के मोती 
दिनांक 27/04/2019
वार - शनिवार 

विषय- निष्ठा!
विधा - विजया घनाक्षरी !
विधान- 8, 8 ,8 ,8 प्रति चरण, 
चार चरण समतुकान्त !
चरणान्त लघु गुरु !

प्रभु के सृजन तले,
     प्राण मिट्टी दीप जले, 
सभी जीव फूले फले, 
          अनंत विकार टले !

नेह में जीवन चले,
             अनुपम रंग ढले,
सज़ग विचार भले, 
          कामना वैभव खले !

साधक दीपक जले, 
            श्याम अनुराग ढले,
पर पीड़ा प्राण पले, 
          आत्म ज्ञान सत्य तले !

दया निधि छाँव मिले, 
              कुंठित कुसुम खिले, 
अंबर विराट झुले,
             निष्ठा भक्ति भाव घुले !!

छगन लाल गर्ग विज्ञ!
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शुभ साँझ 
नमन "भावों के मोती"🙏
27/04/2019
विधा-कुंडलियां छंद 
विषय:-"निष्ठा"
🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺
मन में हो निष्ठा तेरे , बनते  बिगड़े काम।
हाथों की रेखा नहीं ,बुद्धि सवारे काम
बुद्धि सवारे काम,अगर तेरे हो सत्कर्म 
राम ,कृष्णा,अल्लाह ,मिलते जब अच्छे करम
नीव बने मजबूत ,कर्म तब जब अच्छे होंगे 
मिलजुल कर रहे सभी,तब न मन खट्टे होंगे 
स्वरचित 
नीलम शर्मा #नीलू
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नमन भावों के मोती 🌹🙏🌹
27-4-2019
विषय:-निष्ठा
विधा :- पद्य 

प्रेम के  महा  सागर   में निष्ठा ,
बह   जाती है काग़ज़ी नाव सी ।
एक अहंकार की लहर उठ कर , 
लीलती  निष्ठा  को  उकाब सी ।

निष्ठा मन  का दृढ विश्वास है ,
सदा  हृदय को  रहे आभास है ।
अंध  विश्वास की   जन्म धात्री,
परिणाम    निराशा   संत्रास  है ।

महाभारत   में    निष्ठाएँ    टूटी ,
भीष्म  द्रोण   कृपा   निष्ठा थे ।
पाँचाली   के   क्रंदन  में   फूटी ,
निष्ठा   की  मिथ्या  प्रतिष्ठा थे ।

रिश्तों  की  बुनियाद   है निष्ठा ,
भक्तों की  फ़रियाद है  निष्ठा ।
प्रेम   में   आँसू  झर झर  बहते ,
आती   उसकी  याद  है   निष्ठा ।

सुने  अंतरिक्ष   में  स्वर   गूँजता ,
वह   भी  अनहत  नाद है निष्ठा ।
जड़   चेतन   के  सौर   मंडल में , 
जो    भी    चले संवाद है निष्ठा ।

स्वरचित :-
ऊषा सेठी 
सिरसा 125055 ( हरियाणा )
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भावो के मोती--सादर नमन मंच को
दिनांक----27--4---2019
विषय-------निष्ठा
विधा/------कविता
सच्ची निष्ठा रखें गुरु मे
ब्रह्म ज्ञान हम पाये
पाये अच्छे संस्कारों को
जीवन अमूल्य बनाये
रखें एकलव्य सी निष्ठा तो
धनुर्धर महान बन जाये
राणा प्रताप सी निष्ठा रखकर
अपनी आन बचाये
निष्ठा हो अभिनंदन सी
जो सीमा पार चले जाये
कर आतंक का सफाया
देश का गौरव बढाये
कर्मों की निष्ठा जीवन में
सांसो की निष्ठा प्राणों मे
क्यों हो निष्ठा विहीन हम
जो जीवन पड जाये संकट में
निष्ठा रखें माँ शारदे मे
जो ओज लेखनी मे भर दे
कर्मशील बनाकर हमको
जीवन को रोशन कर दे।
स्वरचित-----🙏🍁🙏

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सत्यता कर्तव्य निष्ठा गुजरे दौर की बात हो गई हैं 
ह्रदय में सबके स्वार्थ के विचार अब जन्म ले रहे हैं 
झूठ मक्कारी खूब फल-फूल रहे हैं 
हर तरफ मानो अब इनका ही बोलबाला हैं .

प्रेम सम्पर्ण से बना हैं ये ह्रदय मेरा 
निष्ठा विश्वास का जिसमें सार हैं 
कैसे इस समाज से इसको बचाऊँ
कैसे अपना यहाँ मैं तालमेल बिठाऊँ .

सबने अथक किया प्रयास  
निष्ठा और कर्तव्य से मुझे गिराने की 
हर बार गिरती रही फिर हर बार सँभलती रही 
कोई रोक नहीं पाया मेरे मनोबल भरी निष्ठा को .

बस ह्रदय की हैं अब तम्मना  
ध्येय मेरी अटल  निष्ठा 
मन में विजय की पराकाष्ठा  
लहराना हैं विजय पताका .
स्वरचित:-  रीता बिष्ट
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नमन मंच
"भावों के मोती"
दिनांक -27/4/2019
विषय-निष्ठा

देख बांसुरी के
भीगे नयन 
भर गए अचरज से
कृष्ण
    पूंछ बैठे -
    "है प्रिय ये अश्रु कहाँ से नयनो मेँ 
भर लायी ?
किसके शब्दो से ह्रदय चाक कर लायी "?
झुका पलको को बोली बांसुरी
 जलते है सब मुझसे,देते हैं
ताना आपके नाम
का ,लगाते है आप पर
आरोप पक्षपात का
कहती राधा और गोपियाँ आप मुझे
हर वक़्त रखते है साथ मुझे ही देते
अपने अधरों का स्पर्श
नही समझे वो
मेरी निष्ठा को आपके प्रति
'देखिये न जितनी करती है वे आपसे प्रेम उतनी तपस्या मैं भी करती,
पहलेकाटी जाती
फिर छीली जाती
फिर घिस घिस करते मुझे चिकना
फिर छैनी से मैं
छेदी जाती तब जाकर मैं आपका
सानिध्य पाती 
कान्हा मुस्कुराए बोले 'हे प्रिय
तुम क्यो दुखी
होती हो मन को
अपने क्लेश देती हो,मेरे प्रति तुम्हारी अटूट श्रद्धा तुम्हारी
निष्ठा बन गयी
हम एक दूसरे के पर्याय हो
गए
कृष्ण बाँसुरी के बिन बाँसुरी कृष्ण
बिन अधूरी रह गयी ।
उन सबकी बातों पर न कान धरो
तुम मेरी अधरों पर न होगी तो क्या?
मैं मीठी तान छेड़ पाऊंगा 
न गोकुल की  शाम न होगी भोर
न गोपी नाचेंगी न
न राधा पाएंगी झूम 
तुम कुछ न सुनो
आओ मेरी तान
की शोभा बनो
मैं तुम्हें वरता हूँ
तुम मेरी अधरों
की शान बनो ।
स्वरचित
अंजना सक्सेना
इंदौर(म.प्र.)

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नमन मंच
विधा-लघु कविता
"निष्ठा"

सह रहा हूँ
मार बुरे वक्त की
मन्जिल दूर है अभी
पर खड़ा हूँ
अडिग मैं
कर्तव्यनिष्ठ बन
तूफानों के आगे
होंसले बुलंद हैं मेरे
तलाश है मुझे अभी भी
सही वक्त की।

राकेशकुमार जैनबन्धु
गाँव-रिसालियाखेड़ा, सिरसा
हरियाणा
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नमन मंच
दिंनाक-२७/४/२०१९
"शीर्षक-निष्ठा"
देखकर उसकी सच्ची निष्ठा
जगा मन एक आस
प्रयास सफल हो जाये यदि
करें हम एक नेक कार्य।
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थोड़ी सा समय चुराकर
दे,दे थोड़ा उसे अक्षर ज्ञान
धीरे धीरे सीख जायेगा
मूढ़ बनेगा चतुर सुजान।

सोच समझ कर किया प्रयास
लेकर हरी का नाम
देखकर उसका पढ़ाई के लिए निष्ठा
दिया उसे अक्षर ज्ञान।

दिन बीते और समय बीता
बना छात्र होशियार
उसने अपनी सच्ची निष्ठा से
पा लिया समाज मे स्थान।

हम भी अपने कर्म क्षेत्र में
रहे सदा निष्ठावान
सब काम सफल हो जाये
जाने सकल जहाँ।
स्वरचित-आरती-श्रीवास्तव।

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💐भावों के मोती 💐
💐सादर प्रणाम 💐
    विषय=निष्ठा 
    विधा=हाइकु 
    🌻🌻🌻🌻

(1)निष्ठा हो पास
     हर कार्य आसान 
     बात ये मान
     🌻🌻🌻
(2)निष्ठा है मंत्र
     चलता हर वक्त 
      प्रजा या तंत्र 
     🌻🌻🌻
(3)रिश्तों की गाड़ी 
     निष्ठा का हो पेट्रोल 
      जाती है दौड़
     🌻🌻🌻
(4)चाहा जो मिला 
     निष्ठा से कार्य किया 
     सफल हुआ 
     🌻🌻🌻
(5)निष्ठा है नहीं 
     मन माफिक फल
     मिलेगा नहीं 
    🌻🌻🌻
(6)कैसा है दौर
     काटे आधुनिकता
     निष्ठा की डोर
     🌻🌻🌻
(7)निष्ठा का जादू 
     पत्थर में ईश्वर 
     देते दर्शन 
     🌻🌻🌻
(8)मीरा ने पिया
     निष्ठा से जहर भी
     बना अमृत 
     🌻🌻🌻
(9)दौलत आए
      जब डगमगाए
     निष्ठा की नाव 
     🌻🌻🌻
(10)कभी ना जोड़े 
       बंद कर नयन 
       निष्ठा संबंध 
       🌻🌻🌻
===रचनाकार ===
मुकेश भद्रावले 
हरदा मध्यप्रदेश 
27/04/2019
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नमन भावों के मोती
दिनाँक-27/04/2019
शीर्षक-निष्ठा
विधा-हाइकु

1.
निष्ठापूर्वक
अराधना गुरु की
पुष्प अर्पित
2.
कर्त्तव्य निष्ठा
सफलता है पाती
अचूक लक्ष्य
3.
मधुर रिश्ते
विश्वास पर टिके
निष्ठा बनते
4.
कर्म में निष्ठा
मिलती सफलता
हर्षित मन
5.
कर्म की भक्ति
परिश्रम में निष्ठा
जगाती शक्ति
**********
स्वरचित
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा

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नमन भावों के मोती , 
विषय , निष्ठा , 
शनिवार , 
२७ , ४ , २०१९ ,

अपने अपने संस्कार हैं , संस्कार अनुसार ही सोच होती है ,

निष्ठा की कुछ कमी नहीं है , ये अलग बात है वो कहाँ होती है ।

धर्म कर्म रिश्ते नफरत सब , निष्ठा की ही बातें हैं ,

सत्यनिष्ठ कम ही मिलते हैं , ज्यादा आघातों की ही बातें हैं । 

हर युग मेंं निष्ठायें बदलीं हैं फिर ये तो आखिर कलियुग है । 

हित अनहित हावी रहता है , निष्ठा रंग बदलती है । 

बिरला ही कोई मिलता है , निष्ठा जिसकी भले कर्मो में रहती है ।

देश हित में जब निष्ठा होती है ,
यश गौरव की तब बात होती है।

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश ,

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नमन मंच
27-4-2019
निष्ठा

नेह  प्यार  की  बोली हो 
पूजा की अक्षत रोली हो 
हाथ बंधी एक मौली हो 
खिल जाते  हैं फूल वहां 
निष्ठा और विश्वास जहां 

करुणा की चाहत फैली हो 
मन की  चादर ना  मैली हो 
राहें प्रीत की गलियों जैसी हो 
खिल  जाते  हैं  फूल   वहाँ 
निष्ठा  और  विश्वास   जहाँ 

वो  मन  मंदिर  बन जाता 
उजास वहीं  पर रच जाता 
सौरभ हर दिल बस जाता 
खिल  जाते  हैं  फूल  वहाँ 
निष्ठा और  विश्वास   जहाँ

मीनाक्षी भटनागर
स्वरचित
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27/4/19
भावों के मोती
विषय- निष्ठा
_________________
निष्ठा और समर्पण 
प्रेम और विश्वास
रिश्तों को रखें बाँध कर
तब बनता है परिवार
स्त्री पुरुष के त्याग से
पुरुष की निष्ठा
परिवार का विकास
धूप हो या बरसात
सिरदर्द हो या बुखार
बस एक ही चाह है
कमी न खले किसी को
किसी भी अभाव की
लगा रहता पूरी निष्ठा से
आज्ञाकारी पुत्र बन 
माँ-बाप की सेवा
कठोर पिता की 
भूमिका बच्चों का हित
धेर्यवान पति बन 
पत्नी की आशाएं पूरी करता
पता है उसको 
फ़िर भी कमी लगती है
सबको उसके समर्पण में
पर वो पुरुष है ग़म दिखाता कम
पर लगा रहता कर्त्तव्य पथ पर
पूरी निष्ठा ईमानदारी से
स्त्री बाँध कर रख देती
ख्वाहिशों को अपनी
भूल जाती सपने सारे
कर्त्तव्यों का पालन करने में
निष्ठा से निभाती रिश्ते
बड़ों का सम्मान
पति के लिए समर्पित
ममतामई माँ का रूप
हर रूप को खुश होकर जीती
यही निष्ठा नारी की
उसको सबसे ऊपर रखती
***अनुराधा चौहान***©स्वरचित ✍
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सादर नमन
विधा-हाईकु
विषय- निष्ठा
निष्ठा की नैया
नैतिकता लहरें
मीठे संबंध
राहें अनेक
पगडण्ड़ी सहारा
निष्ठा बढ़ती
दिल आँगन
समर्पण है निष्ठा
प्रेम के फूल
*****
स्वरचित-रेखा रविदत्त
27/4/19
शनिवार

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