Wednesday, June 26

"मोबाईल"25जून 2019

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ब्लॉग संख्या :-428


।। मोबाइल/फ़ोन ।।

बुराई मत देखो निकलना सीखो 
खड़े मत रहो सदा चलना सीखो ।।

हवायें भी हैं काँटे भी हैं धूल है
हर मुश्किलों में संभलना सीखो ।।

दुनिया कभी न बदली न बदलेगी
अपने आप को बदलना सीखो ।।

मोबाइल बुरी नजर से देखने वालो
कमल को देखो और खिलना सीखो ।।

अर्जुन की तरह अपना निशाना देखो
नजरें पढ़ लक्ष्य से न डिगना सीखो ।।

सन्तुलन सादगी सजायी 'शिवम' ज़ीस्त
अति वाली आदतों में न ढलना सीखो ।।

अच्छाई बुराई सिक्के के दो पहलू
मोबाइल में ये सूत्र लागू करना सीखो ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 25/06/2019

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नमन मंच भावों के मोती
शीर्षक- मोबाइल
मेरी प्रस्तुति-
#एक_दिन_मोबाइल_बिन

बचपन से ही पढ़ते रहे कि तकनीक बन जाती है अभिशाप यदि नतमस्तक हो इंसान करें इसकी दासता स्वीकार।
मोबाइल स्वयं तो नाम के अनुरूप ही चलित उपकरण है लेकिन इसने हमें स्टैच्यू के पोज में कर दिया।
एक दिन आ गया इसमें कोई फॉल्ट और जिंदगी हो गई जैसे खाना हो बिना साल्ट।
हम हुए ऐसे जड़ जैसे सेना के चीफ ने बोल दिया हो हाल्ट।
असीम खिन्नता के हुए शिकार,
 लगा न हो जाए कोई मनोविकार। 
एक-एक लाइक से जी रहे थे, अब गरल पी रहे थे।
सारी कायनात से हो चुके थे बेजार ,
अंतस में मचा था घोर हाहाकार।
निकल चुका था आधा दिन , जैसे जागे हों सारी रात तारे गिन - गिन।
अवसाद की गर्त में पहुंचते ,उससे पहले ही किया आत्म विश्लेषण और मंथन कि आखिर यह संचार का साधन है या कोई संचारी रोग। वाकई छूत की तरह फैलता है। 
कुछ घंटों में ही हम हो चुके थे निस्तेज, निष्प्राण, निष्प्रयोजन।
वाकई मोबाइल ने रिश्तों से भी टच छुड़वा दिया ।

#मोबाइल_बिन_हो_गया ,जीना यूं दुश्वार।
कहे शालिनी तज अभी ,लत इसकी बेकार।।

इस बिन दुःखी यूं हुई, जैसे जल बिन मीन।
सारे साधन पास है, क्यों बनती हूँ दीन।।

#मोबाइल_की_दास_हुई, रिश्तों से हूंँ दूर।
गिने स्वयं के दोष तो, धूप खिली भरपूर।।

कुदरत से दूरी बनी, मिला देह को शाप।
सही समय पर चेतिए, मिट जाए संताप।।

शालिनी अग्रवाल
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित
25/6/2019

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नमन मंच भावोंके मोती
विषय     मोबाइल
विधा      लघुकविता
25 जून 2019,मंगलवार

दूर देश में बातें करते हम
सुख दुःख से अवगत होते।
मोबाइल जीवन पर्याय है
हँसते गाते लेकर कर सोते।

कला सन्निहित मोबाइल
सर्व गुणों का यह आगार।
सकारात्मक अगर सोच है
खुशियां मिलती अपरम्पार।

दूर रखो अबोध बच्चों को
शुभ अशुभ वे क्या जाने?
वह मात्र खिलौना समझे
मोबाइल सुख साधन माने।

भावों के मोती सजते नित
काव्य बेल नित फैल रही है।
अंजाने होकर भी हम सब
स्नेह किरण हिय खेल रही है।

स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

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नमन🙏भावों के मोती🌹💐
विषय:-फोन/मोबाइल
🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀
एक पुरानी रचना फिर से पढ़ें 

विधा:-छंद मुक्त कविता

दिखे नहीं जब प्रिय मोबाइल दिल मेरा घबराये
बार बार तुझे निहारते अँखियाँ भी थक जाये😂

लेकर तुझको साथ में बैठूँ मन आतुर हो जाये😂
जो तुझको कोई छीन ले मुझसे लाल आँख हो जाये

सुबह सवेरे वंदना स्तुति तू ही तो कर बाएं 😂
तू ही मेरा कान्हा और तू ही भगवान कहा ये

जब काम से फुरसत मिलती तुझे देख मुस्करा दूँ
खाना पीना भूलूँ फिर तुझे देख पेट भर जाये😂

ये हालत है मेरी अब कोई राह नजर नहीं आये
ऐसी व्यथा कथा के आगे सब बेबस हो जाये😂

स्वरचित
नीलम शर्मा #नीलू

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करार ए दिल को ना मिलता, जो तू मुझसे नही मिलता।
तुझे बस देख के मेरा ये दिल,खुशियों भरा खिलता॥
......
मेरी है आरजू तुझसे,मेरे जीवन का हर सय तू।
तेरी तस्वीर आँखो मे, मै हर पल देखता रहता॥
....
नही जब पास तू रहती, तुम्हे मै ढूढँता रहता।
तेरे इनबाक्स मे जाकर, मोबाइल चेक मै करता॥
.....
रही तस्वीर की ख्वाहिश, जो तेरे साथ मेरा हो।
मिलेगे आज शायद हम यही बस सोचता रहता॥

झूठे-सच्चे  ख्वाब  सजाना  छोड़ दिया।
अरमानों  के  बाग  लगाना  छोड़ दिया।

जब से  इन  हाथों में  आया  मोबाइल है।
सब लोगों ने आवाज़ लगाना छोड़ दिया।

इतनी  सीलन  है  रिश्तों  में  आज   कहूं।
माचिस ने भी  आग  जलाना छोड़ दिया।

भूख  बनीं  दुश्मन  क्यों  पेट नहीं  भरता।
जबसे  अपने  घर का  खाना  छोड़ दिया।

पूछा जो  दिया  क्यों  जवाब हाथ पैरों ने।
तुमने  जो सुबह  घूमने  जाना छोड़ दिया।

जबसे हमको  दी  दाद  तुम्हारी आंखों ने।
हमने भी  महफिल  में  गाना  छोड़ दिया।

रुसवा ना हो जाओ तुम दुनिया में सोहल।
बस नाम तेरा  होंठों पर लाना छोड़ दिया।

                                विपिन सोहल

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नमन भावों के मोती
आज का विषय, मोबाइल
दिन, मंगलवार
दिनांक, 2 5,6,2019,

मोबाइल हमारा हमको तो लगता है सबसे प्यारा ।

जब फुरसत हो मोबाइल से अपना वक्त गुजारो।

नई नई खबरों के संग संग मनोरंजन भी पाओ ।

हुनर सीखने के कितने ही कालम इसमें पाओ।

प्यार अगर हो हिंदी भाषा से कागज कलम उठाओ ।

साहित्यिक अभिरुचि के समूह में शामिल होते जाओ।

पंख लगाकर भावनाओं के कल्पनाओं को सजाओ।

दायरा अपने मित्रों का कितना ही विस्तृत करते जाओ।

समझ मगर अपनी सदैव ही तुम जीवंत बनाओ।

गुण अवगुण मौजूद सब जगह गुणों को अपनाओ ।

दूर नहीं लगे कोई अपना वीडियो काल से सुख पाओ ।

कम से कम कीमत में अकेलेपन को दूर भगाओ ।

प्यार दया ममता ज्ञान कला का अद्भुत भंडार पाओ ।

सुविधा के लिए है मोबाइल गुलाम इसके मत हो जाओ ।

स्वरचित, मीना शर्मा, मध्यप्रदेश,
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नमन मंच
भावों के मोती
25/6/2019::मंगलवार
विषय--मोबाइल

मोबाइल ने जकड़ कर
सबको कर किया है मस्त
रिश्ते नाते आज हुए हैं
देखो बहुत व्यस्त
कोई मिलना नहीं चाहता
किसी से
बस वाट्सअप और एफ बी पर
हाय हैल्लो, सुप्रभात
और इक प्यारी सी सेल्फी से
होती आपस की मुलाक़ात
कुछ याद रखने की
आवश्यकता ही नहीं रही
एक अलर्ट !!!!
जन्मदिवस का
या विवाह वर्ष गाँठ का
कीपैड और उंगीलियाँ
कर देतीं बाकी का सारा काम
कहाँ अब कोई अहसास बाक़ी
कोई अकेला है या कौन बीमार
Get well soon 
हमेशा रहता तैयार
इस जकड़न से कुछ तो बाहर आएं
कुछ को मिलें और कुछ को अपनाएं
छोड़कर ये आभासी दुनियाँ
अहसासों से पगे प्यारे रिश्ते निभाएं
                   रजनी रामदेव
                     न्यू दिल्ली
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नमन मंच भावों के मोती
25/6/2०19
बिषय, मोबाइल,, फोन,,
आधुनिक परिवेश में मोबाइल
 क्या  आ गया
 अजब गजब जहां का रंग ढं
 रिश्ता नाता समा गया
 शोक पत्र ,आना जाना
 चाहे हो आमंत्रण
 पहुंचने का समय नहीं
फोन में ही दे दिया निमंत्रण
इसके सिवाय और न 
कोई आकर्षण 
 समक्ष हमारे कोई हो 
न रहता स्वयं पर नियंत्रण
 नन्हे मुन्ने बच्चों में भी लग
चुका है इसका रोग
 इसको सुविधा की संज्ञा दें
 या फिर बोल़े भोग
 सहुलियत को हमने
जीने का ढंग बना लिया
 पाश्चात्य संस्कृति को पूर्णत:
अपना लिया
 शनैः शनैः हम इसके होते गए गुलाम
अच्छे बुरे का हम भूल गए
परिणाम
केवल सीमित साधन बनाकर करना है हमको उपयोग
आवश्यकतानुसार चलें
न समझें इसको उपभोग
स्वरचित,, सुषमा, 

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🙏नमन भावों के मोती🙏
  🌹🙏 सभी गुणीजनों को मेरा 
              सादर प्रणाम 🙏🌹

दिनांक : - 25/06/019
विषय : - मोबाइल / फोन

**** बेहाल शिक्षा ****

क्या बताऊँ
शिक्षा का हाल
आधुनिकता किया है
इसे बेहाल।

फोन और फेसबुक
दूरियाँ मिटा दिया
लेकिन हमारे बच्चों को
घर में ये कैद किया।

जैसे-तैसे बस ये
परीक्षा पास होते हैं
अपना सारा वक्त
घर के किसी कोने में
कम्प्यूटर, टीवी और फोन
के साथ बिताते हैं।

छात्रों के इच्छापूर्ति ही
शिक्षा के जर्जरता का कारण है
विद्वानों की धरती है ये
कहाँ इन्होंने जाना है।

पर यहीं कहीं
अभावों में जलता है एक लौ,
जो बुझते-बुझते फफक जाता है, 
याद कर एकलव्य की शिक्षा
स्वंय में प्रकाश भरता है। 

ढ़लते सूर्य को वही लौ,
रात-भर प्रज्वलित
रहने का वचन देता है।

स्वरचित: - मुन्नी कामत।
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25/6/2019
💐💐💐💐
मोबाइल/फोन

नमन मन्च।सुप्रभात सबको।
मोबाइल में रहो,
पर डूबो नहीं।
अच्छाई को अपनाओ,
मगर बुराई से खुद को जोड़ो नहीं।

मोबाइल तो है लाजबाब,
इसका कोई जबाब नहीं।

इसमें मिलते सारे रिश्ते,नाते,
जिसका कोई हिसाब नहीं।

इसमें डूबकर सब भूल जाते हैं,
दुःख दर्द को मोबाइल हँसी में बदल देता है।

कितने सारे अच्छे काम होते हैं इसमें,
कुछ सीखो इससे,पर इसमें डूबे ना रहो।

बूराई के साथ अच्छाई होती है हर जगह,
मोबाइल से अच्छाई ग्रहण करो,
बुराई को छोड़ आगे बढ़ो।
💐💐💐💐💐💐💐
स्वरचित
वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी
💐💐💐💐💐💐

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एक राजस्थानी भाषा में कविता
"माली"

माली,
आज मुम्बई आ ली, 
धूड़ गा धोरा लारै रै ग्या
भयंदर गी लोकल
अँधेरी जा ली,
माली, 
आज मुम्बई आ ली l

च्यारूं ओर बादळ थर्रावै
दिखणादी बिरखा
याद घणेरी आवै,
नीरै-ग्वार गो तसीयो मिटग्यो
शहर मं सिट्टो सिकग्यो l
दूध घणों ही थैल्यां म आवै
डोवा राबड़ी सपनां गी बात्यां
बड़ा-पाव होटल स्यूं ल्यावै l
काचरां गो साग भूल गी
और भूल गी भातो
पाणीं गा ल्याणां घड़ा भूल गी
कठ लगावां माथो ,
भूल बंटेड़ी, ठीकरा
आदत जीवण गी घाली
माली,
आज मुम्बई आ ली l

के केवूं बै गोर-मगरिया
मेह बरसता ताल भरिया,
जमीं स्यूं उगती पत्यां भूली
सालूं बीत ग्या झूलो झूली,
खोळी मं जीवूं ज्यूं तिरतो पाणीं
उमर बीत गी स्याणीं-स्याणीं,
परम्परा गो ढोल फूट ग्यो
आपसदारी गो मोल टूट ग्यो,
घूंघट गी लाज टी.वी. तोड़ दी
बाकी सरम मोबाईल पर छोड़ दी,
 "सासू न छोड र
मम्मीं न बुला ली,

भयंदर गी लोकल
अँधेरी जा ली,

माली,
आज मुम्बई आ ली l

श्रीलाल जोशी "श्री"
तेजरासर ( बीकानेर)
मैसूरू मो. ९४८२८८८२१५
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नमन मंच-भावों के मोती
दिनांक-25.06.2019
शीर्षक-मोबाइल/फ़ोन
प्रस्तुत है अहबाब की ख़िदमत में
================
              मुक्तक
बेदर्द है जो प्यार निभाता नहीं कोई ।
मैं फ़ोन लगाता हूँ उठाता नहीं कोई ।।
हासिल हो मेरा मुद्दआ़ मैं क्या करूँ जतन?
जो दिल को मेरे दिल से मिलाता नहीं कोई ।।
************************
               साॅनिट
यह फ़ोन क्या इसे कहें हम दूसरा ख़ुदा ।
उपहार है विज्ञान का जो कुछ हमें मिला ।।
महबूब लाखों मील हो हरदम ही पास है ।
इसमें मुदाख़लत नहीं मिलने की आस है ।।
सब कुछ भरा है इसमें कायनात कुछ नहीं ।
गर फ़ोन हाथ में हो तो हैहात कुछ नहीं ।।
क़द बढ़ गया है फ़ोन का पीछे किये सब यन्त्र।
इन्सान के दिमाग़ में बैठा दिया है तन्त्र ।।
ईजाद जब यह हो गया तब चाहतें बढीं ।
देकर क़रीबी रह गईं तन्हाइयाँ खड़ीं ।।
तू पास मेरे हो न हो पर आस तो बँधी ।
यह ज़ाहिरन् दीदार की है प्यास तो सधी ।।
महबूब !तुझको फ़ोन का गुलज़ार खिल गया।
इतना मुझे एहसास है यह तू ही मिल गया ।।
 मुदाख़लत=दख़ल; हैहात=अफ़्सोस
       कायनात=संसार
========================
              "अ़क्स " दौनेरिया

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🌹🙏नमन मंच🙏🌹
विषय-मोबाइल
25/6/2019
छंदमुक्त कविता
🌿🌺🌿🌺🌿🌺

कितना फर्क आ गया है
आज ज़माने में भी
और रिश्तों में भी
पहले चिट्ठी,तार, टेलीग्राम
चलन में थे
जिनमें कितनी भावनाएं
हुआ करती थीं
अपने परिजनों को
दिल से संदेश भेजे जाते थे
पाने वाले अनकही बातें
भी समझ जाते थे

अब मोबाइल हाथ मे है
अंगूठे,उंगलियों का 
इस्तेमाल होता है
सालगिरह, होली दीवाली
कोई भी अवसर न छूटता है

जन्मदिन,मृत्यु या शादी ब्याह पर
फोरवर्डेड मेसेज 
फॉरवर्ड किये जाते हैं
यहां तक कि
नीचे अपना नाम तक लिखने की
जहमत ये न उठाते हैं

भेजने वाले,पाने वाले
सब एक दूसरे को पहचानते हैं
क्योंकि मोबाइल में सेव किये नाम
फ़्लैश जो हो जाते हैं।

ये मशीन बन कर
समय और श्रम बचा रहे हैं
अब  आदमी
अतीत बनते जा रहे हैं
अब आदमी आदमी नहीं रहे
मशीन बनते जा रहे हैं..

अब  आदमी
अतीत बनते जा रहे..!!

    @वंदना सोलंकी
©️स्वरचित

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भावों के मोती दिनांक 25/6/19
मोबाइल  / फोन

है चमत्कार  
मोबाइल  फोन
बैठे रहो 
कौसो  दूर
बात होती 
चंद क्षणों  में 

आधुनिक 
 हो गया है
आज मोबाइल  
बन गया है
स्मार्ट फोन 
मुट्ठी  में  
बंद हो गयी
दुनियां  सारी

चाहे हो 
पैसों  का लेन देन
शिक्षा या स्वास्थ्य 
मिलती है , मोबाइल 
गूगल  पर सब जानकारी 
और भी सभी  जरूरतों 
सब का हल है
मोबाइल फोन

है सलाम तुझे
मोबाइल 
आज की है
तू सबसे  ज्यादा
जरूरी आवश्यकता

स्वलिखित लेखक
 संतोष श्रीवास्तव  भोपाल
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भावों के मोती
25 06 19
विषय - मोबाइल (गतिशील संभाषण यंत्र ) 

मोबाइल की महिमा 
अपरंपार है
चलता फिरता
सूचना का आधार है
किसीका भी बिन इसके
चलता नही काम है
जितना उपयोगी
उससे ज्यादा नशेदार है
पहले ये "गतिशील संभाषण यंत्र" 
बुद्धु सा था अब तेज-तर्रार है( स्मार्ट फोन ) 
एक पल न दिखे तो
दिल का होता बुरा हाल है 
जितना ज्यादा जो ड़ूबा उनका 
कोई न खेवनहार है
दूर दूर तक नेह लगावे
पास बैठों से बेजार है
बिन पैसा पकवान बनादे
घर की जलती दार है
तेरी महिमा अपरम्पार 
मोबाइल बाबा ,
तेरी जय जय कार है l

स्वरचित 
कुसुम कोठारी ।

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नमन मंच 🙏
सभी को सादर नमन 🙏💐💐
दिनांक- 25/6/2019
शीर्षक-"मोबाइल /फोन"
विधा- कविता
**************
जमाना मोबाइल का दिवाना हो गया, 
अपना हर कोई अब बेगाना हो गया, 
दिल,दिमाग,आँखे और ये उगुलियाँ ,
सब पर मोबाइल का ही राज हो गया |

चिट्ठी, पत्र अब कहीं नही दिखते ,
मन से मन के तार अब नहीं जुड़ते,
गुडमार्निंग,गुडनाइट मोबाइल से हो जाती,
हाथ जोड़ने की तो बारी ही नहीं आती |

अब रोज अपडेट हम सब हो जाते,
एक से बढ़कर एक सूचना हम पाते, 
नये जमाने की ये नई तकनीकी,
सेल्फी से आ जाती चेहरे पर हँसी |

स्वरचित *संगीता कुकरेती*

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नमन             भावों के मोति
विषय             मोबाइल 
विधा              कविता 
दिनांक           25,6,2019
दिन                मंगलवार 

मोबाइल 
🍁🍁🍁🍁

मोबाइल का ही है कमाल
हम जान लेते तुरन्त हाल
देख लेते तुरन्त तस्वीर 
नहीं रहते अब अधीर। 

सब कुछ प्रकट होता चित्रों में
तफ़रीह करते घर बैठे मित्रों में
सारे मनोरंजनों का बनता लेखा जोखा
सबका प्रस्तुतिकरण बहुत अनोखा। 

मोबाइल से ही मिले भावों के मोती
मोबाइल से ही खिली इसकी ज्योति
मोबाइल से ही कवियों की कलम निखरी
और काव्य सुगन्ध हर ओर बिखरी।

मोबाइल से हुए सबके सम्बन्ध 
सबके शब्द ऐसे जैसे मकरन्द 
सब अपने तनावों को भूल
मुस्कराहट में भिगोते अपने छन्द। 

स्वरचित
सुमित्रा नन्दन पन्त

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मोबाइल

गुरु  मोबाइल  ज्ञान  मोबाइल, 
सबका रखता ध्यान मोबाइल।
आजकल रिश्तें  निभे इसी से-
सम्बन्धों  की  जान  मोबाइल।

         किसी-किसीकी शान मोबाइल,
         करवाये    पहचान    मोबाइल।
         दूरियाँ   जितनी   बातें   करनी-
         कर  देता   आसान   मोबाइल।

पूर्ण   करे   अरमान  मोबाइल,
झूठ का शरण स्थान मोबाइल।
जीवन  मृत्यु  दोनों  दिखलाये-
शैतानी     सामान    मोबाइल।

          रखते  जो   इन्सान  मोबाइल,
         भरता  उनमें   जान  मोबाइल।
         अगर कभी खो जाये कहीं तो-
         कर   देता   बेजान   मोबाइल।

क्या-क्या देता  ज्ञान मोबाइल,
है   बहुते    विद्वान  मोबाइल।
जानो तो   एक  यंत्र  मात्र  ही-
मानो  तो    वरदान  मोबाइल।

कमलेश्वर ओझा
सिंगरौली, मध्यप्रदेश

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नमन "भावो के मोती"
25/06/2019
   "मोबाईल/फोन"
1
"फोन" के साथ
दिन की शुरुआत
विदाई रात
2
इंसान फंसा
"मोबाईल"का नशा
आभासी रिश्ता
3
ऊपर "फोन"
नाचती ऊँगलियाँ
थिरका मन
4
"फोन" का जाल 
तकनीकी है चाल
रिश्ता फरार
5
देखा सपना
"मोबाईल" दुनिया
लगा अपना

स्वरचित पूर्णिमा साह(भकत)
पश्चिम बंगाल।

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मोबाइल पर एक हास्य कुण्डलिया

मोबाइल   की  लूट  है,  लूट   सके  तो  लूट।
ऐसी  लें  स्कीम   जिसमें, फ्री बातों की छूट।।
फ्री  बातों   की  छूट,  दिले   दरवाजा  खोलें।
पकड़ सके फिर कौन,झूठ जितना भी बोलें।।
कह  ओझा कविराय, न पत्नी बने मिसाइल।
फोरजी  इक सिम  ले,  दे दें  उसे  मोबाइल।।

कमलेश्वर ओझा
सिंगरौली, मध्यप्रदेश

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नमन भाव के मोती
दिनांक- 25 जून 2019
विषय- मोबाइल /फोन 
विधा -लघु कविता

हवा में बातें करता संसार
दूर क्षितिज के आर पार
विज्ञान का ये चमत्कार
मोबाईल फोन का आविष्कार

तकनीकी का सुंदर संसार
जगत को है प्यारा उपहार
मोबाईल का यह अवतार
चिट्ठी का स्थापन्न प्रकार

मेघ,शुक-सारिका सन्देश 
डाक रहा चिट्ठियों का देश
करते धारण विभिन्न वेश
चिंतित रहते थे परदेस

टेलीफोन भी अतीत हुआ
मोबाईल आगमन हुआ
इंटरनेट का आगाज हुआ
दुनिया का सरताज हुआ

दिलों में खुशियां है बसती
दुनिया मुट्ठी में लहराती
हर पल सबकी खबर है रहती
मोबाईल सेवा अब धड़कन कहलाती।।

मनीष श्री
स्वरचित
रायबरेली

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विषय ,,मोबाईल ,फोन ।
बुरा नही साधन ये बात चीत के माध्यम का ।
सोचकर करो प्रयोग तो सार्थकता वर्णन निर्थक ।
दुर्भाग्य है युवा कर रहे इस्तेमाल गलत ।
दुष्परिणाम सब भोग रहै सच को समझने मे बुद्धि भ्रष्ट हो चली ।
कम समय मे सहज सरल हो काम इसीलिऐ करते इस्तेमाल ।
नाते रिश्ते सब जुडे इससे ।
करो ज्ञान न पाने के लिऐ न की गलत राहे चुने ।
माँ बाप है नही सावधान बच्चो के मस्तिष्क भ्रमितं हो काल के गाल मे समाहित हो रहे ।
स्वरचित,, दमयन्ती मिश्रा ।
गरोठ मध्यप्रदेश ।

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नमन"भावो के मोती"
25/06/2019
  " फोन /मोबाईल"
छंदमुक्त
###############
😍
जय-जय,जय-जय...
मोबाईल महाराज...
करुँ कैसे आपकी..
महिमा का गुणगान..
हम तो ठहरे मासूम नादां.
मिला आपको ज्ञान का वरदान...
गीता,, बाईबिल,, या हो कुरान,,,,,
सर्व धर्म है महान...।
😍
प्रात:नमन,वंदन ,अभिनंदन
होती आपसे दिन की शुरुआत...।
😍
मन में उठते हजार सवाल..
झट-पट मिलता हमें जवाब..
भूल गए हम पोथी-पुराण..।
😍
झटपट घर का काम निपटाते
ज्यादा देर दूर न रह पाते..
बातें करते खाते-खाते...।
😍
अब तो पतिदेव भी हुए नाराज.....
कहते अब न करुँगा "रीचार्ज"
उन्हें मनाती छोड़कर काज..।
😍
भाग्य जब मुझसे रुठा था..
आपको(मोबाईल) मैंनें खोया था...
मन में बेचैनी का आलम था..
दिन लगता पहाड़ था....।
😍
नये "फोन"की मिली बधाई..
खुशियाँ मेरे मन में छाई..
दिनभर बातें करती आपके साथ...
दिन बीता और हो गई रात..
सपनों में भी रहते साथ..
आपकी महिमा अपरंपार..।।
😍
स्वरचित पूर्णिमा साह(भकत)
पश्चिम बंगाल।।

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नमन मंच
दिनांक-२५/६/२०१९"
"शीर्षक-मोबाईल"
जब न था मोबाईल हाथ मे
कोसा करती दिन रातों में
जब से आया मोबाईल हाथ मे
भूल गई फर्क दिन ओ रातों मे।

जिस वाट्सएप व एफबी को
पानी पी कर कोसती थी,
अब खाना पीना छोड़ छाड़ कर
रमने लगी दिन रातों में।

इतना भी कसूरवार नही,
जितना हम समझते है,
ये तो है हमारी मर्जी
कैसे इस्तेमाल हम करते है।

दुनिया सिमट गई अब
जब मोबाईल हो हाथों में
सारी दुनिया का सैर करा दे
घर बैठे बरसातों मे।

अवसादों से दूर करा दे
दोस्त बना दे हजारों मे
बिछड़ गये थे,जो बीस सालों से
ढ़ूंढ़ निकाले मिनटों में।

संबंधी जो पहले सिर्फ मिलते 
शादी व बरातों मे
अब हमें वो रोज मिलते
वाट्सएप के आ जाने से।

मोबाईल के है सभी दिवाने
नही अब ये दिखावे में
रिश्ते नाते सब सहेजे
आपको रखें भुलावे मे।
स्वरचित-आरती-श्रीवास्तव।

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नमन " भावों के मोती " पटल
वार : मंगलवार 
दिनांक : 25.06.2019
आज का विषय : मोबाईल फोन
विधा : काव्य

            गीत 

युग बदला है , हम बदले हैं ,
नये नये आयाम हैं !
मोबाईल ने बदली दुनिया ,
लगे बड़ी अभिराम है !!

दूरभाष अब हुए पुराने ,
मोबाईल का दौर है !
ढूंढ रहे हैं ठौर ठिकाने ,
खत्म न होता छोर है !
आकर्षण की डोर बंधी है ,
अपना काम तमाम है !!

समय काटता था , कट जाये ,
सभी लगे अलमस्त हैं !
सबके बीच अकेले बैठे ,
सभी यहाँ पर व्यस्त हैं !
मोबाइल से हाथ न हठता ,
और सभी नाकाम हैं !!

रिश्ते बनते और बिगड़ते ,
पल छिन की न देरी है !
हरकारों की नहीं प्रतीक्षा ,
समय की हेराफेरी है !
मोबाईल में राज़ हैं गहरे ,
इसीलिये बदनाम है !!

बच्चे और जवान सभी क्या ,
भूले सारे खेल हैं !
मोबाईल बस खेल बन गया ,
घर ना लगती जेल है !
दौड़ रहे हैं दौड़ अनूठी ,
हासिल नहीं मुकाम है !!

मोबाईल की रिंग धड़कन सी ,
हम करते महसूस हैं !
इसने जीना किया है मुश्किल ,
बना कहीं जासूस है !
हानि लाभ हैं हाथ हमारे 
कैसे लेते काम हैं !!

स्वरचित / रचियता : 
बृज व्यास
शाजापुर ( मध्यप्रदेश )
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25/6/19
भावों के मोती
विषय-मोबाइल/ फोन
___________________
मोबाइल इक विकट बीमारी
जिसमें लिपटी दुनिया सारी
गप्पे-शप्पे भूल गए अब
शतरंज,कैरम छूट गए सब
हँसी-ठिठोली बन गई सपना
मोबाइल ही अब सबका अपना
दादा-दादी बोर हैं लगते
मम्मी-पापा खुद फोन में जकड़े
बच्चों की तो हाई-फाई बात
आधुनिकता का है यह कमाल
जो कुछ भी,कभी भी हो ढूँढना 
मोबाइल में है पूरी दुनिया
बचपन भूला बाहर खेलना
मोबाइल से अच्छा कोई खेल ना
मोटे-मोटे चश्में पहने
इयरफोन कानों में लटके
मोबाइल ने दिए यह गहने
कहानी-किस्से दम तोड़ रहे
अंताक्षरी को सब भूल गए
जिसके हाथ देखो मोबाइल
लुका-छिपी चोर-सिपाही
बच्चों के अब खेल नहीं है
चंपक,नंदन,लोटपोट जो
हम सबकी कॉमिक्स थी प्यारी
बच्चों को तो मोबाइल गेम की
लगी हुई है बड़ी बीमारी
सुविधाजनक है फोन बड़ा
पर उतना ही गहरा इसका नशा
एक बार जो फसा चंगुल में
फिर कभी-भी न बाहर निकल सका
मोबाइल की लीला अपरम्पार
हर कोई देखो बना है गुलाम
***अनुराधा चौहान***© स्वरचित✍

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🌹🙏नमन मंच🙏🌹
आदरणीय जनो को नमन
🌹🙏       🙏🌹
विषय-मोबाइल
दिनांक-25/06/19

हम लेडीज को स्मार्ट बनाने में 
बड़ा योगदान निभाया है
जब से #मोबाइल
घर में आया है

पहले तो चूल्हा,चक्की
हुआ करती थी जान हमारी
घर के पड़ोस तक ही थी
पहचान हमारी............

जब व्हाट्सएप चलाना सीखा हमने.......
बहुत कौतुहल से 
लोगों ने देखा
पर हिम्मत नहीं हारी हमने

जब फेसबुक चलाने लगे
समाज के ठेकेदारों को नापसंद से आने लगे
कोई कहता बच्चों से प्यार नहीं है
कोई कहता घर से सरोकार नहीं है
सच तो यह है स्मार्ट है औरत
अब गंवार नहीं है
घर,बच्चों के साथ 
दफ्तर पर नजर रखती है
खुद को मोबाइल की तरह अपडेट रखती है

   ***स्वरचित****
 --सीमा आचार्य(म.प्र.)

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शुभ संध्या
विषय-- ।। मोबाइल/फ़ोन ।।
द्वितीय प्रस्तुति

मोबाइल भी क्या शय है
होने को तो इसमें क्षय है ।।

मगर मोबाइल बिना भी 
किसी क्षेत्र में न विजय है ।।

उद्देश्य के प्रति सच्ची निष्ठा
सच्ची लगन जिसकी लय है ।।

मोबाइल क्या किसी गली
में न भटकने का संशय है ।।

रही बात स्वास्थ्य की 'शिवम'
सदा रखो इसकी भय है ।।

हानी मोबाइल की छुपी न
वक्त सोच कर करो व्यय है ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 25/06/2019

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नमन भावों के मोती
दिनाँक -25/06/2019
शीर्षक-मोबाइल, फोन
विधा-हाइकु

1.
रिश्ते हैं मौन
भूल गए कायदे
याद है फोन
2.
फोन है मेरा
एकमात्र सहारा
मितवा प्यारा
3.
आएगा फोन
सुन पाएगा कौन
बंद पड़ा है
4.
न जाने कौन
अपना बनाने को
दे गया फोन
5.
अकेली खड़ी
फोन इंतजार में
मेरी प्रेमिका
6.
एकांत भला
मोबाइल हाथ में
दिन व रात
7.
सावन मास
मटकाएंगे बात
फोन है पास
8.
तस्वीर तेरी
देखी मेरे फोन में
मन भा गई
9.
कब से खड़ी
थक गए नयन
फोन लगाओ
10.
कब आओगे
फोन पर बताओ
क्या क्या लाओगे
*********
स्वरचित
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा

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आज वैवाहिक कार्यक्रम में व्यस्तता के कारण
मै शीघ्रता में लिख रहा हूँ ,क्षमा करें कुछ अच्छा नहीं लिख पाऊँ।

1*भा25/6/2019/मंगलवार
बिषयःः मोबाइल/फोन
विधाःः काव्यः

मोबाइल बिन काम नहीं चलता।
  अधिकांश समय इसी में गलता।
    सब समयाभाव का बहाना करते,
       सचमुच ही मोबाइल में मन रमता।

मोबाइल को पसंद करें सभीजन
  माँ बाप कहें या बच्चे बडे बूढे सारे।
     सिर्फ सुबह शाम की बात नहीं अब,
        लगे रहते चौबीसों घंटे इस में प्यारे।

चिट्ठी पत्री की कोई औकात नहीं है।
  सच मोबाइल में वो जज्बात नहीं है।
    आत्मीयता जो झलकती थी पत्रों में,
    .  इसमें मगर यहां वो प्रेमलाप नहीं है।

इससे संम्बन्धों पर असर पडा है।
  अब भाई बंन्धु से मोबाइल बडा है।
      पहले चिट्ठी पत्री से बातें होती थी ,
         मानें गलती सामने खशम खडा है।

कलयुग सा मोबाइल मानें हम
  क्यों इससे रिश्ते नाते टूट रहे हैं।
    वैरभाव रागद्वेष ये तुरंन्त उगलता,
      देखो इससे बनते रिश्ते छूट रहे हैं।

इसमें अच्छाई पर अधिक बुराई।
  कुछ लोगों ने यहां कुसंगति पाई।
   जोअनभिज्ञ रहे किशोरावस्था तक,
      बच्चों ने अब ऐसी कुसंस्कृति पाई।

स्वरचितःः ः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.
जय जय श्री राम राम जी

1*भा.#मोबाइल/फोन#काव्यः ः
25/6/2019/मंगलवार

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नमन भावों के मोती
25-06-19 मंगलवार
विषय-फोन/मोबाईल
विधा-हाइकु
💐💐💐💐💐💐
तेरा जलवा

वाह रे मोबाईल

कैसा जमाना👌
💐💐💐💐💐💐
वाह रे फोन

नकली रिश्ते बना

अव्वल कौन👍
💐💐💐💐💐💐
झूठ बोलने

 का मोबाईल फोन

बढ़िया यंत्र💐

💐💐💐💐💐💐
श्रीराम साहू अकेला
💐💐💐💐💐💐

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मंच को नमन
दिनांक - 25/6/2019
विषय - मोबाइल/फ़ोन

मोबाइल है मेरा अंग्रेज़ी नाम
हिंदी में मेरा चलभाष उपनाम
करता हूँ अनेक काम बेमिसाल
पल भर भी ना करता मैं विश्राम
पलघर में तुम्हारे संदेश भेज दूँ
विडियो काल से दर्शन करवा दूँ
चलते फिरते संवाद करवाता हूँ
सबकी दिनचर्या बतला देता हूँ
आवागमन का महत घटा दिया
सबको एकदम डिजीटल बना दिया
बिना नेटवर्क के हो जाता हूँ बेकार
निश्चित अवधि पर रीचार्ज  पुकार
लोगों  में मेरा इतना अधिक है क्रेज़
मुझ बिना मानो लाइफ हो गई फ़्रीज़
बच्चे ,बूढ़े ,नर, नारी,संग संग जवान
अबोध शिशु भी है मेरा ही क़द्रदान
मेरे मोहपाश में हर कोई उलझा है
दूरगामी परिणामों को नही समझा है

✍🏻संतोष कुमारी ‘ संप्रीति ‘
मौलिक एवं स्वरचित

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25/6/19
भावों के मोती
मोबाइल/फोन
हाइकु
🏵
क्या तकनीक
परदेश में बेटा
फोन से बात
🏵
बड़ा है बुरा
मोबाइल का रोग
मानता कौन
🏵
करे तबाह
मासूम बचपन 
फोन का नशा
🏵
रिश्तों के बीच
अकेलापन बढ़ा
वजह फोन

अनुराधा चौहान ©स्वरचित✍

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नमन भावों के मोती 
विषय - मोबाइल/ फोन 
25/06/19
मंगलवार 
दोहे 

मोबाइल   विज्ञान  का , है   सुंदर   वरदान। 
इससे  ही  छोटा हुआ , यह सम्पूर्ण जहान।।

घर में  बैठे मिल रहा, हर परिजन का हाल।
ज्ञान- वृद्धि के क्षेत्र में, इसने किया कमाल।।

मोबाइल के लाभ का, मिले न   कोई   अंत।
इसके उचित प्रयोग से ,खुशियाँ मिले अनंत।।

युवा, वृद्ध , बच्चे सभी  , मोबाइल  में   मस्त ।
फिर चाहे इस जगत में, रहे अस्त औ व्यस्त।।

इस  मोबाइल का सभी,करें  उचित  सम्मान। 
किसी व्यक्ति का हो नहीं,इससे कुछ अपमान।।

स्वरचित 
डॉ ललिता सेंगर

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भावों के मोती :: दिनांक२५-६-१९.
विषय:: मोबाइल ::
ममता कहूँ या कहूँ इसे छुटकारा,
बच्चों को दिया ये कैसा सहारा।
पकड़ा के मोबाइल नन्हें हाथों में,
हम सब ने ये कैसा कर्म कर डाला।।
उलझे हैं बच्चे काल्पनिक दुनिया में,
उनका बचपन हमने क्यूँ लूट डाला।
अनर्गल साहित्य,अश्लील बातों में,
मासूमों के भोलेपन को जला डाला।।
बच्चे बड़ों सी बातें करने लग गए,
अरे साथियों हमने ये क्या कर डाला।
आदर्श और नैतिकता की बातें छोड़,
बच्चों का धरातल ही  बदल डाला।।
ज्ञान,आदर्श,मर्यादा का वध करके,
हमने एक नया संसार बसा डाला।
विचलित हुए माता-पिता ने खुद ही,
अपने बच्चों का भविष्य बिगाड़ डाला।।
(स्वरचित)     ***"दीप"***


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नमन 🙏मंच
तृतीय प्रयास 💔💔

विषय:-फोन/मोबाइल

विषय:-फोन
तुम तो न आये लेकिन !
एक विस्तृत  आकाश दे दिया है।
तुम ने मुझे , जिसे मे ओढ कर
बैठे हुए हूँ।
फोन जो हमारे जीने का जरिया था ,
आज बेकार  लगने लगा है।
अब बस गड़ती रहती हूँ , अपने शब्दों में तुम्हें।
और आकार देती रहती हूँ ,अपने भावों को ।
काश उस विस्तृत आकाश में कभी मिल 
जाओ , छू लूँ तुम्हें अपनी इन आँखों से
ही सही । एक आभासी दुनियाँ जिसे मैने
और तुमने अपनी दुनिया बना लिया था।
लेकिन तुम जब चले गये तो लगा ,सपने में
जी रही थी । जब सपना टूटा तो सब बिखर 
गया । और अब ये फोन ही एक मूक वाहक
बन गया है। मेरे अंतर मन के द्वंद्व का
अपनों के बीच रह कर भी शून्य हो रही हूँ।
अब यही सहारा है।  फोन ,फोन ,फोन
और बस फोन ! ।।।

स्वरचित
नीलम शर्मा#नीलू

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नमन "भावों के मोती"🙏
25/06/2019
हाइकु (5/7/5)   
विषय:-"मोबाईल "
(1)📱
इच्छाएँ पूरी 
मोबाईल का पेट 
खा गया दूरी
(2)📱
आभासी मजा 
मोबाईल का नशा 
घर लापता 
(3)📱
उस्तरा हाथ 
मोबाईल दोहरा  
विवेक जाग 
(4)📱
वक़्त का दोष?
मोबाईल में दोस्त
भूले पड़ौस 
(5)📱
संवाद गौण 
मोबाईल दुनियां 
घर है मौन 
(6)📱
फ़ोन जो पास 
बचपन को छीना 
गली उदास 

स्वरचित 
ऋतुराज दवे

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नमन
भावों के मोती
२५/६/२०१९
विषय-मोबाइल/फोन

मोबाइल विज्ञान का वरदान,
जिससे हुआ हर काम आसान।
ज्ञान-विज्ञान, मनोरंजन का खज़ाना,
इससे दूरस्थ संवाद हुआ आसान।
अब चुटकियों में मिलती है सूचना,
आसान हुआ हर जगह पहुंचना।
पर लत हर चीज की होती है बुरी,
मोबाइल की लत है बहुत बुरी।
बच्चों और युवाओं में देखो असर,
किसी को किसी की नहीं है खबर।
स्वास्थ्य पर पड़ता है बुरा असर,
इसका दुरूपयोग जैसे जहर।
अपराधों की ये बनता वजह,
जीवन में इसने लेली ऐसी जगह।
मोबाइल है वस्तु बड़े काम की,
सदुपयोग हो ये बात ध्यान की।
स्वास्थ्य पर इसका असर न पड़े,
संबंधों में दूरियां न बढ़े।
बच्चे इसके आदी नहीं बने,
उपयोग सीमित इसका करो,
वरदान को अभिशाप बनने न दो।

अभिलाषा चौहान
स्वरचित मौलिक

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सादर नमन
विधा-हाईकु
विषय- मोबाईल
ले मोबाईल
खेलों की भरमार
छूटा मैदान
गुगल गुरू
मोबाईल पिटारा
ज्ञान से भरा
मिलना बंद
मोबाईल निभाता
रिश्तों से प्यार
**
स्वरचित-रेखा रविदत्त
25/6/19
मंगलवार
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नमन  मंच  भावों के मोती
तिथि         25/06/19
विषय      मोबाइल/ फ़ोन
**
विरोधाभास लिये ,
अपनी स्थिति पर मौन 
मैं मोबाइल फ़ोन !
सोचता ....
मैं कैसे गलत हो गया ..
सभी का दोष कैसे माथे चढ़ गया..
बड़ी आसानी से इल्जाम लगा देते हैं ..
गलतियां मेरे आवरण में छुपा देते है ..
एहसान फरामोश हैं ये ...
दूर   बैठे परिजनों के जब 
वीडियो दिखाता हूँ ..
बच्चों  की मासूमियत को 
दादी नानी  से रूबरू कराता हूँ..
कुशलक्षेम की पाती  हूँ..
विरह का साथी हूँ...
एक क्षण में जानकारी बताता हूँ ...
कहीं भी  दो के मध्य सेतु बन जाता  हूँ ..
दुरुपयोग तुम करो 
और दोष मेरे सर  मढ़ो...
मैं तो ठहरा एक यंत्र ...
मैं वही करूं जो तुम फूकों मंत्र 
मैं बुद्धि विवेक हीन हूँ...
तुम तो नहीं...
क्यों नही रिश्ते निभाते हो ..
अपनी सुविधा  के लिये 
बच्चों को मोबाइल थमाते हो ..
सही गलत का निर्णय तुम करो ..
जनक  हो तुम मेरे 
मेरे अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह क्यों..
मैं बेचारा मोबाइल फ़ोन

स्वरचित
अनिता सुधीर
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भावों के मोती 
शुभ सन्ध्या 
25/6/19
मोबाईल/फोन
हाइकु 
------------------------
1)
फोन का जादू
जवान हुआ दादू 
बालक कोन?
2)
सस्ती है दोस्ती
मोबाईल में मस्ती
कभी भी तोडो।।
3)
फोन सुन्दरी
सबकी है प्रेमिका
दिल में बसे।।
--------------------------
क्षीरोद्र कुमार पुरोहित 
बसना,महासमुंद,छ,ग,

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"अंतरात्मा"19नवम्बर 2019

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