Friday, August 2

"कलम/कलमकार "2अगुस्त 2019

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ब्लॉग संख्या :-464



मै शेरसिंह सर्राफ.....
******************
....

इक परिचय मेरा भी सुन लो,
शब्द मेरे है साफ।
लिखता हूँ खुद से खुद को मै,
शेर सिंह सर्राफ।
...
बचपन बीता यौवन भी अब,
मै हूँ चालीस पार।
लेखन मे डूबा रहता मन,
इससे ही मुझको प्यार।
....
पाँच जुलाई का दिन था वो,
सावन की बरसात।
पृथ्वी पर जब गिरे शेरसिंह,
रिमझिम थी बरसात।
.....
गोरखपुर के पास जिला है,
देवरिया निज धाम।
कभी कटोरा चीनी का था,
आज मगर बेनाम।
.....
माता है दमयंती देवी, पिता
महेशेन्द्र सिंह सर्राफ।
चार भगनी अरू तीन बँन्धू मे,
मै सबसे छोटा सर्राफ ।
....
एम ए ,बी एड, एल एल बी संग,
शिक्षा विशारद का हार ।
काम मेरा बर्तन आभूषण , 
मै हूँ एक सोनार।
....
निज निकेतन प्रिय- प्रवास है,
प्रिया है भार्या नाम।
दो पुत्रो की यह माता है,
यशवन्त ,राजवीर सिंह नाम।
....
ये है मेरा पूरा परिचय,
जो है बिल्कुल साफ।
यू पी का इक कलमकार मै,
शेरसिंह सर्राफ ।
....
********************
स्वरचित एंव मौलिक 
शेर सिंह सर्राफ


दिनांक .. २..८..२०१९
विषय .. कलम/ कलमकार 

***********************

मोहे रंग दे रे रंगरेज, साँवरे के रंग मे।
जिस रंग मे डूबी राधा, उसी सुन्दर रंग मे॥
मोहे रंग दे.....

वृन्दावन की गली-गली, जमुना का तट जिस रंग का है।
बरसानी की हर गोरी के, दिल मे जो रंग उस रंग में॥
मोहे रंग दे....

बँशीवट अरू कुँज गली की मिट्टी का रंग जिस रंग है।
सखी सहेली ललिता के संग, नयनो का रंग जिस रंग मे॥
मोहे रंग दे...

कलम लेखनी की स्याही में, रंग जो रंग दे उस रंग मे।
कलमकार इस शेर का मन भी, रंग दे तू उसके रंग मे॥
मोहे रंग दे....

भावों के मोती भी झलके, श्याम मनोहर के रंग मे।
मीरा मोहन सूर के दिल, श्याम बसें है उस रंग में॥
मोहे रंग दे....

स्वरचित एंव मौलिक 
शेर सिंह सर्राफ

 नमन - मां शारदे को
नमन- भाव के मोती
दिनांक-02/07/2019

विषय-कलम

कलम से आज लिख दूं अंगार..

बागी एक सितारा हूँ।

किसी के आहो का आवारा हूँ।

कलम क्यों उगलती आग।

अक्षर से ही बनते चिंगारी।

हरदम जलते नभ में शोले

बादल बनते बिजली के क्यारी।

क्यों ही जलती सदैव

अतुल्य भारत की हर नारी।

जिसके नयनों में दीपक जलते

करुण क्रंदन पे विश्व हँसते।

सांसो से झरता स्वप्न पराग।

मन में भरा एक उश्चवास।

हँस के उठते पल में आद्र नयन।

छा जाता जीवन में एक बसंत।

लुट जाता संचित अनुराग।

यह नहीं है जीवन ऋतुराज।

है यह एक घोर अवसाद........?

स्वरचित
मौलिक रचना
सत्य प्रकाश सिंह
केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज
.

कलम की ताकत बदल देती है
अच्छे अच्छों की तकदीर
कलम ने ही ये युद्ध दिये
कलम ने रोक लिये
ये कलम की ताकत है
सत्ता बदल देती है
जीवन बदल देती है
यहां तक की दुनियां की
तस्वीर बदल देती है
कलम ही असली शक्ती है
नमन करते कलम को
जिसने इतने वेद शास्त्र दिये
स्वरचित एस डी शर्मा


नमन :"भावों के मोती मंच "
#कलम की कलमकारी 
ले
चला 
कलम
मन साध
रच के काव्य 
भर के उडान
कर पूर्ण प्रतिज्ञा ।

हे
ञानी
विद्यार्थी
वैज्ञानिक 
भूगोल बना 
इतिहास रचा
संकल्प कलम का।

है 
पूज्य 
कलम
रंगों संग
सामर्थ्यवान 
चलती है जब
बन भाग्य विधाता ।

ले
दीप
खिलौने
फुलझड़ी 
सुतली बम
कलम दवात
संपूर्ण दीपावली ।
#स्वरचित 
# नीलम श्रीवास्तव

गिरा बडा है वकार, जब जब झुकी कलम है। 
कहाँ बचा है मयार, जब जब बिकी कलम है।

हौसलो के हर्फो में, हिम्मत की लिखावट है। 
थके थके हम यार, जब जब थकी कलम है।

तहरीर ने लिखे है यहां, तहरीक के अन्जाम। 
रुके हैं सिलसिले के जब जब रुकी कलम है। 

लिखे हैं दर्द भरे जाने, ये कितने ही अफसाने। 
हंसी की बरसात हुई ,जब जब हंसी कलम है।

इसकी कुर्बानियों के सिलसिलो की हद नहीं। 
फूंक दी जान वतन मे जब जब फुंकी कलम है। 

विपिन सोहल 

स्वरचित

कलमकार

प्रकृति के साथ रहकर,
जीवित रखता खूद को ।
करता हैं परिवर्तीत ,
एक एक शब्द में ।
अपने भाव को ।
भाव शब्द बनकर,
उभरते हैं कागज पर ।
जो बनते कभी,
कविता,गजल,काव्यमाला ।
कहानी,नाटक,मधुशाला ।
अमर कर देता प्रकृति को,
अपने शब्दों में संजोकर ।
जो बन जाती धरोहर ।
जो हो जाता अमर,
कहते उसे कलमकार ।

Xप्रदीप सहारे

नमन मंच।
नमस्कार गुरुजनों, मित्रों।
कलम
💐💐 
कलम लिखे
जैसी भी जो भी बातें
आता भूकंप
2
जैसी लेखनी
उसकी कलम की
दर्शाता सच
3
आग उगले
जमाने को झुकाए
कलमकार
💐💐💐💐💐💐
वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी
स्वरचित


 कलम
दूसरी प्रस्तुति


कलम की ताकत को कौन नहीं जानता,
इसकी लिखावट कौन नहीं पहचानता।

इससे जमाने में हुए कितने काम,
भेजते थे संदेश इसीसे,जब थे हम गुलाम।

सबको एकजुट करके,
भड़काया खिलाफ अंग्रेजों के।

सबने जब ठान लिया लड़ने का,
जीते हम मनाया जश्न आज़ादी का।

इससे हल हुए बड़े, बड़े मसले,
चाहे बड़े या छोटे हों मसले।

कलम हीं शान है कलमकार की,
यही एक पतवार है मंझधार की।

वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी
स्वरचित
 शीर्षक-- कलम/कलमकार
प्रथम प्रस्तुति


यह कलम मेरी दीवानी
कब क्या लिखे कहानी 
ऐसी अल्हड़ ऐसी नूरानी
कभी जाय न ये बखानी..

कब इसमें क्रोध की ज्वाला
कब इसमें प्रेम का प्याला
बेझिझक है इसकी बानी
यह कलम मेरी दीवानी...

सत्य की यह परम सहेली
लगे कभी दुल्हन नई नवेली 
कोई नही है इसका सानी 
यह कलम मेरी दीवानी...

सोते सोते यह उठा दे
चलते चलते ये लिखा दे
महिमा है जग ने जानी
यह कलम मेरी दीवानी...

जब से हुई इससे प्रीत
सताये न गर्मी न शीत
भूली चोट कई पुरानी
यह कलम मेरी दीवानी...

थे दामन में दर्द हजार 
सताये थे कई विकार 
भूले जब से लौ ठानी
यह कलम मेरी दीवानी...

प्रभु को पाने से आसार
आऐगी वह भी बहार
अलग अहसास औ रवानी
यह कलम मेरी दीवानी...

हर दौलत लगे फीकी 
जब से हुई ये नजदीकी
ये प्रीत 'शिवम' सनमानी 
यह कलम मेरी दीवानी...

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 02/08/2019

नमन मंच🙏
2/7/2019
विषय-कलम/कलमकार
्रथम प्रस्तुति
✍️🌹✍️🌹✍️🌹✍️
कलम की ताकत
दोधारी तलवार से भी है ज़्यादा
युद्ध करने का नहीं
इसका तो मोहब्बत का है इरादा
कलम तो सदा सत्य ही लिखती है
ये न कभी किसी से डरती है
भेदभाव करना न जाने 
कौन गरीब कौन है शहजादा..
कलम के सौदागर होते हैं
अनोखे प्राणी
सच्चाई उनका ईमान
दौलत उनके लिए है पानी
सच ही कहेंगे सच ही लिखेंगे
ये है एक कलमकार का वादा...
कलम की ताकत
दोधारी तलवार से भी है ज़्यादा ।।
✍️वंदना सोलंकी©️स्वरचित

भावों के मोती
बिषय- कलम
कलम की ताकत से भला
कौन यहां अपरिचित है।
तुलसी,सुर, कबीर, मीरा का
काव्य,साहित्य सर्वविदित है।।

कवि, कल्पना और कलम का
रिश्ता सबको ही भाया है।
सोये हुए सिंहों को अकसर
कवियों ने ही जगाया है।।

चंद्रवरदाई ने पृथ्वीराज को,
बंकिमचंद्र ने मां के लाल को,
सही राह कलम से दिखाकर
ऊंचा कर दिया देश के भाल को।।

बदल दे इतिहास व किस्मत
वो काबिलियत है कलम में।
वेद,पुराण, रामायण,गीता के
सार को अपना लो जीवन में।।

स्वरचित- निलम अग्रवाल, खड़कपुर

नमन मंच 
02/08/19
कलम
***
पहली बार जब थामा था तुम्हें
प्यार से ऊंगलियों मे सजाया था ,
अपना नया दोस्त बना तुम्हें
चूम कर रिश्ते को सजाया था ।

मेरा दोस्त मेरी कलम अब 
पल पल मेरे साथ रहे,
अहसासों को शब्दों की माला 
में पिरो मन का रीतापन भरे ।

कोरे कागज को खूबसूरत रंगों
से सजा मन को अभिव्यक्त करे,
लेख मेरे ,लेखनी के माध्यम से
नित कल्पना की नई उड़ान भरे।

जब संवेदनशीलता शब्दों में ढले 
कलम निर्भीक धाराप्रवाह चले,
स्वयं को स्वयं से परिचित करा
जीवन को नई दृष्टि नये लक्ष्य मिले।

लेखन से मिला विस्तार मुझे
सीखा नई विधाओं का अद्भुत संसार
आप सब ने पढ़ कर मुझे 
दिया रिश्तों का अनुपम उपहार।

लेख,लेखनी से गहरा नाता है
दोस्त बिन रहा नही जाता है
एकाग्रता यूँ ही अब बनी रहे
कलम निष्पक्ष निडर चलती रहे।

स्वरचित
अनिता सुधीर

आदरणीय जनों को नमन
🌹🙏🌹🙏🌹
विषय-कलम/कलमकार
दिनांक-०२/८/२०१९

होश में नहीं आज समंदर भी देखकर चाँद पूनम का
सहसा किनारों पर आया जाया न करो ।

है याद उन्हें हर लम्हा गुज़रा हुआ
संवरने दो यादों को खंजर चलाया न करो ।

हर शख्स फ़रिस्ता नहीं होता कसम से
यूँ खिलखिलाकर हाथ मिलाया न करो ।

अरमानों को "पर" नहीं मिलते हर वक्त गुलिस्तां में
छोंङो भी आग पानी में लगाया न करो ।

होके मजबूर तन्हा चलते हैं सफ़र पर
मुङमुङ कर आशिकी जताया न करो ।

जब शहर में शोर हो तन्हाइयों का तब जन्म लेती है गज़ल
बेवज़ह दोष #कलम पर लगाया न करो ।

तोङते जो हया तो निगल जाते समंदर भी "सीमा"
इन आँसुओं को सलीका सिखाया न करो ।

स्वरचित ✍️
-सीमा आचार्य-(म.प्र.)

1भा.नमन साथियों
तिथि ःः2/8/2019/शुक्रवार
बिषयःःः#कलम#
विधाःःःकाव्य ः

कलमवीर हम कलम हस्त है।
कलम हाथ मे कलम शस्त्र है।
सद्साहित्य सृजन हम करते,
सृजनकार की कलम मस्त है।

गद्य पद्य सभी सृजन करें हम।
संगीत सभी भजन लिखें हम।
कलमकार बस कलम थामता,
समाज समस्या खनन करें हम।

ये कलम बहुत प्रहार करती है।
रूके नहीं सदा चलती रहती है।
कलम हर क्षेत्र में कदम बडाती,
सूंघ सूंघकर लिखती रहती हैं।

सृजनशीलता इससे दिखती है।
न भयभीरुता इसमें दिखती है।
साहित्यकार की यही निशानी
कलम निर्भीकता में मिलती है।

स्वरचित ः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.
जय जय श्री राम राम जी

2/8/2019/शुक्रवार
काव्यः ः
#कलम#


विषय- कलम / कलमकार 
सादर मंच को समर्पित -


🍀🌺 मुक्तक 🌺🍀
*************************
🌷 कलम / कलमकार 🌷


कवि आराधना, साहित्यिक साधना ,
भाषा समाज उन्नयन लक्ष्य को रखते हैं ।

भारतीय संस्कृति ,शाश्वत चेतना से ,
सत्य का निरूपण कलम परक हो करते हैं ।

समाजिक उत्थान को , जन-जागरण को ,
जीवन मूल्य समझाते करके राष्ट्र को नमन --

कलम सृजना से , शुद्ध व्याकरण से ,
कलमकार भावों से साहित्य को रचते हैं ।।

🌺🍀🌷🍊🌹

🌴🌺**....रवीन्द्र वर्मा आगरा

2भा.नमन साथियों
तिथिःः2/8/2019/शुक्रवार
बिषयःः# कलम/कलमकार#
विधाःः काव्यःः

कलमवीर मैं कलमकार हूँ।
छोटा सा मै साहित्यकार हूँ।
जो मन चाहे मैं लिख देता,
मनमौजी पर मै फनकार हूँ।

नहीं चलाता मैं कोई शस्त्र,
मगर कलम मेरा हथियार।
प्रमाण पत्र नहीं इसे चाहिए,
जब माँ सरस्वती बलिहार।

शौर्य वीर सब इसमें संचित।
लिखते नाटक होते मंचित।
सबरस उगले कलम हमारी,
प्रेमपूर्ण हो चाहे रक्त रंजित।

खबर नहीं हम खबर बना दें।
कुछ मिनटों में नगर जगा दें।
जहाँ के बिकते कलमकार ये,
कोई नाम और शहर बता दे।

न चाटुकार जो कलमवीर हो।
वही सचमुच का महावीर हो।
साहित्य सृजन शारदे वरदान,
कलाकार वही जो धर्मवीर हो।

स्वरचितः ः
इंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.
जय जय श्री रामरामजी

2भा.#कलम/कलमकार#काव्यःः
2/8/2019/शुक्रवार

नमन भावों के मोती
दिनांक : - 2/8/019
विषय : - कलम/ कलमकार

सूखे डालों में
हरियाली भरता
पत्थरों के सुमधुर
राग वह है सुनाता
समुन्दर के क्रन्दन
को दर्शाता
सुप्त रहता जो सदैव
उसमें भी यह चंचलता ले आता
अपने शब्दों के भावों से
हर परिवेश, परिस्थिति
और वर्तमान 
इतिहास को
रचता, गढ़ता रहता
वह कलम के 
मसीहा कलमकार। 

कहाँ मौन रह पात वह 
चाहे खुशी का हो अम्बार 
या गमों का सैलाब
उनकी कलम चलती ही रहती
बनकर कभी अंगार
कभी बन शीतलता का फुहार
दिखाते वह धुँधलाई हर छवि
दाग- धब्बे के साथ 
वह सच्चा कलमकार। 

स्वरचित : - मुन्नी कामत।

नमन हिंदी भाव भूमि💐
कार्य:-शब्दलेखन
बिषय:- कलम
विधा:-काव्य

कौन कहता है कि मैं,
एक असिहष्णु को मार नहीं सकता।
कौन कहता है कि मैं,
किसी को ढेर नहीं कर सकता।
निहत्था हूँ मैं-यह सच है,
क्या वार नहीं कर सकता।
सामने तो आओ यार,
मैं अपनी कलम की धार से-
क्या सीना फाड़ नहीं सकता?

माना कि मैं हूँ सहिष्णु,
भारी ख़ंजर उठा नहीं सकता।
दौलत के नाम पर हूँ कंगाल,
भारी धन लुटा नहीं सकता।
खुश हूँ इसीलिये कि ,
कोई चोर डाका डाल नहीं सकता।
आजमा के तो देखो यार,
कितना चौड़ा है सीना तुम्हारा-
क्या लेखनी से उसे काट नहीं सकता।
💐
मौलिक:( मेरे कविता संग्रह से )

डॉ.स्वर्ण सिंह रघुवंशी, गुना (म.प्र.)

:भावों के मोती::
#दिनांक::२"८"२०१९::
#विषय::कलम कलमकार::
#विधा::काव्य:;
#रचनाकार::दुर्गा सिलगीवाला सोनी::

*""***""कलम कलमकार""***""*

दूर ही रहे वो सभी हाथ कलम से,
जो धन दौलत कमाने में व्यस्त हैं,
सिर्फ वही रखें अब विचार अपने,
जो निरन्तर सत्य के ही साथ तटस्थ हैं,

लाभ और नफे की मन में चाहत,
सच्चाई को भी नजर अंदाज करे,
नकली और चमकीले आडम्बर में,
बगुला भगत भी इस जहां मैं राज करें,

कलम की ताकत असीमित होती,
कलम से अतीत कलम से आज,
भविष्य भी सुरक्षित हो सकता है,
सच की स्याही पर हो कलम का राज,

कलम चलाकर कुछ पूर्वाग्रहियों ने,
ज्ञानियों की जात ही बतला डाली,
परिणाम दुराग्रह का हुआ यही की,
हिंदुत्व रूपी पेढ से कटिं अनेकों डाली,

सच्चे सिपाही तो कबीर थे कलम के,
उनसे ना हुई किसी की खुशामद,
अब कलम चलाने में भी निकला हूं,
हानि हो लाभ हो क्षति ही हो या आमद,

भावों के मोती
2/08/19
विषय-कलम ,कलमकार

. रश्मियों की कलम से 
एक नव प्रभात रच दूं,
खोल कर अंतर झरोखा
सूरज को स्वाधीन कर दूं ।

रजनी की निरवता में
मधुर स्वर मुखर कर दूं ,
सुधा चांदनी की कलम से
उद्धाम अंधकार हर दूं।

श्वास-श्वास पावन ऋचाएं
हर कलम संगीत भर दूं,
मन वीणा मधुर बज मेरी 
विश्व को सरगम मैं कर दूं।

कर सरस काव्य सृजन 
हे व्याकुल मन मेरे रसी तूं,
मन के कोमल भाव उकेरूं
कलम से बस कविता रच दूं।
स्वरचित।
कुसुम कोठारी।

सादर नमन
02-08-2019
कलम
कलम के बल से डोल उठते हैं सिंहासन
रणभेरी सी गुंजित होते शब्द-रूप हुंकार
अनीति-अन्याय के प्रति सजग जन-मन
जोश, रोष भर दे, कलम की ऐसी ललकार

सच का उद्बोधन, बहुत कठिन डगर है
पग-पग फनियों की फैली विषैली फुँकार
कर शपथ, अविचल पथ, चल पाये मन्मथ 
वनराज सरीखे, बचे वो कितने कलमकार

सिक्कों की खन-खन, सर पर टंगे तलवार
संगीनों के साये में है, कुंद कलम की धार
अर्थ का शोधन या सत्ता का है सम्मोहन
चारण बन मन करता आज जय जयकार
-©नवल किशोर सिंह
स्वरचित

II कलम / कलमकार II नमन भावों के मोती...

कलम तेरी तो है बात निराली...
तू कब..कैसे...किसपे चल जाए...
कभी मधुर बजती बाँसुरिया सी...
कभी तलवार चमक दिखलाये...
तू कब..कैसे...किसपे चल जाए...

कभी चले ठुम्मक ठुम्मक...
पैंजनियां छनकाये...
तुलसी के छंदों में मीठी...
राम धुन सुनाये....
बच्चों की किलकारिओं सी...
मिश्री कर्ण घुल जाए....
कभी बारिश में भीगी... 
कागज़ पे...
नाव चलती जाए....
बच्चों की हठखेलियों से तू...
सब मन मोह ले जाए......
बिलकुल नटखट बच्चे जैसे तू...
न जाने कब क्या कर जाए....
कलम तेरी है बात निराली...
कब...कैसे...किसपे चल जाए..

जवाँ दिलों की धड़कन में तू ...
धक् धक् कर रह जाए....
बन आवाज़ खामोश दिलों की...
दिल को दे समझाए....
कभी टूटे जो दिल किसी का....
मरहम दे है लगाए....
दर्द में जब कोई डूबे आशिक़...
तू सैलाब ले कर आये....
डुबोकर समंदर अश्कों में...
तू चमत्कार दिखलाये....

उड़े चुनरिया गोरी की तो...
पवन ठहर जाए....
गाल पे काला तिल गोरी का...
तू पहरेदार बनाये....
जब लहराए पवन मस्त सी, तू...
ज़ुल्फ़ गोरी की लहराए....
कंगना...बिंदिया चमकी जब...
तू बिजली बन गिर जाए...
कभी गाल गुलाबी बनाती...
कभी पंखुड़ी से होंठ बनाये...
कितने रूप हैं तेरे कलम जी....
कैसे कोई बतलाये....

आती जब ठहरे हाथों में, तो...
नया सृजन कर जाए....
ज़िन्दगी के हर सफ़े को तू....
खोल खोल समझाए.....
पर बेशर्म हाथों का खिलौना बन...
विध्वंस रचती जाए....
हर गली..मोड़..हर बाग़ में बैठी...
तू अपने गीत सुनाये....
कभी दुहाई देती उम्र..जज़्बों की...
कभी देह चिल्लाये....
पर नासमझ ये दुनिया ऐसी....
तेरी बोली समझ न आये....

जात पात न धर्म लिहाज तुझे है....
तू सबके ताज सजाये.....
गीत गोबिंद बने तुझसे, कभी...
गीता राह दिखलाये....
बन कबीर तू दिल को खोजा....
नहीं बहरा खुदा बतलाये....
पहुंची जब सूरदास हाथ में...
कान्हां की मूरत दे दिखलाये.....
जग दंग देख रह जाए.....
कभी रसखान कभी मीरा में...
तू प्रेम सुधा बरसाए...
जग प्रेममय हो जाए....

कभी बन लक्ष्मी बाई तू...
देश की आन बचाये....
कभी वीरों के चरण कमलों में....
तू फूल बन बिछ जाए.....
कभी हिमालय से ललकारे...
तो कभी सियाचिन जाए....
ज़िन्दगी और मौत का सच तू....
आँखों से देख दिखलाये....
जब माँ के जांबाज़ों के आगे...
कृतज्ञता से झुक जाए...
तेरे अश्रुओं से सब की ही...
रूह पिघल बह जाये.....
जब ललकारें देश के दुश्मन...
तू बन शमशीर चमक जाए....
किस विद करून मैं तेरा वर्णन....
मुझे समझ न आये....

जब मांगू मैं सुकून खुदा से...
तू माँ की लोरी सुनाये....
जब लगूं कभी मैं गिरने तो...
बाजू पिता की तू बन आये....

बन जीवन संगिनी मेरी तू....
हर मोड़ पे साथ निभाए....
जैसे भाव उमड़े मन में...
तू वैसे ही बहती जाए....

कलम तेरी तो है बात निराली...
तू कब...कैसे...किसपे चल जाए...

II स्वरचित - सी.एम्.शर्मा II 
०२.०८.२०१९

नमन भावों के मोती 
विषय - कलम/ कलमकार
02/08/19
शुक्रवार 
मुक्तक 

कलम के सिपाही सदा लेखनी की 
प्रखरधार से क्रांति लाते रहे हैं। 
जहाँ भी अनाचार का सिर उठा है, 
उसे शब्द-शर से दबाते रहे हैं। 
उन्हें कोई भी भय नहीं इस जहाँ से ,
निरंतर चलाते हैं अपनी कलम को-
कभी गर अंधेरा हुआ इस धरा पर 
तो कविता से दीपक दिखाते रहे हैं।

स्वरचित 
डॉ ललिता सेंगर

नमन भावों के मोती
शीर्षक--
कलम/कलमकार
दिनांक--2-8-19
विधा--मुक्तक
1.
जनहित में उठती कलम, कलमकार सत्कार।
समन्वयी सरिता बहे, बढ़े आपसी प्यार ।
कविता हो या गद्य हो,भरें उत्कृष्ट भाव-
देश प्रगति औ रक्ष हित, हों जन गण तैयार।
2.
कलम क्रांति की कथा सुनाती।
कलम शांति की गाथा गाती।
कलम तख्त औ ताज पलट दे-
कलम खड्ग माथा झुकवाती।

********************
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451551


ना में कोई साहित्यकार हूँ,
ओर ना ही कोई कवि हूँ मैं,
ना चंद्रमा की धवल चांदनी,
ना आभामय कोई रवि हूँ मैं,

केवल शब्दो को लिखता हूँ,
बस मन की बाते करता हूँ,
जैसा हूँ वैसा ही दिखता हूँ,
ना कोई अभिनय करता हूँ,

जिसकी जैसी मर्जी सोचे,
इसका चिंता मैं क्यों करूँ,
ना मन मे रखता मैं द्वेष राग,
दुनिया से फिर मैं क्यों डरूँ,

हाँ, फिर भी चिंता करता हूँ,
मेरे इन शब्दो की मर्यादा की,
नही मेरी कोई मनोकामना,
जो प्राप्य है उससे ज्यादा की,

क्षमता नहीं हैं मुझमें बिल्कुल,
कोई व्यर्थ के लांछन सुनने की,
ना मैं रखता कोई महत्वकांक्षा,
कोई बड़े से सपने बुनने की,

करूँ सम्मान सभीका लेकिन,
कुछ आदर मैं भी चाहता हूँ,
जैसा मान कोई मुझसे चाहे,
वही सादर मैं भी चाहता हूँ।
#वही_सादर_मैं_भी_चाहता_हूँ"
🖊️ #प्रकाश_जांगिड़_प्रांश 🖊️
🌳काव्यगोष्ठी मंच, कांकरोली



🌳
कलम को गढ़ना सिख रहा हूँ,
मैं आगे बढ़ना सिख रहा हूँ,
मेरी उम्र भले ही 33 हो गयी,
मैं अब भी पढ़ना सिख रहा हूँ,

शब्दो से लड़ना सिख रहा हूँ,
शिखर पे चढ़ना सीख रहा हूँ,
लोगो के मन की लोग ही जाने,
मैं अब भी पढ़ना सिख रहा हूँ,

कविता को मढ़ना सिख रहा हूँ,
खुद से ही अड़ना सिख रहा हूँ,
ज्ञान के सागर में गोते लगाता,
मैं अब भी पढ़ना सिख रहा हूँ,
🖊️ #प्रकाश_जांगिड़_प्रांश 

नमन भावों के मोती
आज का विषय, कलम , कलमकार
शुक्रवार
2, 8 ,2019,

भावों के मोती छलकायें ,
शब्दों से उनका श्रृगार करे ।
जन मानस की छिपी वेदना,
का जो प्रतिपल वमन करे ।

आइना दिखाये हरदम जो,
फैली सामाजिक कुरूपता को।
सदैव देता रहे प्रोत्साहन जो ,
नव विकास की धारा को। 

दिल में बसी रहे कोमलता,
पर धारण करे जो दृढ़ता को ।
परवाह जिसे मानवता की हो,
जिन्दा रखता जो अपनेपन को । 

कलम बने हथियार हमेशा ,
अत्याचार से लड़ने को ।
कलमकार होता है वही,
जीवित रख्खे जो न्याय को ।

स्वरचित, मीना शर्मा, मध्यप्रदेश,

नमन मंच को
दिन :- शुक्रवार
दिनांक :- 02/08/2019
शीर्षक :- कलम/कलमकार

शब्दों को गूंथता माला के मोती सा...
तुफानों से लड़ता दीप ज्योति सा..
जनमानस से हटाता,अंधकार हूँ...
हाँ मैं एक अदना सा कलमकार हूँ..

चाह नहीं कोई किसी सम्मान की...
चाह नहीं प्रशंसकों के प्रमाण की...
शब्दों की बहाता अविरल धार हूँ..
हाँ मैं एक अदना सा कलमकार हूँ....

लिखता आमजन के अधिकारों को...
संजोता रहता शब्दों के हथियारों को...
अत्याचार पर करता सतत् प्रहार हूँ...
हाँ मैं एक अदना सा कलमकार हूँ....

स्वरचित :- मुकेश राठौड़

 नमन
भावों के मोती
२/८/२०१९

विषय-कलम/कलमकार

कलम रचे,
हर रोज नया इतिहास,
बनकर पहचान।
कलमकार की।
कलम की प्रखर धार,
करे रूढ़ियों पर प्रहार।
मिटाएं अंधकार।
करे नवपरिवर्तन का आगाज।
विश्व के महान ग्रंथ
कलम की देन है।
विश्व की क्रांतियों में
कलम ही मूल है।
कलम से बरसे रस,
बरसे प्रेम की फुहार।
कलम जीवन -सार,
और दर्शन का प्रसार।
कलम से विज्ञान,
कलम में बसे ज्ञान।
कलम विश्व संस्कृति
की बनती है पहचान।
कलम है अस्तित्व
कलमकार का।
कलम ही करें कार्य
संस्कृति के प्रसार का।
सम्पूर्ण विश्व साहित्य
कलम की देन है।
कलम कलमकार के
दिल का चैन है।

अभिलाषा चौहान
स्वरचित मौलिक
2/8/19
भावों के मोती
विषय- कलम/कलमकार
=================
आजादी की आग बनी
बनी क्रांति की ज्वाला
कलम ने अपनी ताकत से
हर एक मन में भरा उजाला

खुशियों का पैगाम बनी
हर दिल का लिखती हाल
यह कलम की ताकत है
इतिहास रचता कलमकार

सजनी की पाती लिखे
लिखती माँ की ममता
पिता का आशीष लिखे
कलम दिल की जुबां बने

बसंत की बहार,होली के रंग
सावन के गीत,तीज की रौनक
साहित्य के सागर में डूबी
कलम नित नए आयाम रचे

शब्दों से संस्कार जगाकर
ज्ञान का प्रकाश फैलाती
ग्रंथों को गढ़कर कलम ने
संस्कृति को नई दिशा दी

तलवार-सी धार बनकर
शब्दों के बाण चलाती
कलम की ताकत कम न समझो
कलम बड़े-बड़े काम कर जाती
***अनुराधा चौहान***©स्वरचित
🌹शुभ संध्या🌹
2/7/2019
विषय-कलम/कलमकार
द्वितीय प्रस्तुति
✍️🌹✍️🌹✍️

ए कलम!आज तू कुछ ऐसा कमाल कर दे
युवा शक्ति के लहू में देशप्रेम का उबाल भर दे..

खा रहे हैं जो सीने पर दुश्मनों की गोलियां
उन वीरो के रग रग में देशहित हौसला बेमिसाल भर दे...

सत्ता के नाम पर जो सेंक रहे हैं अपनी रोटियाँ
उन लोलुपों को सबक सिखाने का
कलम की स्याही तू सौमुखी ज्वाल भर दे

भरी थी अब तक चिंगारी जिन गोलियों में 
ए कलम! तू उन गोलियों में आग की मशाल भर दे 

रुकना तेरा धर्म नहीं,तू कलम की सिपाही है 'वंदू'
ज्वलंत निज लेखनी से ,,शान से ऊंचा देश का तू भाल कर दे ।।

✍️वंदना सोलंकी©️स्वरचित

मंच को नमन 
दिन -शुक्रवार ।2/8/2019
विषय:- कलम /कलम कार 
विधा :-हाईकू
कलमकार 
कलम की ताकत
पहचान तू ।
(2)
शक्ति कलम 
भक्त कलमकार 
क्या नही करे ।
(3)
जीतो संघर्ष
कलम से अपनी
कलमकार ।
उषासक्सेना :-स्वरचित

कलम आज मैंने बड़े दिनों बाद उठाई हैं 
क्या लिखूं बस इसी सोच में उलझी हुई हूँ 
कागज पर कलम से उमड़े भाव जगे हैं 
फिर से दिल के दर्द कलम और कागज पर उतरे हैं .

कलम से लिखी हैं यादों की हैं नैय्या
कभी बचपन कभी यौवन 
कभी ख्यालों की खवैया
कभी अहसास लिख दिये हैं कभी पल ख़ास लिख दिये हैं .

मन के अहसा उतार कर कलम से 
एक मन की अर्चना लिख दी हैं 
शब्दों से हर दिन कलम से ईश्वर संग बात करती हूँ 
कभी खुश और उदास रहती हूँ .
स्वरचित,:- रीता बिष्ट

 शुभ संध्या
नमन मंच
।। कलम/कलमकार ।।

द्वितीय प्रस्तुति

दिलवर दिल पर जादू चला गयी 
नाचीज़ को कलमकार बना गयी ।।

बेशक हुनर छुपा था यह मुझमें 
पर वो ही है जो पता बता गयी ।।

वो न होती मैं कुछ न था ज्यों 
जन्मों का अहसान चुका गयी ।।

कलमकार यूँ न निखरे खोना पड़े 
आकर्षण ऐसा होश उड़ा गयी ।।

कैसे कहूँ इश्क में कुछ नही मिला
कलम का 'शिवम'तोफ़ा दिला गयी ।।

एकलव्य की मूरत सी ये मुहब्बत
सच्ची लगन की जीत बता गयी ।।

कहें उसे रहनुमा या हमनवा 
कितने गम चुटकी में भगा गयी ।।

जीने के वास्ते हैसियत हो बतौर-
कलमकार हैसियत कहा गयी ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 02/08/2019

नमन मंच
दिनांक-२/८/२०१९
शीर्षक-"कलम/कलमकार"
कलम तू मेरा अभिमान
कलम तू बन मेरी पहचान
झूठ, आडंबर से तेरा क्या काम
सदा रखना सत्य का मान।

सरपट दौड़ना तू कागज पर
लोहा मनवाना धरातल पर
तुम्हारा वार जाये ना खाली
बड़े बड़े दिग्गज पर भारी।

रहना तू सदैव चौकन्ना
मर्म जान, फिर भेद खोलना
कठिन है काम तुम्हारा
पर धूमिल न हो नाम तुम्हारा।

हर विषय पर धार तुम चलना
इसमें तुम विफल मत होना
लिखने के लिए सिर्फ मत लिखना
कुछ फर्ज अदा तुम करना।

जो दिखाओ तुम सत्य का मार्ग
उस पर चलूं मैं पहले आप
कलम तू है मेरा अभिमान
कलम तू बन मेरी पहचान।
स्वरचित -आरती श्रीवास्तव।

शुभ संध्या 
नमन मंच ।
" कलम/ कलमकार"
'विनम्र प्रस्तुति'
एक निवेदन 
**********
हे! कलमकार कुछ लिख अनूठा।.... 
शब्द हो सब सत्य तेरे, इक न झूठा।....
कहानी कुछ शौर्य की, पहचान की हों। 
वीरांगनाओं के दबे, अरमान की हों। 
देश भक्ति की हों कुछ बलिदान की हों। 
गुरु द्रोण का छल लिख रे! तू, एकलव्य का लिख अंगूठा।.... 
हे! कलाकार कुछ लिख अनूठा।.... 
राम की मर्यादा लिख दे, कैकेई की डाह लिख दे। 
लक्ष्मण का भ्रातृ- प्रेम, उर्मिला का दाह लिख दे। 
नागरिकों का रुदन औ' दशरथ की आह लिख दे। 
मित्र भाव सुग्रीव का लिख शबरी का लिख बेर झूठा।... 
हे! कलमकार कुछ लिख अनूठा।...
सागर मंथन की कथा को तू, पूरे विस्तार से लिख। 
दैत्य- दानव मध्य सागर रत्नों की बटवार दे लिख। 
दैत्य गुरु की बृहस्पति से अनवरत तकरार दे लिख। 
रूप मोहिनी लिख विष्णु का, स्वप्न शुक्र का टूटा।.... 
हे! कलमकार कुछ लिख अनूठा।....
पीड़ा तू लिख दे हे! कवि, धरती के भगवानों की। 
भरपाई नहीं हो सकती है, जिनके एहसानों की। 
मजदूर किसान, कमेरों की, इस भू के परवानों की। 
लिख,रहे सदा दु:ख से लड़ते, नहीं कभी हौसला टूटा।.... 
हे! कलमकार कुछ लिख अनूठा।.... 
युवा- वर्ग का दर्द लिखो रे! घुटन बढ़ी है भारी। 
सक्ष्म होकर भी फिरते हैं, बिन धंधे लाचारी। 
डिग्री ने सब लील लिया, ना खेत रहा ना क्यारी। 
भटक भटक कर हिम्मत हारी,बीज क्रोध का फूटा।.....
हे! कलमकार कुछ लिखा अनूठा।....
********************************
स्वरचित व मौलिक, 
एल. आर. राघव "तरुण"
बल्लबगढ, फरीदाबाद।

 नमन मंच भावों के मोती
विषय- कलम
विधा- माहिया छंद

2/8/2019

विद्या की है शाला
मन चिकनी मिट्टी
गूँथे गुरुवर आला 1

सरकंडे की डंडी
पहली बनी कलम
हो गर्मी या ठंडी 2

तख्ती हमने पोती
कलम तने की है 
अक्षर बनते मोती 3

इक कुंजी है शिक्षा
शस्त्र बना इसको
नर मांँग नहीं भिक्षा 4

हर युग में कलम चली
भय का भाव नहीं
तरणी भव पार भली 5

शालिनी अग्रवाल
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित

नमन भावों के मोती नमन आ0 राठौर मुकेश एवं लज्जा राम राघव तरुण जी 

शीर्षकः- कलम / कलमकार

होता नहीं कलमकार कभी आतंक या सत्ता का गुलाम ।
लिखती है वही केवल, आता है जो समाज के ही काम ।।

दास प्रथा को भी रोक ही पायी, कलमकार की कलम ।
देख कर होता जुल्म दासों पर, चल पड़ी उनकी कलम ।।

विरुध्द इस प्रथा के, उस समय जो भी था सिर उठाता ।
बिना मौत के ही वह बेचारा, था निश्चित मारा जाता ।।

देख तथा सुन कर उन्होंने, दासों की दर्द भरी सिसकियां ।
लिखी कलम से कलमकार ने ही, पंचतन्त्र की कहानियां ।।

है प्राप्त अब तो, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार ।
रुक नहीं सकता कलम कलमकार का, अब किसी प्रकार ।।

होते है बहुत विषयों पर, बुध्दिमानों के विभिन्न विचार ।
कहते हैं पर कुछ सिर फिरे, लिखो कहें हम जिस प्रकार।। 

लिखोगे नहीं पसंद का हमारी, फिर मारे ही तुम जाओगे ।
मरने के पश्चात तुम,फिर कुछ भी लिख ही नहीं पाओगे ।।

कलमकार किन्तु दबाव में किसी के, मिथ्या नहीं लिखता ।
लिखता तो फिर, वैज्ञानिक गैलीलियो मारा ही क्यों जाता ।।

मगर बहुत से मतकटे तो, आज भी केवल ऐसा है करते ।
कहना उनका नहीं मानने पर,कलमकार को हैं मार डालते।।

कलमकार किन्तु कभी मरने से, किंचित भी नहीं है डरता ।
वह तो मत अपना ही केवल,लेखनी से सदा रहेगा लिखता ।।

उठाते हो श्रीमान आप क्यों, कलमकारों के विरुध्द तलवार ।
बिगड़ गये हैं जनाब क्या आपके,समस्त ही उत्तम संस्कार ।।

आता नहीं क्या आपको किंचित भी कलम चलाना सरकार ।
पढ लेते तो आ जाता शायद आपको भी कलम चलाना य़ार ।।

कलमकार पूरी शक्ति भर करेंगे, हर अत्याचार का प्रतिकार ।
डालेगा नहीं कलमकार, अत्याचार के सामने अपने हथियार ।।

कलमकारों के बारे में होनी नहीं चाहिये, कभी कोई भ्रान्ति ।
लाता है कलमकार समाज में, कलम से ही समग्र क्रान्ति ।।

होते नहीं कलमकार, तो रहते हम अब तक अंग्रेजों के दास ।
विरुघ्द उनके उठाने का सिर,होता ही नहीं किसी में साहस ।।

सुनता है कलमकार केवल,अपनी अन्तर आत्मा की आवाज़ ।
करने से कलम बध्द आवाज़ को,आता ही नहीं है वह बाज़ ।।

दिखाता है कलमकार ही, सारे समाज को सच का आईना ।
खाता नहीं भय किसी से वह, चाहे अमेरिका हो या चाईना ।।

ऐसे सिर फिरों के कारण ही, इतिहास को है बिगाड़ा जाता ।
सदियों बाद कठिनाई से, फिर लिखा सत्य है उसको जाता ।।

कर सकता नहीं कलमकार कभी भी, झूठा किसी का गुणगान। 
करता हो अगर कोई तो,उसे कलमकार नहीं तू भाट ही जान ।।

होता नहीं है बाज़ीगर कलम का, कभी किसी का भी गुलाम ।
कर दे कोई भी अत्याचारी चाहे, उसका काम ही पूरा तमाम।

कहता है व्यथित हृदय तुम भी तो कुछ कलम चलाना सीखो।
उत्तर कलमकार को तुम, केवल ,कलमकारी से ही देना सीखो ।।

डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव
“व्यथित हृदय मुरादाबादी”
स्वरचित

नमन् भावों के मोती
2/8/19
विषय:कलम
विधा:हाइकु

घाटी में लहू
आतंकी वारदातें
कलम स्तब्ध

निर्भया कांड
कलम हुई मौन
समाज स्तब्ध

नया जमाना
टच स्क्रीन कलम
विकास यात्रा

कलम लिखे
स्वतंत्र अभिव्यक्ति
लोकतंत्र में

अक्षर ज्ञान
कलम उपहार
सभ्य समाज

साहित्य विश्व
कलम के सिपाही
ज्ञान क्षितिज

मनीष श्री
स्वरचित

"नमन भावों के मोती, नमन मंच"
"शीर्षक:- कलम/ कलमकार"
. "विनम्र निवेदन"

हे!कलमकार कुछ लिख अनूठा।.... 
शब्द को सब सत्य तेरे, इक ना झूठा।....... 
कहानी कुछ शौर्य की पहचान की हों। 
वीरांगनाओं के दबे अरमान की हों। 
देश भक्ति की हों कुछ बलिदान की हों। 
गुरु द्रोण का छल लिखरे तू,एकलव्य का लिख अंगूठा।.... 
हे! कलमकार कुछ लिख अनूठा।...
राम की मर्यादा लिख दे, कैकेई की ड़ाह लिख दे।
लक्ष्मण का भ्रातृ-प्रेम, उर्मिला का दाह लिख दे। 
नागरिकों का रुदन और, दशरथ की आह लिख दे। 
मित्र-भावसुग्रीव का लिख,शबरी का लिख बेर झूठा।....
हे! कलमकार कुछ लिख अनूठा।....
सागर मंथन की कथा को तू पूरे विस्तार से लिख। 
दैत्य-दानव मध्य सागर -रत्नों की बंटवार दे लिख।
दैत्य-गुरू की बृहस्पति से अनवरत तकरार दे लिख। 
रूप मोहिनी लिख विष्णु का स्वप्न शुक्र का टूटा।..... 
हे! कलमकार कुछ लिख अनूठा।... 
पीड़ा तू लिख दे हे! कवि, धरती के भगवानों की। 
भरपाई नहीं हो सकती है, जिनके एहसानों की। 
मजदूर, किसान, कमेरों की इस भू के परवानों की। 
लिख, रहें सदा दुख से लड़ते नहीं कभी हौसला टूटा।... 
हे! कलमकार कुछ लिख अनूठा।...
युवा वर्ग का दर्द लिखो रे! घुटन बढी है भारी। 
सक्ष्म होकर भी फिरते हैं, बिन धंधे लाचारी। 
डिग्री ने सब लील लिया ना खेत रहा ना क्यारी। 
भटक भटक कर हिम्मत हारी, बाँध सब्र का टूटा।...
हे! कलमकार कुछ लिख अनूठा।... 
***********************
स्वरचित व मौलिक 
"तरुण"

रायबरेली

 नमन "भावों के मोती"
शुभ साँझ
🙏🙏💐🍁🌺🍁💐🍁🙏🙏
विषय:-कलम


लगजा गले कि रात बाकी है..।
याद मे अब रात गुजारी है...।

खामोश आँखों की बयानगी..।
जागने की रस्में जारी है..।

पावंद कलम तेरे नाम से..।
यादें नज्मों में उतारी हैं..।

कर चले हैं फ़ना खुदी को हम..।
तुझे पाने की जिद सारी है

कस्ती खुद ही डुबो देते हैं...। 
लहर से बचना दुस्वारी है..।

स्वरचित
नीलम शर्मा

नमन मंच भावों के मोती
2/7/2019/
बिषय ,कलम ,/कलमकार
जिस पर माँ वीणावादिनी की कृपा
चलती रहती कलम अनवरत
दुनियां के अनभवों को कलम
से निखारना इनकी फितरत
जमाने के कृत्य अकृत्य देख न सकता कलमकार
हाथों में फौरन आ जाती 
जैसे हो तलवार की धार
शौर्य वीरों की गाथाऐं
कलम ही संवारती
सरस मृदु शब्दावली से
संजोती संवारती
हृदय संताप को दूर कर
पिलाती है मधु मकरंद
मन मयूर लेता हिलोरें
छा जाता आनंद ही आनंद
वहीं वीरों के मन में करता नव.रक्त संचार
कलम के सिपाही भारत के सर्वोच्च कर्णाधार 
अक्षरसः अक्षर शब्दों में तरासना
कव्यांजलि माल पिरो सत्य को संवारना
माँ सरस्वती का रहे सदैव बृहद हस्त.इनपर
सम्मानों से भरे पिटारा
भरते रहें गागर में सागर
साहित्यिक कृतियों से दिखाते
समाज को आइना
खुशी या गम में शरीक
हो सिंचित करते भावना
वेखौफ हो करते हैं वार
कलम यूं चले ज्यों तीखी तलवार
शाश्वत सत्य ही है इनका आधार
ओजस्वी, माधुर्य लेखन में
सर्वोपरि है कलमकार
स्वरिचत,, सुषमा ब्यौहार

"कलम"
कलम चला तो राजनीति पर
आत्मा इनकी सो गई है
बना कानून कोई ऐसा
कितनी निर्भया मर गई है।

चला कलम तू नशे पर
कितने घर बर्बाद हुए हैं
खुश हैं सौदागर नशे के
हमने कितने पैसे कमा लिए हैं।

मां बाप के बारे में भी लिखना
जो वृद्धाश्रम की हवा खाते हैं
रात को उठकर वे सपने में 
बेटा बेटा बुलाते हैं।

गद्दारों का जिक्र भी करना
नमक देश का बेच रहे हैं
दे रहे हैं भेद अपना 
देश में आतंक फैला रहे हैं।

तू हमेशा दर्द लिखना
लिखती रहना अत्याचार
बातें हमेशा ही सच लिखना
न करना झूठ का प्रचार।

राकेशकुमार जैनबन्धु
रिसालियाखेड़ा, सिरसा
हरियाणा।
Dhaneshwari Dewangan #नमनमंच
#विषय-------कलम
#विधा--------छंदमुक्त

मेरे एक- एक शब्द
मेरी कविता ,
मेरी कलम,
मेरी लेखनी
मेरी गीत - गज़ल
मेरी जीवन की
अनुभूति बन कर
उभरते हैं,
ज़िंदगी के कैनवास पर
रंग- बिरंगी तस्वीर
उकेरती है मेरी
मेरी कलम
सुखद अनुभूति बन
मुझे जीने मकसद
सीखाती,संबल देती
मेरी लेखनी
मेरी प्यारी सखी
जो हरदम
मेरे साथ रहती
बन कर
मेरी प्यारी अनुभूति
मेरी कलम

#स्वरचित
#धनेश्वरीदेवांगन #धरा
#रायगढ.#छत्तीसगढ़)

शुभ संध्या 
नमन मंच को ,
कलाम एवं कलमकारों को 
दिनाँक -2/8/2019
विषय- कलम 
हे ईश्वर मेरी कलम में इतनी शक्ति देना 
बाँध सकूँ छंदों की लयबद्धता को 
ला सकूँ विचारों की क्रमबद्धता को
उजागर कर सकूं समाज की संवेदनहीनता को
उजड़ती मानवता एवं लुटती मनुष्यता को
दिन पर दिन मानव की बढ़ती धनलोलुपता को 
चल प्रपंच के द्वारा गढ़े गए साम्राज्य को
अपनों के बीच बढ़ते वैमनस्य को ।
हे ईश्वर कलम जो लिखे उसमे कोमल कल्पना तो हो 
प्रियतम का प्रेम मिलाप भी हो 
परंतु उसमें झूठ का परचम न हो 
सृजनात्मकता हो ,परंतु मक्कारों का गुणगान न हो 
जो समाज को दे ऐसा संदेश, कि मानव ,मानव ही रहो पशुता का न फैलाओ ऐसा परिवेश।
स्वरचित 
मोहिनी पांडेय

दिनांक- 2/8/2019
विषय- "कलम/कलमकार"
विधा- कविता
******************
"मेरी कलम"

मेरी कलम की बात निराली,
दिलों-जां से ये मुझको प्यारी,
हरपल इसने मेरा साथ दिया,
आज कवि मुझे बना दिया |

प्रलोभन में ये कभी न आती,
बस सच्चे भाव गढ़ती जाती,
अनकही बातों को समझती,
कोरे पन्नों पर उन्हें उतारती |

मेरी कलम बिना मैं कुछ नहीं,
इसका लिखा हर शब्द सही,
एक-एक शब्द का श्रृंगार करती,
मात्रा,बिन्दी उनमें रखती |

चीटीं से लेकर पहाड़ तक,
मेरी कलम पहुँचे कहाँ तक,
जहाँ न पहुँच पाता रवि,
कलम पहुँचती वहाँ बन कवि |

लिख-लिख, ये सयानी हो गई,
शब्दों की ये दिवानी हो गई,
उम्र गर मुझे थका भी देगी,
मेरी कलम तो चलती रहेगी |

स्वरचित *संगीता कुकरेती*

नमन "भावों के मोती"🙏
02/08/2019
विता 
विषय:-"कलम" 

कागज़ के केनवास पर 
भरती कल्पनाओं के रंग 
संवेदनाओं को स्पर्श कर 
चित्रण कर देती है कलम... 

शब्द साधना के पथ पर 
अनुभवों की स्याही संग 
भावों का आह्वान कर 
स्वयं चल देती है कलम... 

निशां रहते हैं दिल पर 
कलमकार की यादों के 
इतिहास को संजो कर 
अमर कर देती है कलम... 

प्रेम-घृणा के दो छोर पर 
विचलन करता जीवन 
शब्दों से इन्हें बाँध कर 
प्रकट कर देती है कलम... 

साहित्य के गगन पर 
विधाओं के इंद्रधनुष 
मौसम को मुट्ठी में कर 
मन बदल देती है कलम... 

प्रेरणा फूँक के लगाए पर 
वंचितों और शोषितों की 
चेतना जगा मशाल बन कर 
राह दिखा देती है कलम...

स्वरचित एवं मौलिक 
ऋतुराज दवे, राजसमंद(राज.)

द्वितीय प्रस्तुति

हाइकु
कलम/लेखनी

कलम कार
अन्तस की पुकार 
लिखते धार 

लेखक धर्म
निर्भीक हो कलम
क्रांति के बीज

भावों के मोती
सतत अभिव्यक्ति
कलम साथी

स्याही घनिष्ठ
कलम कर्म निष्ठ
जीवन पृष्ठ

कलम पूजा 
चित्रगुप्त वंदन
अभिनंदन

अनिता सुधीर

नमन भावों के मोती 
विषय - कलम / कलमकार 



सत्य की डोर 
शब्द भरे उड़ान 
कलम संग 



साहित्य धरा 
शब्दों में अमरत्व 
बोती कलम 



कलम संग 
तलवार की जंग 
विजयी शब्द 



सत्य का साज 
कलम की आवाज 
साहित्य काज 

(स्वरचित )सुलोचना सिंह 
भिलाई (दुर्ग )
भावों के मोती दिनांक 2/7/19
कलम / कलमकार

है बहुत ताकत
कलम में 

" सरफरोशी की 
तमन्ना अब 
हमारे दिल में है "
कलम ने 
जगा दी थी अलख
देशभक्ति की 
दिलों में 

कलम शक्ति 
भी है
कलम है 
भक्ति भी
कलम ज्वाला
भी है
कलम है
राही भी 
दिखाती है
सही राह
दुनियाँ को

जरूरत है आज
ऐसे कलमकारों की
जो दें 
देश समाज 
परिवारों को
सही दिशा 
हो विकास 
उन्नति करें 
मिल कर सब

स्वलिखित लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल
भावों के मोती दिनांक 2/7/19
कलम / कलमकार

है बहुत ताकत
कलम में 

" सरफरोशी की 
तमन्ना अब 
हमारे दिल में है "
कलम ने 
जगा दी थी अलख
देशभक्ति की 
दिलों में 

कलम शक्ति 
भी है
कलम है 
भक्ति भी
कलम ज्वाला
भी है
कलम है
राही भी 
दिखाती है
सही राह
दुनियाँ को

जरूरत है आज
ऐसे कलमकारों की
जो दें 
देश समाज 
परिवारों को
सही दिशा 
हो विकास 
उन्नति करें 
मिल कर सब

स्वलिखित लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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"कांच /शीशा ""10अक्टुबर 2019

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