Saturday, September 14

"हिंदी/हिंदी दिवस "14 सितम्बर 2019

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ब्लॉग संख्या :-505

#बेटी_के_साथ_हिंदी_भी_बचाएंगे
#हम_हिंदी_हैं_हिंदी_सबको_बताएंगे
✍️✍️🇮🇳✍️✍️
मुश्किलों के बीच
समय की धारा से
एक - एक बूँद चुरानी है
हालातों को हराना है
रूकावटों से रुकना नहीं
बढ़ते चलना है
हाथ पर हाथ रखने से
कुछ नहीं होगा
हमें उठना होगा
आँखों के आगे से
रातों का काफिला गुजारना होगा
चाहत को राहत का जरिया बनाना होगा
दुनिया पागल कहेगी
बेवकूफ कहेगी
कहने दो
हमें अकेले ही लड़ना होगा
सबसे आगे चलना होगा
साहस दिखाना होगा
कलम को हथियार बनाना होगा
हिंदी को हृदय से हिम्मत देनी होगी
देखो !
वो कितनी अकेली पड़ गई है
छूट गई है अपनों से
उसको साथ चाहिए
हमारा हाथ चाहिए
वो रूठी नहीं, टूटी है
हर पल - पल
कभी उसकी उँगली
हमारा सहारा हुआ करती थी
और आज....
उसे हमारा सहारा चाहिए
वह निरंतर निहार रही है
चलते अपनों को पर....
हम हैं जो मुड़कर भी
नहीं देख रहे
हमें कुछ भी फिक्र नहीं कि....
माँ भारती क्या कहेगी
वह कहेगी.... उन्नति के दौर में
स्पर्धा की दौड़ में
तुम्हें मेरी बेटी का ख्याल ही नहीं रहा
मानती हूँ ...
मानव बहुत मक्कार हो गया
उसे अपनों से ज्यादा परायों से प्यार हो गया
अपनी बेटी को कोख में मारने वाला
वह हैवान
भला माँ भारती की बेटी के बारे में
क्यों सोचेगा
खैर जो भी है
माँ ममता का सागर होती है
हम क्षमा माँग लेंगे
वो माफ कर देगी
पर हमें माँ भारती को
विश्वास दिलाना होगा
हमें अपना फर्ज निभाना होगा
हमें हिंद को जगाना होगा
अंधों की आँखें खोलनी होंगी
उन्हें यह एहसास कराना होगा कि....
अपनों के लिए अपने ही होते हैं
हिंदी हमारी आवाज है
आत्मा है
जननी है
पहचान है
हम कसम खाते हैं
वादा करते हैं
मरते दम तक दिल से निभाएँगे
जग-जगकर जुनून जगाएँगे
बेटी के साथ हिंदी भी बचाएँगे
हम हिंदी हैं
हिंदी
सबको बताएंगे
जय हिंदी
नफे सिंह योगी मालड़ा ©
स्वरचित कविता
मौलिक


विधा -पद#हिंदी_मुझ_में_समायी_रहे

प्राथमिक उपचार के बल पर
भला कब तक कोई जिंदा रह सकता है
गोली लगे उसे
पूरा एक घंटा हो चुका था
दो-दो बनियानें बांधने के बाद भी
जाँघ से खून
रुकने का नाम नहीं ले रहा था
इसके बावजूद भी वह लड़ रहा था
उसका ध्यान दर्द पर नहीं
दुश्मन पर था

कुछ देर बाद
उसकी आँखें पथराने लगी
जुबान लड़खड़ाने लगी
बनियान से टपकता हुआ खून
ऐसे लग रहा था
जैसे घाव रो रहे हों
इतना सब कुछ होने के बाद भी
उसके बंदूक चलाने का अंदाज
बिल्कुल भी नहीं बदला
अपने साथी पर
खतरा नहीं आने दिया उसने
अंतिम पल तक

फतेह के बाद
ज्यों ही जय हिंद का नारा लगा
और तिरंगा फहराया तो...
सहसा उसकी आँखों से
आँसू फूट पड़े
और उसने एक हाथ से
तिरंगे की ओर इशारा करते हुए
अपने साथी से कहा कि...
मानता हूँ कि...
भारत माता खुश होगी मेरी शहादत पर

पर ...उसे बहुत दुख भी होगा
हमारी इस आदत पर
जो ..हम एक शहीद के
दस्तावेजों को भी
अंग्रेजी भाषा में लिखते हैं
क्या गुजरती होगी उस वक्त
हिंदी माँ के दिल पर
जबकि...हर शहीद
मरने से पहले जय हिंद पुकारता है
जिसमें साफ-साफ हिंदी झलकती है
वो जन्म देने के बाद भी
अपने आप को
सौतेली माँ ही समझती होगी

मानता हूँ कि...
मैं हिंदी को
देश की कार्यालयी अनिवार्य भाषा
नहीं बना सकता हूँ
मेरे पास वो ताकत नहीं है
हाँ पर... तुम मेरे लिए
इतना कर देना कि..
शहीद होने के बाद
पत्थर पर मेरा नाम हिंदी में लिखवा देना
ताकि ....मेरे मरने के बाद भी
हिंदी मुझ में समायी रहे
जय हिन्दी

नफे सिंह योगी मालड़ा ©
स्वरचित रचना
मौलिक

नमन मंच-भावों के मोती
दिनांक-14.09.2019
विषय शीर्षक-हिन्दी /हिन्दी दिवस

विधा-चन्द दोहे
========================
(01)
हिन्दी विश्व विमोहिनी,इसको दो सम्मान ।
जो सज्जित विज्ञान से,फिर क्यूँ कम है ध्यान।।
(02)
हिन्दी,सबल बनाइए,रख दिल में अहसास ।
जो पाले है गर्भ में,निखिल जगत इतिहास ।।
(03)
हिन्दी सेवा के लिए,झटिति भरो हुंकार ।
बढ़ो सृजनकारी बनो,प्रस्तुति दो उद्गार ।।
(04)
वही शुभ घड़ी आ गई,जिसके प्रति था ध्यान।
हिन्दी को सम्मान दो,क़ौमी बने ज़बान।।
(05)
भावों का चिन्तन करो,लिखो समादृत छन्द ।
हिन्दी सेवा के लिए,सजग बनो हर चंद ।।
============================
'अ़क्स' दौनेरिया



14/09/2019
हाइकु - हिन्दी


शब्द फारसी,
लिपि देवनागरी,
है श्रेष्ठ हिन्दी ।

राष्ट्र की शान,
दिखावे का सम्मान,
महान हिन्दी ।

देश का दिल,
फिर भी बदहाल,
बेबस हिन्दी ।

झूठ दिखावा,
मुखौटा क्यों अंग्रेजी,
जब हैं हिन्दी ।

आंग्ल सौतन,
हिंदू भी भरमाये,
लजाये हिन्दी ।

-- नीता अग्रवाल
#स्वरचित

नमन साथियों
हिंदी दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं
दिनांक 14,,09,,2019

विषय,,हिंदी

देखों हिंदुस्तान की भाषा हिंदी हैं।
भारत के सम्मान की भाषा हिंदी है।।
प्रेम दया सद्भाव सहजता की जननी।
जन गण के मन की अभिलाषा हिंदी है।।

भारत माता के गौरव की शान हमारी हिंदी हैं।
संस्कार सद्भाव सहज पहचान हमारी हिंदी हैं।।

सदी पुरानी परंपरा को जिवित रखा जिसने अब तक।
अरबों भारत वासी का अरमान हमारी हिंदी हैं।।

दुनिया मे जिसने अपनी बोली का परचम लहराया।
देश धर्म का हृदय स्वाभिमान हमारी हिंदी हैं।।

कवियों ने जिसकी महिमा का गाया गान सदा दिल से।
वेदवाणी ऋषि मुनियों का वरदान हमारी हिंदी हैं।।

राज राष्ट्र जनपद जन जन तक अलख जगाया हैं जिसने
लोकतंत्र की आन बान सम्मान हमारी हिंदी हैं।।

स्वरचित
शिव कुमार लिल्हारे,, अमन
बालाघाट मध्यप्रदेश

## हिन्दी / दिन्दी दिवस ##

पाश्चात्य की झूठी बना कर ऐंठ

निज धरोहर की हमने चढ़ा दी भेंट ।।
भाषा विरासत में हमने है पायी
कर रहें हैं आज हम उसी से कुनेंट ।।

जरूरत के मुताबिक दवायें ली जाती
जरूरत मुताबिक भाषायें ली जाती ।।
निजता को भूल जो गैरों में झूलते
कहानी उनकी हास्यास्पद ही कहाती ।।

विश्व पटल पर हम पहचान खो रहे
एक नही ऐसे हजार बीज बो रहे ।।
संग्रहालय में दिखेगी भाषा संस्कृति
पाश्चात्य को जो बेवजह ढो रहे ।।

निज भाषा आज घुट घुट रोय है
आँसू से अपना दामन भिंगोय है ।।
तरस न उस पर किसी को 'शिवम'
झूठे अहं झूठे मद में खोय है ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 14/09/2019

नमन-भावो के मोती
दिनांक-14/09/2019
विषय-हिंदी दिवस काव्य लेखन


मधुमेह वाणी दिव्य राग

नित्य नूतन स्वर हिंदी साज

वीणा की झंकृत झंकार

माथे की बिंदी है हिंदी।।

श्वेत कमल से मांग सोहे

लेखनी जिसकी मन को मोहे।।

आज हिंदी की बिंदी चिंदी चिंदी ....

संस्कृत की लाडली बेटी

अन्य भाषा को संग लेकर चलती

भाषा सभ्यता की सरल अभिव्यक्ति

जो सर्वदा प्रकृति के संग रहती।।

हिंदी कहती अपनी व्यथा.....

मैं तो एक दिन की दुल्हन की गाथा

लेखनी की अनंत प्रजनन हूं

बिन दूल्हा की दुल्हन हूँ

इस दुल्हन की प्रथम चुंबन

दर्द स्याही से से कौन करेगा।

कपकपाँती कलम धार से

मेरी सिंदूरी मांग कौन भरेगा।।

भाषा की हूं मैं निबंध

इस दुल्हन का दर्शन कौन करेगा।।

भाषा की खादी को पहनकर

मेरे कक्ष में प्रथम शयन कौन करेगा..........................।।

मौलिक
रचना सत्य प्रकाश सिंह प्रयागराज

 नमन मंच भावों के मोती
14/09/19
विषय हिंदी

**
सरसी छन्द में गीत
***
"हिन्दी है अस्तित्व हमारा" ,गहन भाव ये बोल।
माथे पर की बिंदी जैसी, शुचिता ले अनमोल ।।

लिखी भक्ति मीरा की इसमें,लिखा प्रेम रसखान,
कबिरा के दोहों से सजती ,भाषा मातृ महान ।
प्रेमचंद जयशंकर करते ,हिंदी का गुणगान,
माखन,दिनकर महादेवि की ,कृतियां करें हिलोल।
माथे पर की बिंदी जैसी, शुचिता ले अनमोल ।।
हिन्दी है अस्तित्व हमारा" .....

देवनागरी भाषा अपनी,रचते छन्द सुजान ,
चुन चुन कर ये भाव सजाती ,हिन्दी है अभिमान।
मान विदेशी का करना है ,सँस्कृति की पहचान,
नहीं बदल पायेगा कोई ,भाषा का भूगोल ।
माथे पर की बिंदी जैसी, शुचिता ले अनमोल ।।
हिन्दी है अस्तित्व हमारा" .....

हिन्दी का वन्दन अभिनन्दन, हिन्दी हो अभियान,
एक दिवस में क्यों बाँधें हम ,हिन्दी से हिन्दुस्तान।
रची बसी जीवन में रहती ,हिंदी है पहचान ,
मधुरम मीठी भाषा वाणी,रस देती है घोल ।
माथे पर की बिंदी जैसी, शुचिता ले अनमोल ।।
हिन्दी है अस्तित्व हमारा" .....

हिन्दी है अस्तित्व हमारा" ,गहन भाव ये बोल,
माथे पर की बिंदी जैसी, शुचिता ले अनमोल ।

स्वरचित



तृतीय प्रस्तुति

हिंदी भाषा का रचनाकार से वार्तालाप


क्यों हो क्लान्त शिथिल तुम
क्यों हो आज व्यथित तुम
इन ऊंचाइयों तक पहुँच
किस भाव से ग्रसित तुम ।

आज के हालात पर
चीत्कार करता मेरा मन
होता जब अधिकारों का हनन
अपनों में जब पराये हो जाये
विदेशी आ मुझे हीन दिखाए
सीमाओं, दिवस मे
बांध दिया जाय
तब वेदना से ग्रसित हो
बिंधता है मेरा तन ।

निर्मूल है तुम्हारी व्यथा
प्राचीनतम गौरवमयी
इतिहास रहा तुम्हारा
कोई छीन नही सकता
आकर,अधिकार तुम्हारा,
पहला शब्द तोतली भाषा
माँ के उच्चारण में हो तुम,
सम्प्रेषण के सशक्त
माध्यम मे हो तुम
जन जन में चेतना का
संचार करती हो तुम
कवियों की वाणी हो तुम
रस छंद अलंकार से सजी तुम
संस्कृत उर्दू बहन तुम्हारी
अंग्रेजी है अतिथि तुम्हारी
साथ साथ मिल कर रहो
एक दिवस का क्षोभ न करो
तुम हमारी शान हमारी पहचान
प्रतिदिन करते है तुम्हारा सम्मान
पर आज तुम्हें देते विशेष स्थान
हम हिंदी से ,हिंदी हिन्दोस्तान ।

©anita सुधीर

14सितंबर 2019
हिंदी दिवस की बधाई.. क्यों... भारत में हिंदी दिवस की जरूरत क्यों..
जो हमारी माँ है उसका सम्मान एक दिन....
एक विनती है कि हिंदी का सम्मान करे..

#हिंदी #व्यथा
पहचान मेरी तुझसे है नहीं किसी से डरती हूँ,
हिंदी हिंदी बोलू मै हिंदी को ही जपती हूँ l
कैसे हो तुम हिंदुस्तानी.. मुझको ही गर्त में डाल रहे,
हिंद के बेटे होकर.. हिंदी दिवस का मान करे ll

एक दिवस की माता हूँ क्या, एक दिवस सम्मान है,
मेरी धरती पर ही हिंदी दिवस, ये मेरा अपमान है,
क्या है इसकी जरूरत. मेरे हिंदुस्तान में, आंग्ल यहाँ पर राज करे... और मुझे अब श्मशान है ll

राष्ट्र भाषा का मान नहीं, न कोई सम्मान है,
इससे ज्यादा मेरे बच्चो.. क्या मेरा अपमान है ll
कुसुम पंत उत्साही
स्वरचित
देहरादून



विषय:- "हिन्दी / हिन्दी दिवस"
दिनांक :- 14/9/19.
विधा :- "मुक्तक"

1.
हिन्दी है मेरी मातृभाषा, ये ही मेरा मान है।
ये ही तो मेरी शान भी, ये ही मेरी पहचान है।
अब बने ये विश्व-भाषा, ऐसे कुछ प्रयास हों,
दिल में छुपा वर्षों से मेरे,बस यही अरमान है।
2.
एक प्रश्न .....?
*************
सितम्बरचौदह को ही यादक्यों आती हैये हिन्दी।
समूचे साल क्यों मुखड़ा,छिपाए जाती है हिन्दी।
सुधीजन प्रश्न है तुमसे, जरा उत्तर सुझाओ तो,
"दिवस" केबादक्यों खामोश,ये रहजाती है हिन्दी।
3.
'पूज्य' है "देववाणी" से, मिली सौगात हिन्दी की।
सुनोगुणीजन दुर्दशा की,कहूँ क्याबात हिन्दी की।
अदालत में चिकित्सा क्षेत्र में,ना मान मिल पाया,
हमारे देश में ये, रह गयी औकात हिन्दी की।
14-09-2019
हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ
हिंदी
(सार छंद,16,12 अंत-गुरु,गुरु)

हिंदी है अस्तित्व हमारा
हिंदी मेरी बोली
संवर्धन दायित्व हमारा
हिंदी के हमजोली
चक्षु खोलो सब हिन्दी बोलो
हिन्दी को अपनाओ
पराधीन रहे नहीं मानस
अब छुटकारा पाओ
रस छंद अलंकार विभूषित
सार सरल यह वाणी
है भाव भरा निजत्व प्यारा
उन्नत भाल अभिमानी
दूर क्षितिज में भी गुंजित हो
रुचिरा अपनी भाषा
जन मन उच्चार करे हिंदी
आज यही अभिलाषा।
-©नवल किशोर सिंह
स्वरचित


सभी साथियों को
हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
विधा - गीत

आधार छंद - सरसी
छंद विधान - १६,११=२७ अंत गाल २१

हिन्द-देश के वासी है हम,हिन्दी अपनी शान।
हिन्दी से ही मान हमारा, हिन्दी ही पहचान।।

निज भाषा का करें सदा सब,
नित आदर सत्कार।
रहें सभी से मिलजुल करके,
छोड़ें सब तकरार।

गर्व हमें हिन्दी भाषा पर,हिन्दी अपनी जान।
हिन्दी से ही मान हमारा,हिन्दी ही पहचान।।

भटक गए हैं कुछ साथी तो,
उन्हें दिखाओं राह।
ठेस न पहुँचे कभी किसी को,
रखिए ऐसी चाह।
हिन्दी भाषा का सब मिलकर,करिए नित सम्मान।
हिन्दी से ही मान हमारा, हिन्दी ही पहचान।।

बातचीत करिए हिन्दी में,
खास रहें या आम।
हिन्दी भाषा में ही हो अब,
सब सरकारी काम।

दर्ज राष्ट्रभाषा के पद पर,करिए सब अभिमान।
हिन्दी से ही मान हमारा,हिन्दी ही पहचान।।

हिन्दी है बिन्दी के जैसे,
सदा बढ़ाती साज।
मधुर-मधुर हैं शब्दावलियाँ,
सब भाषा सरताज।

लेन-देन हो सब हिन्दी में,रखिए इसका ध्यान।
हिन्दी से ही मान हमारा,हिन्दी ही पहचान।।

स्वरचित
रामप्रसाद मीना 'लिल्हारे'
चिखला बालाघाट (म.प्र.)
दिनांक-14/9/2019
शीर्षक- "हिन्दी/ हिन्दी दिवस"
िधा-कविता
*******************
हिन्दी का नहीं कोई तोड़,
हिन्दी देती सबको जोड़,
मैं हिन्दी, हिन्द मेरा वतन,
खिलता रहे इसका चमन |

आज हिन्दी कहाँ खो गई,
क्या गहरी नींद में सो गई?
कोई,क्यों नहीं इसे जगाता,
क्योंकि अंग्रेजी से जुड़ गया नाता |

आज हिन्दी बड़ी व्यथित है,
हमें देखकर बहुत चकित है ,
बोलने मैं क्यों लगती है शर्म,
हिन्दी भूलना क्या ये है धर्म |

सम्मानित अपनी भाषा हो,
जन-जन की अभिलाषा हो,
भारत का गौरव है हिन्दी,
माँ भारती के माथे की बिंदी |

स्वरचित- *संगीता कुकरेती*


नमन मंच
विषय-हिंदी


हिंदी दिवस की शुभकामनाएं 🙏🏻💐

हिंदी भारत माँ की बिंदी !
सुहाग की तरह प्यारी !!
जी जान से रक्षा करने!
करनी है हमें पहरेदारी!!

अंग्रेजों को मार भगाया!
अंग्रेजी से करली यारी!!
त्यक्ता माँ भारती को बना!
अंग्रेजी पर जाते बलिहारी!!

हिंदी बहुत उदास रहती!
अंग्रेजी सौतन सी लगती!!
क्या करूँ दर्द किसे सुनाऊँ!
किसको मैं अपना बनाऊँ!!

बच्चे बहुत ही मुझको प्यारे!
बचपन में अंग्रेजी के मारे!!
दादी कहती सेवफल खाओ!
मम्मी कहती एप्पल लाओ!!

बच्चे कुछ भी समझ ना पाएं!
मस्तिष्क चलना बंद हो जाए!!
सेवफल एप्पल खूब विचारे!
हर शब्द उलझे लगे अकारे!!

कहना इतना ही है मुझको!
हिंदी में ही पढ़ाओ सबको!!
हिंदी भारत माँ की शान हैं!
सुहाग सा चमकता निशान है!!

स्वरचित कुसुम त्रिवेदी
नमन मंच
विषय -हिंदी


जय हिंद, जय हिंदी

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.....

मैं हिंदी हूँ, शान तुम्हारी,
जन-जन में पहचान तुम्हारी।
पढ़कर मुझको होती है कवि,
दुनिया में जयकार तुम्हारी।।

डरती हूँ अपने लोगों में,
खो न जाऊँ आज कहीं मैं।
व्यथित बहुत है,मन मेरा पर,
तुमसे हूँ नाराज नहीं मैं।।

बढ़ चढ़कर आजादी की,
मैंने भी लड़ी लड़ाई थी।
जन को जागृत करने में,
अपनी भूमिका निभाई थी।।

तुलसी, सूर, कबीर ने मुझको,
दिया हमेशा मान बहुत।
पंत, निराला, दिनकर,
मुंशी जी पर है अभिमान बहुत।।

सरकारों से करूँ अपेक्षा,
करेंगी वो समृद्ध मुझे?
नहीं भरोसा इन पर मुझको,
देती हूँ यह काम तुझे।।

अब तक जिंदा रखा है तो,
आगे भी ऐसे ही रखना।
बनूँ राष्ट्रभाषा भारत की,
कुछ प्रयास ऐसा भी करना।।
रविशंकर विद्यार्थी

सिरसा मेजा प्रयागराज



हिन्दी की छाँह
🍓🍓🍓🍓🍓

हिन
्दी भाषा !सुन्दर शब्दों से मालामाल
स्वर और व्यँजनों से, भरा है इसका अनुपम थाल
एक से एक उपमायें ,और चमकते अलंकार
शोभित कर देते हैं इसका, मोहक शैली में श्रँगार।

सम्बन्धों से भरी हुई,अपनी ये जीवन नगरी
और सुन्दर सम्बोधनों से ,भरी है हिन्दी की गगरी
हर रिश्ते को अलग अलग ,ये भव्य एक रुप देती
शब्द पुष्पों से सजा, सुन्दर सा प्रारुप देती।

हिन्दी की और क्या कहें, यह है एक समृद्ध भाषा
विश्व मंच पर यह विराजे, ऐसी ही उठती अभिलाषा
हिन्दी का आँचल जब, सब ओर लहरायेगा
मधुर सम्बोधनों के सुन्दर,गीत विश्व भी गायेगा।

कृष्णम् शरणम् गच्छामि

नमन 🙏भावों के मोती🙏
दिनांक 14 -9- 2019
विषय -हिंदी/ हिंदी दिवस
🌹हिंदी दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं🌹🙏

आज हम सब मिलकर, हिंदी दिवस मनाते हैं ।
हिंदू हिंदी हिंदुस्तान, सबको याद दिलाते हैं ।।

14 सितंबर का दिन, हम सब के लिए खास है,
हिंदी दिवस के रूप में, आज ही बना इतिहास है ।

हर वर्ष आज ही के दिन, हिंदी दिवस मनाते हैं।
फिर हम अंग्रेजी को, इतना क्यों महत्व देते हैं ।।

अंग्रेजी बुरी नहीं, पर हम हिंदी क्यों बिसराते हैं।
क्यों बोलचाल में हम ,शब्द अंग्रेजी दोहराते हैं।।

गांवों का है देश हमारा, गांवों में हम रहते हैं ।
बड़े बुजुर्ग अनजान,उनके सामने अंग्रेजी दोहराते हैं।।

आज हिंदी दिवस पर, बड़े दुःख से यह बतलाती हूँ।
हिंदी की हालत कैसी, उस से रूबरू करवाती हूँ ।।

चहुँओर राज करती, वह भाषा अंग्रेजी होती है।
आजकल उसके सामने हिंदी, शो पीस सी नजर आती है।।

कहते हैं खुद को हिंदुस्तानी, पर हिंदी की पीड़ा किसने जानी।
बता अंग्रेजी को हिंदी से ऊंचा, खत्म कर दी कहानी ।।

अंग्रेजी केवल आशा है, विदेशियों की भाषा है ।
हिंदी अपनी जान है, इसी से तो अपनी पहचान है।।

अंग्रेजी बड़े गर्व से बोलता है, पर हिंदी से क्यों तोलता है।
अपने वतन में हिंदी बोल, देख कितना सुकून पाता है।।

विश्व की भाषा में हिंदी, जैसे मेरे ललाट पर बिंदी।
नहीं कर पाएगा बराबरी इसकी, देश का सम्मान है हिंदी।।

मान यह बढ़ाएगी, चहुँओर परचम लहराएगी ।
उठो जागो देश को बनाने वालों,देश को आगे, हिंदी बढ़ाएगी।

वीणा वैष्णव
कांकरोली
v

आयोजन --🌷हिन्दी दिवस 🌷पर काव्य लेखन
ादर मंच को समर्पित -

🙏हिन्दी दिवस पर अनन्त बधाइयाँ 🙏

🌻 गीतिका 🌻
*******************
🌹 हिन्दी 🌹
***********************
समांत - आर , पदांत- हिन्दी
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

शब्दिता संस्कार हिन्दी ।
राष्ट्र भाषा हार हिन्दी ।।

मातृ वाणी ज्योति उज्ज्वल ,
ज्ञान की आधार हिन्दी ।

प्रेम की वीणा अलोकिक,
हृदय की गुञ्जार हिन्दी ।।

व्याकरण ,रस, छन्द,अनुपम ,
शब्द लय शृंगार हिन्दी ।।

जय महादेवी निखारी ,
पन्त , दिनकर ज्वार हिन्दी ।

विश्व में साहित्य गुञ्जन,
श्रेष्ठ वैदिक सार हिन्दी ।

धर्म संस्कृति की प्रसारी ,
भारती का प्यार हिन्दी ।।

🌹🍀🐚🌷

🏵🌲**...रवीन्द्र वर्मा आगरा

नमन मंच भावों के मोती
१४ सितम्बर २०१९


आप सभी को विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं---
*************************************************

हिंदी हिन्द देश की भाषा है!
ये समस्त राष्ट्र की आशा है!!
इतिहास है ग़ौरव गाथा की!
संस्कृति,परम्परा की परिभाषा है!!
**
हम सब मिल कर सम्मान करें!
आओ हिंदी भाषा का मान करें!!
ये परम कर्तव्य हम सबका है!
निज भाषा पर स्वाभिमान करें!!
**
ये मीठी,सरल सुकोमल है!
ये सुन्दर,सरल मनोरम है!
साहित्य का सागर है अनंत!
समाहित ज्ञान का गागर है!!
**
शारदा के भाल का वरद हस्त!
है एकता की परम्परा अनुपम
हिन्द देश की भाषा है कालजयी
है सहज अभिव्यक्ति का आधार
हम सबको है हिंदी से प्यार!!
मेरे राष्ट्र को है हिंदी से प्यार!!

@ मणि बेन द्विवेदी

नमन मंच
14.9.2019
शनिवार

आयोजन -हिन्दी दिवस
विषय - हिन्दी/हिन्दी दिवस
🌹🌹हिन्दी दिवस 🌹🌹

हिन्दी प्रेम की भाषा, हमारी मातृभाषा है
बने यह विश्व की भाषा,यही मेरी अभिलाषा है

हिन्दी दिवस की
अनंत शुभमंगलकामनाएँ
🌹🌹🌹

आइए संकल्प लें

* हिन्दी में बात करेंगे
* हिन्दी सिखलाएँगे
* हिन्दीमय संसार करेंगे
* हम हिन्दी अपनाएँगे

🍁हिन्दी से प्यार कीजिए 🍁

हिन्दी से प्यार कीजिए,हिन्दी है जन की भाषा
ये हिन्द की है भाषा,भारत के मन की भाषा
पढ़ना, सरल है लिखना और बोलना सरल है
है स्वाभिमान अपना,सरलीकरण की भाषा ।।

अहसास है दिलाती ,यह देशभक्ति का ही
मन में अलख जगाती, यह देशप्रेम का ही
है बाँधती हृदय को,यह एकसूत्रता में
यह हर हृदय की भाषा, यह देश की है भाषा ।।

संस्कृत की ये है बेटी,संस्कृति को मान देती
निजता का ध्यान रखती ,निज को स्वमान देती
अपनाती हर ज़ुबाँ को,समृद्ध हो रही है
यह हर ज़ुबाँ की भाषा ,हिन्दोस्ताँ की भाषा ।।

अनजान है न कोई,पहचानते सभी हैं
अपनाना चाहते हैं,पर मानते नहीं हैं
मजबूरियाँ हैं कैसी, क्यों बोलते नहीं हैं ?
है यह चमन की भाषा, है यह अमन की भाषा।।

हर दिल में बस रही है, हर मन में हँस रही है
सबकी ज़ुबाँ पे सज कर, मुस्कान भर रही है
सब बोलते हैं हिन्दी,यह आम जन की भाषा
पहचान की ये भाषा, अभियान की है भाषा ।।

स्वरचित
🍁
डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘ उदार ‘

 नमन मंच

विषय हिंदी, हिन्दी दिवस

विधा काव्य
14 09 2019,शनिवार

प्रथम कवि वाल्मीकि को
आओ मिलकर नमन करे।
कालिदास बाणभट्ट भारवि
श्री चरणों पर सदा चंले।

देववाणी संस्कृत मधु भाषा
प्रिय तनया है हिन्दी वाणी।
झुक झुक शीश झुकाते नर
कर जोड़ निज नित पाणी।

महाकाव्यों को प्रिय भाषा दी
तुलसी सूर जयशंकर मैथिली।
लक्ष्य एक समाज सुधारना
जनता की नित ताली बजती।

रीतिकालीन कवि वर बिहारी
केशव देव पद्माकर शौभित।
प्यार दुलार जनता का पाया
रहीम ज्ञान अति अपरिमित।

गद्य पद्य अद्भुत संगम
भारतेंदु दिनकर द्विवेदी।
सप्त स्वरों की बजे बांसुरी
मिल जाते हैं जब चतुर्वेदी।

राष्ट्रभाषा प्रिय भारत की
मान बढ़ावे शान बढ़ावे ।
कोटि कोटि रसना वाणी
मिलजुल हिंदी सदा सजाएं।

स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

दिनांक-14-9-2019
आयोजन-🌷हिन्दी दिवस🌷पर ,,,,हरिगीतिका छंद में भावाभिव्यक्ति,,,
य हिन्दी जय हिन्द
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
नव निर्मित रचना
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"हिन्दी की गरिमा "
🏵🏵🏵🏵🏵
#हरिगीतिका छंद में,,,,,,,
2212 ,2212,,2212 ,2212( मापनी)
समांत-आर
पदांत-है
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हिन्दी सरल मनभावनी, रचना-सृजन आधार है!
हर शब्द ज्यों मणिमालिका सी,काव्य का श्र॔गार है !!
***
ये भारती भाषा अनोखी,,,शिल्पगत सौंदर्य में,
आखर विहँसते मातु जैसे,,,,,,,,,प्रेम का संसार है!!
***
पहली हमारी मातृभाषा,,,,,,,'तूतली" में गुंजरित,
फिर लेखनी में ढल गई,,,,,जो शारदा का प्यार है!
***
भाषा यहाँ अगनित वतन में,किंतु ये प्रियभाषणी,
मनमोहनी वरदायिनी सम,,,,ज्ञान का भंडार है !!
**
ये झंकृता "वीणा" मृदुल सी,रागनी सुरसाधिका,
प्रिय श्याम की प्यारी बँसुरिया सी,मथुर झ॔कार है!!
**
कवि सूर तुलसी ने रचा,अनुपम सृजन ग्रंथावली,
ये सब गुणों की खान है ,,,,,,ये राम-ग॔गा धार है!!
**
हिन्दी हमारे हिंद की,पहचान व अभिमान भी,
माता हमारी है धरा सी,;;;;,,,;,,प्रेम की गुंजार है!!
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#"ब्रह्माणी वीणा हिन्दी साहित्यकार
#स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित( गाजियाबाद)


द्वितीय प्रस्तुति
नमन भावों के मोती समूह
14 सितम्बर पर विशेष
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷


आज" हिन्दी दिवस" पर
देव नागरी हिन्दी मातृ भाषा
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पारंपरिक छंद * मत्तगयंद छंद * में, ,,,
मात्रा भार = 211 211 211 211 _ 211 211 211 22 है /
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देव सुता, कवि -मानस- हंसिनि ,
,लोकहुं लोक लुभावत हिन्दी/
मातु समान महान सुजानहि ,
मोद प्रमोद लुटावत हिन्दी /
मोहन की मुरली सम लागति ,
गान सुगान सुनावत हिन्दी /
सूर कबीर यथा रसखानहुॅ ,
छंद कवित्त सिखावत हिन्दी //
*******************************
आखर- आखर कंचन जैसन ,
लेख सुलेख रचावत हिन्दी /
मातु पिता सम लागति प्रेमिल ,
नेह -सुधा बरसावत हिन्दी /
देशज भाषहि नेक अनेकहि,
देवन -नागरि भावत हिन्दी /
भारत में महिमा गरिमा अति,
देश विदेशन छावत हिन्दी //
********************************
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रचनाकार = ब्रह्माणी वीणा हिन्दी साहित्यकार
#स्वरचित सर्वाधिकार #सुरक्षित


तृतीय प्रस्तुति

,#हिन्दी #दिवस पर विशेष,,,,
हार्दिक बधाइयाँ व शुभकामनाएं
,,मातृभाषा हिन्दी की महिमा
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" मनहरण घनाक्षरी छंद"
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एक पॅक्ति में 8+8+8+7 वर्णों की लयात्मकता के साथ तुकान्त आवश्यक है,,,,,,,,,,
हिन्दी भाषा
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***************************
हिन्दी मधुगान लागै,वाणी वरदान लागै,
वीणा वरदायिनी सी,मन को लुभावती !!
हिन्दी है मइय्या सम", भाषा बड़ी गुणधाम ,
मीठी-मीठी बोलिन में,मिसरी घुलावती !!
यमुना कछारन,बजावैं श्याम बाँसुरी ज्यों,
वहै तान हिन्दी लागै,हिया दुलरावती !!
बरगद-छैंया लागै,पूनम जुन्हैया लागै ,
भारती के भाल हिन्दी-बिंदिया सुहावती !!
***************************
ब्रह्माणी वीणा हिन्दी साहित्यकार
#स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित


चौथी प्रस्तुति
नमन मंच
भावों के मोती समूह
,,,मातृभाषा हिन्दी की महिमा
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

" मनहरण घनाक्षरी छंद"
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एक पॅक्ति में 8+8+8+7 वर्णों की लयात्मकता के साथ तुकान्त आवश्यक है,,,,,,,,,,
हिन्दी भाषा
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🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
***********************************
हिन्दी,काव्य-कामिनी है,कल्पना- विहंगनी सी,
छंद-मकरंद झरै,सुमन ज्यों मालती !!
मीरा की है नागरिया, सूर की पदावलिया,
तुलसी की अवधी में मधु छंद ढालती !!
मूरतिया ममता की,"माई " बोली शैशव की,
आँचल में गोद धरे,मइय्या ज्यूँ पालती !!
हिन्दी, वर्ण-मालिका से ,शब्दों का श्रृंगार करैं,
शारदा की पूजन में,ज्ञान-दिया बालती !!!!!!!
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🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
ब्रह्माणी वीणा हिन्दी साहित्यकार
#स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित (गाजियाबाद)


विश्व साक्षरता दिवस*पर हिन्दी का सम्पूर्ण योगदान,,,,,,,,
"" सुन"वीणा" के बोल,सभी को करै साक्षर /
""साहित्य मे अनमोल,चमकते हिन्दी आखर //
अपनी भाषा हिन्दी
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हिन्दी भाषा देश की,,,,,,सबसे मीठी बोल
डोर एकता सूत्र की,,,,,,,भाषा है अनमोल
भाषा है अनमोल,,,;,,लेखनी प्यारी लगती,
ज्यों मोती की माल,,,चमकती न्यारी लगती
चमके भारति-भाल ,,दमकती-बिन्दी-हिन्दी
है स्वदेश -सिरमौर,,,राष्ट्र की भाषा हिन्दी /
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आख़र चमके स्वर्ण सम,,रचना रचे कमाल
हिन्दी अपनी सी लगै,,,,,भाषा रूप विशाल
भाषा रूप विशाल,,,कविता की है सरोवर,
देशज,क्षत्रिय संग,,,,,,,,देवनागरी धरोहर,
सुन "वीणा"के बोल,,,सभी को करैं साक्षर
लेखन मे अनमोल,चमकते हिन्दी आखर /
*********************************
🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷
ब्रह्माणी वीणा हिन्दी साहित्यकार
#स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित (गाजियाबाद)

विषय- हिन्दी
14/09/19
शनिवार
कविता

अपने ही आँगन में हिंदी क्यों फिर आज कराह रही है ,
हर भारतवासी से अपनी खोई गरिमा माँग रही है।

हिंदी ने तो पराधीन भारत में नए प्राण फूँके थे ,
एक सूत्र में बाँध सभी को स्वतंत्रता के मन्त्र दिए थे।

देश स्वतंत्र हुआ लेकिन हिंदी भाषा परतन्त्र हो गयी ,
एक विदेशी भाषा केसम्मुख वह् स्वयं विपन्न हो गयी।

क्या विदेश की भाषा किसी राष्ट्र को उन्नत कर पातीहै,
अपनी मातृभूमि की वाणी ही सबसे पूजित होती है।

भाषा तो एक राष्ट्रपुरुष की आत्मा का स्वरूप होती है,
बिना राष्ट्रभाषा के कैसे राष्ट्र -उन्नति हो सकती है।

हे भारत के पहरेदारों! भाषा का अभिमान जगाओ ,
हिंदी भाषा को भारत की तुम अनुपम पहचान बनाओ।

विश्व-पटल पर जब हिंदी को खोई गरिमा मिल जाएगी,
तभी समझिए मातृभूमि की सच्ची सेवा हो पायेगी।

स्वरचित
डॉ ललिता सेंगर


 नमन - सम्मानित मंच
14-9-19 , शनिवार
विषय - हिंदी दिवस

~~~~~~~~~~~~~~~~~~

*हिंदी दिवस*
~~~~~~~

बढ़े एकता की कड़ी, हिंदी है आधार।
मत भटको हे साथियो,करो इसी से प्यार।।

हिंदी भाषा श्रेष्ठ है, मान रहा संसार।
कुटिल जनों की नीतियाँ, करती बहुत दुराव।

भाषा सीखो और भी, हिंदी को मत छोड़।
दुश्मन इसके हैं कई, उनकी टाँगें तोड़।।

संस्कृत की यह आत्मजा,भरा पड़ा भंडार।
शरण गहो इसकी सखा, कर देगी उद्धार।।

हिंदी भाषी कर रहे, हिंदी का अपमान।
उनको समझाना हमें, लेन इसका संज्ञान।।

~~~~~~~~~~

दि-14.9.19
शनिवार
आयोजन -हिन्दी दिवस पर काव्य लेखन
सादर मंच को समर्पित

मैं हिन्दी हूँ तेरे भारत कीअजब निराली
शान हूँ मैं
कबीर तुलसी मीरा के लिखे छन्दों की
पहचान हूँ मैं
सारे रस विधाएँ सब ताकत मेरी रूह की हैं
न जाने क्यूँ फिर भी किताबों से कहीं
गुमनाम हूँ मैं
इन्गलिश बोलकर क्यूँ लगे हो तुम इतराने
ईश्वर की घड़ी रचना हूँ और तेरे वेदों की
जान हूँ मैं
अंग्रेज़ी ने जकड़ा था माता को जंजीरों में
वतन पर मरने वालों के नारों का
सम्मान हूँ मैं
कभी थी मैं शास्त्र उपनिषदों की महारानी
क्यूँ मुझको आज लगता है कि तुम्हारा
अपमान हूँ मैं
स्वरचित। ममता सोनी

भावों के मोती
विषय-हिंदी
________________
बहुत समय पहले की बात है।माँ भारती अपने सभी बेटों(धर्म) और अपनी समस्त बेटियों (भाषाओं) के साथ अपने विशाल घर(सम्पूर्ण भारत) में सुख-शांति से रहती थीं।
माँ भारती नख से शिखर तक सोने,चाँदी, हीरे-जवाहरात के आभूषणों से सुसज्जित थी।धन्य-धान की कमी नहीं थी,स्वर्ग से उतरी गंगा, यमुना, कृष्णा, कावेरी, गोदावरी आदि नदियों में माँ भारती के बच्चों की जीवन अमृत मिला करता था।
एक दिन इंग्लिश लड़खड़ाते कदमों से माँ भारती से टकरा गई।माँ भारती को उसकी दुर्दशा देखकर दया आ गई, आखिर हमारी माँ भारती थी ही बहुत दयालु,हर किसी का बाँहें फैलाकर स्वागत करना आज भी उनके स्वभाव में बसा है।
अंग्रेजी को अपनी दशा सुधारने का मौका मिला,माँ भारती के प्यार का ग़लत इस्तेमाल किया गया।अंग्रेजी ने माँ भारती के पुत्रों को आपस में लड़वाना शुरू कर दिया।उनसे उनका साम्राज्य छीन कर अपने बेटों को दिया जाने लगा।
धीरे-धीरे माँ भारती के आभूषण भी उतरने लगे, अपने पुत्रों के लहु से लहुलुहान माँ भारती चित्कार उठी,माँ भारती की सभी बेटियों(भाषाओं) ने माँ को संभालकर, एकजुट होकर अपने गीतों में माँ की रक्षा करने का जज़्बा जगाया।
फिर क्या था माँ भारती के सभी पुत्र (धर्म) एक-जुट हो गए।युद्ध छिड़ गए,सदियाँ बीतने लगी पर माँ भारती की संतानें रण करती रही।
और फिर खुशियों भरे दिन आए माँ भारती फिर से मुस्कुरा उठी।हर तरफ खुशियाँ लहलहा उठी,पर जाते-जाते अंग्रेजी अपनी बेटियों (इंग्लिश और तहजीब) को पीछे छोड़ गई,जिसे आजाद भारत में भी सब हिंदी में ज्यादा अपनापन मिला।
हाँ सही तो कह रही हूँ, हिंदी में बोलने वाले को उतना सम्मान नहीं जितना इंग्लिश भाषा के व्यक्ति को मिलता है।एक दिन हिंदी को याद करते हैं,रोज ही क्यों नहीं, आजकल तो बच्चे भी जन्म से ही इंग्लिश सुनते हैं, बोलते हैं,माना इंग्लिश जरूरत बन गई है पर जहाँ जरूरत है वहीं इस्तेमाल करना चाहिए।
हम घर पर, दोस्तों के बीच, साधारण बोलचाल में तो हिंदी को प्राथमिकता दे सकते हैं और देना भी चाहिए हिंदी हमारी मातृभाषा में इसका सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
तो शरमाइए मत आज़ से अभी से शान से हिंदी बोलिए, लिखिए,यह हमारी सभ्यता है संस्कृति है हमारा मान-सम्मान और पहचान है।
सारे जहाँ से अच्छा
हिंदोस्ता हमारा-हमारा
हिंदी है हम वतन है,
हिंदोस्ता हमारा-हमारा।
जय हिन्द

***अनुराधा चौहान*** स्वरचित 


तिथिःः14/9/2019/शनिवार
बिषयः हिंदी/हिंदी दिवस
रदीफः #हिंदी#
विधाःः काव्यः ः

लगती ललाट पर सुंन्दर बिंदी।
ऐसी ही सब भाषाओं मे हिंदी।
आलोक सभी इसी से फैलता,
सत्य संस्कृति सम्मान है हिंदी।

ये भारत का अभिमान है हिंदी।
सब भाषाओं की जान है हिंदी।
संस्कृत है भाषाओं की जननी,
पर भाषाओं की शान है हिंदी।

रच बस गई पूरे भारत में हिंदी।
फैल गई है जनमानस में हिंदी।
नित हिंदी का अस्तित्व बडा है,
बोलें गली,गांव ,शहर में हिंदी।

माना कुछ खिचड़ी हुई है हिंदी।
देखें फिरभी जीवंत हुई है हिंदी।
हिंदी दिवस मना एकदिन पूछते,
लगताकुछ तो बेबस हुई है हिंदी।

स्वरचितःः ः
इंंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.
जयजयश्री रामरामजी

भा.रदीफः ः#हिंदी#काव्यः

14/09/2019
"हिंदी"
हाइकु
1
प्रकृत हिंदी
देवनागरी लिपि
माता समान
2
हिंद की बिंदी
भाल शोभायमान
हिंदी सम्मान
3
भावना मान
सहज व्याख्यान
हिंदी महान
4
विदेशी भाषा
हिंदी की सरलता
किया स्वीकार

पिरामिड
1
है
हिदी
सरल
अविरल
विदेशी भाषा
हिंदी ने तराषा
सबको दिया मान
2
है
हिंदी
महान
हिंद शान
दिलों की जान
मासूम नादान
देवनागरी लिपि।

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।।

हिन्दी दिवस पर समूह के सभी मित्रों को बधाई एवं शुभकामनायें कि आपकी ।
दिनांक 14/09/2019
विषय:हिन्दी
विधा:पिरामिड
🌹
है
हिन्दी
सम्मान
अभिमान
भाषा महान
बनाअभियान
जन जन योगदान।

है
काव्य
माधुर्य
दोहा छंद
सोरठा छंद
कुडलियाँ छंद
मात्रिक हिंदी छंद ।

हो
हिन्दी
विस्तार
रामायण
गीता का सार
कविता पुराण
महाभारत कथा।

वो
हिन्दी
सम्मान
गुणगान
माथे की शान
रचना सुजान
संस्कृति पहचान ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
स्वरचित
नीलम श्रीवास्तव लखनऊ उत्तर प्रदेश ।




"हिंदी/हिंदी दिवस "14 सितम्बर 2019

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