Tuesday, September 24

"बनारस" 24 सितम्बर 2019

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ब्लॉग संख्या :-515


विषय बनारस
विधा काव्य

24 सितम्बर 2019,मंगलवार

काशी वाराणसी बनारस
अद्भुत नाम दिये हैं तुमको।
सुख शांति यँहा पर मिलती
विश्वनाथ दर्शन दे सबको।

चरण पखारे स्वयं सुरसरी
बहती भक्ति धारा निर्मल।
दूर दूर से शिव भक्त आते
भोले कृपा बरसे विमल।

महाकाल सोमनाथ नागेश्वर
विश्वनाथ जग ज्योतिर्लिग हो।
तेरी महिमा अति निराली
नाम भिन्न तुम भोले शिव हो।

पान बनारस अति प्रिय है
मुँह में खुश्बू को भर देता है।
जगत प्रिय भोले के द्वारे
तांता तांता लगा रहे मेला है।

भव्य स्वरूपा गङ्गा मैया में
तरणी करवाती गंग विहार।
जननायक भक्त मोदी को
शिव ने किया उन्हें निहाल।

स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

24/9/2019
"बनारस"
शिव का धाम
बनारस नगरी
मंगल काम।।

शिव नगरी
महाश्मशान घाट
मोक्ष का द्वार।।

दान व धर्म
हृदय बनारस
सफल जन्म।।

शुचि संस्कार
हिय डाले प्रभाव
काशी की शिक्षा।।

दीप नगर
पौ संध्या जगमग
काशी विख्यात।।

वीणा शर्मा वशिष्ठ
स्वरचित,मौलिक
प्रथम प्रस्तुतिबनाकर के रखना जीवन में रस
यही एक संदेशा कहे बनारस ।।
नाम में ही जिसके छिपा फ़लसफ़ा
कठिन है तब्सिर है यूँ ही न यश ।।

शिवजी की नगरी करिये प्रणाम
जीवन भी यहाँ और है मोक्ष धाम ।।
तंग हैं गलियाँ यहाँ बेशक मगर
तंग न कहलाय यहाँ का आवाम ।।

जीना क्या होता सिखाय है कला
प्यार की भाषा न यहाँ कोई छला ।।
नौ रस यहाँ पर टपकते मिलेंगे
कवित्व का जादू हरेक पर चला ।।

संत और मनीषियों की नगरी 'शिवम'
जितना भी लिखिये कहलाय है कम ।।
बिन घूमे बनारस जानना नामुमकिन
चलो सैर करें कभी बनारस की हम ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 24/09/2019
बिषय,, बनारस
जय जय बाबा विश्वनाथ
तुम्हीं हो अनाथों के नाथ
संग अन्नपूर्णा गंगा की धारा
मोक्षदायिनी तारे जग सारा
नगरी अद्भभुत बनारस नाम
शिव भोले ने बनाया अपना धाम
जहां से मिलता अंतिम विश्राम
करते बाबा पूरण काम
दही पूरी और कचौरी
जिनके बिन यात्रा अधूरी
पीलो गटागट भांग का प्याला
पान चबा हो जाए मतवाला
जो भी आता यहीं का हो जाता
भवबंधन से मुक्ति पा जाता
ऐसी है बनारस नगरी न्यारी
पार्वती संग बिराजे भोले भंडारी
स्वरिचत,, सुषमा, ब्यौहार

आज का विषय, बनारस
मंगलवार

24,9,2019,

काशी नगरी शिव बसें ,
भागीरथी महान ।
विश्वनाथ कृपा करें ,
जाने सकल जहान ।।

शिक्षा का महत्व यहाँ,
बनारस है महान ।
शिक्षित होकर हैं गये ,
बड़े बड़े विद्वान ।।

नगर पुराना बहुत ये ,
वैभव आलीशान ।
होते रहते हैं सदा ,
धार्मिक अनुष्ठान ।।

साड़ी बनारसी मोहती,
शुभ अवसर की जान ।
नारी इसको चाहती ,
पहने बढ़ती शान ।।

मोदी जी को भा गया ,
गंगा का स्वरूप ।
आशीष विश्वनाथ का ,
कीर्ति मिली अनूप ।।

लेकर मन में कामना ,
बसते गंगा घाट ।
भोले नाथ दया करें ,
लखें मुक्ति की वाट ।।

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश ,


विषय बनारस
24/9/2019


बनारस

धर्म अध्यात्म के क्रियाकलापों की बनारस कहानी है

सांस्कृतिक, दार्शनिक शास्त्रीय संगीत की भी कहानी है

शिव का बसाया यह पवित्र पावन प्राचीन नगर है

इक विरासत इतिहास की अनोखी सी मेज़बानी है

रामचरितमानस की जन्मस्थली ,संतो की नगरी है

पवित्र नदियों के पानी की यहाँ अजब रवानी है

दार्शनिक कवि लेखकों की आन बान शान है

वरुणा असि ,गंगा अनेक नदियों की अगुवानी है

प्राचीनता की धरोहर पौराणिकता का मर्म है

हर धर्म की , मोहब्बत की यहाँ बागवानी है

अनेकानेक अद्भुत पर्वों का पावन सम्मेलन है

संस्कृतियों के महान वैभव की निशानी है

हर घाट का एतिहासिक, दार्शनिक रूप है

प्रत्येक वर्ष यहाँ आते जाते सैकड़ो सैलानी हैं

जगमगाते दीप,आरती की विहंगम दृश्यावली है

आस्था की जोत अनवरत ही हमें जलानी है

रेशम के धागों में मोहब्बत की कशीदाकारी है

शहर ही नहीं , साड़ी भी यहाँ की निशानी है

घाटों पर सजता धर्म का सजीव आयोजन है

कहीं मंदिर तो कहीं मस्जिद की शान निशानी है

कहीं टूटती है आस्थाएं कहीं , टूटते हैं मूल्य भी

हरिश्रचंद की कहानी प्राचीन हमें दोहरानी है

हर श्वास यहाँ तीर्थ , प्राणों में तपोवन हैं

मानवता और आस्था की धाराएं यहाँ बहानी हैं

मीनाक्षी भटनागर

स्वरचित

भावों के मोती
24-9-2019

बनारस

वाराणसी हैँ नाम वरुणा और असी नदियों का सँगम ,
उस पर शिव की नगरी परम मोक्ष भावों का संवरधन l

शिव की जटाओं से निकल कर गंगा करती है उद्धार ,
शिव ने जटाओं में सम्हाल कर उन पर निज उपकार l

मंदिरों का अदभुत शहर, कलाओं के सब हैँ पुजारी ,
साड़ियाँ विश्व भर में प्रसिद्ध, अतुलनीय अलंकारी l

कबीर चौरा,शिप्री बाजार, कचौड़ी वाली ये गलियाँ ,
सावन में शिव विराजते, खिलतीं मन की सुकलियाँ l

घाटों की अपूर्व है शोभा, होती आरती सबसे निराली,
नाद सँग समस्त जीव-पिशाच चलते अनूप त्रिपुरारी l

हिन्दू तीर्थो में वाराणसी, ये नगरी जन-जन को भावे ,
एक बार अवश्य हिन्दू भ्र्मरे, मोक्ष भावना विचरावे l

डॉ पूनम सिंह
मौलिक
लख़नऊ

विषय-बनारस

काशी , वाराणसी
बनारस के नाम
तीर्थों में परम तीर्थ
देवताओं का धाम

बनारस शहर, देवताओं की भूमि, मंदिरों का शहर , गंगा के घाट,जैन और बौद्ध धर्म की विरासत, बनारसी पान, बनारसी साड़ियाँ, जुलाहों और पंडितों की पहचान , गंगा तट और मंदिरों में आरती के सजे थाल, बनारस की गलियाँ, चन्दन के तिलक, विश्वनाथ गली, कबीर तुलसी की नगरी ,एक शांत और सीधा सा शहर।
बहुत कुछ है मेरे पास इस शहर के बारे में कहने को , मगर क्या सब कुछ मैं लिख पाऊँगी, शायद नहीं।
भारतवर्ष के प्राचीनतम शहरों में से एक है बनारस । पौराणिक काल से ही बनारस का धार्मिक महत्व है। पवित्र नदी गंगा के घाट इसकी खास पहचान है। यूँ तो यहां अठ्ठासी घाट है , जिनमें से पांच प्रमुख घाटों की गिनती पंच तीर्थों में की जाती है। असी घाट, दशाश्वमेध घाट ,मणिकर्णिका घाट,आदिकेशव घाट और पंच-गंगा घाट।
असी घाट और दशाश्वमेध घाट ,पौराणिक महत्व के साथ साथ आरती , स्नान और नौका विहार के लिए प्रसिद्ध है। देश विदेश से हजारों पर्यटक यहां आकर आत्मिक शांति और आनन्द का अनुभव करते हैं।इस पावन नगरी में अपनी अंतिम सांस लेने, मोक्ष की प्राप्ति के लिए लोग यहां का रुख करते हैं। मणिकर्णिका घाट पर शवों का दाहकर्म किया जाता है।बनारस के आसपास के गांवों से लोग शवों को दाह कर्म के लिए प्रायः यहीं लाते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु स्वयं सबसे पहले आदि केशव घाट पर पधारे थे और स्वयं अपनी मूर्ति यहाँ स्थापित की थी।
पंचगंगा घाट पर कबीरदास जी ने गुरु रामानन्द जी से दीक्षा ली थी। ये प्रमुख पाँचों घाट पंचतीर्थ कहलाते हैं।
बनारस में छोटे- बड़े हजारों मन्दिर हैं , जहाँ धर्म और आस्था के रंग घुले हैं।मंदिरों और घाटों पर धूप और अगरबत्ती की महक, आरती के सजे थाल ,गंगा की धारा में प्रवाहित दीपक-अवलियाँ मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
बनारस की साड़ियाँ दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। जुलाहों को आप स्वयं खड्डी पर साड़ियाँ बनाते देख सकते हैं।गुलकंद और सुरती वाले या सादे, खुशबुदार बनारसी पान की कई सौ किस्में मुंह में रस घोल देती हैं । बनारसी मिठाइयाँ, ब्लू लस्सी,जलेबी कचौरी का नाश्ता और टमाटर की बेहतीन चाट ,(लपलपाने लगी न जीभ आपकी भी) सभी कुछ ध्यानाकर्षण के लिए पर्याप्त है।
हाँ जी बनारस के ठग भी बहुत मशहूर है। खरीददारी के लिए आप दुकानों पर खड़े हैं तो इनसे बच कर रहिये ।
असी घाट से दशाश्वमेध घाट तक भाँग का सेवन श्रद्धालुओं को मस्ती से सराबोर कर देता है।गंगा घाट पर बैठ उतरती सन्ध्या का मनोहारी दृश्य ,गंगाजल पर तैरती नौकाएं , मोहक सुगन्ध ,आरती के स्वर ,पानी पर तैरते दीपक क्या कभी भुलाए जा सकते हैं ।

मन्दिर के घण्टे हों,पूजा के थाल
चन्दन का तिलक हो,हमारे भाल
गंगा का तट हो , सुबहो- शाम
हो जीवन की , बनारस में शाम

सरिता गर्ग

24/9/2019
विषय-बनारस
🌷🌷🌷🌷🌷
"वरुणा "और"असी"का मेल बाराणसी
दशाश्वमेध,मणिकर्णिका प्रमुख घाट असी

बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी
काशी,बनारस या कहो बाराणसी

गली गली में निर्मित मंदिर
देश का ये है पवित्र नगर

ये नगरी है मोक्षदायिनी
कर्मकांड संग शिक्षादायिनी

भोर का दृश्य बड़ा ही मनोहारी
घाटों की बुनावट धनुषाकारी

गंगा जमुनी तहजीब यहां की शान
जग प्रसिद्ध बनारसी साड़ी और पान

इसका है समृद्ध शाली इतिहास पुरातन
वेद,पुराण,महाभारत में भी है वर्णन

मंत्रमुग्ध हूँ इस नगरी के आभामंडल से
पहुँच जाती हूँ जब तब वहां तन मन से ।।

**वंदना सोलंकी**©स्वरचित®
दिनांक २४/९/२०१९
शीर्षक-बनारस
बनारस है बाबा की नगरी
बसा है भोले के त्रिशूल पर
पवित्र नदी गंगा की धारा
यहाँ विराजे संस्कृति पुरानी।

हर कामना हो जाये पूरी
जहाँ बसे हैं शिव व गौरी
बनारस की है महता भारी
सभी जानते नर व नारी।

भागे रोग विषाद यहां से
भोलेनाथ का दर्शन पा ले
अलौकिक है छटा निराली
गंगा आरती दश्वमेघ तट पर भारी।

लोभ,मोह मद दे त्याग यहाँ पर
शरण में आकर,भोले के नगरी
लोगों के बोली में मीठास यहाँ
बनारसी पान का उपहार यहाँ।

हिंदू विश्वविद्यालय की ख्याति भारी
जहाँ से निकले विद्वान अनेक
देश विदेश में नाम कमाये,
बनारस है मोक्ष की नगरी।

बनारस की शान, बनारसी साड़ी
हमें है यह नगरी प्यारी
शिव हमारे इष्ट भगवान
रोज करते हम उन्हें प्रणाम।

दिनांक 24/09/2019
विषय:बनारस
विधा: हाइकु
🌹🌹🌹
गंगा मइया
बनारस आन
अस्सी है घाट।

शिव नगरी
आस्था अनेकानेक
सावन माह।

श्री विश्वनाथ
गलियों का शहर ।
पूजा अर्चना ।

मणिकर्णिका
कर्ण फूल आभूषण
शिव पार्वती ।

श्रृंगार रस
बनारसी कजरी
गायकी मान।

लंका भ्रमण
सांझ की नित लस्सी
आज भी स्वाद।

बौद्धिक तीर्थ
धर्म चक्र प्रवर्तन
है सारनाथ।

वृद्धा आश्रय
बनारस की गोद
निष्ठुर बच्चे
🙏🙏🙏
स्वरचित
नीलम श्रीवास्तव लखनऊ उत्तर प्रदेश ।

24.9.2019
मंगलवार
विषय -बनारस
विधा -मुक्तक

बनारस
🍁
(1)
बनारस में बहुत रस है,मगर है आम रस उत्तम
गली,गैया,गवैया,सब बनारस के हैं सर्वोत्तम
यहाँ तुलसी का मानस है,
यहाँ मंदिर की जमघट है
कहीँ शहनाई बजती है,कहीं होता यहाँ मातम ।।

(2)
यहाँ के घाट सा कोई,शहर सुन्दर नहीं लगता
काशी शिव की काशी है,
यहाँ काँटा नहीं चुभता
सतत सच की शिला पर चलने वाले अब भी ज़िन्दा हैं
ये है प्राचीन नगरी,इसका कोई सानी नहीं मिलता ।।

स्वरचित
डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘ उदार ‘

दिन :- मंगलवार
दिनांक :- 24/09/2019
विषय :- बनारस/काशी

अमर संस्कृतियों की धरा है काशी,
पुण्य आत्माओं की धरा है काशी।
गंगा की बजती मधुर कलकल यहाँ,
ये बाबा विश्वनाथ की धरा है काशी।

कबीर, प्रेमचंद और प्रसाद है काशी,
तुलसी रामायण का प्रमाण है काशी।
बिस्मिल्लाह की शहनाई की गूंज रमे,
शास्त्रीय संगीत का आधार है काशी।

कला और शिल्प का आधार है काशी,
ज्ञान और विज्ञान का उद्धार है काशी।
विस्तृत गंगा का आँचल लहराता यहाँ,
वेद और समृतियों में वरदान है काशी।

स्वरचित :- मुकेश राठौड़


24/09/19
विषय-बनारस

जैन धर्म के तेवीसवें तीर्थंकर
नाम श्री "पार्श्वनाथ" गुणकर
राजा अश्वसेन के राजदुलारे
वामा देवी भांति के प्यारे
पोष कृष्णा दसमी दिन जन्म लियो
नगर बनारसी धन्य कियो
छोड़ राज-पाट दौलत, अरू नारी
सन्यास लियो महा हितकारी
जलते नाग नागिन उद्धारे
वन में विचरण, घोर तपस्या, कठोर संयम
केवल ज्ञानी, तरण-तारण, और जंगम
सम्मेत शिखर पर मोक्ष सिधाये
मुक्ति पथ के अनुरागी ,सिद्ध गति पाये ।

स्वरचित
कुसुम कोठारी।

24/9/2019
द्वीतीय प्रस्तुति

छंदमुक्त कविता लेखन

बनारस शहर है नाम।
धर्मस्थली का।
गंगा के किनारे,
बसा हुआ है।
शोभा इसकी न्यारी है।
पापी स्नान करके।
तर जाते हैं।
पवित्र गंगा नदी है।
बाबा विश्वनाथ विराजे।
पूजा अर्चना करते हैं लोग।
श्राद्ध कर्म करने को।
यहां आते लोग।
पवित्र गंगाजल है इसका।
बरसों शुद्ध रहता है।
नहाकर यहां की गंगा में।
लोग मोक्ष पाते हैं।
अस्थि विसर्जन करते हैं।
चाहे कहीं मरे प्राणी।
कहते हैं कि अस्थि विसर्जन से।
मोक्ष प्राप्त करते प्राणी।
महिमा इसकी भारी है।
बनारस नगरी बड़ी प्यारी है।

वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी
स्वरचित
भावों के मोती
२४/९/२०१९
विषय-बनारस

धार्मिक आस्थाओं का केन्द्र,
बाबा विश्वनाथ का धाम,
गंगा के पावन तट पर बसा,
प्राचीन संस्कृति का प्रतीक,
भारतीय संस्कृति की पहचान,
हां,बनारस है।

संगीत है जिसकी शान,
नृत्य-कलाओं की जान,
महान‌ विभूतियों की जन्मभूमि,
कण-कण में भक्ति है बसी,
हां ,यही बनारस है।

अपनी ही लय में सोए-जागे,
जहां जाकर मनुष्य के भाग जागे,
गंगा की कल-कल करती लहरें,
हवाओं में मंदिरों की घंटियां गूंजे,
मोक्ष का है ये धाम,
हां ,यही बनारस है।

यहां के मीठे पान,
यहां के सुर और तान,
यहां की प्रसिद्ध साड़ी,
शिक्षा के केन्द्र,
विविध धर्मों की पहचान,
हां,यही बनारस है।

घाटों पर गंगा की आरती,
मस्जिदों में अज़ान
बौद्ध दर्शन का धाम
है जिसकी पहचान
हां,यही वो बनारस है।

अभिलाषा चौहान
स्वरचित मौलिक

आज का विषय, बनारस
मंगलवार
24,9,2019,

विश्वनाथ की नगरी है ये
साक्षात प्रभु विराजे है
सौम्य रूप गंगा का पावन
इस नगरी की छवि निखारे है...
गंगा आरती अद्भुद यहाँ की
ज्ञानगंगा में बनारस का
कोई सानी नहीं..
शामें सुंदर,घांट सुहाने
मन को बड़ा लुभाते है
पावन नगरी तेरे दरस को
किस्मत वाले देख पाते है।
जय हो बनारस,पान बनारसी तेरी ख्याति में
चार चांद लगाते हैं
साड़ी बनारसी पहन
नारियां,हर उत्सव का रंग
बढ़ाये..
घंटो की सुंदर ध्वनि सुनकर
रोज सवेरे होते है
नमन बनारस तेरी धरती
को🙏🙏🙏
✍️कल्पना


24/09/2019
"बनारस"
छंदमुक्त
-----------------------------------
"बनारस हिंदू विश्वविद्यालय"
शिक्षा में अग्रणी जान...
भारत की है यह शान....
हिंदूओं की यह पूण्य भूमि
हर-हर महादेव की गूँजे गान
दर्शन देते बाबा विश्वनाथ...
गली-गली घूमते मिल जाते
शिव के वाहन दो -चार..
"सत्यम,शिवम,सुंदरम"
"तुलसी"के "रामचरितमानस"
में प्रमाण......
गंगा आरती की शोभा निराली
देश-विदेश से आते दर्शनार्थी
देव दीपावली की अपनी शान
देवगण पधारते घाट-घाट
बनारसी साड़ी यहाँ की जान
कहीं न मिलते ऐसे शिल्पकार
पीली पत्ती वाली बनारसी पान..
इसके हैं अद्भुत स्वाद..
एक से ही भर जाते गाल।।

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल।।

दिनांक-24/09/2019
विषय-बनरास

मैं देख के रह गया दंग

शाम -ए-बनारस के रंग

हुस्न -ए- बाजार कथा

कलम प्रेमचंद की जंग।।

मुंह में दबाकर बनारसी पान

छेड़े स्वर से बेसुरी तान

बिन डोर के उड़ावे पतंग

सुबह शाम मस्त मलंग।।

आरती के आलोक में

आलौकिक सूर्य को अर्घ्य देते

मंदिरों में होते गायत्री मंत्र

जब होते मस्जिदों में अजान

गूंजते हर कर्ण में शंख।

दिवोदास की प्राचीन नगरी

यहां रोशनी की ऊंचे ऊंचे स्तंभ।।

वैभव सजता संस्कृति का

कबीर के दोहे के संग।।

स्वरचित
मौलिक रचना
सत्य प्रकाश सिंह प्रयागराज

बनारस की सुबह बनारस की शाम
अविमुक्त नगरी है ये धर्मों का धाम

शिव करें निवास मंदिरों का शहर
तीनों लोक समाहित काशी है नाम

अगस्त्य बुद्ध पाणिनी कबीर पतंजलि
तुलसी ने रचा यहां चरित मानस राम

चारों युग का साक्षी हिंद का सिरमौर
संगीत, शिक्षा, दर्शन हिन्दू ओ इस्लाम

मशहूर दुनिया में बनारस के पान
बनारस की साड़ी तो बनारस के आम

विपिन सोहल स्वरचित

विषय:-बनारस
विधा:-छंद मुक्तक कविता

काशी बनी मोक्षदायिनी
आते यहाँ सब लोग हैं।
नित पाप कर्मों से सने हैं
गंगा में धोते लोग हैं।
पितरों की तृप्ति का है मार्ग
काशी बना अब है धाम।
चौरासी घाटों मे सजा काशी
का ये अजब है धाम ।
अस्सी घाट पर बिराज कर
तुलसीदास जी ने रची ।
रामचरितमानस का तब किया
निर्माण ।
प्रयाग घाट बिराजे ज्योतिषी
विद्वान।
भाग्य पढकर सुनाते हैं ।
आये जो यात्री मेहमान।
शिव के स्वागत में बना
दशाश्वमेध का ओजस्वी घाट
इस घाट का खुद ब्रह्मा
ने किया निर्माण ।
मणिकर्णिका घाट की महिमा
है विशाल
अंतिम संस्कार पाये जो यहाँ
जन्म मृत्यु के
चक्र से मुक्त हो पर आत्मा
यही है यहाँ का प्रावधान ।
.
स्वरचित
नीलम शर्मा#नीलू

24/09/19
मंगलवार
विषय - बनारस
विधा- कुण्डलियां छंद

पावन गंगा-तीर पर , बसा बनारस धाम।
जयकारे शिव-शम्भु के, गूँजें आठों याम।।
गूँजें आठो याम , वहीं संकटमोचन हैं।
जिनकी महिमा देख , ठहर जाते लोचन हैं।।
स्वर्ग-प्राप्ति का नगर,लगे सबको मन भावन।
धुलते सबके पाप , भाव जगते हैं पावन।।

शिक्षा व आध्यात्म का , है यह पावन धाम।
इसीलिए है विश्व में , इसका ऊँचा नाम।।
इसका ऊँचा नाम , शिष्य सब पढ़ने आते।
बनकर वे सब योग्य, देश का मान बढ़ाते।।
लेते साधू- संत , यहाँ आध्यात्म- परीक्षा।
इसीलिए है उच्च , बनारस में हर शिक्षा।।

स्वरचित
डॉ ललिता सेंगर

विषय:बनारस
विधा:कविता

शिवजी का धाम बनारस
नवरस संगीत बनारस
जीवन और मृत्यु बनारस
योग और सन्यास बनारस

राग और बैराग बनारस
काशी के कोतवाल बनारस
त्रिशूल पर बसा बनारस
संकटमोचन धाम बनारस

जिन्दगी की ठाठ बनारस
सुबह और शाम बनारस
ज्ञान और विज्ञान बनारस
उत्सव और रंग बनारस

विश्व प्रसिद्ध पान बनारस
साड़ियों का शहर बनारस
शिक्षा का केंद्र बनारस
स्वप्नों का शहर बनारस

राजनीति का रंग बनारस
सभ्यता और संस्कृति बनारस
पूरी सृष्टि का केंद्र बनारस
अदभुत गंगा घाट बनारस

सप्तपुरी काशी बनारस
डमरू की झंकार बनारस
माया और मोह बनारस
पुण्य और मोक्ष बनारस

मनीष कुमारश्रीवास्तव
स्वरचित
रायबरेली

बनारस

है महादेव
की नगरी
भरी है यहाँ
गंगा ने गगरी
है यह बनारस
धार्मिक नगरी
भारतीय संस्कृति
की पहचान
है ये बनारस नगरी

गूंजते है
हर हर महादेव
हर हर गंगे
के उदघोष
यह है हमारी
बनारस नगरी

है पुण्य पावन
बनारस नगरी
विश्व प्रसिध्द है
यह बनारस नगरी

करते
शत शत नमन
सुबह शाम
है आस्था विश्वास
से भरी
हमारी बनारस नगरी

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

विषय -बनारस
दिनांक 24-9-2019

संतो मेला लगे, बनारस घाट है ।
तीर्थ स्थली, यह बनारस घाट है।।

अस्थि विसर्जन कर,मोक्ष पाते हैं।
अपने पुरखे ,सब यही लाते हैं।।

महिमा भारी मान,स्नान करते हैं।
मोक्ष मिलेगा,यही सोच रखते हैं।।

पूजा अर्चना,गंगाजल ले जाते है।
अंत चरणामृत दे,उद्धार करते हैं।।

संतों की संगत, बनारस घाट है।
आशीष पाते, बनारस घाट है ।।

वीणा वैष्णव
कांकरोली

24/09/19
विषय बनारस
दोहावली
***

वरुणा असि के नाम से ,पड़ा बनारस नाम ।
घाटों की नगरी रही ,कहें मुक्ति का धाम ।।

विशिष्टता इन घाट की ,है काशी की साख।
होती गंगा आरती ,कहीं चिता की राख ।।

विश्वनाथ बाबा रहे ,काशी की पहचान ।
गली गली मंदिर सजे,कण कण में भगवान।।

गंगा जमुना संस्कृति ,रही बनारस शान ।
तुलसी रामायण रचें,जन्म कबीर महान ।।

कर्मभूमि 'उस्ताद' की , काशी है संगीत।
कत्थक ठुमरी की सजे ,जगते भाव पुनीत।।

काशी विद्यापीठ है ,शिक्षा का आधार ।
विश्व विद्यालय हिन्दू,'मदन' मूल्य का सार।।

दुग्ध ,कचौरी शान है ,मिला'पान 'को मान ।
हस्त शिल्प उद्योग से ,'बनारसी' पहचान ।।

त्रासदी अधजले शवों ,की !भोग रहे लोग।।
गंगा को प्रदूषित करें ,काशी को ही भोग ।।

बाबा भैरव जी रहे , काशी थानेदार ।
हुये द्रवित ये देख के ,ठगने का व्यापार।।

धीरे चलता शहर ये,अब विकास की राह।
काशी मूल रूप रहे ,जन मानस की चाह ।।

स्वरचित
अनिता सुधीर

लघु कविता

बनारस धाम निराला है,
इसका शिक्षा से नाता है।
जो भी खाए एक बीड़ा पान
कहे कबीरा दीवाना है।

अस्सी घाट की रौनक प्यारी,
गोदौलिया की शान निराली।
गूंज रही घंटों की धुन या फिर हो शहनाई।
घर घर से भाईचारे का देता है शोर सुनाई ।

जन जन में बाबा विश्वनाथ हैं,
भैरो बाबा इसके कोतवाल हैं।
गंगा मैया इसके चरण पखारें,
कहते ऐसा तो तुलसीदास हैं।

माँ गंगा का श्रृंगार बनारस,
बाबा विश्वनाथ का धाम बनारस।
बात करें हम साड़ी की या करें आरती गंगा की,
बिस्मिला खाँ की बात करें तो उनका तो है प्यार बनारस।

सुबह बनारस शाम बनारस,
सांढ बनारस भांड़ बनारस।
नगरों की यदि बात करें तों
भारत की तो है शान बनारस।
(अशोक राय वत्स)© स्वरचित
रैनी ,मऊ उत्तरप्रदेश।

विषय:--बनारस
विधा:--मुक्त

शिव शंभु की नगरी
कालनाशक काशी नगरी
गंगा पावनी जहाँ पे बहती
ऐसी पावन-पाक है नगरी

कहते जब धार्मिक-धाम
तब कहलाती काशी नगरी
ठगी के साथ जब जुड़ता नाम
तब कहलाती बनारस नगरी

छोटे-छोटे मुक्तिधाम
बन जाते अबलाओं के धाम
यहीं पर आकर मृत आत्मा को मिलता तर्पण

कबीर,रविदास,रामानंद त्रैलंग स्वामी का ज्ञान यहाँ जीवित है
प्रेमचंद,प्रसाद का यथार्थोन्मुखी आदर्श यहाँ
लेता हैं साँसें

आचार्य शुक्ल का इतिहास धड़कता इसकी रगरग में
संस्कृति और धर्म का केंद्र
रवि शंकर,गिरिजा देवी,हरि प्रसाद ,उस्ताद बिस्मिल्लाह
के सुर -संगम की भूमि

चार धाम से विश्व विद्यालय
जहाँ होता भाषाओं का संगम
तुलसी के पावन मानस की
यही है सृजन-भूमि
तभी तो ये कहलाती धर्म की राजधानी

दीपों से जगमगाती ये है
ज्ञान की नगरी
मार्क ट्वेन की लेखनी में
इतिहास से भी पुरातन, किंँवदंतियों से भी
पुरानी है बनारस नगरी।

डा.नीलम,अजमेर

24/09/19
विषय:बनारस
विधा:पिरामिड
द्वितीय प्रस्तुति
है
काशी
कजरी
सूर्योदय
विद्या सागर
मंगल आरती
बनारसी ओढनी
पी
लस्सी
ठंडा
मीठा पान
लंगड़ा आम
नौका विहार
रसीली लौंग लता ।

नीलम श्रीवास्तव
स्वरचित


विषय- बनारस
कविता-
महादेव की भक्ति का बादल,
बरसो से यहां छाया है।।
विश्व की प्राचीन नगरी भोले ने,
त्रिशूल की नोंक पर इसे बसाया है।
काशी पति भोले विश्वनाथ का ,
धाम यह पुराना है।।
गंगा के तट पर बसा ,
नगर ये बड़ा सुहाना है।।।
बनारसी पान के लोग ,
बड़े दीवाने है।
बनारसी साड़ी के ,
उतने परवाने है।।।
रबड़ी वाले बनारसी,
बहुत मस्ताने है।।।
वैदिक संस्कृति की ,
शिक्षा फैलाती है,
बनारस काशी वाराणसी,
मोक्ष का नगर कहलाती है।।।
मुसाफिर
सोमेश सिन्हा

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"कांच /शीशा ""10अक्टुबर 2019

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