Tuesday, September 10

"कटु/कड़वा"3सितम्बर 2019

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ब्लॉग संख्या :-494
































नमन मंच भावों के मोती
3 /9 /2019 /
बिषय ,,कटु / कड़वा

सत्य हमेशा कड़वा होता है
वह मन के मैल को धोता है
कटु वचन जो निकले जबान से
चुभते जैसे कि निकले तीर कमान से
रिश्तों में कटुता आ जाए तो खो देते मान सम्मान
जैसे कि चोट. का मिटता नहीं निशान
. फिर चाहे कितने चाहो मिले न मन से मन का मेल
कटुता बढ़ती ही जाती जैसे
बढ़ती बेल
मुख से. सदा निकालें शब्द हम मीठे
लोग इतना प्यार करेंगे
जैसे शहद में चीटे
शब्द बनाए शब्द बिगाड़े
शब्दों का ही खेल
और जिसने समझ लिया शब्दों का तालमेल
उसने सारा जग जीता यह सिध्दांत अपेल
स्वरिचत,, सुषमा ब्यौहार


नमन मंच
दिनांक .. 3/9/2019
विषय .. कटु/ कडवा

******************

मृदु भावों को कटु वचनों से,
हाय मेरा वो तोड दिया।
श्वेत कुसुम सी नन्ही कली में,
हाय हलाहल जोड दिया।
**
रिक्त हो गयी हृदय कोठरी,
कडवा उसने बोल दिया।
बावरा मन था प्रित मे जिसके,
शेर उसे ही तोड दिया।
**
विरह वेदना मे मै तडपी,
पर कुछ तो अपमान सहा।
बेदर्दी से मन को जोडा,
जिसको उसने छोड दिया।

तार तार हो गयी मोह पर,
मन मेरा ये भटक रहा।
राणा की ऐसी मै मोहिनी,
शेर मोह वो त्याग दिया।
**

शेर सिंह सर्राफ

दि.3.9.19.
शीर्षकः कटु/कड़वा

*
सुख-दुख की छायामय जीवन।
संघर्ष -शान्तिमय वन -उपवन।
कंटक - अरण्य,स्वर्गिक - नंदन।
कटु-तिक्त-मधुर रस-आस्वादन।

इसलिए सतत जो सावधान।
उसके हित सौ-सौ सुख-विधान।
जो अविचारी स्वच्छंद सदा।
उसको सुख-संसृति दुःख-प्रदा।।
-डा.'शितिकंठ'


शीर्षक-- कड़ुवा/कटु
प्रथम प्रस्तुति

कड़ुवा हो जाता जायका
सच को मत मिलाया करो ।।

सच को छुपाना सीखो
कभी इसे छुपाया करो ।।

अपने पराये न हो पायँ
ये ध्यान न भुलाया करो ।।

सच क़रीने से पेश हो
ये अन्दाज लाया करो ।।

बुरा भी न लगे बात बने
लफ़्ज़ यूँ फरमाया करो ।।

रिश्तों में ख़लल हानीप्रद
सीख मन को सिखाया करो ।।

सच देर सबेर सब सीखे
'शिवम' जुल्म न ढाया करो ।।

दिलवर ने सिखाया हुनर
आप भी अजमाया करो ।।

आज तक वो दिल से न गये
यह हुनर अपनाया करो ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 03/09/2019.




विषय-- कड़ुवा/कटु
द्वितीय प्रस्तुति

मेरे सनम मधुर गोली न थे
कितना न सिखाया औ रिझाया ।।

पूरी कहानी ही लिख डाली
पढ़ कर मैं खुद स्तब्ध कहाया ।।

न मीठा काम दे न ही कड़ुवा
जीवन इन्ही बीच फँसा पाया ।।

कब किसकी कितनी मात्रा हो
किस्मत ने भी करिष्मा दिखाया ।।

समझिये सीखिये और पढ़िये
गले लगाइये जो पास आया ।।

कड़ुवा घुँट किसने न पिया 'शिवम'
सीना ठोंक इतिहास बताया ।।

राम का वनवास पांडवों का
अज्ञात वास ये घुँट कहलाया ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 03/09/2019


दिनांक-3-9-2019
स्वरचित कविता

कटु/कड़वा

सीखो उत्तम आचार-विचार-
करो नहीं कड़वा व्यवहार,
मनुज!तुम्हारे ही कर्मों से-
अनुपम है सुंदर संसार.

मीठे-मधुर वचन ही बोलो-
कानों में मिश्री सी घोलो,
बना सभी को अपना सा ही-
मानवता को दिल में तोलो.

कटु बोली से काक न रूचता-
कोकिल-स्वर को जी-भर सुनता,
जन-मन की है बात गहन यह-
मीठे सुर को ही है चुनता.

___
स्वरचित
डा.
अंजु लता सिंह
नई दिल्ली


 नमन मंच ,भांवो के मोती
विषय कडुवा,कटु
विधा काव्य

03 सितम्बर 2019,मंगलवार

कटु रस मन कडुवाहट लाता
कभी मधुरता यह भी भरता।
पुनर्नवा कडुवी औषध से
तपते तन ज्वर को यह हरता।

कटु सत्य कह देने वाले
इस जीवन में कम मिलते हैं।
चाटुकार बनते ज्यादा हैं
नित उल्लू वे सीधा करते हैं।

गरल घूँट कटु पीने वाले
भोलेनाथ कँहा मिलते हैं?
सब मायावी स्वार्थ में रत
मनोकामना पूर्ण करते हैं।

जीवन जीना सरल नहीं है
निज स्वार्थ हित कटुता फैली।
दया ममता स्नेह साधक ने
सदा मुसीबत जीवन में झेली।

कटु कथन प्रेरक जग होता
जो अपना है वही तो कहता।
मीठा आकर्षित बोल सदा ही
वह निज मतलब पूरी करता।

स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।





द्वितीय प्रस्तुति

कटुता से पाया किसने है
कटुता से सब कुछ खोया।
दया करुणा ममता खो दी
वह जीवन भर जग में रोया।

कटु शब्द कभी न बोलो
कटु शब्द कभी न सुनो।
जो परमार्थ मार्ग जाता
दिल से तुम उसको चुनो।

कटु शब्द भी चुभ जाता है
सोचो समझो फिर तुम बोलो।
स्नेह दुलार भरा है जग में
हाथ मिलाओ उसके होलो ।

कडुवी औषध हरती मर्ज को
कडुवाहट में मधुरता भी होती।
अपने को अपना तो समझो
जीवन में कभी आँखे न रोती।

स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान
नमन-भावो के मोती
दिनाक-03/09/2019
विषय-कटु-कड़वा

चिंगारी का खेल बहुत बुरा होता है........................

दूसरों के घर जलाने का सपना...

अपने ही घर में कटु सच होता है...............................

आश्वस्त होकर उतरूंगा

जीवन- मरण के कटु द्वंद में

घेर न पाएंगे मुझे विपक्षी

षड्यंत्रों के छल-छंद मे।।

सत्ता का सहवास

विपक्ष का बनवास

यही है मेरे जीवन का

कटु सत्य का स्वाद।।

असहाय की कटु जीत

बन गई दिवास्वप्न बालू की भीत

कपट व्यवस्था कटु सत्य

काला सच यथार्थ का रथ

जिस पे सवार सपने सुखद

यही है सत्य का मूल्य तथ्य ।।

कटु बोली काक की

मीठी बोली अनुराग की

चले एक कड़वा सच के संग संग

बने रही लफ्जे हमारी नम नम।।

स्वरचित...
@ सर्वाधिकार सुरक्षित

सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज


भावों के मोती
बिषय- कटु/कड़वा

सच कड़वा होता है
पर इसे स्वीकार करो
इससे हमारा भला होता है।
यह हमको हमसे मिलवाता है,
हमारे ऐब गलतियां दिखलाता है,
सही राह पर लाता है।
जैसे करेला कड़वा होता है
मगर स्वास्थ्य वर्धक होता है
वैसे ही सच सबका भला करता है।
मीठी-मीठी बातें करने वाले
अकसर दगा दे जाते हैं
मगर कटु सत्य कहने वाले
कभी धोखा नहीं देते।
इसलिए उनकी बातों को सुनो
और उससे प्रेरणा लो।

स्वरचित- निलम अग्रवाल, खड़कपुर

बिषयःः ः#कटु/कडवा #
विधाःः काव्यः ः

प्रभु कटु वचन कभी न बोलूं।
बिन तोलमोल कहीं न बोलूं।
कोशिश सदा यही हो मेरी,
हो जितना झूठ कहीं न बोलूं।

कडवे घूंट तभी पीने पडते हैं।
जब छिपाऐं हम अपने दुर्गुण।
कडवाहट जिव्हा पर रखकर,
गिना रहे हम अपने सदगुण।

ये क्रोध बहुत अंधा होता है।
क्रोध सदैव आपा खोता है।
संयम और विवेक सो जाते ,
फिर नहीं पता क्या होता है।

घुला जहर वाणी में अपनी,
उत्पन्न क्रोध इससे होता है।
मन वश में हमें करना होगा,
स्वयं क्रोध मुशीबत ढोता है।

स्वरचितःः ः
इंंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.


कटु / कड़वा - छंदमुक्त रचना

है मुश्किल
जीवन का
सफ़र
कटु और
कड़वा
हैं लोग
मतलबी और
स्वार्थी
चले साथ जो
सच्चाई से
जीवन में
वहीं करें
नैया पार

आती राह में
बाधाएं अनेक
होते अनुभव
कड़वे अनेक
जो बड़ा
हिम्मत से आगे
उसी ने बनाईं
राह अनेक

चखेंगे जब
कड़वा
जीवन में
तभी तो
समझेंगे
मीठा
जीवन में

बोलो
भले ही
मुँह से
कड़वा
रखो मत
मन में
कटु विचार
जैसा बोएंगे
जीवन में
मिलेगा
वैसा ही फल
जीवन में

करो सभी का
अच्छा
सोचो सभी का
भला
देगा ईश्वर
साथ सदा
यहीं हैं
जीवन के
सदविचार

स्वलिखित लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल


 नमन मंच- भावों के मोती
03/09/2019
मंगलवार

विषय - कटु ,कटुता
विधा - सायली छंद

कटु
कभी भी
वचन न बोलिए
घायल करे
हृदय

कटुता
से मिटे
बना मधुर संबंध
बिगड़ जाये
संबंध

कटुता
मानव कभी
भूल सकता नही
याद रहता
हमेंशा

सत्य
होता कटु
सहन नहीं होता
मन आहत
सुनकर

कटुता
को त्यागे
मीठा वचन बोले
सबको जोड़े
सर्वदा

स्वरचित डॉ.विभा रजंन(कनक)
नयी दिल्ली


 नमन "भावो के मोती"
03/09/2019
"कटु/कड़वा"


धूप-छाँव है जिंदगी का सफर
मिलते कभी मीठे-मीठे पल
कड़वाहटों के भी आते क्षण
झेलने होते हैं कभी कटु सत्य

मिलन की खुशियों को जीते
जुदाई के गम भी पीने पड़ते
सोमरस सा है मिलन का पल
कड़वा काढ़ा है जुदाई का गम।

खुशी के आँसू कभी छलकते
सुहानी यादों को सँजोते
कभी आँखें होती दर्द से नम
कड़ुवाहटें सीने में जो जलती।।

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।।


नमन भावों के मोती
आज का विषय, कटु, कडुवा
दिन , मंगलवार
दिनांक, 3,9,2019,

कटु अनुभव अक्सर जीवन में,
सीख नई दे जाते हैं ।
कभी-कभी अपने भी मन में,
कडुवाहट भर जाते हैं ।

कभी रिश्ते नाते अपनेपन में ,
धोखा भी दे जाते हैं ।
हमें काँटे मिलें अगर राहों में,
छोड़ नहीं पथ देते हैं ।

गुजर बसर के लिऐ पांव में,
काँटे भी सह लेते हैं ।
कभी-कभी ये काँटे घर में ,
बीज प्रेम का बोते हैं ।

कडुवे बोल मानव के मन में,
घृणा द्वेष ही उपजाते हैं ।
दागदार हुए रिश्ते डूबे शर्म में,
महाभारत हम जानते हैं ।

हमारे मीठे बोल बातों बातों में,
आहत को सुकून दे जाते हैं।
चोट हो कितनी गहरी मन में,
ये राम बाण बन जाते हैं ।

कटुता रहेगी न अपने बीच में ,
हम स्वार्थ जो दूर भगाते हैं।
मिल जुल कर ही रहने में ,
हम सच्चा सुख पाते हैं ।

स्वरचित , मीना शर्मा, मध्यप्रदेश,


II कटु / कड़वा II नमन भावों के मोती....

विधा: छंद - दोहा

कटुक वचन मत बोलिए, लगे ह्रदय में तीर...
मलहम भी न असर करे, और न जाए पीर...

मीठी वाणी अमृत सी, ज़हर लगे कटु बोल....
सन्तन सब ही कह गए, बोल हमेशा तोल....

मन की कटुता कर दिए, फीके छप्पन भोग....
साग-बेर से बन गए, प्रभु दर्शन के योग....

शबरी झूठे बेर ने, विदुर साग में प्रेम....
राम-कृष्ण को बस किया, कटु मन ढूंढें क्षेम...

दुख में भी न दुःख लगे, सुख की रहे न थाह...
पूर्ण रिश्ते प्रेम से, कटुता करती स्वाह....

II स्वरचित - सी.एम्.शर्मा II
०३.०९.२०१९


विधा कविता
दिनांक 3.9.2019
दिन मंगलवार

कटु/कड़वा
🍁🍁🍁🍁

चाहे कितनी भी हो वाक् पटुता
पर बोली में नहीं हो कभी कटुता
क्यों कि बोली में ही पैने पैने तीर हैं
जो मन को घायल करते गम्भीर हैं।

कहते हैं सबसे मीठे बोल हैं
इसलिये ही बोल बडे़ अनमोल हैं
लोकोक्तियाँ मुहावरे और अलंकार
ये सब इनके सुनहरे खोल हैं।

कटु शब्द सब चौपट करते
शान्त मन पर भट भट करते
वैमनस्यता के गंदे घट भरते
आपसी प्रेम को को हट हट करते।

स्वरचित
सुमित्रा नन्दन पन्त

नमन🙏भावों के मंच 🙏
विषय- कटु /कड़वा
दिनांक 3-9-2019

जमाने में लोगों को, बड़े हुनर आते हैं ।
मीठा बोल ,लोगों को धोखा दे जाते हैं।।

मीठी वाणी से लोग,वशीभूत हो जाते हैं ।
कटु बोलने वाले,पसंद कहाँ आते हैं ।।

कटु सत्य ,लोग हजम नहीं कर पाते हैं।
मीठी वाणी के ,कायल हो जाते हैं।।

कटु वाणी चूभती, लेकिन सत्य होती है ।
कड़वी दवा निगलनी, कहाँ आसान होती है।।

कड़वी दवा कटु वचन, हितार्थ होते हैं ।
समझने में कठिन, लेकिन यथार्थ होते हैं ।।

स्वस्थ तन स्वस्थ मन,इन्हीं से बनता है ।
बाकी सब, सच में नकाबपोश होते हैं।।

दूर रहना इनसे ,यह किसी के नहीं होते हैं।
कटु बोलने वाले ही, सही मार्ग दिखाते हैं ।।

मीठी वाणी फरेब ए जाल, में फंसाते हैं ।
नादान यह कटु सत्य, समझ नहीं पाते हैं।।

वीणा वैष्णव
कांकरोली
( स्वरचित)

मन मंच
03/09/19
कटु/कड़वा
***
सत्य कटु ही होता है ,
झूठ चासनी में पगा होता है।
एक कटु सत्य सामने आ खड़ा हो जाता
सोच सोच कर जीना दुश्वार किया करता है ।
मंगल तक हम पहुँचे एक ही प्रयास में
चाँद तक पहुंचने की आस में
ऊँचा भारत का नाम है ,
देश के वैज्ञानिकों को सलाम है।
पर कटु सत्य पर नजर डालिए
सरकार और वैज्ञानिक इस ओर भी कदम बढ़ाइए।
सेप्टिक टैंक और गटर में
सफाई कर्मचारियों के क्यों जाते प्राण है।
आपने कभी सोचा या बनते अनजान हैं।
उपकरण ,प्रौद्योगिकी विकसित हो रही
लाखों किलोमीटर दूर हमारा नियंत्रण है
इन के लिए सुरक्षा के क्या उपकरण है ?
सामान्य स्थितियों में
कोई गटर में उतर नहीं सकता
बिना नशा किये कोई
इसे स्वच्छ कर नहीँ सकता ।
जहरीली गैसों का रिसाव
और दम घुटने से मृत्यु
इनकी कोई खबर नहीं आती
इनकी मौत टी आर पी नहीँ बढ़ाती
वोटबैंक भी बेअसर रहता
एक दो दिन बाद लाश की तरह
मामला भी ठंडा हो जाता ।
मास्क ,जैकेट ग्लव्स हैं
तो क्या इनका अकाल है
या इसमें भी फैला भ्रस्टाचार है।
प्रौद्योगिकी और विकास के विरोधी नहीं
ये कटु सत्य सदैव प्रश्रचिन्ह बन खड़ा रहता है ।

स्वरचित
अनिता सुधीर


3/9/2019
विषय -कटु/कड़वा
***********
अस्थि हीन जिव्हा होती है ज़रा सी
कहर ढा दे या अमन, है बात सोचने की सी

मुख से निकले वचन होते हैं प्रभावशाली
कटु वचन न बोलिये न ही दीजिये गाली

कवि रहीम कह गए वाणी का है मोल
जीवन सफल बनाइये तोल मोल के बोल,

"रहीमन जिभ्या बावरी, कह गई सरग पाताल,आप तो भीतर रही, जूते खात कपाल ।।"

कुटिल वचन निकले मुख से घाव करें गंभीर
मीठी वाणी मरहम बनें,,ऐसी उसकी तासीर ।।

वाणी चाहे तो जीवन मे स्वर्ग से सुख दिला दे
विष वाणी पल भर में नरक सी दुर्दशा करा दे

चाहिए जो जीवन मे अमन सुख शांति का बास
फौरन त्याग दीजिये ज्यूँ हो कटुता का आभास

शत्रु मित्र आपके हाथ यदि जिव्हा पर हो नियंत्रण
बैठे बिठाए आफत मोल ले लेते, जो बोले कटु भाषण ।।

**वंदना सोलंकी**©स्वरचित


नमन भावों के मोती
दिनांक-३/९/२०१९
शीर्षक-कटु/कड़वा
कटु वचन से होते हैं,जग में नाम खराब।
मूड बिगाड़े अपना,जग में काम खराब।।

कटु वचन के जनक है,लोभ,मोह और क्रोध
इन सब से दूर रहें,बोले मधुर बोल।

कटु वचन बोल कर,काम बिगाड़े आप
मधुर वचन बोल कर,लाभ उठावें आप।

कटु वचन बोल कर काम बिगाड़े क्यों?
मीठे वचन बोल कर काम निकाले क्यों?

गरीष्ट भोजन आपका ,ज्यों बिगाड़े सेहत।
कटु वचन वैसे ही रिश्तों में घोले जहर।।

जब भरें कड़वाहट मन में,कर लें थोड़ा विचार।
आधी कटुता दूर हो,बन जाये बिगड़े काम।
स्वरचित आरती श्रीवास्तव।


सादर नमन
कटु/कड़वा
जहाँ हो विश्वास की कमी,
कटु रिश्तों का हो वहाँ आगमन,
झूठी मुस्कान के संग वो जीते हैं,
ले द्वेष भाव वो अपने मन,
प्रेम का निश्चल जल लेकर,
धोएँ पटल अपने हृदय का,
सुख-दुख आना जाना है,
जब पहिया चले समय का,
कटु वचन की दीवारें,
बाँट देती हैं परिवार,
हर मौकों पर जब भी मिलते,
रह जाती है बस तकरार।
**
स्वरचित-रेखा रविदत्त
3/9/19
सोमवार


जिंदगी में कुछ कड़वे घूंट भी पी लिये हमने
जिंदगी हमारी बनासूर न गई जब कड़वे घूंट हलक से उतरे

दिल दिल अपना साफ़ रखती हूँ
नीम करेले की तरह कड़वे बोल मेरे पर हर चीज का हिसाब रखती हूँ

मीठा बोल कर किसी को धोखा नहीं दिया
कड़वा बोलकर दिल से चाहे सबके दिल से रुखसत हुए .

अभी भी बोल मेरे कड़वे हैं पर दिल नियत साफ हैं
बदलते वक्त हर पल का मेरे पास हिसाब हैं .
SWRACHIT :- RITA BISHT


नमन "भावों के मोती"
विषय:-कडवा
विधा:-पत्र

राज,

आज सोच ती हूँ
मैं मुक्त क्यों नहीं हुई
आजादी जो चाहिए वो तो आज सब है मेरे पास कड़वे अनुभव और मीठे एहसास भी .........
पर नहीं हो तो बस तुम.......
रेत की मानिंद हथेलियों से फिसल ही गये तुम..........
सम्भाल नहीं सकी मै तुम्हें और
न तुम मुझे .... पर अब भी हाथ में दबे उन हाथों की उँगलियों को मे महसूस कर सकती हूँ......
आह.......कितना सुकून देता था तुम्हारा वो स्पर्श वो एहसास के जायके को मैं आज भी महसूस
. . ......कर भीग जाती हूँ मैं
और मेरा तकिया.......... भी
.....फिर एक दिल में टीस उभर आती है वो टीस .............एक
कडवाहट मे बदल जाती है । तेरा जिक्र हो और मुझे तेरी फिक्र न हो
ऐसा कभी हुआ ही नहीं तुम दूर हो पर दिल मे रहोगे

हमेशा हमेशा हमेशा

नीलू

स्वरचित

नीलम शर्मा#नीलू


विषय - कड़वा/कटु

होते हैं जिंदगी में
कई तरह के
कड़वे, कसैले
खट्टे,मीठे अनुभव
दे जाते हैं
अच्छी, बुरी यादें
मधुर वचन लगते मीठे
अपनत्व-भाव करते हैं पैदा
दूरियाँ घटाते
दुश्मन को अपना बनाते
मगर झूठ में लिपटा सत्य
अहित करता प्रिय का
सन्मार्ग से डिगाता
हानि पहुँचाता है
सत्य प्रायः
होता है
कड़वा,कसैला
सुनने वाला
हजम नहीं कर पाता
और हो जाता है
आरोप - प्रत्यारोप का सिलसिला
एक मीठे झूठ से अच्छी है
कड़वी सच्चाई
प्रहार करती है दिल पर
लगती है तीर-सी
कानों में डालती
पिघला सीसा
हो जाता है इंसान
बहुत कुछ सोचने को मजबूर
बादल छँटते ही
हो जाता है
मार्ग प्रशस्त
और खिल जाती है
मन पर सुनहरी धूप
मीठा झूठ अहितकर है
कटु न बोलें मगर
करेले सम
औषधि है
कटु सत्य

सरिता गर्ग


नमन भावों के मोती

आज का शीर्षकः- कटु- कड़वा

हितेशी तुम्हारा वहीं होता है बोलता जो कड़वा।
सुन कर कड़वे बोल उसके जा न कभी हड़बड़ा।।

करती है लाभ शीघ्र वही होती जो कड़वी दवा।
मीठी दवा के चक्कर में रोग को तू मत बढ़ा।।

माता पिता के कटु बोलों समझना उत्तम दवा ।
उनकी क़ड़वी वाणी को कभी तू हवामें न उड़ा।।

गुरु उत्तम वही, शिक्षा देते समय रहे जो कड़वा।
ऐसे गुरु को तो मानना सदा ही तू अपना सगा।।

डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव
"व्थथित हृदय मुरादाबादी"
स्वरचित


विषय:--कटु / कड़वा
विधा:--मुक्त
दिनांक:--03 / 09 /19
~~~~~~~~~~~~~~
सच से कडु़वा कुछ नहीं
झूठ के मीठे पाँव
हर जबान,हर दिल में
बने हैं इनके ठाँव

सच की कटु निबोली से
मन में कड़वाहट घुलती
मजबूत से मजबूत दीवार भी
कटु सच्चाई से दरकती

मीठे गुड़ सा होता झूठ
मुँह में घुल घुल जाता है
बिना किसी आधार के
झाड़ पे चढ़ जाता मानुष

पर अटल सच्चाई है
जितना कड़वा सच होगा
जड़ से उतना निरोगी होगा
कितनी भी आये आँधी
पाँव पे अपने खडे़ होगा।

डा.नीलम

भावों के मोती मंच -नमन
दिनांक -3/9/2019
विषय -कटु /कड़वा

कटु शब्द की कटुता
प्रचलन में अब आई है
जनजीवन की मधुरता
बेरहमी से झुठलाई है

मीठी वाणी का मोल घटा
कटुता ने जगह बनाई है
छोटे बड़े का अंतर मिटा
अहं भाव ने गुहार लगाई है

परिवारवाद का मेल कम हुआ
स्वच्छंदता ने बिसात बिछाई है
अब मतलब का हर रिश्ता हुआ
सम्बंधों में कटुता ख़ूब समाई है

कटु रूप में जीना ना भला
बात गहरी इसमें बतलाई है
जीवन जीने की सच्ची कला
कटुता ने कब कहाँ सिखलाई है

✍🏻 संतोष कुमारी ‘ संप्रीति ‘
स्वरचित


 नमन भावों के मोती
दिनाँक -3/09/2019
विषय -कटु/कड़वा

बन्दे मधुर बोल बोल
कटु बचनों से जीवन में कटुता न घोल
मधुर वचनों से मधुरसता है घोल
जीवन है अनमोल ,बन्दे मधुर बोल बोल।
वाणी का नहीं कोई मोल ,मधुर वाणी है अनमोल
रिश्तों के बंद दरवाजे है खोल
बन्दे मधुर बोल बोल ।
न इसमें दाम लगे न है कोई मोल
कटु वाणी से कटुता न घोल
बन्दे मधुर बोल बोल।
कागा कोयल एक ही जैसे
पर वाणी से हो गए भेद
बन्दे मधुर बोल बोल ।
स्वरचित
मोहिनी पांडेय


















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