Sunday, September 1

"मदद /सहायता"31अगस्त 2019

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ब्लॉग संख्या :-491



विधा काव्य
31 अगस्त ,2019,शनिवार

जय जय हो प्रिय भारत माँ
तुम सहायता हेतु बनी हो।
प्रकृति के हर कण कण में
मदद हेतु माँ आप खड़ी हो।

अद्भुत है भारत की धरती
ताज हिमालय प्रहरी इसका।
संत दधिची और विशिष्ठ से
संकटमोचक विपदा हरता ।

सब धर्मों का एक सार है
परोपकार जीवन धर्म है।
पीड़ा दुःख विपदा को देना
सबसे बड़ा जग अधर्म है।

भक्तिभाव सेवा में शक्ति
सदा मदद जीवन में करता।
दीन दयालु जग कहलाता
वह जीवन में न कभी मरता।

स्व0 रचित, 
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

शीर्षक-- मदद/सहायता 
प्रथम प्रस्तुति


सबसे बड़े मददगार हैं पेड़ हमारे 
उनके ही अहसान भुलाये हमने सारे ।।

एहसान फरामोशी बढ़ती जाए निश दिन
पैर कुल्हाड़ी खुद अपने पर हम हैं मारे ।।

शुभ कर्म भी मौका बखत पे आए आड़े 
शुभ कर्म से भी हमने अब पल्ले झाड़े ।।

मैराथन सी दौड़ आज चल रही भाई
कोई न होगा मदद को जो काज सँवारे ।।

ऐसे अवसर आ न पाऐं वक्त अभी है
प्रेम बढ़ाओ सबसे , प्रेम ही हमें उवारे ।।

संगठन में शक्ति होती ये भी हम भूले 
संयुक्त परिवारों की महत्ता हम विसारे ।।

दुख तकलीफ कहाँ होती थी छोटों को
मदद ताकना न होती थी किसी के द्वारे ।।

अभी वक्त है सँभलो 'शिवम' जाग्रति लाओ
अंतस में भी बैठा ....कोई लो सहारे ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 31/08/2019




शुभ संध्या
विषय -- मदद/सहायता
द्वितीय प्रस्तुति


मददगार है सबका एक 
उसकी राहें लेना टेक ।।

सत्य सनातन भूल रहे 
खो रहे हैं आज विवेक ।।

सत्य से प्रीत न आज रही 
भूल गये सब राहें नेक ।।

कौन हमारी मदद करेगा
पढ़ते हैं नित ऐसे लेख ।।

धोखा छल कपट ने घेरा 
बेंचा विवेक बचा अविवेक ।।

मानवता पर गर्द चढ़ी है 
पड़े उदाहरण हैं अनेक ।।

मदद का हाथ कौन बढ़ाये
लिए पीछे छुरी हर एक ।।

'शिवम' समस्या जटिल बनी है
इंसानियत दी कब की फेंक ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 31/08/2019


 विषय-- मदद
तृतीय प्रस्तुति


सुन व्यथा उनके आँसू छलके 
काश पल भर जाते मिल के ।।

मुझे भी कुछ मौका देते 
ऐसे भी न दिल थे हलके ।।

जब सुनाया सारा किस्सा
उनके भी आँसू थे ढलके ।।

कैसी किस्मत लिखी कहानी 
खुद्दारी में रह आँख मलके ।।

मदद किसे न किसकी होती 
चलें 'शिवम' अब हम सँभलके ।।

वक्त के हर अन्दाज जाने 
जमीं छोड़ कुछ न मिले उड़के ।।

मदद अपनों से ली जाती 
समझ आयी आगे चलके ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 31/08/2019
द्वितीय कृति

जीने को तो इस दुनियां में

असंख्य जीव यँहा जीते हैं।
दीन दुःखी परहित सेवा रत
मानव को जग श्रेष्ठ कहते हैं।

खुद का जीना दानवता है
परहित जीना है मानवता।
जीवन अगर मिला है हमको
परोपकार मन में हो शुचिता।

बिना मदद अधूरा जीवन है
त्याग स्नेह जीवन आभूषण।
धरतीपुत्र मदद से जीवन है
सैनिक सीमा विजय करे रण।

मदद हेतु उठे जन पाणी
सदा अमर होते बलिदानी।
जिसने जग में की सहायता
वे ही तो मानी अति ज्ञानी।

स्व0 रचित,मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

नमन मंच भावों के मोती
दिनाँक-31/08/2019
विषय-मदद

***********************
मदद करे जो दुखियों की,
साक्षात्कार ईश्वर से हो जाये,
दीन दुखियों की सेवा करे जो,
वो परम् गति मोक्ष पा जाये !

आओ हाथ बढ़ाएं हम सब,
मन के कोमल उन सच्चों की,
जो है शिक्षा से वंचित,
मदद करें उन बच्चों की!

एक हाथ तेरा,और एक हाथ मेरा हो,
सुख शाम और खुशियों का सबेरा हो,
देश हित मे कुछ मदद करें ,
सब कुछ अपना हो कहीं न तेरा मेरा हो!

स्वरचित-राजेन्द्र मेश्राम "नील"

मन मंच भावों के मोती
31 / 8 /2019
बिषय,, "मदद" सहायता,,

परम परोपकार किसी की मदद का काम
मन को मिल जाता आत्मिक आराम
बाढ़ से पीड़ित आधा हिंदुस्तान
बाढ़ आपदा सैनिकों ने किया कार्य महान
यत्र तत्र सर्वत्र बने देवदूत
लोगों को बचाना ही इनका आधारभूत
ए बांके जांबाज हर हाल में खड़े
जोखिम उठाने को तत्पर हैं अड़े
मशीबत में सहायता है परमोधर्म
गिरे को उठाने में कैसी शर्म
बेघर बेसहारों को कोई देता है सहारा
जैसे डूबते को मिल जाए किनारा
हर इंसान को चाहिए आगे बढ़ाए हाथ
ईश्वर भी नहीं छोड़ेगा कभी तुम्हारा साथ
चलो हम भी मिलकर करें पुण्य का काम
इससे चौगुना देंगे हमको श्री राम
स्वरिचत,, सुषमा ब्यौहार

दि- 31-8-19
विषय- मदद/ सहायता 
सादर मंच को समर्पित --


🏵 गीतिका 🏵
***************************
🌺 मदद/सहायता 🌺
आधार छंद- गीतिका 
मापनी - 2122, 2122, 2122, 212
समान्त - आर,पदांत-करिए तो तनिक 
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

लख किसी मजबूर को ,उपकार करिए तो तनिक ।
सुख मिलेगा मदद कर के प्यार करिए तो तनिक ।।

दीन , हीन , गरीब भी तो बन्धु हैं अपने सभी ,
रह सकें खुशहाल वे, साकार करिये तो तनिक ।

है नहीं छत का ठिकाना , रात काटें सड़क पर ,
बन सकें घर-द्वार कुछ उद्धार करिये तो तनिक ।

जी रहे बदहाल जो , परिवार बच्चे श्रमिक बन,
मुख्य धारा आ सकें , उपचार करिये तो तनिक ।

हो जहाँ श्रम का निरादर, आह निकले हृदय से ,
चीख दब जाये नहीं , प्रतिकार करिये तो तनिक ।

है पराया कौन जग में एक सा सब में लहू ,
प्रेम से हों एक , मृदु व्यवहार करिए तो तनिक ।

साँस गिनती की मिली हैं , बीतती हैं जा रहीं ,
याद रह जाये मदद , सुविचार करिए तो तनिक ।।

🌷🍀🍑🍎🌻🌺

🌴🌻🌷
**...रवीन्द्र वर्मा आगरा

भावों के मंच🙏 विषय -मदद /सहायता 
दिनांक 31-8 -2019
जीवन प्रभु दिया, श्रेष्ठ कार्य कर ।
मदद सबकी,जीवन साकार कर।।

प्रभु श्रेष्ठ रचना, कर दिए कर।
अपने कर्मों से,सहायता कर ।।

जग प्रसिद्धि,ना अहित कर ।
दोबारा ना जीवन, हितकर ।।

बहेलिया बन,ना आखेट कर ।
पहचान बना ,सदा मदद कर ।।

वाणी संयमित,ना वाक प्रहार ।
बोल मीठे,न हृदय घाव कर।।

परोपकार कर ,तू विपदा हर ।
मनुष्य जन्म,उद्देश्य सार्थक कर।।

रखना है पहचान, बरकरार ।
बने जो तुझसे, मदद कर।।

नेक कार्य, तू इंतजार ना कर।
हर लम्हे का, सदुपयोग कर ।।

पेड़ से सीख, उदाहरण बन ।
ओर हित,सर्वस्व न्यौछावर कर।।

मौका मिला, न समय गवांँ। 
मदद सुअवसर,ना राह भ्रमित कर।।

वीणा वैष्णव
कांकरोली 
(स्वरचित)

नमन मंच
दिनांक .. 31/8/2019
विषय .. मदद

********************

भाव शून्य से हो गये नयना,
ना ही कोई आभास।
रानी थी वो नाम यशोधरा,
देखे पति की आस॥
**
चले गये क्यो त्याग के वैभव,
प्यार मेरा श्रृँगार।
दूधमुहे नन्ही संतति पे,
क्यो ना आया प्यार॥
**
धर्म नियन्ता बने आर्य अब,
ना कोई संताप।
मदद करेगा कौन प्रभु अब,
सोच रही वो आप॥
**
नारी मन की व्यथा ना जाने,
हरिश्चन्द्र ना राम।
तारामती से जानकी तक थी,
हरिइच्छा अभिराम॥
**
भाग्य जटिल है बदल ना पाये,
कर ले कोई उपाय।
महलों की सुकुमारी कन्या,
शेर लिखे मन हाय॥
***

स्वरचित .. शेर सिंह सर्राफ
नमन मंच भावों के मोती
नमस्कार गुरुजनों, मित्रों।

मदद करो उसकी।
जिसे हो मदद की जरूरत।

वरना लोग तो यहां।
मदद के नाम पर, ठगते रहते हैं।

भूखों को भोजन दो।
प्यासे को पानी।

इन जरूरतों के लिए तुम।
मत करो आनाकानी।

तुमसे पैसे की मदद लेकर।
भिखारी अमीर बन जाते हैं।

सजग होकर करना मदद।
वरना लोग यहां लूट मचाते हैं।
स्वरचित
वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी

दीन दुखियों,
मदद जो करते,
प्रभु के भक्त।।१।।

२/मदद एक,
मानवीय चरित्र,
करुणा वान।।२।।
३।।दया के पात्र,
मदद योग्य होते
परोपकारी।।३।।
४। करुणा वान,
प्रभु का प्रतिनिधि
देवदूत है।।४।। 
५/दीन दुखियों,
बस्तियों में रहते
करुणा निधि।।५।।
स्वरचित हाइकु कार देवेन्द्र नारायण दास बसनाछ,गया,।

नमन भावों के मोती🙏
31/8/2019
विषय -मदद/सहायता
िधा-मुक्त छंद 
🌹🌹🌹🌹🌹🌹
धनवान मदद करे निर्धन की
गुणवान मदद करे नादान की
सबल निर्बल की,प्रबल निर्दल की
एक दूसरे की मदद से ही 
ये सृष्टि चलती है
पल पल ये दुनियाँ
अपने रंग ढंग बदलती है
तन मन धन से करें यदि हम
जरूरतमंद की यथोचित सहायता
संतुलन बना रहे प्रकृति में
तब ही होगी मानव जीवन की उपादेयता
प्रत्येक पग पर कुदरत
हमारी मदद को हाज़िर है
हम हैं उपकृत माँ प्रकृति के
हे मानव !ये तो जग जाहिर है
संकट की हर घड़ी में
माता पिता संतान की मदद करते 
उनका ऋण हम संतानें
उनकी सेवा सम्मान से चुकता कर सकते 
ईश्वर प्रतिक्षण प्राणी की मदद को तत्पर है
हम कैसे उसे ग्रहण करें, ये हम पर निर्भर है ।।

**वंदना सोलंकी**©स्वरचित


विधाःः काव्यः ः

करें सहायता मेरी इतनी ,
मदद किसी की कर पाऊँ।
रहूँ परोपकार परहित प्रभु,
कोई सहायता कय पाऊँ।

मदद करें उसकी हम जो,
अपनी मदद के लायक है।
नहीं करें सहायता उनकी,
जो सबके खलनायक है।

सब तो दिया है दाता तूने,
सद् भाव भावना दे देना।
हो मदद निर्धन निर्बल की
मुझे शुभकामना दे देना।

ना कोई पुरूषार्थ करूँ मै,
न ही परोपकार करता हूँ।
जबतक कृपा नहीं तुम्हारी,
नहीं उपकार मै करता हूँ।

स्वरचितःः ः
इंंजी. शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना म.प्र.

"नमन भावों के मोती "
31/8/2019
विषय- मदद/सहायता 

विधा- छंद मुक्त " कविता "

हम एक दूसरे के काम आएं,
हमसब मिलकर कदम बढ़ाएं...
मन में ठान लें करने की कुछ 
तो कोई काम नहीं ऐसा...
जो हो नहीं ...सकता !!

मदद करें हम उनकी जो हैं निर्बल!
पांच साल का छोटा गोलू .. दो जून 
रोटी की खातिर करता है काम ... 
मता -पिता दोनों ...
अंधे ..फिर कैसे चलें संसार !!

धनवान हो कर क्या किया - जो
सहायता न किया निर्बल की ...
वक्त बदलते देर नहीं लगता ...
सोच कर देख़ो आफत ...की !!

सृष्टि का नियम यही एक दूसरे की 
सहायता करिए ,किसी के बेटी नहीं 
बिके बाजार में ... ऐसी कामना करिए , 
किसी गरीब के घर कम 
से कम एक वक्त चूल्हा जलें !!

माता पिति को अब कोई दुःख मिलें न ,
घर- घर में एक औलाद हो सरबन जैसी 
कोई बुजुर्ग अब वृद्धा आश्रम जाए न 
करें सेवा तन मन धन से तभी बनी
रहेगी धरती की ...संतुलन !! 

रोग छय का होगा नास 
जीवन होगा खुशहाल 
आओ मिलकर हाथ बढ़ाएं 
प्रकृति के सजदे में सर को झुकाएं!!

स्वरचित मौलिक रचना 
सर्वाधिकार-सुरक्षित 
रत्ना वर्मा 
धनबाद-झारखंड


..जय माँ शारदा 
सादर नमन भावों के मोती.
दि. - 31.08.19
िषय - मदद / सहातया 
मेरी प्रस्तुति सादर निवेदित...
=============================

ईश्वर सच्चे मददगार हैं सदा मदद करते हैं |
अलग अलग रूपों में जन की पीर वही हरते हैं ||

उनसे बढ़कर कौन सहायक होगा इस दुनिया में,
सबके मन में भाव मदद के वो ही तो भरते हैं |

मदद सदा करने को तत्पर रहते जो जीवन में,
ईश्वर की आज्ञा का पालन समझो वो करते हैं |

दीन हीन निर्बल विकलों का ध्यान रखें जो मन से,
ईश्वर सदा नेह बरसाते और ध्यान रखते हैं |

मानव सेवा ही तो माधव की सेवा कहलाती,
चलो सहायक बन हम भी ईश्वर को खुश करते हैं |

============================
#स्वरचित 
प्रमोद गोल्हानी सरस 
कहानी सिवनी म.प्र.
नमन मंच को
दिन :- शनिवार
दिनांक :- 31/08/2019

शीर्षक :- मदद/सहायता
राष्ट्रीय आपदा मोचन दल
(NDRF) के जवानों को समर्पित..

मदद से न कतराते जो...
आपदा मोचक कहलाते वो...
सदा करते निःस्वार्थ सेवा...
जानें कईं बचा लाते वो...
शौर्य व साहस का पर्याय वो...
खेल जाते हैं निज जान पर...
भूकंप हो या बाढ़ आपदा...
निकल जाते हैं वो काम पर...
कोई तूफान इनको रोके न....
कोई सरहद इनको टोके न...
तन,मन सब समर्पित करते....
जीव,जंतु सब सुरक्षित करते...
उठे हो भले ही बवंडर कितने...
या उग्र हुए हो समंदर कितने...
रोक सके न इनका पराक्रम...
आए भले ही संकट कितने...
सेवा सदैव संकल्प जिनका....
नहीं कोई विकल्प इनका...

स्वरचित :- मुकेश राठौड़

नमन मंच भावों के मोती
31/09/19
मदद/सहायता

लघुकथा 
(सच्ची घटना)
****
कुछ वर्ष पहले सुनील अपने दो तीन साथियों के साथ कहीं बाहर जा रहे थे । उन लोगो ने रास्ते मे पांच छह वर्ष का एक बच्चा गुमसुम हालत मे देखा । गाड़ी रोक उसके पास जा के पूछा ..
तुम कौन हो बेटा ,और यहाँ क्या कर रहे हो?
बच्चे ने रोते हुए बताया कि मेरा नाम राजन है ,मेरी माँ नही है ,और पिता जी को कुष्ठ रोग हुआ है । आस पास वालों ने उन्हें कुष्ठ आश्रम मे भर्ती करा दिया है।
छूत के मारे मुझे किसी ने सहारा नही दिया , मेरा अब कोई ठिकाना नही है कह कर वो रोने लगा ।..
सुनील अपने साथियों से विचार विमर्श करने लगे ,
क्या किया जाए ,हम लोग बच्चे को ऐसे छोड़ भी नही सकते..
सुनील अपने साथ राजन को ले आये ।
समाज सेवा और इंसानियत के एक नए अध्याय का आगाज हो चुका था।
समय के साथ सुनील और उनके साथियों ने ये बीड़ा उठाया, कुष्ठ आश्रम जा कर और ऐसे बच्चों का पता लगाया जिनके माता या पिता आश्रम मे थे और बच्चों को छूत के डर से समाज ने अनाथ कर दिया था ।
धीरे धीरे समाज के सहयोग से ऐसे बच्चों के रहने और शिक्षा का प्रबंध किया ।
सुनील और साथियों के सहयोग से किया छोटे से कार्य का "आरंभ "अब पूर्ण आकार ले चुका है ।
कई बच्चे आत्मनिर्भर बन समाज की मुख्यधारा मे आ चुके है।
ये सहायता कई लोगों के जीवन मे उजाला भर चुकी है।
समाज में ऐसी सहायता आज की आवश्यकता है।

अनिता सुधीर श्रीवास्तव

31/08/2019
"मदद/सहायता"

1
राष्ट्र मदद
प्रत्यक्ष या परोक्ष
मूल कर्तव्य
2
निफ्टी नर्तक
आर्थिक सहायक
वृद्धि सूचक
3
बाढ़ पीड़ित
राष्ट्र सहायता
तत्पर सेना
4
इंसानियत
सदैव ही तत्पर
हेतु मदद
5
दीन,लाचार
सहायता आहार
रुके न हाथ

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।।

नमन् भावों के मोती
31अगस्त19
विषय:मदद/सहायता

विधा:दोहा

प्रभु सहायता खुद करें,
जो करता विश्वास।
भक्त परीक्षा प्रभु करें,
जीवन में भर आश।(1)

सरल मृदु वाणी बोलिए,
सुंदर उचित उपाय।
जीवन में रस घोलिये,
मदद करो असहाय।(2)

मनीष कुमार श्रीवास्तव
स्वरचित
रायबरेली

 सादर नमन
मदद/ सहायता
ना कर उम्मीद किसी से,

तुझे खुद का मददगार बनना होगा,
काँटो से भरा है रस्ता तेरा,
रख हौंसला तुझे आगे बढ़ना होगा,
काँटों के संग रहकर भी,
फूलों की तरह महकना होगा,
अंहकार का बोझ उतार सिर से,
नम्रता से झुकना होगा,
मदद की बैसाखी को तोड़कर,
अकेले ही बढ़ना होगा,
जल कर मेहनत की भट्टी में,
कुंदन की तरह चमकना होगा,
भूल कर गमों को अपने,
लबों को मुस्कुराना होगा,
चढ़कर सफलता के पायदान,
शिखर कामयाबी का पाना होगा।
***
स्वरचित-रेखा रविदत्त
31/8/19
शनिवार
Rani Kumari नमन मंच 

भावों के मोती
दिनांक- 31-08-2019
विषय- मदद/सहायता
विधा- कविता

लगा फेरे मंदिरों के,
ना ढूंढूं मैं भगवान,
कर मदद दीन -हीन, लाचारों की
बन जाऊं पहले मैं इंसान।

प्यासे की थोड़ी प्यास बुझा दूं,
भूखे को दो रोटी खिला दूं,
हाथ पकड़कर बूढ़ी अम्मा की,
जरा सड़क पार करा दूं।

अशिक्षा तांडव करती ,
झुग्गी-झोपड़ी वाली बस्ती में,
लुटते-पिटते बचपन को संवारु,
बिठा कर शिक्षा की कश्ती में।

हे ईश! बस इतनी शक्ति देना हमें,
मदद कर सकूं मैं उनकी,
नव-उमंग भर सकूं उनमें,
जीवन-आस छूटी जिनकी।

स्वरचित
@सर्वाधिकार_सुरक्षित
रानी कुमारी
पूर्णियां (बिहार)


भावों के मोती दिनांक 31/8/19
मदद / सहायता

रोको मत हाथ
जब हो कोई 
मुसीबत में 
बढ़ाओ हाथ
मदद के लिए 

बुरा समय 
कह कर 
आता नहीँ 
जीवन में 
कब किसको 
कहाँ पड़ जाऐ
जरूरत 
सहायता की 
रहो तैयार 
हरदम

मौला
रखो खुले
दिल के 
दरवाजे
हरदम
फकीर
आ सके 
मांगने 
मदद 
द्वारे द्वारे 

करो मत 
घमंड 
दौलत का
ऐ इन्सान 
पहाड़ों को भी
दरकते देखा है 
हमने

न कुछ 
जाऐगा साथ
नेकी मदद ही
रह जाऐगी
पहचान तेरी

करो ईश से
बस यहीं 
प्रार्थना 
जब रहे 
ये जीवन
देते रहे 
मदद 
सभी को

स्वलिखित 
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

भावों के मोती
विषय=मदद/सहायता
===============
अकेले आए,अकेले जाएंगे
सब-कुछ पीछे छोड़ जाएंगे
आओ मिलकर बांट लें हम
सुख-दुख आधा-आधा
मदद करें एक-दूसरे की
करके हम सब यह वादा
क्या मिला है अबतक
अपने लिए ही जीकर
मुस्कान किसी के चेहरे पर
सजा सके तो अच्छा हो
दिखावे की सेवा न करो
जो करो दिल से करो
दीन-दुखियों की सहायता
और बुजुर्गो को खुश रखना
सबसे बड़ी सीढ़ी है यह
हमारे सुखद भविष्य की
यह सीख दे नयी पीढ़ी को
जो अनुसरण हमारा करते
यह संस्कार ही हैं हमारे
उनके दिलो-दिमाग में उपजते
***अनुराधा चौहान***स्वरचित 


नमन भावों के मोती
आज का विषय, मदद, सहायता
दिन, शनिवार
दिनांक, 31.8,2019.

मदद बिना चलता नहीं,
ये सारा संसार ।
आपस के सहयोग से ,
बढ़ती शक्ति अपार ।।

घर में सब मिलकर करें,
सभी आपसी काम ।
इक दूजे की मदद से ,
बनते काम तमाम ।।

सहायता सबकी करें ,
यही मनुज पहचान ।
केवल अपने काम तो ,
करते हैं शैतान ।।

निर्बल दीन दुखी सभी ,
होते हैं लाचार ।
मदद अगर हम कर सकें ,
खुशियाँ बढ़ें अपार ।। 

मानवता विस्तार में ,
सहायता का हाथ ।
हमको हरदम मिल सके,
इक दूजे का साथ ।। 

स्वरचित, मीना शर्मा, मध्यप्रदेश


नमन सम्मानित मंच 
31/08/2019
मदद/सहायता 
***************
संसार है साहब!
यह वह कुआँ है
जिससे 
वैसी ही आवाज आती है
जैसा हम बोलते हैं 
लोग बहुत हैं ऐसे
जो मानव को कर्मों से तौलते हैं 
करते हैं लोग
इज्जत उसी की
जो किसी की मदद करते हैं 
जो भागते हैं दूर 
सहायता करने से
वे भी हो असहाय मरते हैं।
**********
सुरेश मंडल 
पूर्णियाँ,बिहार 


🌹💮🌹💮🌹💮🌹
विषय:-मदद/सहायता
विधा:-नज्म

मददगार रही दुआएँ उसकी ।
मिले जख्म में न दरार आया।।

ले डूबी मोहब्बत उसकी ।
खिजाओं मे न बहार आया ।।

ऐसा मौका कहाँ बार बार आया,
तेरे काँधे पर मुझे करार आया ।।

बनाया जिन्दगी जिसे हमने ।
जरूरत पड़ी नजर फरार आया

नफरत भी न हो सकी उससे
मोहब्बत में ऐसा मजार आया

जिन्दगी था वो रहेगा हर सूं,
कहता मेरा दिल खुमार आया

#स्वरचित 
🌷नीलम शर्मा #नीलू🌷

"नमन भावों के मोती"
विषय :- मदद/सहायता,
दिनांक :- 31/8/19.
विधा :- "दोहा"
1.
बदला अब युग का चलन,सब स्वार्थ वशीभूत।
बे - स्वार्थ करे मदद जो, वो ईश्वर का दूत।
2.
पीड़ित जन की कर चलो, सहायता भरपूर।
चहुं-दिश जाये फैलता, यश तेरे का नूर।
3.
मदद करें जे दीन की, ते बड़भागी लोग। 
रहें सदा आनन्द में, हरि ते हो संयोग।
4.
कर के मदद गरीब की,नर-तन चन्दन होय।
फलती दुआ गरीब की, माटी कुन्दन होय।
5.
द्वेष कपट छल है भरा, लोभ मोह मद साथ।
कैसे इस माहौल में, बढें मदद को हाथ।


दिनांक ३१/८/२०१९
शीर्षक_मदद/सहायता
हर एक को चाहिए,बढ़ाये मदद को हाथ
इससे होता आत्म संतोष,सुख देता अपार।
कंचन महल हो आपका,मदद को नही तैयार,
कल आपका कैसा हो? नही जानते इंसान।

दीन दुखियों का मदद करना है उत्तम संस्कार
निराश मन में आस जगा दे,वे सबसे बड़ा मददगार।
ख्याति के लिए न मदद करें,ये नही सही काम।
जरूरतमंद को मदद करना है, आराधना समान।

बुढ़ापा में भावुक हो जाता है हर एक इंसान
प्रतिदिन उनसे बातें करें, यही मदद साकार।
हर एक को चाहिए,बढाये मदद को हाथ
इस कलिकाल में यही प्रशंसनीय काम।
स्वरचित आरती श्रीवास्तव।




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"स्वतंत्र लेखन "17नवम्बर 2019

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