Monday, November 4

"महानायक"18अक्टुबर 2019

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ब्लॉग संख्या :-540
मंच को सादर नमन
दिनांक 18 10 2019
विषय महानायक

विधा पद (छंद मुक्त रचना)

गाँव का हीरो

किसान
मजदूर
गवाले
बच्चे
बूढ़े
औरतें
यहाँ तक कि ...
पड़ोसी गाँव का भी
तांता लगा हुआ था
सभी की नजर
सड़क पर गड़ी हुई थी
हाथों में पुष्प मालाएँ वह पुष्प लिये
जोर जोर से
भारत माता की जय
वंदे मातरम के नारे लगा रहे थे

आज बड़े जोश की लहर
दौड़ रही थी गाँव में
मैंने एक बुजुर्ग से पूछा
बाबा !कोई नेता आ रहा है क्या
बोला बेटा! नेता नहीं
हीरो आ रहा है हीरो ....
एक सामान्य से
पिछड़े गाँव में हीरो ....
कुछ समझ में नहीं आ रहा था
कौन हीरो आ सकता है भला
चुनाव भी नहीं हैं
तब तक तो गाड़ीअड्डे पर
पहुँच चुकी थी

मैंने बचपन से आज तक
गाँव में बहुत बड़े बड़े
समारोह
मेले
उत्सव देखे हैं पर ....
इतनी भीड़ पहली बार देख रहा था जिसमें ....
पूरा गाँव आज एक साथ खड़ा था
सिर से सिर जुड़ा हुआ था
जोश के सैलाब का उफ़ान तो
अवर्णनीय था
किसी ने ठीक ही कहा है कि...
सरहद का गाँवों से
बहुत गहरा रिश्ता है ..
आज देख भी लिया

नफे सिंह योगी मालड़ा ©
स्वरचित कविता

18/10/2019
"महानायक"

1
हिंद की सेना
राष्ट्र महानायक~
शांति दायक
2
सीमा प्रहरी~
कर्तव्य परायण
महानायक
3
आदर्शवादी
पिता महानायक~
तप्त जीवन
4
महानायक
अभिनय दुनिया~
सिर्फ कहानी
5
महानायक~
पराक्रमी, साहसी
सत्य पुजारी

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।।

दिनांक-18/10/2019
विषय -महानायक


सौ में से निन्यानवे हम मे से ही बेईमान।
फिर भी मेरा देश महान।

संसद पंच सदस्य विधायक।
जो जो भी जितने हैं लायक।
कसर नहीं कोई छोड़ रहा कहीं।
लूटैं जनता बन "महानायक"
पहुंचैं झगड़ा करै यकायक।
एक दूजे से कह संम्प्रदायक।
झूठी कसम देश की खाते गाकर जन गण मन अधिनायक।
पिला पिला के थैली मैली करैं जनता को प्रधान।
फिर भी मेरा देश महान।

कवि महावीर सिकरवार
आगरा (उ.प्र.)

विषय महा नायक
विधा लघुकाव्य

18 अक्टूबर 2019,शुक्रवार

जन हिताय जन सुखाय हो
जिसका जीवन देश समर्पित।
जन जन की आँखों का तारा
देश हेतु महानायक अर्पित।

धीर वीर गम्भीर गुणी हो
जन नेतृत्व लोकप्रिय हो।
जग का प्यारा राज दुलारा
दया स्नेह करुण हिय हो।

वाक चातुर्य रण कौशल
शत्रु जिसके नाम काँपते।
महानायक कहाता जग
जो भविष्य पूर्व भाँपले।

महानायक धरती पर बनते
गले लगाकर विपदा हरते।
खुद हेतु कभी नहीं जीते हैं
सिर भारती ऊंचा ही करते।

स्वरचित, मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।


शीर्षक-- महानायक
प्रथम प्रस्तुति


दर्द को गाते गाते ,
फ़कीर से अमीर हो गया ।
ग़ालिब अमर है ,
कौन कहता है
कि ग़ालिब सो गया ।
नायक तो नायक
महानायक का
मुकाम हासिल किया ।
दर्द को जिया जिन्दगी
का हर जहर पिया ।
शिकायतें न रखीं
खुदा से खुद को
जल्द जान लिया ।
कम उम्र में शायरी
के सफर पर चला ।
हर पल को वह जिया
और हर पल में ढला ।
नमन है उस उर्दू के
महानायक को ।
शायरों के उस
सहायक को ।
है प्रेरणा की मिसाल
भरते हम उससे दम ।
नमन करते हैं हम
उन्हे सदा 'शिवम' ।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 18/1/0219


दिनांक-18/10/2029
विषय-महानायक


लिख रहा हूं सहस्राब्दी के
महानायक का अंजाम....
गरल मिले हलाहल
बिन कोलाहल के है पीना।
प्यासा सागर सिसकती नदियां
युग बीता ,बीती सदियां।।
जन्म लिया हमने उस युग में
जब जब संकट की घड़ी आई।।
ऊंचे पर्वत गहरी खाई
महानायक ने ली अंगड़ाई।।
सत्ता में परिवर्तन आई
महानायक ने जब ली जमुहाई।।
अंगारों से जूझते महानायक
कभी ना उनकी हिम्मत घबराई ।।
हर युग में रहा है महानायक
क्रांति ज्वाला के परिवर्तन की दाई।
प्रताड़ित यातना,कसकती बेदना
तब तब महानायक ने चेतना जगाई

स्वरचित
मौलिक रचना
सत्यप्रकाश प्रयागराज

दिनांक :- 18/10/19
विषय :- महानायक


सच्चाई की राह पर चले ,
बने हरदम सब का सहायक,,
वो ही कहलाता इस जग में
सब से बड़ा महानायक ,

कभी किसी का ह्रदय न तोड़े,
बने सब के प्रेम के लायक,
वो ही कहलाता इस जग में,,
सब से बड़ा महानायक,

ये जीवन गीत सुनहरा ,
बने जो सुन्दर इसका गायक,
वो ही कहलाता इस जग में
सब से बड़ा महानायक

ये दुनिया एक रंगमच हैं
बने जो सफल इसका नायक,
वो ही कहलाता इस जग में
सबसे बड़ा महानायक

हम तो कटपुटली सारे ,
वो प्रभु सब के महानायक।

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित


तिथि _19/10/2019/
विषय _ महानायक

विधा ___काव्य

जगतपिता जननायक सबके,
मिलते खलनायक बहुत यहां।
हैं जगदातमा प्रभु जगदीश्वर,
सचमुच महानायक कौन यहां।

करें कर्म कुछ अच्छे हम भी
केवल पहले मानव बन लें।
हैं श्री राम आदर्श जगत के
हमभी पदचिन्हों पर चल लें।

पहले स्वयंभू नायक बन लें।
अपने मन को काबू कर लें।
महानायक की बातकरें फिर
अपने घर के नायक बन लें।

जबतक कलुषित भाव हमारे
बताऐं महानायक बन सकते।
हैं विचार अधिनायकतावादी
यूँ क्या महामानव बन सकते।

स्वरचित
इंजी शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना मध्य प्रदेश
जय जय श्री राम रामजी

1भा 'महानायक' -काव्य
18/10/2019/ शुक्रवार
18/10/2019
विषय-महानायक
🌷
💐🌷💐🌷💐🌷

नायक या महानायक क्या सिर्फ
फिल्मों या जगत में ही होते हैं
जो ऊंची धनराशि कमाकर
पर्दे पर सिर्फ अभिनय या
मैदान फतह कर लेते हैं ??

हमने तो ज़मीनी दुनियां में
न जाने कितने महानायक देखे हैं
आइए उनसे
आपका परिचय करा देते है

बर्फीली रातों में सीमा पर
डटे प्रहरी सबसे बड़े महानायक हैं
जिनकी सजगता,जिनके त्याग से
हम घरों में चैन की नींद सोते हैं

महानायक हमारे देश का
अन्नदाता किसान भी है
जिसमें परिश्रम और ईमानदारी
और खुद्दारी का ईमान भी है

बच्चों के लिये उसका महानायक
उसका पिता होता है
जो संतान के हित में
निज सुख चैन तक खोता है

मगर आजकल तो गढ़ी जा रहीं हैं
उनके साहस,शौर्य की पराक्रम-गाथाएँ
जो सरेआम भोली जनता को
लूटते ही चले जाएं

कितनी सफ़ाई से छिपा रहे हैं वे
मुखौटे के पीछे वो असली चेहरा
उसकी महानता और उदारता का
रचा जाता है पाठ सुनहरा

उनको महानायक का दर्जा
चालाकी से दे दिया जाता है
जो असली हकदार हैं यहाँ
उन्हें उपेक्षित कर दिया जाता है ।।

**वंदना सोलंकी**©स्वरचित®

18-10-19
शीर्षक -- महानायक

०००००००००००००

किसे कहें हम
महानायक
सजीली कद-काठी वाले को
नहीं,
धनवान सेठ को
नहीं
बड़े नेता को
नहीं
लच्छेदार
भाषण देने वाले को
नहीं

महानायक
वह है जो कि
दीन-दुखियों के
जीवन में
खुशियाँ बिखेर दे
राष्ट का गौरव बढ़ाए
धर्म धरा से
पापियों का नाश कर दे
ज्ञानांधकार को मिटा दे
धरा को स्वर्ग बना दे !!!
~~~~~~~~~
मुरारि पचलंगिया

18/10/2019
"महानायक"

################
महानायक के रुप में....
मैंनें पिता को देखा......
हमारी खातिर सुबह से शाम
मेहनत करते देखा...........
पसीनें से तर-बतर देखा.....
खुद धूप में तपकर...........
हमें छाया देते देखा...........
हमारे लिए टॉफी,खिलौने की
दुकान बनते देखा........
हमारी जिद को पूरा करने के लिए
एक रईस को देखा.....
हमारी नादानियों को हँसकर
झेलते देखा.............
अपनी आँखों से साक्षात ईश्वर को देखा............
महानायक के रुप में......
मैंनें पिता को देखा.........।।

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।।

दि.18/10/19.
विषयःमहानायक

*
महानायक राष्ट्र का जो , राष्ट्र का गौरव बढ़ाये।
प्राण-पण से समर्पण के,चाव का उत्सव सजाये।
ईमानदारी ,धैर्य, साहस, शौर्य का सूरज जगाये।
छल - प्रवंचन,धूर्तता की धुंध-रजअंधड़ मिटाये।

वुभुक्षाकुल नग्नता हँस,असन-वसन निवास पाये।
विवश - हाथों को नये रोजगार दे ,सपने सजाये।
श्रमिक,कृषकों को मिले सम्मान,श्रम नित फले फूले।
गले मिल सम-भाव से सब रहें, झूलें सौख्य- झूले।

18/10 /2019
बिषय,, महानायक,,

खेती करता किसान
सरहद पर खड़ा जवान
इन्हें क्या दिन क्या रात
कड़ाके की ठंड या बरसात
इन्हें क्या धूप क्या छांव
एक प्रहरी एक खड़ा गांव
दोनों के नहीं थकते पांव
दोनों के ही हाथों में देश की नाव
दोनों में ही धैर्य दोनों में त्याग
धरती माँ के चरणों में दोनों का अनुराग
एक है रक्षक तो दूजा पालनहार
इन्हीं के नेतृत्व में देश का आधार
यही हमारे महानायक करें हृदय से सम्मान
बोलो जय जवान जय किसान
स्वरचित,, सुषमा ब्यौहार
विषय -महानायक
दिनांक 18-10- 2019
जिंदगी के हर पल को ,मुस्कुरा कर जीना है ।
अमृत मिले या जहर, खामोश रह पीना है।।

बन महानायक, इतिहास फिर तुम्हें रचना है।
अमिताभ को आदर्श बना, जिंदादिल रहना है।।

बहुत गवाँया समय तुमने, अब कुछ करना है।
शेष समय थोड़ा बचा, मार्ग प्रशस्त करना है।।

होती रहेगी उथल-पुथल, मंथन कर अमृत पीना है।
सार ना निकला जीवन का, तो बेकार जीना है।।

जी रहे हैं डर डर कर, यह भी कोई जीना है।
स्वाभिमान से जीना सीखो, वरना बेहतर मरना है।।

करो श्रेष्ठ कार्य, महानायक तुमको बनना है।
देशहित सर्वस्व समर्पण, अब तुमको करना है।।

देश के इतिहास में, एक पन्ना और जोड़ना है।
बेटी हो तो वीणा जैसी,वरना ना हो कहना है ।।

वीणा वैष्णव
कांकरोली

विषय, महानायक
1 8,10,2019,

शुक्रवार ,

रहती एक रंगमंच सी दुनियाँ सारी ,
यहाँ पे कोई खिलाड़ी कोई अनाड़ी ।

संसार में हुआ हो जो परोपकारी,
परहित में लुटा दे जो जिंदगानी।

जो सत्य अहिंसा का हो पथगामी,
धर्म नीति का रहता जो अनुगामी ।

जिसकी सद् चरित्रता होती पूँजी,
बन जाये चलन जिसका प्रेरणादायी ।

लगती चंदन जिसके चरणों की माटी ,
शख्सियत ऐसी ही महानायक कहलाती ।

विकसित दुनियाँ इनसे ही होती ,
इनके हाथों में सुरक्षित मानवीय ज्योति ।

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश 

18-10-2019
(एक पहले की रचना)


महानायक कर्ण

पुछे लोग जनक, जाति औ वर्ण
बंद होंठ, हिय धधक लिए कर्ण
छल, छद्म सहे अनीति अन्याय
कर्ण, शोषित, वंचित का पर्याय
भाग्य बैरी उसका या भगवान
पग-पग प्रताड़न और अपमान
मिल जुल जिसने भी शाप दिये
क्या उसने कमतर ये पाप किए
निष्ठा का प्रतीक, धनुर्धर धीर
अपितु न विचलित वो दानवीर
यद्यपि दुर्योधन दुर्भाव से भरा
मैत्री मिलन कर बनाया मोहरा
अंग का ताज देकर किया मान
हुआ उऋण वो भी तजकर प्राण
मित्रता अक्षुण्ण कोई छल नहीं
परिणामभिज्ञ बली विकल नहीं
स्वाभिमान, संबल का परिचायक
कर्ण, महाभारत का महानायक
-©नवल किशोर सिंह
स्वरचित

18/10/19
महानायक

***
आज के परिपेक्ष्य में

अज्ञान का अंधकार जब छाया था जग में
ज्ञान का प्रकाश फैलाया चौबीसवें तीर्थंकर ने ।
जन्म पूर्व माँ त्रिशला को स्वप्न में आभास हुआ
राजा सिद्धार्थ ने स्वपनों को यथा परिभाष किया।
साधना ,तप ,अहिंसा से, सत्य से साक्षात्कार किया
महापुरुष महावीर ने जनजीवन को आधार दिया ।
जैन धर्म को पंचशील का सिद्धांत बतलाया
सत्य,अहिंसा,अपरिग्रह,अस्तेय, ब्रह्मचर्य सिखाया ।
बारह महत्वपूर्ण वचनों से था भिज्ञ करवाया
'जियो और जीने दो' का अर्थ था समझाया ।
शत्रु कहीं बाहर नही ,भीतर ही विराजमान है
क्रोध ,घृणा ,लोभ अहम से लड़ना सिखाया ।
स्वयं को जीतना ही श्रेयस्कर है ,समझाया
क्षमा और प्रेम के महत्व का पाठ पढ़ाया ।
आत्मा सर्वज्ञ और आनंद पूर्ण है ,
शांति और आत्मनियंत्रण ही महत्वपूर्ण है ।
अलग कहीं न पाओगे प्रभु के अस्तित्व को
सही दिशा में प्रयास कर पा जाओ देवत्व को ।
शेर और गाय अब एक ही घाट पानी पियें
आओ मानवता का दीप हम प्रज्वलित करें।
आज के समय की भी यही पुकार है
तीर्थंकर के संदेशों को आत्मसात कर जीवन सफल करें।
उनके वचनों का पालन करने का व्रत लेते है
समाज सुधारक महानायक को शत शत नमन करते हैं ।

स्वरचित
अनिता सुधीर


कर्ण महानायक या ...

महाभारत युद्ध के पहले कुंती पांडवों की रक्षा का वचन लेने जब कर्ण के पास जातीं हैं तो वह कर्ण की सच्चाई उसे बता देती हैं । ये जानने के पश्चात कर्ण की स्थिति को ,कर्ण द्वारा कुंती से पूछे जाने वाले प्रश्नों के माध्यम से व्यक्त किया है...
***
सेवा से तुम्हारी प्रसन्न हो
ऋषि ने तुम्हें वरदान दिया
करो जिस देव की आराधना
उसकी संतान का उपहार दिया।
अज्ञानता थी तुम्हारी
तुमने परीक्षण कर डाला
सूर्य पुत्र मैं, गोद में तेरी,
तुमने गंगा में बहा डाला ।
इतनी विवश हो गयी तुम
क्षण भर भी सोचा नहीं,
अपने मान का ध्यान रहा ,
पर मेरा नाम मिटा डाला ।
कवच कुंडल पहना कर
रक्षा का कर्तव्य निभाया
सारथी दंपति ने पाला पोस
मात पिता का फर्ज निभाया ।
सूर्य पुत्र बन जन्मा मैं
सूत पुत्र पहचान बनी
ये गलती रही तुम्हारी , मैंने
जीवन भर विषपान किया।
कौन्तेय से राधेय बना मैं
क्या तुम्हें न ये बैचैन किया!
धमनियों में रक्त क्षत्रिय का
तो भाता कैसे रथ चलाना।
आचार्य द्रोण का तिरस्कार सहा
तो धनुष सीखना था ठाना।
पग पग पर अपमान सहा
क्या तुमको इसका भान रहा !
दीक्षा तो मुझे लेनी थी
झूठ पर मैंने नींव रखी ,
स्वयं को ब्राह्मण बता ,मैं
परशुराम का शिष्य बना ।
बालमन ने कितने आघात सहे
क्या तुमने भी ये वार सहा !
था मैं पांडवों मे जयेष्ठ
हर कला में उनसे श्रेष्ठ,
होता मैं हस्तिनापुर नरेश
क्या मुझे उचित अधिकार मिला
क्या तुम्हें अपराध बोध हुआ!
जब भी चाहा भला किसी का
शापित वचनों का दंश सहा
गुरु और धरती के शाप ने
शस्त्र विहीन ,रथ विहीन किया।
भरी सभा द्रौपदी ने
सूत पुत्र कह अपमान किया
मत्स्य आँख का भेदन कर
अर्जुन ने स्वयंवर जीत लिया ।
मैंने जो अपमान का घूंट पिया
क्या तुमने कभी विचार किया !
कठिन समय ,जब कोई न था
दुर्योधन ने मुझे मित्र कहा
अंग देश का राजा बन
अर्जुन से द्वंद युद्ध किया ।
मित्रता का धर्म निभाया
दुर्योधन जब भी गलत करे ,
कुटिलता छोड़ कर , उसको
कौशल से लड़ना बतलाया ।
दानवीर नाम सार्थक किया
इंद्र को कवच कुंडल दान दिया
तुमने भी तो पाँच पुत्रों
का जीवन मुझसे माँग लिया
क्या इसने तुम्हें व्यथित किया !
आज ,जब अपनी पहचान जान गया
माँ ,मित्र का धर्म निभाना होगा
मैंने अधर्म का साथ दिया ,
कलंक सदियों तक सहना होगा
अब तक जो मैंने पीड़ा सही
उसका क्या भान हुआ तुमको !
मेरी मृत्यु तक तुम अब
पहचान छुपा मेरी रखना
अपने भाइयों से लड़ने का
अपराध, मुझे क्षमा करना ।
जीवन भर जलता रहा आग में
चरित्र अवश्य मेरा बता देना
खलनायक क्यों बना मैं
माँ तुम जग को बतला देना ।

स्वरचित
अनिता सुधीर

नमन भावों के मोती
शीर्षक-- महानायक

द्वितीय प्रस्तुति

महानायक की कमी
नही इस देश में ।
मगर कुछ नकली
भी छुपे कई वेष में ।
कुछ बाबाओं के रूप में
कुछ नेताओं के रूप में ।
उजागर होते रहते हैं ।
वक्त के पहिये
भला कब रूकते हैं ।
कुछ खा गये देश
समाज को
कुछ बचा गये ।
नाम एक दिन सबके
सामने आ गये।
किसी का मकबरा
तो किसी का किला है ।
हर जगह हैं ये हज़रात
कोइ न बचा कस्बा जिला है ।
हमें नायक ,महानायक
और खलनायक की
पहचान करना है ।
इतनी बुद्धि ज्ञान जरूर
ज़िहन में भरना है ।
वरना हम ठगते रहे
और ठगते रहेंगे ।
महानायक की
जगह खलनायक
पुजते रहे पुजते रहेंगे ।
आइए मन की आँखों
में चश्मा लगाइए ।
खलनायकों का नही
'शिवम' महानायकों
का गुण गाइए ।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 18/10/2019

18/10/2019

शीर्षक महानायक

जो छुधा पूर्ति करता उर की
मिट्टी से अन्न उगाता है
धरती ही जिसकी माता है
मेहनत ही जिसको भाता है

है महानायक जो इस जग का
उस बिन कुछ भी न भाता है
मेहनत ही जिसका मूल मंत्र
ना समझ जग जिसका कोई तंत्र

तन पर कपड़े है फटे लटे
पसीने से जो नाहता है
गर्मी सर्दी या हो बरसात
दिन रात लगा जो रहता है

मेहनत ही जिसकी पूंजी है
संयम जो बांधे रखता है
वक्त मार की कभी ऐसी पड़ती
वो भूखा ही सो जाता है

सेहत देता दूजो को वो
ख़ुद जर्जर काया सा होता है
कर्जे में डूबा अन्न दाता
फाँसी को गले लगता है
स्वरचित
मीना तिवारी

दिनांक १८/१०/२०१९
शीर्षक"महानायक"

समाज को जो सही दिशा दिखाये
वे होते हैं महानायक।
कर्त्तव्य पर पर जो डट कर रहे
वही होते हैं महानायक।
जो होते हैं धर्म के रखवाले
वे होते हैं महानायक।
भयाकुल को जो भयमुक्त कर दे
वे होते हैं महानायक।
ताज का मोह तज कर
दीनन की जो सेवा करें
वे होते हैं महानायक।
सतत आवाहन करें जो
कर्मठता को,
वे होते हैं महानायक।
निर्मल मन वा सुन्दर कर्म हो ,
वे होते हैं महानायक।
बुराई का अंत कर,
स्वस्थ समाज का जो निर्माण करें,
वे होते हैं महानायक।
सच्चे मन से जो देश की पुकार सुने
वे होते हैं महानायक।
भ्रष्टाचार जो दूर करें,
वे होते हैं महानायक।
स्वरचित आरती श्रीवास्तव।

विषय-महानायक

अपना जीवन कर समर्पित
करता रहा परमार्थ नित नित
मुश्किलों से जो लड़ा है
बन महानायक खड़ा है।

ज्योति जलती त्याग की है
भावना अनुराग की है।
दुःख में आँसू सँवारे
कष्ट में बनकर सहारे।
हाथ कन्धे पर रखे जो
साथ मे हर पल रहा है।
बन महानायक खड़ा है।

युद्ध हो या शांति जग में
वो रहा आगे ही मग में
त्याग मंत्र है जीवन का
है सुदृढ़ विटप वो कानन का
राह में चाहे हो कांटे
पेअर न पीछे धरा है
बन महानायक खड़ा है।

स्वार्थ से रहता परे है
कष्ट जो पल में हरे है।
ईश का अवतार कहते
लोग नैनो में है गहते।
मानव मूल्यों पर सदा से
हर कदम जिसका बढ़ा है।
बन महानायक खड़ा है।

प्रतिमान स्थापित किये नित
है अखिल जग ये अलौकिक
शीश झुकता है सभी का
कीर्ति गाते सब उसी का।
युगों युगों तक आदर्श बने जो
नाम जग लेता रहा है।
बन महानायक खड़ा है।

स्वरचित
गीता गुप्ता 'मन'

18अक्टूवर19शुक्रवार
विषय-महानायक

विधा-हाइकु
💐💐💐💐💐💐
जनम लेता

एक महानायक

हर युग में👌
💐💐💐💐💐💐
इस सदी का

एक महानायक

बताओ कौन👍
💐💐💐💐💐💐
हर घर में

एक महानायक

उसका पिता💐
🎂🎂🎂🎂🎂🎂
श्रीराम साहू अकेला
दिनांक:18/10/2019
विषय: महानायक

विधा: काव्य

बॉलीवुड के महानायक ,कहलाते बच्चन अमिताभ
कवि हरिवंश राय बच्चन के पुत्र, अभिनेता उत्कर्ष ।

उनके जीवन मे रही कठिनाइयां अनेकानेक
कभी पैसे की तंगी तो कभी काम मे फेल।

कई बार असफल हो कर भी हार नहीं मानी
ठान लिया जो नायक बनना बन गये महानायक ।

अस्सी दशक की घटना है जब कुली पिक्चर बनी थी
पिक्चर की शूटिंग मे लग गई थी गहरी चोट ।

कई महीने थे महानायक अचेतना के हिल मे
पूरा भारत अश्रुपूरित था,करता आराधना दिनरात।

प्रयागराज के रहने वाले उत्तर प्रदेश की शान
कायस्थों का मान बढाया,कर गौरव पूर्ण कार्य ।

थोडे दिन पहले था उनका सत्तरवा जन्म दिन
मेहनत लगन व प्रतिभा देख प्ररित होते सबलोग।

नियमबद्ध शैली,सात्विक जीवन,सकारात्मकता
कर देती उनको सबसे भिन्न, सबके है वह आदर्श ।

आज फिर से सुनने मे आया स्वास्थ्य विकार हुआ है
कर छोड प्रार्थना करू उनके जल्द स्वस्थ जीवन की।

स्वरचित
नीलम श्रीवास्तव

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"जिम्मेदार"18नवम्बर 2019

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