Monday, November 4

"वरदान"23अक्टुबर 2019

ब्लॉग की रचनाएँ सर्वाधिकार सुरक्षित हैं बिना लेखक की स्वीकृति के रचना को कहीं भी साझा नहीं करें 
ब्लॉग संख्या :-544
23अक्टूवर19बुधवार
विषय-वरदान

विधा-हाइकु
💐💐💐💐💐💐
हंसवाहिनी
वीणावादिनी मातु
दो वरदान👌
💐💐💐💐💐💐
गणनायक
तेजोमय कर दो
दो वरदान👍
💐💐💐💐💐💐
हे जनार्दन
जनता की जय हो
दो वरदान💐
💐💐💐💐💐💐
हे विनायक
दीजिये वरदान
बनूँ लायक☺️
💐💐💐💐💐💐
ज्ञान दायिनी
ज्ञान भर दीजिये
वरदान दें🎂
💐💐💐💐💐💐
श्रीराम साहू अकेला

शीर्षक-- वरदान
विधा--ग़ज़ल
मात्रा भार --19

प्रथम प्रयास

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

पता न लगे कब क्या वरदान बने
रहो हरदम अपने काम में ठने ।।

दुनिया के दस्तूर बड़े ही विकट
फूल में सुगंध हम शूल को गुने ।।

हो वक्त जब टेड़ा अपने रिसाने
हो वक्त जब खुशनुमा वो स्वतः मने ।।

वरदान बनी वो उनकी जुदाई
रात रात गीत लिखे नग्मे सुने ।।

दर्द का दरिया हम पार कर आय
सुन्दर सपने सदा रहे हम बुने ।।

सपने अगर न हों तो क्या हो 'शिवम'
वरदान ये हमें पर हम अनमने ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 23/10/2019


दि.23/10/19.
विषयःवरदान

*
बीतेगी रजनी बीतेगी
प्रातर्वरदान मिलेगा ही।
पतझारों से जो खेल सका
रसमय मधुमास खिलेगा ही।

अभिशप्त अहल्या तपोपूत
रमणी बनकर मुसकाई थी।
केवट, शबरी की निश्छलता
अनुपम उज्ज्वल रँग लाई थी।
-'शितिकंठ'

शीर्षक- वरदान

हे भगवन्! करूं नीत तेरा बंदन
तप बगैर ही वरदान दिया
अपनी असीम कृपा से लाद दिया
तन-मन मेरा महक रहा ज्यूं चंदन।।

रोशन है धरती का कण-कण
तेरे बनाए सुरज चाँद सितारों से।
सजा हुआ है आंचल इसका
तेरे ही वन वृक्ष नदी पहाड़ों से।।

शीतल पवन,सुरभित सुमन
जीने को जरूरी हर वस्तु उपलब्ध।
बिन मांगे ही ये उपहार दिया
झुक गया श्रद्धा से तेरे आगे ये सर।।

स्वरचित- निलम अग्रवाल, खड़कपुर
23/10/2019
"वरदान"

1
माता शारदे
ज्ञान दे वरदान
दूर अज्ञान
2
युगल पक्षी
अमर वरदान
गुफा में मिला
3
जल जीवन
प्रकृति वरदान
भू अभिमान
4
नारी सुहाग
सौभाग्य वरदान
है अरमान
5
ये अंतर्जाल
शाप या वरदान
देन विज्ञान

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।।

विषय- वरदान
विधा॒॒॒-काव्य

कुछ भक्ति करें भगवान मिलें।
करें हम प्रार्थना सदज्ञान मिले।
हुई श्रद्धा आस्था कहीं जाग्रत
निश्चिंत शुभाशीष वरदान मिलें।

तुम्हीं ज्ञान चक्षु खोलें भगवन।
मुस्कित हो मनमोहन चितवन।
करते रहें प्रभु हम ईशआराधना
नहीं किसी से हो कभी अनबन।

कितने गुणगान बखान करें हम
तुम सचराचर जगत के स्वामी।
क्यों क्या वरदान मांगें हम तुमसे
जब तुम जनमन के होअंतर्यामी।

प्रभु मोह माया के बंधन काटें,
यह माया महाठगनी जग जानी।
भवबंधन की पाश फंसे हुए सब
क्या कोई तुम्हारा है यहां सानी।

सत्य सार इस दुनिया का गह लें
केवल यही वरदान हमें तुम देना।
भले रिद्धिसिद्धि नहीं पाऐं कभी
बस वरदहस्त रहे इतना वर देना।

स्वरचित
इंजी शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय मगराना गुना मध्य प्रदेश

विषय -वरदान
दिनांक 23- 10- 2019
एक ही वरदान मैं, प्रभु आशीष पाऊंगी ।
प्रभु द्वार सिवा,सर ना कहीं झुकाऊंगी।।

नहीं चाहिए दौलत,स्वाभिमान से जीऊंगी।
संघर्ष पथ अपना,जीवन खुशहाल बनाऊंगी।।

हृदय वेदना, मैं किसी को ना बताऊंगी ।
कर्तव्य पथ हो अग्रसर,मंजिल में पाऊंगी।।

जीवन एक वरदान है,यूं ना इसे गवाऊंगी।
विचारों की आभा से,पहचान बनाऊंगी।।

मीठी मीठी बातों में, मैं ना कभी आऊंगी ।
राह भ्रमित जो करे,दूरी सदा बनाऊंगी।।

बुजुर्ग वरदान,एहसास सबको कराऊंगी।
उन्हीं के आशीष से,मैं सफलता पाऊंगी ।।

वीणा वैष्णव
कांकरोली

23/10/2019
विषय-वरदान
=
================
मानुष जन्म हम सबको मिला
ईश्वर का अनुपम वरदान मिला
मिट्टी की काया में प्राण मिले
मन मस्तिष्क में ज्ञान का भंडार मिला

गुणों की खान बना प्रभु ने
धरती पर हमको भेजा
पशु से इतर मुस्कराने का
मधुर स्वर में गाने का वरदान मिला

मस्तिष्क में भरा है ज्ञान सागर
गागर में समा ले जो सागर
नक्षत्रों की गवेषणा,आविष्कार की
चतुर बुद्धि का अनुपम विज्ञान मिला

नर होकर भी नारायण बन दिखाएं
यदि मानव स्वयं बनना चाहे
योग साथना संयम के बल से
अपूर्व आत्मोत्थान मिला

प्राणों को सुंदर तन रूपी मकान मिला
हे मानव तुमको कैसा अद्भुत ये वरदान मिला ।।

**वंदना सोलंकी**©स्वरचित®
नमन मंच भावों के मोती
23 /10 /2019
बिषय,, वरदान,,

मन के अंधेरे दूर हों हरो हरि सारे संताप
अधम से अधम हूँ भगवन किए बहुत ही मैंने पाप
मूरख हूँ कुटिल अज्ञानी
लिया न नाम कभी तुम्हारा
करती रही हूं मनमानी
अब आई हूँ शरण तुम्हारी
जानों प्रभु व्यथा हमारी
करुणानिधि कहलाते हो तुम
नैया पार लगाते हो तुम
दूर करो मन का अभिमान
ऐसा कुछ देदो वरदान
राग द्वेष से मन हट जाऐ
प्रीति चरणों में लग जाए
स्वरचित,, सुषमा ,ब्यौहार
आज का विषय, वरदान
दिन , बुधवार ,

दिनांक , 23.10, 2019.

खुश किस्मत हैं हम सब सोचो कितने ,
जो मिल गई है हमें देह इंसानों की ।

पशु पक्षी जीव जंतु जो अगर हम होते,
होती फिर हालत क्या अपने जीवन की ।

पढ़ना लिखना नित नई नई खोज करना,
ये सब शक्ति है ईश्वर के दिए वरदान की ।

उसने जब की होगी हम सब की रचना ,
कुछ विशेष कृपा दृष्टि रही होगी उसकी ।

बन सकते हैं हम सहारा किसी निर्बल का ,
ईश्वर ने सौंपी है हमको इतनी तो शक्ति ।

कभी दुरुपयोग न करें हम अपनी काया का ।
हमेशा जगाये रखें अंर्तमन की उज्ज्वल शक्ति ।

स्वरचित , मीना शर्मा ,मध्यप्रदेश,

दिनांक २३/१०/२०१९
शीर्षक-"वरदान"

करो कृपा हे कृपा निधान,
दो ऐसा वरदान।
रामेन्द्र,सुरेश,गणेश,
करो कृपा भगवान।

धन धान्य से भरा हो देश मेरा
अज्ञान अंधकार मिट जाये आज
दुर्जन भी निर्मल हो जाये
दो ऐसा वरदान।

तमोगुण हट जाये मेरा
सद्गुण का हो उत्थान
नमस्कार करूं मैं भास्कर
दो ऐसा वरदान।

एक दीपक हर घर में जले
दीवाली हो सबका खुशहाल
कीर्ति बढ़े देश का अपना
अपना देश बने महान।
स्वरचित आरती श्रीवास्तव।

विषय--वरदान
दि. मंगलवार/23अक्टू

विधा ---दोहा मुक्तक

1.
न्यायालय सुप्रीम ने, दिया खरा वरदान।
जीवित तलाक तीन था,आफत में थी जान।
मुस्लिम महिला विजय श्री,नेक हुआ इंसाफ--
समझें शायद पुरुष भी, नारी का सम्मान।
2.
मधुमक्खी जब श्रम करे, शहद बने वरदान ।
पुष्प पुष्प पर डोलती, गुंजित श्रम का गान।
स्व पोषण भी , जन हित भी, मधुमक्खी का काम--
मधुमक्खी को पालकर, हुए कई धनवान ।

******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र ' हितैषी '
बड़वानी(म.प्र.)451551
23/10/2019
"वरदान"

चोका
##############
सघन वन
शिवभक्त "रावण"
कठोर तप
मनोवांछित फल
शिव से मिला
अहंकार से भरा
बुद्धि विनाश
कुबुद्धि ने आ घेरा
कुपथ चला
सीता हर ले गया
छल-बल से
श्रीराम से शत्रुता
मृत्यु कारण
मिला था वरदान
खंडित वो हो गया।।

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।।
वारः-बुधवार

शीर्षक वरदान

करता हूँ सदा प्रभु आपको नमन ।
दे दीजिये एक छोटा सा अहसान ।।

प्रार्थना है प्रभु दीजिये आप वरदान।
कर दीजिये पूरे मेरे, सारे अरमान।।

प्रभु केवल एक चाय की प्याली दो।
साथ में चाय बनाने भी वाली दो।।

अकारण टांग अड़ाने वाली साली दो।
जो बिल्कुल भी न गुस्से वाली हो।।

साली का भी प्रभु बनवा देना खेल।
मिल जाये उसे डालने वाला नकेल।।

दीजिये मुझको प्रभु इतना तो धन।
काम न रुके कोई चाहे भरे न मन।।

चिन्ताओं को हमारी चढ़ा दो चिता।
कृपा बरसाओ मुझ पर परम पिता।।

एक छोटा सा टप्पर भी मुझको दो।
उस छप्पर को भी तो पड़वा कर दो।।

अन्य कुछ भी उचित समझो मुझे दो।
कमी प्रभु,किसी बात की भी नहीं हो।।

चाहे जब ही पास अपने बुला लीजिये।
पर जोड़े से साथ हमें तलब कीजिये।।

जो कोई अकेला धरा पर रह जायगा।
वह भी रोज बिना मौत के मरा करेगा।।

डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव
“व्यथित हृदय मुरादावादी”
स्वरचित
तिथि 23/10/201,बुधवार
विषय - वरदान

विधा॒॒॒ -गजल
बह्न
2122,2122,212
(मात्रा भार, 19)
एक प्रयास मात्र

मीत कुछ तो अब बनाना चाहिऐ
यार सबको साथ लाना चाहिऐ।

ईश से वरदान यही मिला हमें
हार में भी जीत होना चाहिऐ।

जब मिला है प्यार सबका देखना
गीत खुश हो गुनगुनाना चाहिऐ।

कामनाऐं नित बढाते साथियों
वरदान कबतक दिलाना चाहिऐ।

तन मिला माया मिली भैया हमें
क्यों फिर वरदान सुहाना चाहिऐ।

स्वरचित
इंजीशंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना मध्य प्रदेश
जय जय श्रीराम रामजी
वरदान, गजल
2122,2122,212
बह्न मात्रा भार (19)
19/10/2019/ बुधवार

दिनांक:23/10/2019
विषय:वरदान

विधा:पिरामिड
1
है
मान
महान
कन्या दान
दे वरदान
विवाह विधान
वर वधू सम्मान ।
2
माँ
भक्ति
उत्पत्ति
देवी शक्ति
ञान सम्पत्ति
न आये विपत्ति
वरदान दम्पत्ति ।

स्वरचित
नीलम श्रीवास्तव

23/10/19
विषय:वरदान

विधा:कविता

ईश कृपा जीवन वरदान
दया-क्षमा,ममता भण्डार
सृष्टि-जगत का सुंदर ज्ञान
सेवा-सत्कार एवं उपकार
देश-प्रेम एवं राष्ट्र उत्थान
प्रत्येक व्यक्ति जीवन आधार
उत्तम स्वास्थ्य का वरदान
स्वस्थ शरीर, सत्य विचार
सरल स्वभाव,नीति सुजान
मानव तन जीवन व्यवहार
प्रेम विश्व का सम्बल ज्ञान
मधुर आचरण, प्रीति अपार
मनुष्य जन्म ईश्वर वरदान
धर्म - कर्म ,मोक्ष साकार

मनीष कुमार श्रीवास्तव
स्वरचित
विषय- वरदान
दोहा चौपाई

तिथि-२३:१०:१९

हाथ जोड़कर मांगिए, प्रभु से यह वरदान।
जीऊं जब तक कर सकूं, धर्म-कर्म का मान।।

हमें सुख आशीष दो अपना, पूरा करना मेरा सपना।
प्रभु मेरी तुम विनती सुन लो, मन की पीड़ा मेरी हर लो।
आज सृजन की शक्ति हमें दो, मन में श्रद्धा भक्ति हमें दो ।
सहज सरल जीवन पथ देना, डोले कहीं तो थाम लेना ।
प्रभु मधुर अमृत ज्ञान हमें दो, बस इतना वरदान हमें दो ।
शब्द शब्द तेरे गुण गाऊं ,हरदम तुमको शीश नवाऊं।
नित परहित में चित्त लगाऊं, उन्नत यह संसार बनाऊं ।

मिल जुल कर हम सब रहें,दो ऐसा वरदान।
स्वस्थ प्रगति चहुंँ दिशि करें, बढ़े सभी का मान।।

प्रभु तुम मेरे हृदय विराजो, प्रेम घट भीतर आप साजो।
तुम विलीन आत्मा में मेरी, मैं प्रभु परछाई हूं तेरी ।
सत्य अर्थ से प्रीति करुं मैं, समय नष्ट अब नहीं करुं मैं ।
नमन नमन हे ईश्वर मेरे, रहूं सदा चरणों में तेरे।
हम चरणों में ध्यान लगाएं, मीठे संताप शुभ फल पाएं।
स्वीकार लो प्रणाम हमारा, हरदम देना ईश सहारा ।
करुं सुकर्म सदा मैं ऐसे, वृक्ष देता सरस फल जैसे ।

शंकर सुवन गण नायक, देते हमको ज्ञान।
सकल अमंगल दूर कर,दे देते वरदान।।

चंचल पाहुजा
दिल्ली
वरदान

करूँ
वन्दना माँ
नेक ईमान
अपनाऊँ
जीवन में
चलूँ
सत्य मार्ग पर माँ
ऐसा दो वरदान
करूँ माँ वन्दना तेरी

है जीवन
कठिन
हर कदम पर
चलना है
संभल कर
सोऊँ सफल
जीवन में
ऐसा दे
वरदान माँ

करूँ
साहित्य सृजन
नियमित
उत्कृष्ट रचना
हो हर एक
हो देश समाज
परिवार का
उत्थान
ऐसा दे
वरदान माँ

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

No comments:

"जिम्मेदार"18नवम्बर 2019

ब्लॉग की रचनाएँ सर्वाधिकार सुरक्षित हैं बिना लेखक की स्वीकृति के रचना को कहीं भी साझा नहीं करें   ब्लॉग संख्या :-569 Hari ...