Tuesday, November 5

"भाईदूज"29अक्टुबर 2019

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ब्लॉग संख्या :-550
दिनांक-२९/१०/२०१९
शीर्षक-भाईदूज


भाई बहन का पवित्र त्योहार
भैया दूज है आज
युग युग जिये भैया मोरे
रहे मैका आबाद।

भाई भाभी से मिले बस प्यार
नही कोई उपहार
भाई के काल्पनिक दुश्मन को मार
बहना होती निहाल।

चंदन रोली तीलक लगा
मिष्टान खिलाती आज
युग युग जिये भैया मोरे
बना रहे भाई भाभी का प्यार।

स्वरचित आरती श्रीवास्तव।

विधा--ग़ज़ल ग़ज़ल
मात्रा भार -- 16
प्रथम प्रयास

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भाई बहन का अनुपम प्यार
भाई दूज पावन त्योहार ।।

दुआ करे भाई की खातिर
बहना प्रभू से बारम्बार ।।

सदा लक्ष्मी बरसे वहाँ पर
जहाँ भाई का कारोबार ।।

भाई को बरकत मिले सदा
कभी नही आय संकट द्वार ।।

भैया से ही मायका होय
भैया से हो खुशियाँ हजार ।।

भैया से यादें बचपन कीं
संग खेलना व लाढ़ दुलार ।।

मेरी हरेक दुआ उसे हो
जुग-जुग जीवे भाई हमार ।।

'शिवम' अर्ज़ है यही बहन की
करना मेरे प्रभुवर स्वीकार ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 29/10/2019

हमारी सँस्कृति का अनुपम है गुञाँर
इसमें से निकलते सुर मधुर अपार
भैय्या दूज की छनती जब स्नेहमयी धार
सरबोर होते पारिविरिक उदगार।

भैय्या दूज का स्नेही टीका
सौन्दर्य बढा़ता है जी का
और आपस के समन्वय से
बाधा का रंग पड़ता फीका।

आजीवन प्रेम पुष्प खिलते
हँस हँस कर जब सब मिलते
सदभावों के होते उदघोष
सदा भरा रहता यह कोष।

भैय्या दूज की अलग सुगन्ध
प्रेम पुष्पित मुखरित मकरन्द
चाहे हो जायें आँखें धुँधली
पर इनकी प्रीत रहती स्वच्छन्द।

कृष्णम् शरणम् गच्छामि

विषय-भाई दूज/यम द्वितीया
विधा-पद्य

दिनांकः 29:10:2019
मंगलवार
आज के विषय पर मेरी रचना:

भाई बहन के रिश्ते का ,
यह पावन है त्यौहार ।
बना रहे जग में सदा,
इन दोनों का ऐसा प्यार ।।

रक्षा सूत्र वह बांधकर ,
करती दीर्घायु की कामना ।
भाई तुम भी बहन की ,
रक्षा की डोर थामना ।।

यम ने बंधवा कर यह सूत्र,
यमी बहन को वचन दिया ।
जब भी संकट आया उसपर,
भाई ने उसे उबार लिया ।।

नारी बहन समाज की ,
वह बहन समझे नारी को ।
हो सदा समर्पित रक्षा को,
दे प्रेम,मान नारी को ।।

कुछ भी विपदा हो बहन पर,
दिलो जान से मदद करें ।
यदि अवसर यह आ जाये ,
अपनी जान निसार करें ।।

तिलक लगवा कर जो भाई ,
बहन से राखी बंधवाते ।
वे सदा सुरक्षित जहाँ में,
अकाल मौत वे नहीं पाते ।।

हो कहने भर को नहीं बहन,
रिश्ता यह दिल से मानें ।
रक्षा,मदद सदा करने की,
अपने दिल में भी ठाने ।।

स्वरचित
डॉ एन एल शर्मा जयपुर
(डॉ नरसिंह शर्मा 'निर्भय, जयपुर)

नमन मंच भावों के मोती
विषय भाई दूज,यम द्वितीया
विधा काव्य

29 अक्टूबर 2019,मंगलवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया पावन
भाई बहिन अद्भुत त्यौहार।
छोटी चँचल प्यारी बहिना
होती पावन हृदय का हार।

भाई बहिन रक्त का रिश्ता
एक सिक्के के हैं दो पहलू ।
भाई बहिन स्नेह गङ्गा जल
मैं बहिन की विपदा हर लूँ।

खेले कूदे झगड़े हम मिल
बचपन का पाया आनन्द।
मुझे उठाया निज गोद में
दिया सदा स्नेह सुगन्ध।

मुँह बोली प्यारी बहिना
सदा करे भाई का मङ्गल।
भाई बहिन का पावन रिश्ता
जो जीवन में लाता रंगत।

स्वरचित, मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

भावों के मोती
शीर्षक- भाईदूज
बड़ी दूर से आई बहनां

लिए प्यार का उपहार।
निश्छल प्रेम का प्रतीक है
भाईदूज का ये त्योहार।।

अक्षत रोली का टीका लगा
करती विनय बारम्बार।
हे प्रभु! बनाए रखना यूंही सदा
हम भाई-बहन का प्यार।।
स्वरचित- निर्मल अग्रवाल, खड़कपुर

दिनांक...................29/10/2019
विषय ...................*🌷भाई-दूज🌷*
विधा.....................*🌷कविता🌷*
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*भाई-दूज*
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*मन में बहती स्नेह की गंगा,*
*भाई दूज का पर्व बताती है।*
*दीपावली के दूसरे दिन दूज,*
*त्यौहार भारतवर्ष मनाती है।*
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*प्रीत डोर से बँधी है बहना।*
*आई भ्रात घर नैहर अँगना।*
*कातिक मास चाँद दूज का।*
*खुश अधर मन उपवन सा।*
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*कुमकुम अक्षत थाल सजाकर।*
*भ्रात भाल पर तिलक लगाकर।*
*दाँये हाथ पर रक्षा सूत्र बाँधकर।*
*करें आरती धूप-दीप जलाकर।*
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*लंबी उम्र निरोगी काया का,*
*आषिश देती प्यारी बहना।*
*सुख सम्रद्धि जगत में मान,*
*देती दूज पर्व शुभकामना।*
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स्वलिखित
*कन्हैया लाल श्रीवास*
भाटापारा छ.ग.
जि. बलौदाबाजार भाटापारा

बहनें हर्षित हो रहीं, आया भाईदूज।
माँग रहीं रब से दुआ, भाई हो महफ़ूज।
भाई हो महफ़ूज, हमेशा उन्नति पाएं।
खुशियाँ मिले अपार,दु:ख पास नहीं आएं।
भाईयों से आज, मिलेंगे हमको गहनें।
मन में भर उल्लास,खुशी मना रही बहनें।(०१)
********************************

रक्षा करना भ्रात की, जग के पालनहार।
देखों भाईदूज‌ पर, बहने करें पुकार।
बहने करें पुकार,बला भाई की हर लो।
विनती बारम्बार, खुशी से झोली भर दो।
भ्रातदूज पर आज,सभी भाई लो दीक्षा।
जैसे हों हालात, करें बहनों की रक्षा।(०२)
*******************************

स्वरचित
रामप्रसाद मीना'लिल्हारे'
चिखला बालाघाट मध्य प्रदेश


नमन मंच भावों के मोती। नमस्कार गुरुजनों, मित्रों।

भाई बहन का प्यार है बड़ा हीं प्यारा।
भाई दूज का ये अनुपम पर्व, सबसे न्यारा।

बहना आई तेरे घर सुनो मेरे भैया।
देने तुमको दुआएं, मांगती कुछ भी नहीं भैया।

नहीं चाहिए सोने, चांदी, हीरे, मोती।
फीके प्यार के आगे तुम मेरे जीवन के ज्योति।

मुझे सिर्फ चाहिए बस प्यार तुम्हारा।
जीओ लाख बरस,ये है आशीष हमारा।
29/10/2019

वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी
स्वरचित

विषय_भाईदूज
विधा॒॒॒ _ मुक्तक
(मात्रा भार ,27)

भाईदूज का महत्व जानते हैं भाई बहना।
जो बंधन में बंधे मानते हैं भाई बहना।
जिनके माथे तिलक नहीं लगे कभी क्या समझें
इस दिन टीका लगना जानते हैं भाई बहना।

रोली चंदन अक्षत फूलहार लाती है बहना।
भाईदूज मिठाई उपहार लाती है बहना।
होली दीवाली भाईदूज हर घर मनाते
भाई बुलाती कभी दूज पर आती है बहना।

भाग्यवान वो जिनके साथ में होती है बहना।
होता ईश उपकार नाते निभाती है बहना।
मिलता भेंट उपहार शगुन नेह में भाई से,
इसे हमेशा प्रेम से गले लगाती है बहना।

स्वरचित
इंजी शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना मध्य प्रदेश

1भा."भाईदूज "मुक्तक*
(मात्रा भार 27)
29/10/2019/मंगलवार

Veena Vaishnav नमन
विषय-भाई दूज
दिनांक 29-10-2019
भाई दूज का त्यौहार,उल्लास से मनाती है।
हर बहन चेहरे पर,छाई आज मुस्कान होती है।।

यमुना नदी स्नान कर, यमराज पूजा करती है।
प्रथा अनुसार,भाई-बहन आकृति बनाती है।।

एक ओर सांप बिच्छू का,पतिरूप बनाती है।
मुसल से आने वाली विपत्ति, मार भगाती है ।।

भाई के स्वस्थ जीवन,लंबी उम्र प्रार्थना करती है।
भाई पर विपदा आए,प्राचीर बन खड़ी रहती है।।

थाल सजा द्वार खड़ी, भाई इंतजार करती है।
भाई को घर बुला,भाल तिलक लगाती है।।

भाई बहन के रिश्ते, और भी गहरे हो जाते हैं।
तोहफा नही,स्नेह सम्मान बस वो चाहती है।।

हाथों से बना स्वादिष्ट भोजन, भाई को कराती है।
भाई बहन प्यार अमर रहे,यही आशीष चाहती है।।

वीणा वैष्णव
कांकरोली

9/10/2019
"भाई दूज"

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लेकर भाई-बहन का प्यार
आया भाई दूज का त्योहार
आशीष स्वरुप दूर्वा औ धान
चंदन तिलक लगाकर भाल..
भाई के लिए मंगलकामना...
करके न थकती प्यारी बहना
करती आरति, शंख बजाती.
यम के द्वारे काँटा बिछाती....
खिलाकर दही और मिठाई..
भाई के पसंद की उपहार देती
युग युगांतर से चला आ रहा..
भाई बहन का निश्छल और.
अटूट प्रेम का यह त्योहार।।

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।।

29/10/2019
बिषय,, भाई दूज ,यम द्वितीया

भाई दूज का पावन त्यौहार
बढ़ाता रहे परस्पर प्यार
बहिनें टीका लगाऐं हर साल
भाई रखें बहिन का ख्याल
बहिनें देतीं यही दुआएं
दूर रहें सारी बलाऐं
भरे रहें सबके भंडार
रोग द्वेष न झांके द्वार
नेह प्रेम ज्यों गागर में सागर
बारहमास रहे ए अवसर
यम द्वितीया का पर्व ए प्यारा
रहे स्नेह ज्यों यमुना का धारा
टीका लगाकर मांगती भाई से सौगात
भैया मेरे सदा ही करना स्नेह प्रेम की बरसात
स्वरचित ,,सुषमा ब्यौहार

विषय: भाईदूज/यम द्वितीया
दिनांक ,29/10/2019


शीर्षक :भाई दूज /यम द्वितीया

सूर्यदेव संज्ञा जगत आधार।
सुपुत्री यमुना के पालनहार।।
सुपुत्र यमराज के पोषणहार।
अश्विनी कुमारौ वैद्य करतार।।

भारतीय संस्कृति पर्व घर बार।
भाई बहन का प्रेम बंधन प्यार।।
भाई दूज यम द्वितीया त्योहार।
अतिथि देवो भव: पर्व मनुहार।।

यमुना का आग्रह कर स्वीकार।
यमराज आए गोलोक गृहद्वार।।
धरा रंगोली सजाएँ तोरणद्वार।
नीम पत्ते मंगलमय बांधनवार।।

भाल टीका पहनाती चंदनहार।
यमुना घर भोजन यम सत्कार।।
भाई बहन रक्षा वरदान उपहार।
यम दे दो यमुना स्नान उपकार।।

पाँच दिन का महोत्सव त्योहार।
धन्वंतरि रूप चतुर्दशी अवतार।।
गोवर्धन पूजा,भाई दूज सरकार।
'रिखब'करता'दीपदान नमस्कार।।

रचयिता
रिखब चन्द राँका 'कल्पेश'
स्वरचित एवं सर्वाधिकार सुरक्षित
जयपुर राजस्थान

विषय--भाई दूज/यम
द्वितीया

दि.मंगलवार/29 अक्टू
विधा ---दोहा मुक्तक
1.
भ्रात द्वितीया पर्व है, भाई बहना प्यार ।
भ्रात सदा रक्षा करे, बहन करे सत्कार।
भ्रात दूज त्योहार से , बढ़ता प्रेम अथाह--
इक दूजे के प्रेम से, ढहे भेद दीवार ।
2.
यमुना को यम ने दिया, रक्षा का विश्वास।
भाई दूज पर्व बना,बढ़ी बहन की आस ।
भोजन कराय बहन खुद, भाई दे उपहार--
दीप पर्व का अंत ये, बहनों हित है खास।

******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451551

दिनाँक-29/10/2019
शीर्षक-भ
ाई दूज
विधा-हाइकु

1.
प्रेम प्रतीक
भाई दूज का पर्व
माथे तिलक
2.
हाथ में थाल
खड़ी इंतजार में
तिलक वास्ते
3.
बहना लाई
प्रेम का उपहार
भाई के लिए
4.
पवित्र सोच
बढ़े उम्र भाई की
है उपहार
************
स्वरचित
अशोक कुमार ढोरिया
मुबारिकपुर(झज्जर)
हरियाणा
दिनांक 29/10/2019
विधा काव्य

विषय भाई दूज

दीपावली के पाँचों दिन
बीते पूरे उल्लास मे.....
चारो ओर खुशियाँ बिखरी
सबके चेहरों पर मुस्कान ।
धूप बत्ती, खुशबू ,रंगोली,
दियों की कतार बेशुमार ।
आज पांचवा दिन मनाया
भाई दूज के नाम से......
दीपावली .....
कृष्ण के बृज और यमुना की
इस दिन की अनेक गाथाएँ ।
प्रातः काल उठ भाई बहन
कर ले यमुना मे श्रद्धा स्नान.
घर आकर ,चौक बना बहने
मांगे यम से भाई का निरोग जीवन
फिर टीका ,आरती, पकवान खिला
भाई संग मनाये भाई दूज हर साल।।

कई प्रदेशों में इस दिन को मनाते
यम द्वितीया के नाम से
यमुना बहना और यम भाई के
प्रेम की अदभुत कहानी ।
बहने करती इस दिन पूजा विशेष
यम से माग लेती भाई की दीर्घायु ।
इस दिन करते बहन भाई एक दूजे से
वादा कर बांटेंगे सुख दुःख जीवन भर।
दीपावली ...
त्योहारों का मौसम अब होने को अन्त
फिर आयेगा अगले साल..........
यही पाँच दिनो का त्यौहार ।
कल से फिर से आफिस जाना
वही रोज़ की भागम-भाग ।
बच्चों ने भी ली अपनी राह .....
कैलेन्डर मे फिर देखेगे
अगली छुट्टी और रविवार ।

स्वरचित
नीलम श्रीवास्तव

दिनांक-29/10/2019
. "भैया दूज"

~~~~~
भैया बहिन का रिस्ता पावन पवित्र एक दूजे
का पूरक होता है।

इस लिए-

भैया के बिन सूनी है भैया दौज बिन बहिन के
सूनौ सनूनौ है।
श्रंगार बिना पति के है सूनौ व संतान बिन
जीवन सूनौ है।
आश्रम सूनौ है बिन धूना के व बिन धूंआ के
सूनौ धूनौ है।
अमावस सूनी है बिन अंधियारी बिन चंदा के
सूनी पूनौं है।

कवि महावीर सिकरवार
आगरा (उ.प्र.)



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"जिम्मेदार"18नवम्बर 2019

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