Tuesday, November 5

"एकता"31अक्टुबर 2019

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ब्लॉग संख्या :-552
दिनांक-31/10/2019
विषय- एकता


ओ ठेके दारो धर्म के इमाम पंडा पादरी,
देश वासियों को न आपस में लड़ाइये।
बटा देश एक बार मजहव के नाम पै,
बट बारे में और ना हिस्सा फांट करवाइये।
अल्प मत पर बहुमत का दिखा के भय,
द्वेष नफरत की न खाई खुदवाइये।
देश में जो है "एकता" व "अखंडता" उसको,
पुष्टी तुष्टीकरण से मत तुड़बाइये।

कवि महावीर सिकरवार
आगरा (उ.प्र.)
विषय एकता
विधा काव्य

31 अक्टूबर 2019,गुरुवार

कोटि नमन श्री चरणों में
लौह पुरुष अदम्य साहसी।
एकीकरण किये राज्य सब
राष्ट्र भक्त सरदार मानसी।

एकता और अखंडता हेतु
इंदिरा निज बलिदान दिया।
चीर दिया था नापाक को
आत्म समर्पण रिपु किया।

सदा राष्ट्र आगे बढ़ता नित
अगर एकता प्रजा में होती।
विविधता मध्य बने एकता
दमके नवल भव्य ज्योति।

सामुदायिक सामाजिकता
सदा राष्ट्रीयता कायम रहती ।
जन जन में विश्वास एकता
भारत माँ नित आगे बढ़ती।

हिय जोड़ें भाई बहिन मिल
एकता दिवस आज मनावें।
विश्वपटल भारत माता सिर
हीरे जड़ित मुकुट पहनावें।

स्वरचित, मौलिक
गोविन्द प्रसाद गौतम
कोटा,राजस्थान।

एकता
🌺🌺
कता में शक्ति है,ये सुना है।
मेरे मन ने इसको हीं चुना है।

अकेले रहने वाले चिड़चिड़े हो जाते हैं।
साथी कोई नहीं होने से मौन हो जाते हैं।

अकेले रहने से तोड़ दिया करती है दुनियां।
साथ हो कोई तो मिलती है खुशियां।

जो अकेला हो गया है।
उसको तोड़ना आसान है।

एकजुट होकर जो रहते हैं।
उनसे डरता जनसामान्य है।

वीणा झा
बोकारो स्टील सिटी
स्वरचित
दिनांक- 31/10/2019
शीर्षक- "एकता"
वि
धा- छंदमुक्त कविता
*****************
दुनियां के सब देशों में मेरा,
भारत देश है सबसे महान,
अनेकता में दिखती एकता,
यही खास इसकी पहचान |

हिंदु, मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई,
सभी धर्मों को मिलता सम्मान,
भिन्न-भिन्न हैं बोली -भाषा,
एकता की है शक्ति महान |

गंगा, जमुना, सरस्वती,
अलग-अलग बहकर जायें,
इलाहाबाद संगम में जाकर,
एकता से एक हो जायें |

भारत की तो बात निराली,
एकता,अखंडता बड़ी प्यारी,
इसको सदा हमें बनाये रखना,
एकता से देश को सजाये रखना |

जय हिंद, जय भारत!

स्वरचित- *संगीता कुकरेती*
प्रथम प्रस्तुति

एकता का पाठ पढ़ाना नही आसान
होय सरदार पटेल सा व्यक्तित्व महान ।।

खण्डों में बँटा होता आज यह देश
अखण्ड भारत स्वप्न साकार उनसे जान ।।

बड़ी चुनौती स्वतंत्रता के बाद थी ये
सूझबूझ और ताकत का ज्वलंत प्रमान ।।

छिन्न-भिन्न नही होने दिया राष्ट्र को
करता है ये देश आज उनका गुणगान ।।

एकता की शक्ति शान को समझो 'शिवम'
हर एक जगह एकता में छुपे उत्थान ।।

हो मुल्क या परिवार समाज कहाँ नही
एकता का हर वक्त और जगह बखान ।।

हरि शंकर चाैरसिया''शिवम्"
स्वरचित 31/10/2019
शीर्षक- एकता
अनेकता में एकता

नहीं कोई देश दुनिया का
मेरे देश सरीखा।
हर धर्म को पूजता
सबको साथ ले चलता
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सब मिलकर रहते यहां।
ये देश है सबका।
हमारी एकता कोई भी
लाख कोशिशें करके भी
कभी भी नहीं तोड़ सकता।
बनाए रखेंगे हम सदा
इसकी अखंडता,धर्मनिरपेक्षता
ये दृढ़संकल्प है हम सबका।
सभी हैं इस देश के
छोटा हो या बड़ा,
नहीं कोई किसी से कमतर यहां।
ये देश है सबका।
धर्म है इसका मानवता।
कर्म को निशदिन पूजता।
नहीं कोई देश दुनिया का
मेरे देश सरीखा।

स्वरचित- निलम अग्रवाल, खड़कपुर

मंत्र है यही
हमारे में एकता
है सफलता


एकता शक्ति
तीन सौ सत्तर है
धारा भी हटी

एकता भाव
नहीं हो बिखराव
ये समझाओं

रेल की पात
एकता का है भाव
मंजिल जाएं

निकले हल
एकता संग चल
यही है बल

दिनांक 31/10/2019
विषय:एकता

विधा:हाइकु

लौह पुरुष
रन फार यूनिटी
एकता पाठ

श्रद्धा सुमन
सरदार पटेल
एकता सीख

एकता टूटी
शहादत दिवस
इन्दिरा गाँधी ।

स्व0 इन्दिरा जी
गौरव इतिहास
एकता साथ ।

एकता रूप
खुशहाल समाज
आज व कल।

शत्रु निस्तेज
एकता की दीवार
प्रेम की ईट।

एकता छत
परिवार मंगल
कष्ट तू भाग।

एकता देख
ख्वाब नयन भरे
गुलांबी कल।

लालच देख
एकता का पर्वत
मिट्टी का ढेर।

स्वरचित
नीलम श्रीवास्तव
शीर्षक _ऐकता
३१/१०/१९@१०:५०
कता वह नहीं हमेशा देश की बात करें।
अतिक्रमण करें पडोस से बिगाड़ करे।।
ऐक्य रहें न नेक न तनिक उपकारी भाव।
कुटिलता के बस होकर ऐकता पाठ पढें।
देश को संभाले घर परिवार को दूर करें।।
अब सदा दिवस ऐकता ध्वज लिए फिरे।
हे कुटिल कुठित मानव पशुओं से बुरा।।
कभी भेड़ को भी देखो पशु है महान हैं।
सदैव एक दिशा में चले न दायं बायं।
एक कूप गिरे सभी कूप गिरे हे चरवाहा।
अब ऐक्य बनो नेक बनो सदाचारी सदा।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
स्वरचित
राजेन्द्र कुमार अमरा
३१/१०/१९@११:०१

विषय - एकता
31/10/19

गुरुवार
छंदमुक्त कविता

आज असम्भव सम्भव होगा
यदि जन-जन का एक रंग होगा
जाति- धर्म का भेद मिटाकर
मंत्र एकता का गूँजेगा
प्रगति-मार्ग पर साथ चलेंगे
हर मुश्किल को साथ सहेंगे
नामुमकिन को मुमकिन करके
हम असीम आकाश छुएंगे
सीमाएँ सब रहें सुरक्षित
ऐसे पहरेदार बनेंगे
शत्रु कभी न घात लगाए
ऐसे सावधान सब होंगे
भ्रष्टाचार का अंत निकट है
अब बन रहा विधान विकट है
जयचंदों पर भी संकट है
उनके जीवन में कंटक है
सूर्य सत्य का अब चमकेगा
न असत्य भू पर धमकेगा
सभी बनेंगे सत् आचारी
कोई न होगा अत्याचारी
जन परहित का काम करेंगे
सुख-दुख में समभाव रखेंगे
जीवन सुखमय हो जाएगा
कहीं न दुख गहरा पाएगा
बच्चे, वृद्ध और बालाएँ
हो उपलब्ध उन्हें सुविधाएँ
हरी-भरी यह प्रकृति रहेगी
नदियों में शुचि धार बहेगी
चारों ओर शान्ति व सुख की
शीतल - सुखद बयार चलेगी
एकसूत्रता से भारत फिर
नित नवीन आयाम गढ़ेगा
विश्व-पटल पर अपने दम से
अनुपम एक मिसाल बनेगा

स्वरचित
डॉ ललिता सेंगर

31 / 10/2019/
बिषय,एकता

एकता में बल है एकता में संबल
विस्तृत विशाल है एकता का आंचल
एकता में झुकता सारा जहान है
एकता में झुकता धरती आसमान है
एकता से बनता समृद्ध परिवार
एकता से शुद्ध होते आचार विचार
एकता से चलता सारा समाज
अनेकता में एकता का आगाज
एकता में होता देश का विकास
ज्यों मलय में रहती सुवास
जहाँ एकता नहीं वह नहीं परिवार
दूषित रहते हैं सदा आचार विचार
एकता बगैर चलता नहीं देश
कुसंस्कारित रहते घर समाज के परिवेश
सुसंगठित रहकर स्वंय व देश को बनाऐं
सारी दुनिया में एकता का मूल मंत्र फैलाऐं
स्वरचित,, सुषमा, ब्यौहार

शीर्षक --एकता
दि. गुरुवार/31-10-19

विधा--मुक्तक

1.
अखंडता में देश की, भरा प्रगति का गान।
एकता के मंजर से,बढ़ता सबका मान।
एक बनें व नेक बनें,जन गण का हो साथ--
विश्व हमें यों देखता, बनी एकता आन।
2.
'स्टेच्यू ऑफ युनिटी' विश्व की,सबसे ऊंची है प्रतिमा ।
एक सौ बयासी मीटर की,है वल्लभभाई गरिमा।
नर्मदा जिले के नर्मदा तट ,खड़ी एकता की मूरत---
भारत के अव्वल होने की,बिखरी दुनिया में महिमा।

*******स्वरचित ***********
प्रबोध मिश्र ' हितैषी '
बड़वानी (म.प्र.)451551
31/10/2019
"एकता"

छंदमुक्त
################
सदस्यों से बनता है परिवार
सबकी भावना का सम्मान
स्व स्वार्थ का त्याग कर.....
गृहकर्ता का होता काम...
सदस्यगण देते उन्हें सम्मान
एकता का है यही मूलमंत्र।

परिवार-परिवार जोड़कर...
समाज का हम करते निर्माण
सुबह-शाम करते राम सलाम
सुख-दू:ख में हम देते साथ...
सामाजिक व्यवस्था का मान
घर-घर का कर्तव्य सर्वप्रथम
सामाजिक एकता है महान..।

समाज की अपनी संस्कृति
मिलजुलकर बना राष्ट्र महान
हरेक ईकाई को देते सम्मान
सर्वधर्म होता है एक समान
एकता को बनाए रखना.....
हमारा है पहला काम...।

एकता के बल को पहचान
ताकत इसमें मुट्ठी समान..।।

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।
तिथि_31/10/2019/गुरुवार
विषय_ऺएकता ऺ

विधा_काव्य

एक सूत्र में बंधे रहें हम
रहे भारत में सदा एकता।
उन्नति शिखर पर चढते जाऐं
नहीं देश में आए विपन्नता।

जोड जोड धागे को देखें
कितना सुंदर फर्श बनाते।
इसी एकता के बलबूते जी
हम फर्श से अर्श पहुंचाते।

हो हमारी यही विशेषता।
हृदयपटल पर रहे एकता।
जीवन अपना क्षणभंगुर है
पता नहीं कब हमें छोडता।

विकासशील यहां हमें बनना
नहीं पनपे ये कटुता मन में।
रहें सदैव सभी हिलमिलकर
नहीं उपजाऐं शत्रुता मन में।

जाग्रत समता भाव करें हम।
अपने सरल स्वभाव करें हम।
नहीं निष्क्रियता मन में लाऐं
आओ एकता भाव रखें हम।

स्वरचित
इंजी शंम्भूसिंह रघुवंशी अजेय
मगराना गुना मध्य प्रदेश
जय जय श्रीराम रामजी

१भा ,ऺएकता ऺकाव्य
31/10/2019/गुरुवार

दिनांक 31- 10- 2019
नफरत की तोड़ दीवारें, प्रेम को अपनाएंगे।
सबके दिलों में हम,एकता भाव जगाएंगे।।

बहुत लड़े हैं अब तक, अब न इसे दोहराएंगे ।
हंसी-खुशी साथ रह,हम भेदभाव भुलाएंगे।।

एकता के दीप, हर घर में अब जगमगाएंगे।
प्यार का महत्व बता,दिलों को जोड़ आएंगे।।

पैसों के लालच में आ,अब न भ्रष्टाचार फैलाएंगे।
भूखे प्यासे रहकर,एक साथ जीवन बिताएंगे।।

बुजुर्गों का सम्मान कर,आशीष हम पाएंगे ।
उनके ही आशीष से, सफलता ओर जाएंगे ।।

विविधता में एकता,देश की पहचान बताएंगे।
हम हमारे देश को,विश्व में महान बनाएंगे।।

वीणा वैष्णव
कांकरोली
31/10/2019
गुरुवार

विषय -एकता
विधा कविता

एकता तुम तब्दील हो गई
समय के साथ
थोड़ी सी चालाक
थोड़ी सी दलबदलू
हो गई हो धीरे -2
प्यार, ईमान
शायद तुम्हें
अब नहीं भाते
षडयंत्री की सखि
बन गई हो तुम
जो झूठ को
सच बनाने
में अनगिनत
दाव पेंच
लगाते है
और सफल भी
हो जाते है
क्योंकि इनमें
तुम जो समाहित
निचले से ऊँचे
पायदान तक
स्वरचित
शिल्पी पचौरी

भावों के मोती
विषय-एकता

===========
सबसे बड़ी पूँजी जीवन की,
एकता और विश्वास की दौलत।
तोड़ सकें न उस बंधन को,
बंधा जो एकता पाश की बदौलत।
खुशियों भरा वह घर हँसता,
जहाँ रहता एक होकर बसेरा।
प्रेम झलकता हर वाणी से,
विश्वास भरा होता हर सबेरा।
बड़े-बुजुर्गों से मिलता हरदम,
संस्कारों का भरपूर खजाना।
नारी के प्रति सोच का नज़रिया,
बदल देती संस्कारों की सीख।
सबकी सेवा, सबकी इज्जत,
मिलती सदा यही सबको सीख।
एकता ही हमारी ताकत है,
एकता से मजबूत घर-परिवार।
जहाँ खोखली हूई एकता,
खुशियाँ की होने लगती बर्बादी।
देश, घर-परिवार को बाँधे,
बुराई झुकी हरदम इसके आगे।
सुख-समृद्धि का एक ही नारा,
एकता,प्रेम-विश्वाश और भाईचारा।
_अनुराधा चौहान स्वरचित
31/10/19

हम सब सुमन एक उपवन के
माली भी हमारा एक है
जाड़ा गर्मी ओर बरसात
रहते हम सब सदा एक साथ
हवा भी मिलती एक समान
फिर भी अलग रूपो की खान
कांटो का हरदम का साथ
मुझे तोड़ने को बढ़ते हाथ
न कोई दुख
न कोई रोष
देता हूं सबका साथ
खिल जाता सुनहरे प्रातः
मुस्कराता अंधेरी रात
न पूछू मैं जात पात
बन जाता मैं सबका हार
गर्व नही छन भर का
नही दुख लूटने का
ईस्वर पर चढ़ता दिन रात
प्रभु चरणों का हूं दास
शव भी मुझ बिन है सुने
राहों में है मुझे कुचले
नव दंपति के गले का हार
सेजो का जानू मैं राज
प्रेमी द्वारा बनू सृंगार
बलिदानों संग होता अभिमान
पर न करू कोई रार
लुटने को हरदम तैयार
सदा मुस्कराना मेरा काम
दुख सुख में मैं एक समान
अनेकता में एकता की खान

स्वरचित
मीना तिवारी
31.10.2019
गुरूवार

विषय -एकता

एकता

#एकता का राग है,संगठन की आग है
पुष्प है खिला-खिला,पुष्प में पराग है।।

राग ज़िन्दगी के,गुनगुनाते रहिए हर घड़ी
ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से,जोड़ना विहाग है ।।

देश की अखण्डता और एकता सँभालिए
भेदभाव में भी देखो, एकता का राग है।।

भावना ‘उदार’ है, हर किसी से प्यार है
विश्व ऐक्य का ही ख़्वाब, आँख में उधार है।।

स्वरचित
डॉ० दुर्गा सिन्हा ‘ उदार ‘
Damyanti Damyanti 
विषय_ एकता |
एकता मे जो बंधे गर फिर बेमेल स्वर क्यू |
एक गुलशन के रंग बिरगे फूल सब |

नफरते क्यू फनपरही ,सब स्वर बेसुरे क्यू |
सूत्र हे एकता मे अनेता ,रखो बंद मुठ्ठी |
जो खुली तो सब मोती बिखर जायेगे |
न तोडो मर्यादा ऐ कही भी ,विरोध गर करना हो |
वह जरुरी हे सही राह के लिऐ ,पर मर्यादा जरूरी |
प्रेम ,एकता हो सब मे यह अति आवश्यक |
बिखर गये ,जोडना कठिनतम |
इसीका फायदा उठाते लोग |
टूटते परिवार समाज देश सब |
स्वरचित _ दमयंती मिश्रा |
Meena Sharma विषय, एकता ,
दिन, गुरुवार,
दिनांक, 31,10,2019,

अनेकता में एकता यही तो है हिन्द की विशेषता ,
खुशी, विकास, उत्थान वहीं जहाँ हो दिलों में मित्रता ।
बनी जब एकता साथी हमारी मिली हमें तभी स्वतंत्रता ,
मंत्र एकता का करे हमेशा शत्रुओं की विध्वंसता ।
घर, समाज, राष्ट्र सभी जगह फैलाये ये पावनता ,
समूल नष्ट हों घृणा द्वेष रहे आपस में बनी सहायता ।
रहे बोध पराये दुःख दर्द का मन में रह सके न स्वार्थता ,
रह जाये परायापन नहीं बढ़ जाये इंसानियत से निकटता ।
बंद मुट्ठी का होता मोल नहीं खुली मुठ्ठी ने खोई अस्तित्वता।
बात जब समझें सभी ये फिर हर तरफ दिखे महानता ।

स्वरचित , मीना शर्मा , मध्यप्रदेश 

दिनांक ३१/१०/२०१९
शीर्षक-एकता।


गिला शिकवा दूर कर
लाये एकता भाव
आहार ,पोशाक अलग है
पर हम सब है इंसान।

विभाजित नही हम मनुष्य
हर फसाद है बेकार
चिरस्थाई नही यहां कुछ
अनभिज्ञ नही हम आज।

एकता है बड़ी शक्ति
यही हमारी पहचान
हिंद देश के हम निवासी
एकता है मूल आधार।

स्वरचित आरती श्रीवास्तव।
दिनांक................31/10/2019
विषय..................🌷एकता🌷
विध
ा................... 🌷दोहा छंद🌷
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
🙏एकता🙏
*लौह पुरुष वल्लभ बने,कर सपना साकार।*
*देशी रजवाड़े मिला , एकीकरण सुधार।*
🌻🌻🌻🌻
*देश हुआ आजाद जब,पाया गृह का भार।*
*मान बढ़ाया हिन्द का,किया देश उजियार।*
🌻🌻🌻🌻
*बना शिल्प भारत धरा,दिया एकता ज्ञान।*
*नमन करे वल्लभ सदा,करता देश बखान।*
🌻🌻🌻🌻
*सुत्रधार किसान बना , मिला नाम सरदार।*
*मूरत परिचय एकता , दिया सुघर उपहार।*
🌻🌻🌻🌻
*देश शान वल्लभ बने , मिला हिन्द सम्मान।*
*ध्वज तिरंगा मान बढ़ा , विश्व लगा पहचान।*

स्वलिखित
*कन्हैया लाल श्रीवास*
भाटापारा छ.ग.
जि.बलौदाबाजार भाटापारा
नमन "भावों के मोती"🙏🏻
दिनांक-31/10/2019
वि
धा-क्षणिकाएं .. एक प्रयास..
विषय :-"एकता"

(1)
उन्होंने सदन में
दिखाई "एकता"
वेतन वृद्धि बिल
पारित हुआ
ध्वनिमत से l
(2)
उनकी "एकता" भी
बेमिसाल है
देश की खा कर
देश विरोधी नारे
कमाल है !
(3)
भ्रष्टों की "एकता" भी
तहज़ीब है
आखिर अनुशासन भी
कोई चीज़ है !
(4)
धर्म ही तो है
भारतीयता
संकीर्णता की भीड़ में
क्यों खो रही?
"एकता"
(5)
चुनाव आये
सिद्धांतो की बलि दे
बनाया गठबंधन
और मुस्कुराई
"एकता"
(6)
एकता के
कई प्रकार हैं
अब देश हो रहा गौण
स्वार्थ के
बड़े विकार हैं l

स्वरचित
ऋतुराज दवे

31/10/2019
"एकता"

1
एकता मान..
फरेबी पहचान
देश बचाएँ
2
एकता मौन..
एकल परिवार
मुखिया गौण
3
टूटी एकता...
पतन नैतिकता
गृह कलह
4
एकता डोर...
बंधे सदस्यगण
समान मान
5
देश की शान..
भिन्नता में एकता
भारतीयता
6
लौह पुरुष
एकता ही महान..
नीति को मान

स्वरचित पूर्णिमा साह
पश्चिम बंगाल ।।
आज का विषयः- एकता

हो यदि पैदा विरोध,मान लो फिर सलाह मेरी नेक ।
बाहर वालों के विरूध्द तो, हो जाओ मिलकर एक ।।

कर कुल द्रोह मिल शत्रु से, बरबाद स्वयं को करोगे ।
टूटने पर कुल के, साबुत तुम स्वयं भी कैसे बचोगे ।।

धोखा देने वालों अपनों को, बच तुम भी नहीं पाओगे ।
मिटवाया है जिनसे अपनो को, वह तुम्हें भी मिटायेंगे ।।

लेने को बदला, जयचन्द ने मौ0 गौरी को था बुलाया ।
मिल मो0 गौरी से उसने, पृथ्वीराज को था मिटवाया ।।

कुछ समय बाद गौरी ने जयचन्द पर भी कहर ढाया ।
करके हमला जयचन्द पर, उसे भी माटी में मिलाया ।।

नहीं होने पर हमारे, फिर शत्रु से कौन तुम्हें बचायेगा ।
ऐसी दशा में तुमको शत्रु,सरलता से ही निगल जायेगा ।।

दुश्मन पहले तुमसे, तुम्हारे अपनों को ही मिटवायेगा ।
रह जाओगे अकेले जब, गाज़ तुम पर वह गिरायेगा ।।

अपनों के न होने पर, मदद को तुम्हारी कौन आयेगा ।
फल कर्मो का तुम्हें तब, भली प्रकार ही मिल जायगा ।।

होता है कुल द्रोह, एक अत्यन्त बहुत बड़ा अभिशाप ।
हो जाते हैं पितर भी जिससे नाराज़, करते नहीं माफ ।।

ईर्ष्या, जलन तथा लालच, हैं सभी कारण कुलद्रोह के ।
बढ़ने पर यह तीनों ही, हो सकते हैं कारण देशद्रोह के ।।

विभीषण व जयचन्द ने दिया, प्रथम अपनों को धोखा ।
देने के बाद उनको धोखा, देश को भी नहीं फिर छोड़ा ।।
धोखा देने वाला एक को, नहीं कभी किसी का होता ।
हुआ नहीं जो अपनों का, फिर तुम्हारा वह कैसे होगा।।

कहता है व्यथित हृदय, करो नहीं अपनों से तुम द्रोह।
पहुँचाये हानि अपनों को, ऐसा भी क्या माया से मोह।।

ईर्ष्या, द्वेष, जलन, लालच तथा अहं अगर नहीं होते ।
फिर तो अपने ही देश के, दुश्मन भी कभी नहीं बनते।।

भाईयों में जलन न होती,तो प्यार ही प्यार पनपता ।
मिलकर न जाने फिर तो,कितना आगे ही बढ़ा होता।।

शासकों में अहं व जलन आदि अगर, न ही पनपते ।
तो मिलकर विदेशियों से, देश पर हमले क्यों कराते ।।

देश के राजा लड़ते नहीं आपस में रहती उनमें एकता।
समस्त संसार का सरताज तब, देश अपना ही होता।।

डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव
“व्यथित हृदय मुरादाबादी”
स्वरचित
दिन :- गुरुवार
दिनांक :- 31/10/2019

शीर्षक :- एकता

एकता मात्र एक शब्द नहीं...
यह सूत्र है प्रगति का...
है सोपान ये उन्नति का..
उद्घोष है यह संस्कृति का..
आयाम है ये सहमति का..
एकता भाव है संतुष्टि का..
करने होते कुछ समर्पण..
एकता माँगती है समर्थन..
एकता हृदयों का मिलन है...
मिटाती हर एक शिकन है..
एकता में ही शक्ति है...
शक्ति की ही भक्ति है...

स्वरचित :- राठौड़ मुकेश

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"जिम्मेदार"18नवम्बर 2019

ब्लॉग की रचनाएँ सर्वाधिकार सुरक्षित हैं बिना लेखक की स्वीकृति के रचना को कहीं भी साझा नहीं करें   ब्लॉग संख्या :-569 Hari ...