प्रबोध मिश्र 'हितैषी'





लेखक परिचय--

नाम-प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
जन्म तिथि-16 मई1941
जन्मस्थान-पानसेमल(बड़वानी)इंदौर
शिक्षा-एम.एस-सी.(रसायन)बी.एड.(स्वर्ण पदक प्राप्त)
6प्रकाशित कृतियाँ-
5सृजन की विधाएं-काव्य(दोहा विशेष) 1अहिल्या गीत 1974 2बच्चे पग पग पर
4परशुराम चालीसा
मुस्काते 2003 3प्यासी धरती प्यासे लोग 2014-15 2017
विशेष-म.प्र.शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परि. भोपाल की 'शिक्षक पोथी'हिन्दी कक्षा 5में कविता' विलोम शब्द जानिए'सम्मिलित।
5कोई 44 संकलनों में रचनाएं
-भगवान परशुराम की आरती,सरस्वती वंदना और नर्मदा वृतांत की ऑडियो/वीडियो सी.डी. जारी।
-आकाशवाणी इंदौर से गीत ,कविता,दोहे और बाल कहानियों का प्रसारण ।
विज्ञान प्रगति(दिल्ली),सामान्य ज्ञान दर्पण(उपकार प्रका.आगरा), बालप्रहृरी(अल्मोड़ा) अक्षर की छाँह,नईदुनिया(इंदौर) नवांकुर में प्रकाशित।
--गणित के खोजपूर्ण आलेख(3,4,8,और7 की भाज्यता नई तकनीक) 7.सम्मान- 1दर्पण रत्न2003भोपाल 2महेश राजा2005धार
8शब्द प्रवाह(उज्जैन)
3हमजमीं 2012निमाड़ 4साहित्य भूषण(कर्णाट) 5साहित्यायन(ग्वालियर 6जे.एम.डी.(नई दिल्ली 7शीर्षक सुमन(भोपाल) 9छंद रत्न2017इंदौर
द्वारा 500रु का पुरस्कार
10वाग्देवी यु. उ.सा.मंच 11वर्ण पिरामिड शिरोमणि2019 दिल्ली 12 अटल जी पर लिखी कुण्डलिया पर दैभास्कर 8 संप्रति-सेवा निवृत्त
12
प्राचार्य 9 संपर्क सूत्र-85,सुख विलास कालोनी बड़वानी(म.प्र)451551 10 मो. 94259-81988 11ईमेल-prabodhmishra.hiteshi@gmail.com
फेसबुक समूह में दर्जनों सम्मान।
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विषय --अपराध/गुनाह
दिनांक--4-6-19
विधा --दोहे
1.
सब कुछ घर में हो भरा,सोना,
चांदी,नोट।
अगर न रोटी इक मिले, भरे अपराध खोट।।
2.
अपराधों के सरगना, ऊपर तक है पैठ।
जेब न उनकी गर भरी, तुरत जायँगे ऐंठ।।
3.
भुजबल,दलबल से सजे,
अपराधों के शेर।
जनता इक जुट हो अगर, हो जाएंगे ढेर।।
4.
अपराधों की सेज पर,सजते सुख के साज।
अपराधी ही बन रहे, इस युग की आवाज।।

******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451551


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नमन भावों के मोती
शीर्षक -मर्यादा/
रामनवमी
शनिवार/13-4 19
विधा ---दोहे
1.
चैत्र शुक्ल नवमी दिवस,जन्मे थे श्रीराम।
रघुकुल के उत्थान में,मर्यादा आयाम ।।
2.
राम सीय के ब्याह से, जुड़े दशरथ विदेह।
मिलकर विशाल राज्य दो,एक हो गए गेह।।
3.
रत्नाकर ने धो लिए, राम नाम से पाप।
मिला अंत मारीच को, किया राम का जाप।।
4
राम नाम की शक्ति से, हनुमत, भे बजरंग।
नाम,राम से अधिक है,फल पाकर सब दंग।।
5
सभी किया वो राम ने , जो करवाना चाह।
मर्यादा खुद ही रखी, लोक दिखाई राह ।।
6
बड़ा राम का नाम है, बड़ा राम का राज्य।
अन्ते नाता राम से, अन्य सभी हैं त्याज्य।।

*******स्वरचित*****
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551

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शीर्षक --जनतंत्र
दिनांक--28-6-19
विधा ---दोहे

1.
गलत चयन चनाव बने, सदा जनतंत्र कोढ़।
प्रजातंत्र बाँछे खिलें,मतदाता जब प्रौढ़।।
2
ज्योति कलश जनतंत्र का, प्रजातंत्र मजबूत ।
आत्मा प्रजातंत्र सनी,हो सरकार प्रसूत।।
3.
सही व्यक्ति का चयन हो, मन में लें ये ठान।
धर्म,जाति, धन से परे, हो जनतंत्र महान ।।

******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451551

नमन मंच
शीर्षक--सुख/दुःख
दिनांक-12-4-2019
विधा -- मुक्तक
1.
दुख के पांव नहीं होते, पर दुख पीछा करता है।
डर के सींग नहीं होते, पर हर इंसा डरता है।
कष्टों का जोर जगत में ,जब कब बढ़ता जाता--
सारा कष्ट 'हितैषी' को,दुख का पोता लगता है ।
2.
चुभन,दिल में लगी किसी की, मिटा कर तो देखो।
बढ़ती हुई दर्द घटाएं, हटा कर तो देखो।
आशीष की बौछार स्वतः,
आएंगी ' हितैषी ' --
दुखों के संसार से दुःख, बटा कर तो देखो।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र ' हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551

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नमन मंच
विषय--जेब
दिनांक-10--4--2019
विधा--कविता
सौंदर्यीकरण के नाम
ध्वस्त हो रहे मकान
हटा रहे हैं दुकान
उनके बंद हैं कान ।
अफसोस!
जब बन रहे थे
तो बंद थी सबकी आँख
लोग कहते हैं
जेबों में कैद थी ।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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मन मंच
शीर्षक--मैं /स्वयं
मंगलवार/9-4-19
विधा--दोहे
1.
कर्म बिना मिलता नहीं, मन वांछित परिणाम।
कर्म स्वयं ही भाग्य है, कर्म करे हो नाम।।
2.
मैं 'हम' को ही खा गया, जब से हुआ अमीर।
धन के आगे तुच्छ सब, अपने लगें फकीर ।।
3.
मैं का बोझ शरीर पर,इतना भी मत डाल।
हम तिरस्कार से सना,खुद हो जाय निढाल।।
4.
तू तू मैं मैं में फँसे, हो जीवन बर्बाद।
अगर सहज जीवन चहें,रखें समन्वय याद ।।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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नमन भावों के मोती
चित्रलेखन
सोमवार/8--4--19
विधा --मुक्तक
1.
खिली खिली है चांदनी, प्रिया बहुत हैं दूर।
मन पर अधिक दबाव है,असर हुआ भरपूर।
भटक रही थी भावना, पहुँच गया उद्यान--
मोती माला तहँ टँगी, अँखियन चमका नूर।
2
ढूंढ ढूंढ हैरान हूँ, मिली न कोई ठौर।
मन ज्यादा बेचैन है,लगा रहा है दौड़।
थक कर चूर चूर हुआ,शिथिल हो गई देह--
तुरत आंख जब खुल गई,लगा हुई है भोर ।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551
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नमन मंच
शीर्षक--मान/ अपमान
सोमवार/8--4--19
विधा---कविता
यश और अपयश को
मान व अपमान को ।
शकुन व अपशकुन को
खुलकर पहचानिए ।
गर्मी औ शीत को
हार और जीत को।
समान विपरीत को
विलोम शब्द जानिए।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551

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नमन मंच
चैत्र नव वर्ष और नवरात्रि
शनिवार/6-4-19
विधा --दोहे
1.
नवल वर्ष गुड़ी पड़वा, हो समृद्धि सुख धाम।
सिद्ध कार्य ,शुभ कर्म हों,भरें खुशी से ग्राम ।।
2.
सफल चैत्र नव रात्रि हो,पूरित हों सब काम।
वातावरण नया नया, सुख का बढ़े प्रकाश।।
3.
नए वर्ष में मिल सके, सबको नई उमंग।
समरसता पग पग मिले,सभी रहे हम संग।।
4.
प्रतिभाएं विकसित ,बढ़ें, खिसियाएं मतिमन्द।
प्यार प्रकृति का यों मिले,बढ़े खुशी आनन्द ।।
5.
बुरे काम का अंत हो,मिल जाए ये मंत्र।
कोई भूखा न रहे,प्यारा हो गणतंत्र।।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551


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नमन भावों के मोती
शीर्षक --योग/स्वास्थ्य
दिनांक --21-6-19
विधा--दोहे
1
मने इक्कीस जून को,योग दिवस सर्वत्र।
सेहत भरा शरीर हो,रोग हरण का अस्त्र।।
2
सबसे लंबे दिवस को ,दिवस बनाया योग।
लम्बी आयु रहे सदा, ऐसा रचा प्रयोग।।
3
परंपरा प्राचीन है,है अमूल्य उपहार।
देह-दिमागी एकता,यही योग का सार।।
4
आधा घण्टा रोज यदि,करे योग इंसान।
प्रफ्फुलता मन में भरे,हर्षित तन का यान।।
5
श्वांस रोकना,छोड़ना, बढ़े प्राण आयाम।
मिले तसल्ली हृदय को,मनचाहा आराम।।
6
ज्यों ज्यों योग अवधि बढ़े,घटता है अवसाद।
जीवन में खुशियाँ बढ़ें,रखें सदा ये याद।।

******स्वरचित*******
    प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451551
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नमन मंच
शुक्रवार/5-4-19
शीर्षक--मत/वोट
विधा --दोहे
1.
हर मतदाता वोट दे,जनता का तब राज।
वोट डालना इससमय,बहुत जरूरी काज।।
2.
सबसे पहले वोट दें,खुद चुनाव में वोट।
वोट पड़ें जितने अधिक वही सफल संकेत।।
3.
जनता की ये सोच हो , सभी करें मतदान।
स्वच्छ विचारों से सदा, होता है कल्याण।।
4
बटन दबाना सोचकर,क्षण भर के हम शेर।
अगर गलत चुनाव हुआ,हो जाएगी देर।।
*****स्वरचित********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)

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नमन मंच
गुरुवार/4-4-19
शीर्षक-साथी/साथ
विधा--मुक्तक
बदलें साथी भले ही, यात्रा चलनी चाहिए।
कर्म जो करें उसकी उपलब्धि मिलनी चाहिए।
बैठने वाले साथी कभी जीत नहीं सकते--
प्रयास से मंजिल की दुंदुभी बजनी चाहिए।



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नमन मंच
पिरामिड लेखन प्रति.
बुध/3-4-19
शब्द है---घड़ी
1
यों
घड़ी
समय
कुसमय
पल विपल
वक्त करतल
जीवन समतल।
2
यों
वक्त
समय
घड़ी घड़ी
अपूर्व बड़ी
उपयोग खरी
तैरे जीवन तरी।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551


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नमन मंच
शीर्षक -फुरसत
बुधवार/3-4-19
विधा -मुक्तक
सेवानिवृत्त हो गए, फुरसत का संसार।
कला हुनर सीखा नहीं,किया न जन से प्यार।
चलते कुर्सी बल रहे, अब फुरसत हैरान--
बच्चों पौधों प्यार से, मिलो नेह व्यवहार।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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नमन मंच
मंगलवार/2-4-19
शीर्षक-मति,बुद्धि,
दिमाग
विधा ---मुक्तक
अगर सफलता चाहिए,सक्रिय रखें दिमाग।
सदुपयोग से बुद्धि के,मिले जीत का राग ।
वो जो भी मतिहीन हैं, करें न मति उपयोग-
उनके जीवन में सतत,निशदिन सुलगे आग।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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नमन मंच
1-4-19
विषय-फूल
विधा-ताँका
1
सुगन्ध कोष
फूल नर्म निर्दोष
मस्ती व जोश
मन होता निर्मल
कोमलता निव्वळ।
2.
फूल हार में
सुगन्ध विजय में
देव पग में
अनेक शव पर
वीरों के पथ पर।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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सिद्धान्त/उसूल

30-3-19

विधा--मुक्तक




जिन्दगी भर अडिग रहे,पाले सभी उसूल।

अंत अंत में पुत्र ने,किया सभी कुछ धूल।

जाने किसके फंद में,नशा बन गया दोस्त-
पैतृक आस्था लाश पर,चढ़ा रहा अब फूल ।

******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551




शुक्रवार/29-3-19
चित्र लेखन
विधा--मुक्तक
1.
रखी ईंट पर ईंट औ,कमरा लिया बनाय।
माँ बाप गए काम पर, बिटिया' बाल' खिलाय।
यही पाठशाला बनी, यही सीख का ठौर --
लघु बालक जब रो उठे,जब कब दूध पिलाय।
2.
कष्ट कंटकों से भरी ,ये जीवन की राह।
ऐसे ही करना उसे, जिन्दगी का निबाह।
इसी दृश्य को देखकर , उठती मन में हूक--
झूलाघर औ स्कूल की, कब पूरी हो चाह।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551
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शुक्रवार/29-3-19
शीर्षक--उपकार
विधा --मुक्तक
पढ़ें लिखें तो लेखनी, बन सकती है सार।
महफ़िल दोस्ती-ए-कलम,करती है उपकार।
कलम आय वो याद जो,' हितैषी' सह कठोर--
मन के सुंदर भाव जो,फैलाती हर द्वार ।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551



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गुरुवार/28-3-19
--मौका/अवसर
विधा - मुक्तक
मौके पर मौका मिला,किया न कोई काम।
मौका छिटका दूर जब,घोषणा कीं तमाम।
अविश्वास धारा बही, हुई सफलता दूर--
खुद होकर सेवा करें, मिले खुशी आयाम ।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551

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क्षणिका लेखन प्रति.
दिनांक-27-3-19
शब्द है --लाभ
1.
कुर्सी पर बैठते ही
वो सबके मुरीद हो गए
लाभ की सीढ़ी का
शिखर छू लिए ।
2.
बिना मोटी चमड़ी के
मोटी तोंद
मोटा लाभ
मोटा धन
हो ही नहीं सकता।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551
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मंगलवार/26-3-19
विषय--समाचार/ खबर
विधा---दोहा गीतिका
समाचार है आ गए,अपने देश चुनाव।
रिश्वत पर ये टिक गए, दल नेता बेभाव।।
रुपए किलो अनाज औ कर्ज माफ के बीच।
खबर गरीबों के लिए,बहतर हजार दांव।
बैठे बैठे खाइए,सगरे कर्म फिजूल,
मुफ्त सब कुछ मिल रहा,काम करन क्यों जाव ।
काम शून्य व शून्य प्रगति,जाय भाड़ में देश,
बस सत्ता मिल जाय तो निज संपत्ति बढ़ाव।
जिम्मेदार चुप चुप हैं,खुला रिश्वती खेल,
किसी को बिना काम के,मिले कुछ नहिं ,सुझाव।
जो भी ऐसा कर रहा, वो न 'हितैषी' होय,
ऐसे अवसर को कभी, कोई भुना न पाव।
*****स्वरचित********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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सोमवार/ 25-3-19
अधिकार को अधिकार मानें
कर्तव्य को भूलें
सार्वजनिक संपत्ति को
अपनी समझें
वापरें ले जायँ घर।
सरकारी जमीन पर
अतिक्रमण
अधिकार अपना
कुछ दिन बाद
हो जायेगा नाम
ये सपना।
सरकारी सामग्री
जब तक सेवा में वापरें
सेवा के बाद भी
न लौटाएं।
चुनाव जीतते हो
स्वागत सत्कार को अधिकार मानें
काम करवाना हो तो
ये 'जेब 'का अधिकार है
चमचे समझाते
जेब के हिस्से पर
उनका अधिकार है।
पैतृक प्रॉपर्टी मेरी है
अधिकार मेरा ,पर
माँ बाप का मुझ पर
अधिकार नहीं
ये छोटे पर है
छोटा चाहे तो वृद्धाश्रम है।
बेटी बेटा एक समान
बेटी केसमानअधिकार
ये संसार चाहता है
बदल रहे हैं आसार।
जो कुछ मुफ्त में मिल रहा
उस पर अधिकार है
उसे त्यागने से
सदा इनकार है।
कडुआ कडुआ थू
मीठा मीठा गप्प
यही है अधिकार का पल्प।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी (म.प्र)451551
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सोमवार/ 25-3-19
शीर्षक--फैसला
विधा--मुक्तक
सुबह सुबह का फैसला
सूर्योदय के साथ ।
अगर लोग लेने लगें,
झुके कभी नहिं माथ।
पक्षी कलरव सुबह का,
विटमिन 'डी' मय धूप-
सब मनको हैं मोहते,
बढ़ती सेहत गाथ ।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र ' हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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नमन भावों के मोती
पिरामिड लेखन
विषय --रँगोली
शुक्रवार/22-3 -19
1.
यों
रंग
छिटके
सूर्योदय
रँगोली सजे
आँगन सिरजे
नित दृश्य बदलें।
2.
ये
कला
रँगोली
घर खिले
श्रृंगार सजे
जीवन चमके
हाँ विश्वास दमके।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551
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शीर्षक ----धोखा,विश्वासघात
शुक्रवार/22-3-19
विधा --मुक्तक
विश्वासघात की डगर,
माल कमाया ढेर।
मगर पोल जब खुल गई
लिया पुलिस ने घेर।
लोग विपरीत हो गए,
लई संपत्ति छीन--
विश्वास का पतन हुआ
कोई सुने न टेर।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551

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होली की शुभ कामनाएं
बुधवार/20-3-19
शब्द-होली,फाग,रंग अबीर ,गुलाल
दोहे---
1.
धुलेंडी तथा पंचमी, उड़ते रंग गुलाल।
घर बाहर और सड़क पर, होती खूब धमाल।।
2.
डगर डगर पर बिछ रहा,रंग, अबीर,गुलाल।
आँगन आँगन झूमता,भरे रँगीले ताल।।
3.
होली मस्ती 'फाग'की, गाने का उत्साह।
अधिक से अधिक जोर से,गाकर पाते वाह ।।
4.
बूढ़े बच्चे बन गए, तन पर ढेरों रंग।
झांक झुर्रियों से रही, मन में भरी उमंग ।।
5.
टेसू फुले मन खिले,खिले रसीले अंग ।
तन केसरिया हो गया,मला सजन ने रंग।।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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मंगलवार/ 19--3--19
विधा --काव्य-मुक्तक
1.
परम्परा को छोड़कर, नव धारा का घोष।
सोच समझ करनी करें मिले सफलता तोष।
नव धारा के चयन से,सजते नव आयाम--
सबका जब सहयोग हो,बढ़ जाता है जोश ।
2.
धारा धारा गंग की, होती सदा पवित्र ।
वर्षों जल रहता रखा,होय शुद्ध जस इत्र ।
बड़े शहर की बाढ़ से,हुई अपवित्र धार
स्वयं गन्दगी कर रहे,कैसा हुआ चरित्र ।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551



सोमवार/18-3-19
शीर्षक --चयन
विधा ---मुक्तक
सच व झुठ के बीच में ,सच का चयन मुफीद।
सत्य राह पर जो चलें,शांति भरी हो दीद ।
मिले उपलब्धि झूठ से,थोड़े दिन चल जाय--
सहज मदद सहयोग से,सदा होय तब ईद ।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र ' हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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तिथि-17-3-19
वार--रविवार
विषय---स्वतंत्र--होली
विधा --दोहे
1
होली में गोली लगे, उनकी चितवन यार।
बिना किसी हथियार के करती हैं वो वार ।।
2.
केसरिया वसुधा हुई,मन टेसू की प्रीत ।
हवा बसन्ती डोलती,फागुन की ये रीत ।।
3.
विरहिन बैरी बेबसी,बदला सा संसार।
हिय में हूक उठा रहा,फागुन का व्यवहार।।
4.
बृज बरसाना बाँसुरी, बहकी बहे बयार।
नारी नर को पीटती, ये होली लठ मार ।।
5.
फागुन में गुण बहुत हैं,मन का कारोबार ।
अब' मनोज' बिन देह के,' रति' को रहे पुकार ।।
******स्वरचित*******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551
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नमन भावों के मोती
शुक्रवार/ 15-3-19
विषय --जादू/जादूगर
विधा -- मुक्तक
शब्दों का जादू चले, मन मयूर मुस्काय।
शब्द चयन कारीगरी,सुंदर काव्य बनाय।
शब्द भले बेजान हों,भरें लोक में जान--
पूजित रचनाकार वो,मन को जो हर्षाय।
*******स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451551

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नमन मंच
शीर्षक--करवट
गुरुवार/14-3-19
विधा -दोहा मुक्तक
किस करवट बैठे सखा,ये चुनाव का ऊंट
करोड़पति चुनाव लड़ें,कुछ ही होते ठूंठ।
जीत गए तो ठूंठ भी,हरे हरे हो जायँ--
वादे बड़े बड़े सभी,होते ही हैं झूँठ।
******स्वरचित ********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551

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विषय- वस्त्र,कपड़ा
दिन -बुधवार
दिनांक-13-3-19
विधा - मुक्तक
रोटी,वस्त्र,मकान में ,फँसे देश के लोग।
रुपए किलो अनाज से,पा रोटी का भोग ।
रोज काम अब नहि करें,कभी कभी ही जायँ--
श्रम करना भूले सभी, न्यून वस्त्र उपयोग।
******स्वरचित*********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551
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शीर्षक-रोग,बीमारी,मर्ज
विधा--दोहे
मंगलवार/12-3-19
1.
इम्युनिटी जब घटती,सतत बढ़ें तब रोग ।
दुश्चिंता को त्यागकर,सब कुछ सकते भोग।।
2.
स्वच्छ पेयजल औ हवा,हों शौचघर जरूर।
जीवन हो स्वच्छता का ,रहें रोग भी दूर।।
3.
मिलते नहीं गरीब को ,डॉक्टर व अस्पताल।
करोड़ों होंय खर्च पर,रोगों से बेहाल।।
4.
करते नियमित रूप से,जो ,श्रम या व्यायाम।
अगर दुर्व्यसन से बचें,दूर रोग आयाम ।।
5
प्रेम रोग गर लग गया,बढ़े प्रेम की डोर।
इक तरफ़ा यदि प्रेम हो,कभी न होए भोर।।
6.
असमय मृत्यु व बांझपनधूम्रपान की देन।
हृदय आंख व केंसर,की,बढ़े रोग की चेन।।
7.
सौ ग्राम ताजा दही, रोज ,रोज यदि खायँ।
ग्रीवा धमनी हो सही,हृदय रोग मिट जायँ।।
******स्वरचित *******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551
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शीर्षक --संकल्प/प्रण
दोहे---
1.
इच्छा से संकल्प बड़, करे दूर व्यवधान।
द्वार सफलता पहुंचना, हो जाता आसान ।।
2.
सपने बिन संकल्प के , हो सकते बेकार।
सपनों से प्रयास मिले, मनचाही हो धार।।
3.
पाना हो गर सफलता,बन सकते सब दक्ष।
करें संकल्प भी बड़ा,रखें सफलता लक्ष।।
4.
पति पत्नी संबन्ध हैं,ज्यों फूलों में इत्र।
प्यार,संकल्प, नेहमय,सबसे अधिक पवित्र।।
5.
आत्मजीवी व्यक्ति सदा,अलग दिखे संसार।
करे व्यक्ति संकल्प तो,हो अधर्म संहार ।।
*********स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451-551
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आज का शीर्षक----- चोट,वार, प्रहार
शुक्रवार/22-2-19
१.
डरा डरा दुश्मन उधर,इधर सैन्य तैयार।
देश समर्थन दे रहा, सही समय दरकार।
अस्त्र शस्त्र से लैस हैं, भारत वीर जवान -
बहुत हुई चेतावनी, अब हो युद्ध प्रहार ।
२.
आय तिरंगे में लिपट,भारत माँ के वीर।
रक्षा में निज राष्ट्र की,हुआ शहीद शरीर।
कृतज्ञ राष्ट्र युँ दे रहा,इज्जत जय जयकार-
आतंकी टोली दिखे, कर प्रहार दें चीर।
***********************
प्रबोध मिश्र ' हितैषी ' बड़वानी(म.प्र)451551
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आज का विषय-उजाला/उजास
गुरुवार/21-2-19
विधा --मुक्तक
त्याग और विश्वास से, जीवन पाय उजास।
मातृभूमि के हित जिए, बन जाता वो खास।
सीमा पर जवान सदा , हौसले से बुलन्द-
रक्षा करते देश की , अर्पित इक इक श्वास।
******स्वरचित*********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451-551

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मंगलवार/19-2-19
अंत आतंकवाद का, करे विश्व ये चाह।
सभी देश मिल साथ में, उसको करें तबाह।
जितनी ज्यादा देर हो, उतना हो विस्तार--
आतंकवाद की खुली,निकले पूरी आह।
*****स्वरचित********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551
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दिनांक-12-2-19
दिवस-मंगलवार
शीर्षक -लौ
जन गण मन की मदद को जले लौ लगातार ।
धन की गगरी हो भरी, करें सतत उपकार।
रोटी,वस्त्र,मकान से,जितना ज्यादा द्रव्य--
अन्यों के हित में लगे, यही सौख्य आधार ।
*****स्वरचित*********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551
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सादर नमन भावों के मोती
वर्ण पिरामिड ,विषय-चांद, मयंक,सुधाकर,निशापति, शशांक
1.
ये
चंद्र
उदित
शीतलता
पूनो को भाता
प्रकाश लुटाता
नव जोड़ा हर्षाता।
2.
भू
ग्रह
मयंक
उपग्रह
सूर्य प्रकाश
कर्ज से उदास
शीतल हुआ खास।
3.
ये
चंद्र
कलाएँ
ललचाएं
अलग रूप
रोशनी अनूप
शीतलता है भूप।
********स्वरचित*******
बड़वानी (म.प्र.)451551
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गुरुवार/14-3-19
विधा -दोहा मुक्तक

किस करवट बैठे सखा,ये चुनाव का ऊंट
करोड़पति चुनाव लड़ें,कुछ ही होते ठूंठ।
जीत गए तो ठूंठ भी,हरे हरे हो जायँ--
वादे बड़े बड़े सभी,होते ही हैं झूँठ।
******स्वरचित ********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551
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दिन -बुधवार
दिनांक-13-3-19
विधा - मुक्तक
रोटी,वस्त्र,मकान में ,फँसे देश के लोग।
रुपए किलो अनाज से,पा रोटी का भोग ।
रोज काम अब नहि करें,कभी कभी ही जायँ--
श्रम करना भूले सभी, न्यून वस्त्र उपयोग।
******स्वरचित*********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551
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शीर्षक-रोग,बीमारी,मर्ज
विधा--दोहे
मंगलवार/12-3-19
1.
इम्युनिटी जब घटती,सतत बढ़ें तब रोग ।
दुश्चिंता को त्यागकर,सब कुछ सकते भोग।।
2.
स्वच्छ पेयजल औ हवा,हों शौचघर जरूर।
जीवन हो स्वच्छता का ,रहें रोग भी दूर।।
3.
मिलते नहीं गरीब को ,डॉक्टर व अस्पताल।
करोड़ों होंय खर्च पर,रोगों से बेहाल।।
4.
करते नियमित रूप से,जो ,श्रम या व्यायाम।
अगर दुर्व्यसन से बचें,दूर रोग आयाम ।।
5
प्रेम रोग गर लग गया,बढ़े प्रेम की डोर।
इक तरफ़ा यदि प्रेम हो,कभी न होए भोर।।
6.
असमय मृत्यु व बांझपनधूम्रपान की देन।
हृदय आंख व केंसर,की,बढ़े रोग की चेन।।
7.
सौ ग्राम ताजा दही, रोज ,रोज यदि खायँ।
ग्रीवा धमनी हो सही,हृदय रोग मिट जायँ।।
******स्वरचित *******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
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शीर्षक --संकल्प/प्रण
दोहे---
1.
इच्छा से संकल्प बड़, करे दूर व्यवधान।
द्वार सफलता पहुंचना, हो जाता आसान ।।
2.
सपने बिन संकल्प के , हो सकते बेकार।
सपनों से प्रयास मिले, मनचाही हो धार।।
3.
पाना हो गर सफलता,बन सकते सब दक्ष।
करें संकल्प भी बड़ा,रखें सफलता लक्ष।।
4.
पति पत्नी संबन्ध हैं,ज्यों फूलों में इत्र।
प्यार,संकल्प, नेहमय,सबसे अधिक पवित्र।।
5.
आत्मजीवी व्यक्ति सदा,अलग दिखे संसार।
करे व्यक्ति संकल्प तो,हो अधर्म संहार ।।
*********स्वरचित******
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451-551
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आज का शीर्षक----- चोट,वार, प्रहार
शुक्रवार/22-2-19
१.
डरा डरा दुश्मन उधर,इधर सैन्य तैयार।
देश समर्थन दे रहा, सही समय दरकार।
अस्त्र शस्त्र से लैस हैं, भारत वीर जवान -
बहुत हुई चेतावनी, अब हो युद्ध प्रहार ।
२.
आय तिरंगे में लिपट,भारत माँ के वीर।
रक्षा में निज राष्ट्र की,हुआ शहीद शरीर।
कृतज्ञ राष्ट्र युँ दे रहा,इज्जत जय जयकार-
आतंकी टोली दिखे, कर प्रहार दें चीर।
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प्रबोध मिश्र ' हितैषी ' बड़वानी(म.प्र)451551
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आज का विषय-उजाला/उजास
गुरुवार/21-2-19
विधा --मुक्तक
त्याग और विश्वास से, जीवन पाय उजास।
मातृभूमि के हित जिए, बन जाता वो खास।
सीमा पर जवान सदा , हौसले से बुलन्द-
रक्षा करते देश की , अर्पित इक इक श्वास।
******स्वरचित*********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र.)451-551


दिनांक-12-2-19
दिवस-मंगलवार
शीर्षक -लौ
जन गण मन की मदद को जले लौ लगातार ।
धन की गगरी हो भरी, करें सतत उपकार।
रोटी,वस्त्र,मकान से,जितना ज्यादा द्रव्य--
अन्यों के हित में लगे, यही सौख्य आधार ।
*****स्वरचित*********
प्रबोध मिश्र 'हितैषी'
बड़वानी(म.प्र)451-551
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सादर नमन भावों के मोती
वर्ण पिरामिड ,विषय-चांद, मयंक,सुधाकर,निशापति, शशांक
1.
ये
चंद्र
उदित
शीतलता
पूनो को भाता
प्रकाश लुटाता
नव जोड़ा हर्षाता।
2.
भू
ग्रह
मयंक
उपग्रह
सूर्य प्रकाश
कर्ज से उदास
शीतल हुआ खास।
3.
ये
चंद्र
कलाएँ
ललचाएं
अलग रूप
रोशनी अनूप
शीतलता है भूप।
********स्वरचित*******
बड़वानी (म.प्र.)451551

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"भाषा"19 जुलाई 2019

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