"बच्चों की डायरी"



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नाम - तनिष्का सक्सेना

कक्षा - 10

राम- ईश इंटरनेशनल स्कूल

ग्रेटर नोएडा


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सार्थक के द्वारा बनाया गया रोबोट- कक्षा-8


सार्थक का एतिहासिक सिक्कों का संग्रह


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रागिनी शास्त्री -मेरे पोते ने खुद ही बनाया गया चित्र.....
नाम:-,कर्मण्य अभिषेक शास्त्री
कक्षा:-* २ *
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गायत्री बिष्ट 
कक्षा :- दूसरी 
रचना का विषय :- मेरी माँ


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सार्थक ,कक्षा-8/रेखा रवि दत्त 

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रूपम चाष्टा 8 class/ सुनील चाष्टा 

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तनिष्का सक्सेना 
कक्षा 11
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मिताली शर्मा/सुधी शर्मा 
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मेरी भतीजी वैष्णवी द्वारा बनाई गई पेन्टिंग/सर्वेश पाण्डेय 

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मेरे पुत्र Shreshth Madaan द्वारा लिखी गई कविता।/ज्योति मदान 
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मेरी बिटिया मोक्षिमा की लेखनी से...
"तुलसी रंगत" ई पत्रिका में नवांकुर" होने का गौरव
पिछले वर्ष जब वो 7th में थी/तृप्ति नेमा मेहुले 
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ये चित्र मेरी बेटी मेधावी कुकरेती, कक्षा 8,ऐन मेरी स्कूल, देहरादून... द्वारा बनाया गया है!/संगीता जोशी कुकरेती 

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मेरी बेटी सृष्टि द्वारा निर्मित painting .
मेरी बेटी को reading, paintings, listening to music and plying guitar का शौक है l/बी के शोभा जी 
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अवनींद्र मधुरेश, कक्षा - 11/रेनू रंजन जी 
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Meri bitiya Shambhavi ki banayi painting/सर्वेश पाण्डेय जी 

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यह मेरी बेटी की बनाई हुई चित्र प्रेषित कर रही हूँ।

नाम-उदिता भकत
कक्षा-4
9साल/शावर भक्त 







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मन भावों के मोती । इसके अंतर्गत मेरा पुत्र अवनींद्र मधुरेश गिरी द्वारा रचित एक कविता पोस्ट कर रही हूं । आप सभी गुणी जनों से अनुग्रह है कि वो अपना स्नेहाषीश दें ताकि इसकी भी साहित्यिक यात्रा अनवरत चलती रहे।

गुरुदक्षिणा 

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हाथ पकड़ लिखना सिखलाया
डांट-डपट समझाया है,
हर गलती पर डांट पिलायी 
पकड़ कान बतलाया है।
बौद्धिक क्षमता को जिसने
घिस-घिसकर 
चमकाया है, 
हर डांट-फटकार से जिसने
रास्ता सही दिखलाया है। 
होने को अमर किताबों में 
बार-बार उकसाया है, 
नन्हे-से कोमल करों को जिसने
पत्थर-सा कड़ा बनाया है 
जिसने तोतली बोली को 
ज्ञान का रस पिलाया है, 
शिष्यों को सही राह देकर
अपनी पहचान बताया है।
चाहे नहीं ओ बंगला गाड़ी 
गुरुदक्षिणा रूप में, 
चाहा है छोटा उजियारा 
अपने मन के कूप में।
हर गुरु की चाह एक ही 
बने मेरा शिष्य महान, 
अपनाकर मेरे सद्गुणों को 
बढ़ाए मेरी मान।
चाहे, हर पल बढ़े हमेशा 
पलकों से मुझे हटाए बिना, 
व्यर्थ ही डूबे हो सोच में क्यूँ तुम 
यही है गुरु की गुरुदक्षिणा।
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-- अवनींद्र मधुरेश गिरी
कक्षा-11
राकेश निकेतन 
नरगी जीवनाथ 
मुजफ्फरपुर, बिहार 
843123

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मेरी बिटिया नेहा द्वारा कक्षा 9th में बनाया गया चित्र ।।/सुलोचना सिंह 



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मेरी बेटी शाम्भवी द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर बनाया गया चित्र/सर्वेश पाण्डेय जी 


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मेरे बेटे द्वारा बनाया गया पेपर कॉलाज/रेखा रवि दत्त 


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मेरी आँखों की हिरनी,उर की सहेली मेरी प्यारी प्यारी पोती *मनुश्री अनिमेष शास्त्री *उम्र ६वर्ष, 
"चिन्मय मिशन अहमदाबाद "के तत्वाधान में श्रीमदभगवद्गीता कंंठ्य पाठ प्रतियोगिता के अंतरगत प्रथम स्थान प्राप्त किया। अष्टादशो अध्याय के अंतिम १३श्लोक का पाठ किया गया,,,,,/रागिनी शास्त्री जी 


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नमनशारदे 
मेरी बेटी मनोकृति पंत द्वारा बनाया गया पांडा स्केच 
कक्षा 12/कुसुम पन्त 



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दिनांक ,17/10/2018
माँ, का नाम हेमा जोशी

पडित ,रीपुन्जय हेमा जोशी
कक्षा , प्रथम, उम्र पाँच साल 
पंडित रीपुन्जय जोशी दो साल की उम्र से भागवत जागरण मे सभी का मन मोह २हे है 
आज रीपुन्जय जोशी जी ने विंधेश्वरी स्त्रोत सुनाया भागवत में, आप सभी गुरूजन उसे आशीष दे की वो ऐसे ही आगे बढता रहे 🙏🙏🙏🙏



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मेरी छात्रा मानसी, कक्षा 8 द्वारा लिखी पहली कविता।/रेखा रवि दत्त जी 



मेरी छात्रा भूमिका कक्षा 8 द्वारा लिखी प्रथम कविता।/रेखा रवि दत्त जी 


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हमारे शिष्य vansh kashyap द्वारा बनाया गया/अनिल कुमार निश्छल 


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आप सभी को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई...ये रंगोली मेरी बेटी ने बनाई/पथिक रचना 



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मेरी बेटी मनोकृति पंत द्वारा बनाई गयी रंगोली
कक्षा 12




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रेनू रंजन 

मेरे पुत्र अवनींद्र मधुरेश गिरी द्वारा रचित रचना --

नमामि गंगे

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नमन तुझे 
हे पतित पावनी
जीवों की 
जीवन प्रदायिणी। 

तुझसे ही 
माँ भारती हर्षित 
कल कल राग से 
पथिक हो भ्रमित। 

तेरी कृपा हुई 
जगत पर 
भू पधारी, खुश हो 
भगीरथ पर ।

भारत देश की 
हे उद्धारिणी
जय गंगे जय जय 
दुख हारिणी।

तेरी ममता 
निश्छल सब पर 
हरियाली भारत में
तृण-तृण पर। 

तुझसे ही नर-नारी 
होते निर्मल 
पाप बिसर 
बन जाते निश्छल।

गर्व है हिंद को 
तुझ पर माता 
भक्त जगत से 
तुझ तट आता। 

स्पर्श से होता 
निर्मल काया 
नमामि गंगे 
अद्भुत माया।

----- गोस्वामी अवनींद्र मधुरेश गिरि 
राकेश निकेतन
मुजफ्फरपुर 
बिहार, 843123 

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ये चित्र मेरी बेटी ने बनाया है|
नाम-मेधावी कुकरेती
कक्षा- 8
स्कूल-ऐन मेरी (देहरादून)



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वीणा शर्मा वशिष्ठ ...प्रिय मित्रों,वन्दन।
Renu Ranjan जी के पुत्र अवनींद्र जी की कविता "गुरु दक्षिणा"आज अभिनव बालमन में प्रकाशित हुई।
हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ आप दोनो को।🙌🙌🙌🌹💐🌹🍩🍩
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मेरे छ(6)वर्षीय पुत्र रिद्धिमान द्वारा फ्री हैंड ड्राइंग


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रिद्धिमान 6 वर्ष द्वारा ब्लॉक्स से बनाई हॉर्स कार्ट


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मेरी बेटी काव्या (क्लास 1) द्वारा बनाया गया सेब का पेड़/मंजूषा श्रीवास्तव जी 


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तीन रचनाएँ बालपत्रिका में प्रकाशित।👏👏आ0 ,राजेन्द्र कुमार जी के सुपुत्र चिरंजीवी गणेश जी को हार्दिक बधाई।आ0 अरुण वशिष्ठ जी की पुत्री सोनाक्षी वशिष्ठ व आ0 गिरीश शर्मा जी की पुत्री तमन्ना शर्मा को हार्दिक बधाई🎂🎂🎂
यहाँ पुनः प्रेषित करने का कारण यही है कि बच्चों की डायरी से चयनित की गई है अतः इस जगह प्रेषित होना आव
श्यक।🙏वीणा शर्मा वशिष्ठ 
वीणा शर्मा वशिष्ठ ..



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मेरे बेटे मुकुल गर्ग ने ये कविता 8 वर्ष की आयु में लिखी थी अभी इसी महीने वो 10 वर्ष का हुआ है।/सविता गर्ग 

क्यूँ मारते हो बेटियों को 

मुझको भी बता दो
एक जनम मिलता है 
खेलते हँसते गुज़ार लो 
इतनी मुश्किल से मिलती हैं 
भाइयों को बहने 
बड़ी क़िस्मत से मिलती हैं 
भाइयों को बहने 
बड़ी होकर चली जाती हैं 
दूसरे घर 
छोड़ जाती हैं अपने पीछे 
अपनी प्यारी प्यारी यादें 
इन बेटियों को थोड़ा प्यार दो
एक जनम मिलता है 
हँसते खेलते गुज़ार लो ।

नाम - मुकुल गर्ग
कक्षा- पांचवी
डी सी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पंचकूला (हरियाणा)


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मेरा बेटा राहुल रावत आयु 11 वर्ष/कृष्ण सिंह रावत 




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मेरे साढ़े तीन साल के बेटे नमन द्वारा इस चित्र में रंग भरा गया है/मुन्नी कामत 


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ये चित्रकारी मेरी बेटी मेधावी कुकरेती ने आज घर के स्वीच बोर्ड पर की 😊


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मेरे बेटे मनोकुन्ज के द्वारा plain पृष्ठ पर बनाई गई 3D
Figure.. कक्षा 10/कुसुम पन्त 



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मेरी 3 साल की नातिन आसवी पुणे ने बनाई यह पेटिंग/संतोष श्रीवास्तव 



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मेरी खुशियों की कुंजी मेरी प्यारी बेटी हृतिका निवातिया द्वारा चित्रित कलाकृति में बाल गोपाल को दर्शाती सुन्दर छवि/डी के निवातिया जी 


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मेरे पोते ने एक साल पहले मुझे लिखते देख कर एक कविता लिखी। अभी वो 13 साल का होने को है।/कुसुम कोठारी 
श्लोक कोठारी 
कक्षा आठ

मुम्बई।

दोस्त होते बड़े प्यारे
बहुत अच्छे और न्यारे
साथ देते वे हरदम
आने देते न कोई गम
अगर दोस्ती मे होती लड़ाई
हम फिर बन जाते भाई भाई
अगर दोस्तों मे प्यार न होता
जीवन खाली खाली होता।

श्लोक कोठारी।

अयान मेरा पोता

साड़े तीन साल
पेंटिग।




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"भावों के मोती"साहित्यिक समूह की ओर से 
भावी नन्हे - मुन्ने रचनाकारों को हार्दिक बधाई👏👏🍩🍫🍰🍩🍫🍰।प्रिय मुकुल गर्ग पुत्र आ0 Savitagarg Garg जी एवं प्रिय युवराज बिष्ट पुत्र आ0 Rita Bisht जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ,आपकी रचनाएँ पत्रिका अभिनव बालमन में प्रकाशित हो चुकी है।।आशा करते है आप दोनों तक पत्रिका पहुँच चुकी होगी। 

सभी बच्चों की रचनाओं का समूह के "बच्चों की डायरी" में हार्दिक स्वागत है।

वीणा शर्मा वशिष्ठ ..





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सुबह का सूरज 

सुबह-सुबह सूरज की किरणें नभ में छा जाती 

चीं चीं की धुन पर चिड़िया अपना मीठा गीत सुनाती .

सुबह का नजारा लगता हैं प्यारा 
जिसमें खुशियाँ बाँटता हैं संसार सारा.

रात की हो गई हैं अब विदाई 
सूरज की किरणों ने अँधेरा दूर कर रोशनी फैलाई .

देखो किसान की फसल खेतों में लहलहाई 
पेड़ पौधों और पंछियों ने सूरज की किरणों के संग खुशियाँ मनाई .

देखो सूरज ने नभ में रंग-बिरंगी रोशनी फैलाई 
धरती और गगन ने भी मिलकर ले ली हैं खुशियों
की अंगड़ाई.

ब्रहमांड में हैं कई ज़रूरी हिस्से 
उन सब में सूरज दादा के कई किस्से .

दिन भर लुका-छिपी करता हैं सूरज बादलों के संग 
साँझ होते ही ढल जाता हैं सूरज नील गगन .

हर दिन उदय होता हैं सूरज नील गगन में 
संग अपने नवीन ऊर्जा देता हैं सबके जीवन में .

सूरज दादा ने हम पर किये कई परोप्रकार 
सूरज दादा ने हम पर किये कई उपकार .

आओ सूरज के संग करें दिन की शुरुवात 
सबके जीवन में लायें खुशियों की बरसात .
स्वरचित:- युवराज बिष्ट 
Son of रीता बिष्ट
कक्षा :- सातवीं
स्कूल :- रेड रोजेज पब्लिक स्कूल 
दिल्ली .


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मेरे बेटे मुकुल गर्ग ने ये कविता 8 वर्ष की आयु में लिखी थी अभी इसी महीने वो 10 वर्ष का हुआ है।

क्यूँ मारते हो बेटियों को 
मुझको भी बता दो
एक जनम मिलता है 
खेलते हँसते गुज़ार लो 
इतनी मुश्किल से मिलती हैं 
भाइयों को बहने 
बड़ी क़िस्मत से मिलती हैं 
भाइयों को बहने 
बड़ी होकर चली जाती हैं 
दूसरे घर 
छोड़ जाती हैं अपने पीछे 
अपनी प्यारी प्यारी यादें 
इन बेटियों को थोड़ा प्यार दो
एक जनम मिलता है 
हँसते खेलते गुज़ार लो ।

नाम - मुकुल गर्ग
कक्षा- पांचवी
डी सी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पंचकूला (हरियाणा)


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मग करते चाँद सितारे ,सबको लगते कितने प्यारे।

रोज शाम को लिए चांदनी ,हँसते रहते नील गगन में।
ओढ़ काली रात का चादर ,चाँद उतर आया आंगन में।
ये प्रहरी बनकर जगते है ,जब सोते #धरती पर सारे।
जग-मग करते चाँद सितारे ……

ऊँच-नीच औ” जाति – पाति का ,नहीं जानता भेद भाव यह।
अमीर-गरीब का फर्क नहीं ,सबसे मिलता प्रेम-भाव यह।
ठिठुरते सर्द रातों में भी , हँसकर आते सबके द्वारे।
जग-मग करते चाँद सितारे ……

आओ नौनिहाल के मामा, सिलवा दूँगी सुंदर जामा।
दूर सफर पर लेकर जाना ,मिलकर करेंगे हंगामा।
जीवन के सपनों से वंचित ,दिखला देना सुखद नजारे।
जग-मग करते चाँद सितारे ,सबको लगते कितने प्यारे।
मग करते चाँद सितारे ,सबको लगते कितने प्यारे।

वेधा सिंह
कक्षा-छठी







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"मुलाक़ात "19अगस्त 2019

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