सत्य प्रकाश सिंह




लेखक परिचय 
सत्य प्रकाश सिंह आत्मज स्वर्गीय मोती लाल सिंह भार्या श्रीमती डॉ अंजना सिंह ईश्वर शरण बालिका इंटर कॉलेज प्रयागराज। सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज

सत्य प्रकाश सिंह आत्मज स्वर्गीय मोती लाल सिंह भार्या श्रीमती डॉ अंजना सिंह ईश्वर शरण बालिका इंटर कॉलेज प्रयागराज। सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज

गृह जनपद मिर्जापुर उत्तर प्रदेश
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नमन -भावों के मोती माँ शारदे को प्रणाम दिनांक-30/05/2019 कलम से आज लिख दूं अंगार.. बागी एक सितारा हूँ। किसी के आहो का आवारा हूँ। कलम क्यों उगलती आज आग। अक्षर से ही बनते चिंगारी। हरदम जलते नभ में शोले बादल बनते बिजली के क्यारी। क्यों ही जलती सदैव अतुल्य भारत की हर नारी। जिसके नयनों में दीपक जलते करुण क्रंदन पे विश्व हँसते। सांसो से झरता स्वप्न पराग। मन में भरा एक उश्चवास। हँस के उठते पल में आद्र नयन। छा जाता जीवन में एक बसंत। लुट जाता संचित अनुराग। यह नहीं है जीवन ऋतुराज। है यह एक घोर अवसाद........? स्वरचित सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज
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अंतर्मन की निश्चलता...का आगाज किसके सम्मोहन में पागल धरती मदहोश आकाश है।। जीवन संघर्षों के पृष्ठभूमि में आज ओशो का संन्यास है।। अंतर्द्वंद के निश्चलता में चंचल मन एक मधुमास है।। भूख की धूप सलोनी हो मधुर -मधुर मकरंद आगाज है।। आंखों में है सुर्ख शोले तड़प लेखनी का सहवास है।। कागज का दर्द किससे कहै स्याही भी आज उदास है।। ब्रह्म का दर्शन कब मिले वेदांत शंकर का अंतर्नाद है।। ध्यान के धुन को मन में बसाये जमीन की जन्नत बर्बाद है।। स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित@#1 सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज
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सत्य प्रकाश सिंह कैसे विद्यापीठ इंटर कॉलेज. नमन -भावो के मोती 20/05/2019 बेकरार........। क्यों लौ लड़खड़ा रही है ये इस मजार की। जरूर ये कब्र है किसी बेकरार की।। सिसकता चांद ,प्यासा कवि उम्र भर की एक उदासी रह गई बरकरार।। एक कशिश दबी रह गई दिल में गुमनाम रंजिश के द्वार।। किससे शिकवा मैं करूं किस पे करूं एतबार।। जो चराग बुझ गये बेताबी में कब तक करूं मैं इंतजार।। स्वरचित सर्वाधिक सुरक्षित सती प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कालेज प्रयागराज

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चित्र लेखन दिनांक-12/05/2019 जंगलों में बसी निरक्षर आदिवासी माँ- विस्थापन की त्रासदी तन के भूगोल इतिहास के गलियारों में सांद्र मादकता को लिए जिनके पास भूख है। भूख में दूर-दूर तक पसरी उबड़ -खाबड़ धरती है । सपने हैं..... सपनों का पीछा करते हुये.... आंखों से मेघा बरसे प्यार पालकी की को तरसे गोद तुम्हारा सिंहासन राजा बन कर उस पर बैठे। ममता के स्पर्शो को छुये राम राज्य के लुटेरे। एक अंधेरा बड़ा घना है कालीमा रात के डर से। एक ललक है तूफान की एक फलक है म्यान की ढूंढ रही हू मै स्वर्णिम ऊषा की लाली आंचल मेरा श्रम की है मृदुल थाली।। स्वरचित सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज
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दिनांक-02/06/2019

अधिकारों के आधार पर 

स्वतंत्रता की बदली कब बरसेगी..........

हृदय फूल की पंखुड़ियों पर 

कर्तव्य बिंदु बनकर कब छलकेगी।

मूक हृदय के स्पंदन में 

अस्तित्वों की ज्वाला कब धधकेगी।

युगो-युगो की सुप्त वेदना 

अधरों की लहरों पर कब थिरकेगी।

अनुभूति व्यक्त हुई स्नेहिल

गीली आंखों से ,आंसू कब ढलकेगी।

सारे स्नेहिल सत्य हुए यदि

उल्का बनकर टूट- टूट कर कब चमकेगी।।

आशाओं का धवल श्रृंगार बनकर

निर्मोही पाषाणी छाती पर

गंगा बनकर कब निकलेगी।

पीकर सब आनंद मौन हूँ

रजनी के अंगों पर..............

स्वरचित 
मौलिक रचना
सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयाग राज
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सुगंध सुमनो की

मुरझाए पराग

फूल उपेक्षित क्यों फूला

महक जाती उर में आग

दोनों ओर प्रेम पलता

पतित पतंगा भी जलता

शीश हिलाकर दीपक कहता

है कितनी विह्वलता

हाय कितना करुण साथ 

पथ में विछ जाते पराग

यह अनुराग भरा उन्माद

घुल जाती होठों से विषाद

लुट जाता संचित विराग

कैसा है यह तेरा साथ..।

स्वरचित सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज

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विषय- परिवर्तन

टूटी कड़िया ,आंसू लड़ियां

मांग रही हैं परिवर्तन।।

भूखी रातें ,नंगे तन

मांगे रहे है परिवर्तन।।

सत्ता करे तांडव नर्तन........

कब्र शहीदों की मांगे परिवर्तन

कफन में लपेटे उनके तन।।

नारी मांगे परिवर्तन

सत्ता करें करुण क्रंदन।।

राम रहीम की धरती मांगे परिवर्तन

ये काबा ये काशी है उत्थान पतन।।

नारी रोये व्याकुल मन, नयनों से गिरे अंजन

नंगे तन के जादूगर नोचें तन

देखो उस बेवा के माथे की शिकन।।

समाज के सूदखोर करें अनंत धन गर्जन।।

कांप उठी सागर की लहरें

संस्कृति मांगे परिवर्तन।।

गली दलितों की मांगे परिवर्तन

भूख के एहसास को ओढ़े

नंगे तन, मौन मन।।

स्वर मांगे परिवर्तन

धुआं उठे आग जले

कब होगा परिवर्तन.....

सर्प उठावे सहस्त्र फन

कुचल ना पावे में मौन मन

कब होगा इनका नियमन

कब होगा परिवर्तन.....

आओ अब करें कीर्ति कुसुम का हम चयन.

कब होगा परिवर्तन...

प्रवह मान जीवन निवर्तन..

मौलिक रचना
स्वरचित
सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज
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दिनांक-२६/०६/२०१९

विषय- इंद्रधनुष

मोती जैसा चमक रहा है

इंद्रधनुष के अग्रभाग का प्यारा प्याला।

फिर जग में फैल रहा

दांडिम रंग का लाल उजाला।

शून्य गगन में कोलाहल कर 

आगे बढ़ता खग दल।।

इंद्रधनुष के स्वागत को

सहसा महक उठता कमल दल।।

ये मदमस्त नजारा लगता है

सूर्योदय के अरुणोदय का।।

तब धरा से नाता जुड़ता

स्वर्णिम सतरंगी डोरो का।।

खेलने लगी इंद्रधनुष की किरणें

जल की चंचल लहरों से।।

धरती सजने लगी

इंद्रधनुष के सतरंगी रंगों से।।

इसे देखकर चमक उठे

हंसो के दल प्यारे।।

सतरंगी सूर्य स्यंदन चमक रहे 

नदियों के किनारे।।

एक नन्ही कली भी बाट देख रही

इंद्रधनुष के उजाले की।।

मन उद्वेलित होता मधुरस

प्रभाकिरन के आने से।।

स्वरचित...
सत्य प्रकाश सिंह
प्रयागराज
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दिनांक-२८/०६/२०१९

विषय- जनतंत्र

जनतंत्र के पक्ष में...

जनतंत्र का पावन कुंभ लगे

पांच साल में एक बार।।

जनतंत्र को बना दे जन्नत

त्याज करे कुत्सुत विचार।।

संसद के देवालय में एक दीप जला ले

पूजे हम संसद के देवों को

स्वर्णिम रश्मियों से देश सजा ले।।

आओ करे विराट जनतंत्र का श्रृंगार।

जनता के जनतंत्र का असिंचित प्यार।।

जनतंत्र का पावन मंदिर, देवों का उपहार।

पाँच साल में पावन पर्व आये सिर्फ एक बार।।

जनतंत्र के विपक्ष में...

प्रलय मची है चहुँओर हाहाकार

लोहे के पेड़ भी हरे होंगे

नेता कहते बारंबार बारंबार

आकाश से गिरे उल्का अंगार

सत्य ,अहिंसा मौन खड़ा है

घनघोर हैं संकट के द्वार।।

कुछ के लाभ के लिए

बहुतों का पागलपन ...लिये

अभिजन वर्ग का ही हो उद्धार।

गरीब के सपनों का संहार।।

मंत्री जी पढ़े मूल मंत्र

तनिक भी ना सुधरे जनतंत्र

श्वानों को मिलते दूध

अभागे बच्चे अकुलाते भूख

मालिक देते ब्याज व सूद

पापी महलों का अहंकार देखो

जनतंत्र के मूल्य का प्यार देखो

जनतंत्र के ललाट चंदन को

कैसे मैं नमन करू।

हे भारत देश तेरा गरल फिर भी मैं वमन करूं।।

मौलिक रचना

सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज


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दिनांक-२२/०६/२०१९
विषय-सबूत

ए कबूतर जरा संँभल के चल

देखता अब तुझे शिकारी है

 उस किस्मत को दाद देता हूं

 जुल्फ जिसने तेरी सँवारी है ।।

सब बताता है नूर चेहरे का 

रात तुमने कहां गुजारी है।।

  हिज्र में बह गए अश्क सब 

अब तक वह नदी तो खारी है।।

स्वरचित 

सत्य प्रकाश सिंह प्रयागराज

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नमन -भावों के मोती
दिनांक-२०/०६/२०१९
विषय- दर्पण

तमाम उम्र मैं गुनाह करता रहा

धूल तो मेरे चेहरे पर थी

मैं आईने को साफ करता रहा।

खुदा का बंदा हूं मैं.....

तमाम उम्र नेक काम करता रहा

उम्र बीत गई ,  मैं खुदा से डरता रहा

मैं आईने को साफ करता रहा....
स्वरचित 
सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज


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नमन-मंच को
दिनांक-१८/०६/२०१९

पदक का आगाज........

पड़ी है मन के भीतर 

एक सुषुप्त आवाज़।

आतुर है  सच को जानने

कैसा है यह मौन आभास।

चाहत है मन के अंदर

जीत जाऊं पदक मैं एक आज।

इस आस की मिट्टी लेकर मैं

मैं आशा के दिये बनाता।

देश के लिए जीतता मैं पदक......

कब सजेगी पदकों की बारात  ?

घर-घर दीप जलेगा

 देश को रहेगा हम पे नाज।

स्वरचित
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नमन-भावो के मोती

दिनांक-१७/०६/२०१९

विषय-नीयत

जिसकी इतनी क्रूर नियत हो।

 भूख   की  अंतिम दुर्गत हो।।

स्थापन अनिश्चित/ विस्थापन सुनिश्चित

पवित्रता में/ प्रदूषण

रक्षण के घर मे/ रावण का भक्षण

एक हाथ/ जो हाथ नहीं है / हाथ होने का आभास

खामोशी भरी दीवार /जहां चाहा कील गाड़ दिया

ठंडा है /चूल्हा

अनुपस्थित है/ धुआँ

खामोश है/ बर्तन

कैसे हो परिवार/ का जतन

भड़की है /भूखी आग

जब शुष्क है/ सुखी आँत

कैसे बीते/ सुनी रात

गीला आटा /खोखली जाँत

फिर भी धरित्री के धैर्य को/ धारण
 किए हैं....??????

स्वरचित
सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज
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नमन-मंच को
दिनांक-११/०६/२०१९
विषय-घर

घर हो एक अपना

अपना यही हो सपना।।

घर प्रांगण के अँगना

उमंग उत्सव  से सजते नयना।।

अपना यही हो सपना......

नन्हे मुन्ने की किलकारी हो गूँजना

रश्मियों से द्वार सजे ,मेरे घर अंगना।।

अपना यही वो सपना........

 खुशियों का अंबार हो

तम का कभी ना प्रहार हो

प्रतिपल एक दीप जले

मेरे घर अंगना.....

नेह के दीपक ,प्रेम के बाती

से सजा ले घर अपना....

अपना यही हो ,बस एक सपना

स्वरचित
 सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज


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नमन मंच को....

मंगल दीप जले अंबर में

स्वर्णिम रश्मियों से द्वार सजा ले।।

प्रेम के दीपक नेह के बाती

शीश महल का ख्वाब सजा ले।।

भोर के दुल्हन का दर्शन कर

नृत्य नयन से घर बना ले।।

सन्नाटो की यादों में

उज्जवल मोतियों का घर सजा ले।

चांद की चांदनी को छोड़कर

सूरज जैसा घर बना ले....

स्वरचित सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज


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"भाषा"19 जुलाई 2019

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