शिवेन्द्र सिंह चौहान(सरल)




"लेखक परिचय"
1 नाम:- शिवेन्द्र सिंह चौहान 2 उपनाम :- सरल 3 जन्मतिथि :- एक सितंबर 4 जन्मस्थान :- इटावा उ. प्र. 5 शिक्षा :-एम एस सी(फिजिक्स) एम ए (हिन्दी) एम ए (इतिहास) बी एड 6 सृजन की विधाएं :- कविता, दोहा ,मुक्तक, 7 काव्य पुंज साझा संग्रह 8 सम्मान (क) साहित्य शारदा मंच द्वारा दोहा शिरोमणि की मानक उपाधि (ख)उड़ान साहित्य समूह द्वारा आयोजित सर्वश्रेष्ठ शब्द युग्म रचनाकार सम्मान (ग)भावों के मोती साहित्यिक समूह द्वारा विभिन्न काव्य विधा में द्वितीय, तृतीय स्थान (घ)काव्यांचल समूह द्वारा काव्य कुमुद सम्मान (च) अटल काव्यांजलि समूह द्वारा विभिन्न सहभागिता प्रमाणपत्र (छ)साहित्य संगम संस्थान द्वारा दोहाविज्ञ सम्मान,साहित्य कदम्ब सम्मान (ज)शिवतरक्षित समूह द्वारा साहित्य सृजक और साहित्य भूषण सम्मान। (झ) नवोदित रचनाकार मंच द्वारा श्रेष्ठ मुक्तककार सम्मान। 9 सम्प्रति (पेशा, व्यवसाय) प्रवक्ता इतिहास नई दिल्ली नगर पालिका परिषद नई दिल्ली। 10 सम्पर्क सूत्र 12 वायु नगर भिण्ड रोड़ ग्वालियर मध्यप्रदेश 474005
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जीवन है संघर्षों का सागर।
सुख दुःख इसमें आते हैं।
जीवन की आपाधापी में,
हम कुछ समझ न पाते हैं।
कौन अपना है कौन पराया
जीवन भर गिनती होती है।
कितना भी धन अर्जित कर लो,
पर दौड़ खत्म न होती है।
जीवन का अंत समय आता,
तब पछतावा होता है।
पर सबको वो ही मिलता है,
जो जीवन भर बोता है।

स्वरचित
शिवेन्द्र सिंह चौहान (सरल)
ग्वालियर म.प्र.

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मुझको अच्छी लगती भारत माता की तस्वीर।
भारत भूमि बना सारा निर्मल स्वच्छ शरीर।
मुझको अच्छी ------
यू पी , एम पी, बिहार, हिमाचल।
केरल , तमिलनाडु ,अरुणाचल,
पंजाब, असम हैं इसके आँचल।
गुजरात ,गोवा और कश्मीर।
मुझको अच्छी --------

मुकुट बना सिरमौर हिमालय।
गंगा यमुना का सुंदर आलय।
राम कृष्ण के सुंदर देवालय।
चरण पखारे सागर जिसके। 
बहता मन्द समीर।
मुझको अच्छी----

शान न इसकी जाने देंगे।
हरदम इसका मान रखेंगे।
जो भी इससे टकराएगा।
वो मिट्टी में मिल जायेगा।
इसकी रक्षा की खातिर।
खनकेंगी शमशीर ।
मुझको अच्छी------

शिवेन्द्र सिंह चौहान(सरल)
ग्वालियर म.प्र.

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**** सरस्वती वंदना****
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तुझे शारदे मां नमन कर रहा हूँ।
तेरा नाम लेकर सृजन कर रहा हूँ।

हे ज्ञान देवी मुझे ज्ञान दे दे।
मेरे अवगुणों को सदा दूर कर दे
करूं राष्ट्र चिन्तन करूं आत्ममंथन।
न भटके मेरा मन जतन कर रहा हूँ।
तेरा नाम लेकर -------

सदा सच की राहों पे चलता रहूँ मैं।
कदम डगमगाये न, बढ़ता रहूँ मैं।
कर्मों से मेरे भला राष्ट्र का हो।
तेरा हाथ जोड़े भजन कर रहा हूँ।
तेरा नाम लेकर -------
स्वरचित
शिवेन्द्र सिंह चौहान(सरल)
ग्वालियर म.प्र.

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हे जन्मभूमि तुझको प्रणाम, 
हे मातृभूमि तुझको प्रणाम।
तू हम कवियों की हैआशा,
कविताओं की है परिभाषा।
तू मैथलीशरण की कठिन काव्य,
तू है दिनकर की अभिलाषा।
तू राम कृष्ण की अवतारी
महावीर, बुद्ध की पालनहारी।
तुझमें तुलसी, सूर, कबीर हुए,
हुए रहीम, रसखान, बिहारी।
गंगा यमुना हैं तेरी कंठहार,
नर्मदा ,ताप्ती कमरबंध।
सिरमौर हिमालय भूधर है,
सागर पखारता पदारबिंद।
हे जननी तेरे चरणों में,
श्रध्दा सुमन समर्पित हो।
जब जब तुझपर संकट आये,
ये शीश मेरा भी अर्पित हो।
स्वरचित
शिवेन्द्र सिंह चौहान(सरल)
ग्वालियर म.प्र.

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****बाल गीत***
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हम बच्चे हिंदुस्तान के, 
हम बच्चे हिंदुस्तान के
भगत सिंह की आन के,
और ऊधम सिंह की शान के।
(1)
भारत माँ के आँचल को,
हम मिलकर आज सजायेंगे।
बाबू सुभाष, गाँधी और नेहरू,
बनकर के दिखलायेंगे।
सपने सब साकार करेंगे,
बापू के अरमान के।
हम बच्चे ------- 
(2)
हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख, ईसाई
आपस में सब भाई भाई।
भाई को है भाई प्यारा,
हम सबका बस एक ही नारा।
काम करेंगे मिलकर हरदम,
भारत के कल्याण के।
हम बच्चे ------------
(3)
देश में फैली हुई समस्याएं,
मिलकर के निपटाएंगे।
बिखरे बालों वाली मां के,
फिर सिंदूर लगायेंगे।
मान रखेंगे हम सब मिलकर,
वीरों के बलिदान के।
हम बच्चे ---------
(4)
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
सब झंडों से है ये न्यारा।
निर्भय होकर इसके नीचे,
वन्देमातरम गायेंगे।
अपने स्वराज की लाज रखेंगे,
सत्य धर्म ईमान से।
हम बच्चे -------
(5)
अपने देश की आजादी के,
हम सच्चे रखवाले हैं।
भारत की रक्षा की खातिर,
शमशीर उठाने वाले हैं।
आँख उठायेगा जो दुश्मन,
निकलेंगे तीर कमान से।
हम बच्चे ----------
(6)
सबको मिलाकर एक करेंगे,
जातिवाद निपटाएंगे।
समाजवाद आज बढ़ाकर,
रामराज्य को लायेंगे।
सपने तब फिर पूरे होंगे,
शिवेन्द्र सिंह चौहान के।
हम बच्चे --------

स्वरचित
शिवेन्द्र सिंह चौहान(सरल)
ग्वालियर म. प्र.
हाल निवास दिल्ली

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*** राष्ट्रीय झंडा तिरंगा***
*****गीत*******
बहुत प्यार करते हैं तिरंगे को हम।
कसम चाहे लेलो भारत कसम।

बड़ा खूबसूरत है तिरंगा हमारा।
मुझे जान से भी ज्यादा है प्यारा।
है ये हमारा-2, शान ए वतन।
बहुत प्यार------(1)

रंग केसरिया त्याग सिखाता।
हरा रंग खुशहाली लाता।
रंग सफेद है-2, शान्ति अमन।
बहुत प्यार---------2)

नीला चक्र प्रगति बताता।
भारत मां का शान बढ़ाता।
इसको हमारा है-2,शतशत नमन।
बहुत प्यार-------(3)

तिरंगे को हरदम उठा के रखेंगे।
रक्षा को इसकी हम जान देंगे।
बढ़ते रहेंगे-2,कदम दर कदम।
बहुत प्यार-------(4)

तुझे दिल दिया है जां भी हम देंगे।
तेरी शान को कम होने न देंगे।
मरूं तो बने ये-2, हमारा कफन।
बहुत प्यार-----(5)

स्वरचित
शिवेन्द्र सिंह चौहान(सरल)
ग्वालियर म.प्र.

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कौन कहता है कि अबला नारियाँ,
हर समय रही सबला हैं नारियाँ।
एक ही सिक्के के दो पहलू है,
नारी और पुरुष।
इसीलिए अर्धांगिनी भी ,
कहलाती हैं नारियाँ।
मां ,बहन ,बेटी ,
प्रेयसी और पत्नी,
हर रूप में,
पुरुषों का साथ,
निभातीं हैं नारियां।
नहीं है पीछे,
किसी से भी,
बलिदान का जौहर,
भी दिखातीं हैं नारियां।
झूठ यदि मानो ,
हमारी बात को।
तो इतिहास के पन्नों को,
उठाकर के देख लो।
जब हारा पुरूष, तो
तेग भी उठातीं हैं नारियाँ।
पर हे पुरूष प्रधान समाज,
नारी को क्या दिया तूने।
देव ऋण, ऋषी ऋण, पित्र ऋण,
सभी तो बनाये।
पर क्यों नही नारी ऋण,
बनाया तूने।
विधाता की रचना को,
नौ माह गर्भ में ,
धारण करके।
जिसने जन्म दिया तुझको।
क्या उसका भी,
कभी कोई ऋण,
चुकाया तूने।?

स्वरचित, स्वप्रमाणित
शिवेन्द्र सिंह चौहान (सरल)
ग्वालियर म.प्र.



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भारत की पहचान है हिन्दी।
हर भारत वासी की जान है हिन्दी।

तुलसीदास की राम है हिन्दी।
सूरदास की श्याम है हिन्दी

जन मानस की साज है हिन्दी।
राष्ट्रभक्ति की आवाज है हिन्दी।

स्वर व्यंजन की पहचान है हिन्दी।
मधुर भजन की तान है हिन्दी।

माँ भारती का वरदान है हिन्दी।
रहीम और रसखान है हिन्दी।

शुद्ध वर्तनी शुद्ध उच्चारण।
शुद्ध सुस्पष्ट है इसका व्याकरण।

तदभव , तत्सम, देशज रंग है।
रस ,छंद,और अलंकार संग है।

आओ हम सब हिन्दी अपनाएं।
देवनागरी लिखते जांयें।

स्वरचित, स्वप्रमाणित
शिवेन्द्र सिंह चौहान (सरल)
ग्वालियर म.प्र.




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"विधि/विधान"20नवम्बर 2019

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